Bodh Gaya, Where Siddharth became Buddha

Bodh Gaya, Where Siddharth became Buddha Reality that Who is Buddha.

भिक्खुओं की चार मुख्य आवश्यकताएं1. चीवर - वस्त्र2. पिण्डपात - भिक्खा-भोजन3. सेनासन - निवास4. गिलानपच्या भेसज्ज - औषध
20/06/2024

भिक्खुओं की चार मुख्य आवश्यकताएं

1. चीवर - वस्त्र
2. पिण्डपात - भिक्खा-भोजन
3. सेनासन - निवास
4. गिलानपच्या भेसज्ज - औषध

तीन प्रकार की पब्बज्जा (सांसारिक जीवन त्यागना)1. इसी-पब्बज्जा - सांसारिक जीवन त्यागकर इसि (संन्यासी) बनना2. समण-पब्बज्जा...
19/06/2024

तीन प्रकार की पब्बज्जा (सांसारिक जीवन त्यागना)

1. इसी-पब्बज्जा - सांसारिक जीवन त्यागकर इसि (संन्यासी) बनना

2. समण-पब्बज्जा - सांसारिक जीवन त्यागकर समण (भिक्खु) बनना

3. सामनेर-पब्बज्जा - सांसारिक जीवन त्यागकर सामनेर (नवसिखिया) बनना

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Three kinds of Pabbajja (giving up a worldly life)

1. Isi-pabbajjā - giving up of worldly life and becoming an isi (hermit)

2. Samana-pabbajjā - giving up of worldly life and becoming a samana ( monk)

3. Sāmanera-pabbajjā - giving up of worldly life and becoming a samanera (novice)

उठो, बैठो, सोने से तुम्हें क्या लाभ है ? कांटा चुभे पीड़ित रोगियों को नींद कैसे आयेगी ? उठो बैठो, संकल्प के साथ शान्ति (...
10/02/2024

उठो, बैठो, सोने से तुम्हें क्या लाभ है ?
कांटा चुभे पीड़ित रोगियों को नींद कैसे आयेगी ?
उठो बैठो, संकल्प के साथ शान्ति (निब्बान) के लिए अभ्यास करो। मच्चुराजा तुम्हें आलसी (पमत्त) जानकर मोहित करके अपने वश में कर सकता है।

31/01/2024
उस समय भगवान वैशाली के महावन की कूटागारशाला में साधना हेतु विराजमान थे,तब भगवान ने अपने अँगूठे के नख के अग्रभाग पर कुछ म...
11/12/2023

उस समय भगवान वैशाली के महावन की कूटागारशाला में साधना हेतु विराजमान थे,तब भगवान ने अपने अँगूठे के नख के अग्रभाग पर कुछ मिट्टी (धूल) लगा कर भिक्षुओं से पूछा- "भिक्षुओ !

इन दोनों में कौन अधिक है- यह विस्तृत विशाल महापृथ्वी या मेरे नख के अग्रभाग पर लगा हुआ यह धूलिकण ?"

“भन्ते ! यह महापृथ्वी ही अधिक है; नख के अग्रभाग पर लगा हुआ धूलिकण तो उस की कहीं से भी समानता नहीं करता। इस विशाल पृथ्वी के सम्मुख इस धूलिकण की क्या गणना !"

भिक्षुओ ! इसी तरह उस धर्मज्ञ, दृष्टिसम्पन्न आर्यसावक के दुःख का वह भाग जो क्षीण हो चुका है , वह अधिक है और जो बचा हुआ है वो बहुत अल्प है

ये दुःख है यह यतार्थतः जनता है वह दुःख निरोध गामिनी जो पटिपदा है उसे जानता है अतः तुम्हे भिक्षुओं ये दुःख है ये मनन करना चाहिए...

-भिक्खु साक्य मुनि

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