Shri Sai Astrology

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01/07/2020
23/12/2019

26 दिसंबर के दिन सूर्य ग्रहण रहेगा जो कि भारतवर्ष में दिखाई देगा ग्रहण का सूतक 25 दिसंबर रात को 8:00 बजे शुरू होगा ग्रहण 26 दिसंबर सुबह 8:00 बजे शुरू होगा तथा दोपहर 1:36 पर समाप्त होगा ग्रहण का परम ग्रास 10:48 मिनट पर रहेगा अतः ग्रहण ग्रहण के प्रारंभ में स्नान करें उसके बाद जब पित्त यादी करें ग्रहण काल में सूर्य के मंत्र जप आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ इत्यादि करना शुभ रहेगा मध्यकाल में पवन देव पूजा करें और मोक्ष होने के समीप दान इत्यादि करें ग्रहण समापन होने होने पर स्नान करें खाने वाली वस्तुओं में कुशा तिल इत्यादि ग्रहण से पहले डाल दे ताकि वस्तु में दूषित ना हो।

23/12/2019

25 दिसंबर 2019 को बुधवार श्री अमावस्या 11:15 पर सुबह शुरू होगी इस दिन तीर्थों पर पितृ कार्य पितृ तर्पण पिंडदान इत्यादि पितरों के निमित्त करना श्रेष्ठ रहेगा।

22/12/2019
02/12/2015
21/11/2015

शनि देव न्यायप्रिय राजा हैं। अगर आप बुरे काम नहीं करते हैं किसी से धोखा, छल-कपट आदि नहीं करते हैं तो इस ग्रह से डरने की कोई जरूरत नहीं है क्योंकि शनिदेव सज्जनों को तंग नहीं करते।
1. शनि के अशुभ प्रभाव को दूर करने के लिए तिल का तेल एक कटोरी में लेकर उसमें अपना मुंह देखकर शनि मंदिर में रख आएं (जिस कटोरी में तेल हो उसे भी घर ना लाएं)। कहते हैं तिल के तेल से शनि विशेष प्रसन्न रहते हैं।
2. सवापाव साबुत काले उड़द लेकर काले कपड़े में बांध कर शुक्रवार को अपने पास रखकर सोएं। ध्यान रहे अपने पास किसी को भी ना सुलाएं। फिर शनिवार को उसे शनि मंदिर में रख आएं।
3. काला सुरमा एक शीशी में लेकर अपने ऊपर से शनिवार को नौ बार सिर से पैर तक किसी से उतरवा कर सुनसान जमीन में गाड़ देवें।
4. शनि का कोई रत्न बिना किसी सलाह के न पहनें, ना ही लोहे का बना छल्ला पहने। बिना परामर्श के इन्हें पहनने से शनि का कुप्रभाव और बढ़ सकता है।
5 शनि मंत्र का जप भी किया जाए तो काफी हद तक शनि के कुप्रभाव से बचा जा सकता है।
मंत्र - ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनये नमः।

23/08/2014

शनि देव न्यायप्रिय राजा हैं। अगर आप बुरे काम नहीं करते हैं किसी से धोखा, छल-कपट आदि नहीं करते हैं तो इस ग्रह से डरने की कोई जरूरत नहीं है क्योंकि शनिदेव सज्जनों को तंग नहीं करते।

1. शनि के अशुभ प्रभाव को दूर करने के लिए तिल का तेल एक कटोरी में लेकर उसमें अपना मुंह देखकर शनि मंदिर में रख आएं (जिस कटोरी में तेल हो उसे भी घर ना लाएं)। कहते हैं तिल के तेल से शनि विशेष प्रसन्न रहते हैं।
2. सवापाव साबुत काले उड़द लेकर काले कपड़े में बांध कर शुक्रवार को अपने पास रखकर सोएं। ध्यान रहे अपने पास किसी को भी ना सुलाएं। फिर शनिवार को उसे शनि मंदिर में रख आएं।
3. काला सुरमा एक शीशी में लेकर अपने ऊपर से शनिवार को नौ बार सिर से पैर तक किसी से उतरवा कर सुनसान जमीन में गाड़ देवें।
4. शनि का कोई रत्न बिना किसी सलाह के न पहनें, ना ही लोहे का बना छल्ला पहने। बिना परामर्श के इन्हें पहनने से शनि का कुप्रभाव और बढ़ सकता है।
5 शनि मंत्र का जप भी किया जाए तो काफी हद तक शनि के कुप्रभाव से बचा जा सकता है।
मंत्र - ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनये नमः।

16/08/2014

अगर किसी जातक की जन्मकुंडली में शनि नीच राशिगत, वक्री, अशुभ स्थान का स्वामी होकर अशुभ ग्रहों के प्रभाव में हो तो शनि अपनी महादशा, अंतर्दशा, साढ़ेसाती या ढैया अवधि, जन्म, शनि पर गोचर या शनि का गोचर होने पर अशुभ फल देता है।
शनि के अशुभ फल : व्यवसाय, नौकरी व कार्यों में बाधाएं, अस्वस्थता, मानसिक अशांति, पारिवारिक अशांति, धन-संचय में कमी, परेशानीपूर्ण यात्राएं, मित्रों से मतभेद, संतान संबंधी चिंता, सट्टा में हानि, शत्रुओं द्वारा परेशानी, मुकदमा-बाजी, लाभ व मान प्रतिष्ठा में बाधाएं, धन आगमन अवरुद्ध होना, व्यय का योग अधिक, हानि, ऋण में डूबना आदि।

