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छीपा समाज में नारी शक्ति । महिला दिवस के अवसर पर सुजानगढ़ में छपी ये खबर सिर्फ सुजानगढ़ की ही कहानी नहीं सुजानगढ़ के अला...
08/03/2021

छीपा समाज में नारी शक्ति ।
महिला दिवस के अवसर पर सुजानगढ़ में छपी ये खबर सिर्फ सुजानगढ़ की ही कहानी नहीं सुजानगढ़ के अलावा बीकानेर नागौर जोधपुर कुचेरा पाली राजस्थान के हर जिले के साथ जहा जहा भारत में छीपा समाज के लोग रहते है उन सब की है ।
ईश्वर अल्लाह की बड़ी मेहरबानी है छीपा समाज पर जो ये पुस्तेनि काम छीपा समाज को मिला कई सालो से इस रंगाई छपाई बंधेज के काम से कपड़ा उद्योग में छीपा समाज का महत्वपूर्ण योगदान है ।
छीपा समाज की महिलाएं पुरुष के बराबर इस काम को अंजाम देती है ।
गर्व है मुझे अपनी छीपा समाज की मां बहनों पर और छीपा समाज पर ।

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07/03/2021

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06/03/2021

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118 बार के रक्तदानी एडवोकेट मोहम्मद हबीब मोलानी ==================================      रक्तदान - महादान। आज आपका परिचय ...
15/06/2020

118 बार के रक्तदानी एडवोकेट मोहम्मद हबीब मोलानी
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रक्तदान - महादान। आज आपका परिचय एक महादानी से करवा रहा हूँ जिनका नाम है - एडवोकेट जनाब मोहम्मद हबीब मोलानी। आपका जन्म 15 जनवरी, 1968 को बीकानेर में हुआ। आपने अब तक 118 बार रक्तदान करके कीर्तिमान स्थापित किया है। आपको रक्तदान करने की प्रेरणा उनके स्काउट मास्टर विश्नोई सर से मिली। उन दिनों आपकी बीमार माँ के लिए AB निगेटिव रक्त की आवश्यकता पङी। बङी मुश्किल से गुरु जी के प्रयास से व्यवस्था हुई। इस घटना से रक्तदान का महत्व समझ में आया और 1986 में पहली बार रक्तदान किया। उसके बाद से हर तीन माह में एक बार रक्तदान करने का क्रम अनवरत जारी है।
हबीब साहब बताते है कि अब तो ऐसा जनून हो गया है कि कोई जरुरत मन्द न मिले तो ब्लड बैंक जाकर अपना फर्ज निभाते हैं। इस समय कोर्ट के स्टाफ व कुछ वकील अपने ग्रुप के माध्यम से रक्तदान सेवा संचालित कर रहे है। इनका उद्देश्य है कि रक्त के अभाव में किसी की सांसे बन्द न हो। 151 बार रक्तदान करना आपका लक्ष्य है। इसमें अल्लाह आपको कामयाबी अता करें। उल्लेखनीय है कि आपके वालिद मरहूम मोहम्मद ईसाक जी मोलानी का जन्म सुजानगढ में हाजी दीन मोहम्मद जी मोलानी के यहाँ हुआ। बीकानेर में.L. L. B करने के बाद वहीं वकालत की।
द्वारा-शम्सुद्दीन स्नेही।

बहुत बेहतरीन कार्य
14/06/2020

बहुत बेहतरीन कार्य

(वैसे तो ये सस्पेंस थ्रिलर कहानी आपने पहले भी सुनी होगी)मुझ्से भी सुन लोरोनाल्डो ओबस नाम के एक आदमी ने खुदकुशी करनी चाही...
07/06/2020

