03/11/2016
#अपील_है_पोस्ट_जरुर_पढे
सभी धर्म व जीव प्रेमी सज्जनों को नवण प्रणाम...
जीव रक्षार्थ कोर्ट याचिका हेतू आवश्यक अनुरोध।
सज्जनों जैसा कि विदित है कि बिश्नोई समाज सैंकड़ों वर्षों से वन्यजीवों विशेषतः हिरण प्रजातिय जीव जैसे काला हिरण, चिंकारा व नील गाय की रक्षा करता आ रहा है। घटते जंगलों व बढ़ते आबादी/खेती क्षेत्र की वज़ह से दिन ब दिन हिरण प्रजाति के जीवों का विचरण/आश्रय क्षेत्र घटता जा रहा है। पिछले 10-20 सालों में इनकी संख्या बहुत अधिक घटी है और संरक्षित क्षेत्रों से बाहर तो सिर्फ बिश्नोई बाहुल्य इलाके में ही पाए जाते है।
अर्थात अब यदि काले हिरण/चिंकारा बचे हुए हैं तो सिर्फ बिश्नोई बाहुल्य इलाकों में पर चिन्ता की बाद यह भी है कि बिश्नोई बाहुल्य क्षेत्र में भी इनकी संख्या लगातार घट रही है जिसके मुख्य कारण हैं :-
1. अवारा कुतों द्वारा शिकार/घायल करना
2. खेतों में लगी ब्लैडनुमा धारदार तार से कटकर घायल होना और फिर कुतों की चपेट में आना
3. खेतों में लगी जालीनुमा बाड़ में फसना/घिर कर कुतों का शिकार बनना।
4. शिकारियों द्वारा शिकार (सुत्रों से प्राप्त जानकारी अनुसार 5 स्टार होटलों में सप्लाई)
जैसा हम सब जानते हैं कि कुते तो सैंकड़ो साल पहले भी यहीं थे लेकिन घटनाओं का ग्राफ पिछले 5-7 सालों में बहुत तेजी से बढ़ा है जिसका सबसे बड़ा कारण है खेती का रकबा बढना और उसे बचाने के लिए की गई ब्लैडनुमा/जालीनुमा बाड़। जिसकी वजह से या तो हिरण घायल हो जाते है या उलझ जाते है या भागने में अवरोध पैदा होने के कारण कुतों की पकड़ में आ जाते हैं।
अब एक सच्चे बिश्नोई के लिए ये पीड़ादायी है कि जिन जीवों को बचाने के लिए वे जान की बाज़ी तक लगा देते हैं वो जीव उपर उल्लेखित कारणों से कुतों के शिकार हो रहे हैं, बिश्नोई गांवों के आसपास जहां कुछ वर्ष पहले वन्यजीव झुण्ड में दिखते थे वहां अब गिनती के हिरण ही बचे है, यदि हम समय रहते नहीं चेते तो हम बिश्नोई लोग अपनी ये पहचान खो देंगे।
अब प्रश्न ये आता है कि क्या किया जाये ?
फसल सुरक्षा के लिए बाड़ जरूरी है लेकिन कैसी बाड़ ? क्या वो (ब्लैडनुमा धारदार) जो किसी जीव को खेत में घुसने पर मौत की सज़ा दे। इन तारों पर प्रतिबंध जरूरी है।
क्या सरकार का कोई दायित्व नहीं है कि वो इन हिरणों की सुरक्षा के लिए कदम उठाए जैसे इनके लिए हिरण बाहुल्य इलाकों में अलग से जमीन अधिग्रहित करे, ब्लैडनुमा तार पर प्रतिबन्ध लगाए, जालीनुमा बाड़ के लिए नियम बनाए, फसल नुकसान पर किसानों को मुआवज़ा दे, अवारा कुतों पर नियंत्रण करे, हिरण बाहुल्य इलाकों में घायल वन्यजीवों के इलाज़ के लिए एम्बलैंस व ट्रीटमैंट सैंटरों की व्यवस्था करे। लेकिन सरकार तब तक नहीं जागगी जब तब तक समाज का दवाब व कोर्ट का आदेश ना हो।
अभी भी समय है कि हम बचे हुवे दुर्लभ वन्यजीवों के लिए कुछ प्रयास करे। समाज के प्रयास सराहनीय हैं लकिन सरकार को जगाने के लिए और प्रयास करने होंगे जिनमें एक गै न्यायालय की शरण लेना.