ग्रहों की अशुभता को दूर करने के लिए उनसे संबंधित मंत्रों के जाप करने से सफलता मिलती है। साथ ही ग्रह विशेष के मंत्र जाप से ग्रह की शुभता एवं बल में वृद्धि होती है। ज्योतिष के अनुसार शनिवार के दिन शनि की पूजा विशेष रूप से की जाती है।
इस दिन कोई नया काम शुरू नहीं करना चाहिए। शनिवार को अखंड नारियल नदी में प्रवाहित करने से शांति मिलती है। प्रत्येक शनिवार को हनुमान चालीसा का पाठ करने तथा शनिदेव के दर्शन कर तेल चढ़ाने से शनिदेव प्रसन्न होते हैं।

13/08/2014

बुध ग्रह कुशल ग्रह बुध एक ऐसा ग्रह है जो सूर्य के सान्न्ािध्य में ही रहता है। जब कोई ग्रह सूर्य के साथ होता है तो उसे अस्त माना जाता है। यदि बुध भी 14 डिग्री या उससे कम में सूर्य के साथ हो, तो उसे अस्त माना जाता है। लेकिन सूर्य के साथ रहने पर बुध ग्रह को अस्त का दोष नहीं लगता और अस्त होने से परिणामों में भी बहुत अधिक अंतर नहीं देखा गया है। बुध ग्रह कालपुरुष की कुंडली में तृतीय और छठे भाव का प्रतिनिधित्व करता है। बुध की कुशलता को निखारने के लिए की गयी कोशिश, छठे भाव द्वारा दिखाई देती है। जब-जब बुध का संबंध शुक्र, चंद्रमा और दशम भाव से बनता है और लग्न से दशम भाव का संबंध हो, तो व्यक्ति कला-कौशल को अपने जीवन-यापन का साधन बनाता है। जब-जब तृतीय भाव से बुध, चंद्रमा, शुक्र का संबंध बनता है तो व्यक्ति गायन क्षेत्र में कुशल होता है। अगर यह संबंध दशम और लग्न से भी बने तो इस कला को अपने जीवन का साधन बनाता है। इसी तरह यदि बुध का संबंध शनि केतु से बने और दशम लग्न प्रभावित करे, तो तकनीकी की तरफ व्यक्ति की रुचि बनती है। कितना ऊपर जाता है या कितनी उच्च शिक्षा ग्रहण करता है, इस क्षेत्र में, यह पंचम भाव और दशमेश की स्थिति पर निर्भर करता है। पंचम भाव से शिक्षा का स्तर और दशम भाव और दशमेश से कार्य का स्तर पता लगता है। बुध लेख की कुशलता को भी दर्शाता है। यदि बुध पंचम भाव से संबंधित हो, और यह संबंध लग्नेश, तृतीयेश और दशमेश से बनता है, तो संचार माध्यम से जीविकोपार्जन को दर्शाता है और पत्रकारिता को भी दर्शाता है। मंगल से बुध का संबंध हो और दशम लग्न आदि से संबंध बनता हो और बृहस्पति की दृष्टि या स्थान परिवर्तन द्वारा संबंध बन रहा हो, तो इंसान को वाणिज्य के कार्यों में कुशलता मिलती है। इस प्रकार कुशलता बुध तय करता है। क्षेत्र अलग-अलग ग्रहों और भावों व भावों के स्वामी का संबंध जीवकोपार्जन का क्षेत्र बताता है। यद्यपि इस प्रकार के बहुत से क्षेत्र हैं, लेकिन उन पर बुध ग्रह का प्रभाव अवश्य देखने को मिलता है। जब भी किसी क्षेत्र को विशेष योग्यता का सम्मान मिले, तो खेलों के क्षेत्र में भी यदि मंगल, शनि, राहु और बुध का संबंध खिलाड़ियों की जन्मपत्री में देखने को मिलता है।

09/08/2014

कष्ट-पीड़ाओं से मुक्ति के लिए शनि का ध्यान करते हुए नीचे लिखे शनि मंत्रों से उपासना बहुत ही मंगलकारी बताई गई है। शनिदेवजी को प्रसन्न करने के लिए नीचे दिए गए किसी भी एक मंत्र का जाप करें।
शनिवार, शनिदेवजी का दिन है। शनि उपासना से दुख, दरिद्रता, दुर्गति से दो-चार न होकर जीवन में सौभाग्य, दौलत, सफलता और सम्मान प्राप्त होता है।

07/08/2014

sukra greh sukh or asvrya ko dene wala hai is din perfume lagain or safed vastu ka daan karin

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BPO/Naghear Teh-Jhandutta
Bilaspur

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