(वैसे तो ये सस्पेंस थ्रिलर कहानी आपने पहले भी सुनी होगी)
मुझ्से भी सुन लो
रोनाल्डो ओबस नाम के एक आदमी ने खुदकुशी करनी चाही तो उसने इसके लिए सबसे आसान तरीका इस्तेमाल किया
और वह यह कि उसने इमारत से छलांग लगा दे जिसमें वह रहता था,उसने इमारत की दसवीं फ्लोर से छलांग लगा दी और सुसाइड नोट छोड़ा जिसमें लिखा था कि वह जिंदगी से मायूस होगया था !
लेकिन जब 23 मार्च 1994 को पोस्टमार्टम रिपोर्ट आई तो पता चला रोनाल्डो की मौत छत से गिरने से नही बल्कि गोली लगने से हुई है
जब जाँच हुई तो पता चला उसकी मौत उसी इमारत की नौवीं फ्लोर से चली गोली से हुई है और उस फ्लोर पर दो बुढ़े मियां बीवी कई सालों से रह रहे थे
पड़ोसियों का कहना था दोनो मियां बीवी हर वक्त झगड़ते रहते थे और जब रोनाल्डो छत से कुदा तो ठीक उसी वक्त बुढ़ा पिस्तौल थामें अपनी बीवी को मारने की धमकी दे रहा था
बेहद गुस्से में शौहर ने गैर इरादी तौर पर अपनी बीवी फर गोली चला दी निशाना चूक गया और गोली खिड़की से निकली ऐन उसी वक्त रोनाल्डो ने खुदकुशी के लिए छलांग लगाई और गोली उसके सर में लगी जिसकी वजह से उसकी मौत हो गई

(मगर कहानी में अभी ट्विस्ट बाकी है)

अदालत में बुढ़े शौहर पर गैर इरादतन हत्या का मुकदमा चला
लेकिन वह इस बात अड़ा रहा कि उन दोनों में हमेशा झगड़ा होता रहता है और वह जान से मारने की धमकी भी देता रहता है मगर पिस्तौल हमेशा खाली रहती थी गोली नहीं होती थी

जब ज्यादा चाँज हुई तो पता चला की बुढ़े के रिश्तेदारों में से किसी ने एक हफ्ता पहले उनके बेटे को पिस्तौल में गोली डालते देखा था वजह यह थी माँ ने बेटे को पैसा देने से मना कर दिया था तो बेटे ने बुढ़े माँ बाप से जान छुड़ाने की सोची वह जानता था कि दोनो लड़ते रहते हैं और बाप खाली पिस्तौल माँ को डराने के लिए तानता रहता है उसने एक तीर से दो शिकार करना चाहा !
लेकिन गोली उसकी माँ को न लग रोनाल्डो को लगी जब उसने खुदकुशी करने को छलांग लगाई थी और इस तरह कत्ल का आरोप बाप से हट कर बेटे पर जा लगा !

(लेकिन कहानी में अभी एक और ट्विस्ट है )

इस सारे वाकये में सबसे अजीब बात यह रही कि रोनाल्डो खुद उस बुढ़े जोड़े का बेटा था पिस्तौल में गोली उसने ही उन दोनो से छुटकारा पाने के लिए डाली थी
लेकिन माली हालत खराब होने और बाप का उसकी माँ को मारने में लेट करने की वजह से उसने मायूसी में सुसाइड करने का फैसला किया और छत से छलांग लगाते हुए वही गोली जो उसने पिस्तौल में डाली थी उसके सर में लगी
इस तरह वह खुद क़ातिल भी रहा खुद मकतूल (कत्ल होने वाला) भी !

शिकारी खुद यहाँ शिकार होगया

- अखलीम

छीपा समाज के इकलौते  R. A. S.अधिकारी हाजी ===================!============अहसान अहमद छीपा :-==============हाजी अहसान अहम...
06/06/2020