न्यायालय में केस करके निम्नलिखित प्रार्थना करना प्रस्तावित है:-
1. हरियाणा व राजस्थान राज्यों के सरंक्षित क्षेत्रों से बाहर वन्यजीव/हिरण बाहुल्य इलाकों की संरक्षण योजना तैयार करने के लिए अर्न्तराष्ट्रीय स्तर की ऑरगेनाइजेसन से रिपोर्ट तैयार करवाई जाए।
2. उक्त ऑरगेनाइजेसन द्वारा तैयार रिपोर्ट की अनुशंसा की पालना करवाई जाए ।
3. सरंक्षित क्षेत्रों से बाहर वन्यजीव/हिरणों की गणना करवाई जाए जो जहां-जहां वन्यजीव/हिरण काफी अच्छी तादाद में हैं उन इलाकों को सरकार अधिग्रहित करके संरक्षित क्षेत्र बनाएं ताकि दुर्लभ जीवों का चिरस्थाई संरक्षण हो सके।
4. ब्लैडवाले तार पूर्णतया प्रतिबंधित हो तथा जालीनुमा बाड़ के लिए नियम बने तथा वन्यजीवों से फसल नुकसान पर किसानों को मुआवजे की पॉलिसी बने।
5. गणना अनुसार जहां-जहां वन्यजीव/हिरण काफी अच्छी तादाद में हैं उन इलाकों में कुतों का विशेष बंधियाकरण अभियान चलाया जाए।
6. वन विभाग को सुविधासम्पन्न बनाया जाए तथा वन्यजीव/हिरण बाहुल्य क्षेत्रों में चिकित्सकों, एम्बुलेंसो तथा ट्रीटमैंट सैंटरों की व्यवस्था की जाए।
इसके लिए आप सभी धर्म व जीव प्रेमी सज्जनों से अनुरोध है कि आप इसके लिए निम्नलिखित प्रकार से सहयोग करेः-
1. यदि आपके पास इस पेज पर दिखाए चित्रों की तरह ब्लैडवाले तारों से कटे हुए या जाली की बाड़ में उलझे हुए या जाली के पास ही मरे हुए वन्यजीवों के चित्र है तो वे ब्योैरे सहित (स्थान का नाम व दिनांक) सहित भेेजे।
2. कुतों द्वारा घायल या मरे हुए वन्यजीवों के चित्र है तो वे ब्योैरे सहित (स्थान का नाम व दिनांक) सहित भेजें।
3. अन्य दुर्घटनाओं जैसे रोड़ एक्सीडेंट या शिकार हुए वन्यजीवों के चित्र है तो वे ब्योैरे सहित (स्थान का नाम व दिनांक) सहित भेजे।
4. यदि वन्यजीवों की मौत का अन्य कोई प्रामणित आंकड़ा (जनसुचना अधिकार के तहत प्राप्त) है तो वो भी भेजे।
5. लगभग 50 वर्ष की आयु के लगभग कोई जीव प्रेमी जिसने अपने गांव या आसपास के इलाके में अपने जीवन के दौरान अप्रत्याशित रूप से हिरणों व अन्य वन्यजीवों की घटी हुई संख्या को देखा है (जैसे उदाहरणतः किसी गांव के चारो तरफ आज से 30 साल पहले हिरणों की लगभग 8-10 डार थी जिसमें लगभग 300 से 400 हिरण थे, 10 साल पहले डार कम या छोटी हुई और हिरण 100-150 बचे और आज के समय 20-30 हिरण या ना के बराबर ही बचे है) ऐसा कोई जीव प्रेमी उपरोक्त उदाहरण अनुसार शपथ पत्र/एफीडेविट देना चाहता हो उसका ब्यौरा जैसे नाम/बाप का नाम/ पता/ मोबाइल नम्बर भेजें ताकि कोर्ट में सरकार या वन्यजीव विभाग के इतने सालों के प्रयासों को नाकाफी/नकारा बताया जा सके।
आशा है इस कार्य में आपका पूर्ण सहयोग मिलेगा। इसके लिए आप उक्त 5 बिन्दुओं के आधार पर कोई भी ब्यौरा पेज के इनबॉक्स में कमेंट करे या [email protected] पर ईमेल भी करे.
नोट : कृपया करके पोस्ट जरुर शेयर करे।