छीपा समाज के इकलौते R. A. S.अधिकारी हाजी
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अहसान अहमद छीपा :-
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हाजी अहसान अहमद छीपा भारत के मुस्लिम छीपा समाज के एक मात्र व्यक्ति है जो सेवानिवृत R. A. S. अधिकारी है। उनसे पहले और न ही बाद में समाज का कोई भी व्यक्ति R. A. S.या किसी भी राज्य का प्रशासनिक अधिकारी नहीं बन सका है जो समाज के लिए चिन्ता का विषय है। बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी एवं कुशल प्रशासक अहसान साहब का जन्म कपासन से 16 किलो मीटर दूर गुलुण्ड नामक एक छोटे से गाँव में हुआ। वैसे आपका पुश्तैनी निवास स्थान किशनगढ ( अजमेर ) है। जहाँ से आपके पङदादा सुल्तान जी गुलुण्ड आकर बसे थे। सुल्तान जी के एक भाई किशनगढ मे रहे तथा एक भाई सुजानगढ चले गये जिनकी औलाद आज भी कीमीवाला के नाम से पहचानी जाती है।
अहसान साहब की दसवीं तक की शिक्षा उनके गाँव में ही हुई। उच्च शिक्षा के लिए वे उदयपुर गये जहाँ एम.ए.तक की सभी परीक्षाएँ अँग्रेज़ी मीडियम से दी तथा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की। M. A (राजनीति विज्ञान) की परीक्षा में आपने उदयपुर यूनिवर्सिटी में दूसरा स्थान प्राप्त किया। आपका M. A का परीक्षा परिणाम जून 1972 में घोषित हुआ और 5 अगस्त, 1972 को उत्तर प्रदेश के बाँदा स्थित जवाहरलाल नेहरू डिग्री काॅलेज में लेक्चरर (राजनीति विज्ञान) के पद पर आपकी नियुक्ति हो गई ।वहाँ पढाने के साथ साथ आपने R. A. S. की तैयारी शुरू कर दी तथा 1977 में पहले ही प्रयास में आप सैलेक्ट हो गये तथा राजस्थान में बीसवीं पोजीशन हासिल की।
इस शानदार सफलता के कारण आपको भरतपुर का सहायक कलेक्टर नियुक्त किया गया। इसके बाद आपने उपखण्ड अधिकारी, अतिरिक्त जिला कलेक्टर, राजस्व अपील अथाॅरिटी, मुख्य कार्यकारी अधिकारी जिलापरिषद,डायरेक्टर ट्राइबल रिसर्च इन्सटीट्यूट एडिशनल कमिश्नर आबकारी विभाग राजस्थान, रजिस्ट्रार मोहनलाल सुखाङिया विश्वविद्यालय उदयपुर तथा अतिरिक्त संभागीय आयुक्त उदयपुर आदि राजस्थान के महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों पर अपनी सेवाएँ दी। 30 सितम्बर 2010 को 38 वर्ष की उल्लेखनीय गौरवपूर्ण सेवाओं के बाद आप अतिरिक्त संभागीय आयुक्त पद से सेवानिवृत्त हुए।
बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी अहसान साहब 1981 में चूरू के S.D.M रहे। मात्र अढाई महीने के अल्प काल में आप तत्कालीन अतिरिक्त कलेक्टर श्री डी. आर जोधावत व जनाब शरीफ जी मोलानी के साथ दो बार सुजानगढ पधारे। अपने परिजनों व मुझसे आत्मीयता से मिले। अपने गाँव के मदरसे व जमातखाने के लिए समाज से आर्थिक सहयोग लिया।उस राशि से गुलुण्ड में जमीन खरीदी गई। समाज सुधार के लिए 29 मई, 2005 कोआपने उदयपुर में इज्तेमाई शादी का प्रोग्राम किया जो राजस्थान में होने वाला पहला प्रोग्राम था। शेरो शायरी, वादविवाद व आसुभाषण प्रतियोगिता, वेडमिन्टन व क्रिकेट आपकी पसंद रहे हैं। ,1982से आप उदयपुर में निवास करते हैं। आपने तीनों बच्चों की परवरिश व तरवियत बहुत अच्छे ढंग से की है। बेटी फरजाना अहमद सुखाङिया यूनिवर्सिटी से L. L. B की गोल्ड मैडलिस्ट है व महाराणा उदयपुर द्वारा 5000 रुपये व मैडल देकर सम्मानित हो चुकी है। बङे पुत्र इरफान अहमद स्टाॅक मार्केट से जुङे तथा छोटे बेटे फुरकान अहमद हुण्डई कम्पनी उदयपुर के मैनेजर है। समाज गौरव अहसान साहब एक रोशन मीनार है जिसकी रोशनी व मार्ग दर्शन में समाज विकास की अपेक्षा है।

द्वारा -शम्सुद्दीन स्नेही, सुजानगढ।

15/04/2020

16 अप्रैल छिम्पा दिवस की सब कोमी भाइयो तहे दिल से मुबारक बाद।

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341318

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