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कीन्हा मगहर पियाना सतगुरु, कीन्हा मगहर पियाना हो।दोनो दीन चले संग जाके, हिन्दू-मुसलमाना हो।।माघ महीना शुक्ल पक्ष तिथि एक...
30/01/2023

कीन्हा मगहर पियाना सतगुरु, कीन्हा मगहर पियाना हो।
दोनो दीन चले संग जाके, हिन्दू-मुसलमाना हो।।
माघ महीना शुक्ल पक्ष तिथि एकादशी वि.सं.1575 सन् 1518 को अविनाशी परमात्मा कबीर साहेब मगहर से सशरीर सतलोक गये। उनके शरीर के स्थान पर केवल सुगन्धित पुष्प मिले।

हिन्दू व मुसलमान में जो भाईचारे, धार्मिक सामंजस्य का बीज परमेश्वर कबीर जी बो गए थे, उसकी मिसाल मगहर में आज भी देखी जा सक...
29/01/2023

हिन्दू व मुसलमान में जो भाईचारे, धार्मिक सामंजस्य का बीज परमेश्वर कबीर जी बो गए थे, उसकी मिसाल मगहर में आज भी देखी जा सकती है। मगहर से परमेश्वर कबीर जी सशरीर सतलोक गए थे। उस स्थान पर हिन्दू व मुसलमानों ने मंदिर व मजार 100 - 100 फुट की दूरी में यादगार बना रखी है।
कबीर, विहंसे कहयो तब तीनसै, मजार करो संभार।
हिन्दू तुरक नहीं हो, ऐसा वचन हमार।।

कबीर परमेश्वर मगहर से सशरीर सतलोक गए।उनके शरीर के स्थान पर सुगंधित फूल पाए गए जो कबीर परमेश्वर की आज्ञा के अनुसार दोनों ...
26/01/2023

कबीर परमेश्वर मगहर से सशरीर सतलोक गए।
उनके शरीर के स्थान पर सुगंधित फूल पाए गए जो कबीर परमेश्वर की आज्ञा के अनुसार दोनों धर्मों ने आपस में लेकर मगहर में 100 फुट के अंतर से एक-एक यादगार बनाई जो आज भी विद्यमान है।
यह दोनों धर्मों हिंदुओं और मुसलमानों में आपसी भाईचारे व सद्भावना की एक मिसाल का प्रमाण है।
गरीब, बिरसिंघ बघेला करै बीनती, बिजली खाँन पठाना हो।
दो चदरि बकसीस करी है, दीना यौह प्रवांना हो।।

 ीलाहिन्दू व मुसलमान में जो भाईचारे, धार्मिक सामंजस्य का बीज परमेश्वर कबीर जी बो गए थे, उसकी मिसाल मगहर में आज भी देखी ज...
25/01/2023

ीला
हिन्दू व मुसलमान में जो भाईचारे, धार्मिक सामंजस्य का बीज परमेश्वर कबीर जी बो गए थे, उसकी मिसाल मगहर में आज भी देखी जा सकती है। मगहर से परमेश्वर कबीर जी सशरीर सतलोक गए थे। उस स्थान पर हिन्दू व मुसलमानों ने मंदिर व मजार 100 - 100 फुट की दूरी में यादगार बना रखी है।
कबीर, विहंसे कहयो तब तीनसै, मजार करो संभार।
हिन्दू तुरक नहीं हो, ऐसा वचन हमार।।

 ीलाकीन्हा मगहर पियाना सतगुरु, कीन्हा मगहर पियाना हो।दोनो दीन चले संग जाके, हिन्दू-मुसलमाना हो।।माघ महीना शुक्ल पक्ष तिथ...
25/01/2023

ीला
कीन्हा मगहर पियाना सतगुरु, कीन्हा मगहर पियाना हो।
दोनो दीन चले संग जाके, हिन्दू-मुसलमाना हो।।
माघ महीना शुक्ल पक्ष तिथि एकादशी वि.सं.1575 सन् 1518 को अविनाशी परमात्मा कबीर साहेब मगहर से सशरीर सतलोक गये। उनके शरीर के स्थान पर केवल सुगन्धित पुष्प मिले।

 #कबीरपरमेश्वर_निर्वाणदिवस  ीला कबीर परमेश्वर निर्वाण दिवस                           देख्या मगहर जहूरा सतगुरु,          ...
25/01/2023

#कबीरपरमेश्वर_निर्वाणदिवस ीला


कबीर परमेश्वर निर्वाण दिवस


देख्या मगहर जहूरा सतगुरु,
देख्या मगहर जहूरा हो।
काशी में कीर्ति कर चाले,
झिलमिल देही नूरा हो।

प्रसिद्ध कवि एवं जुलाहे की भूमिका करने वाले महान सन्त के रूप में विख्यात कबीर साहिब ही पूर्ण परमेश्वर हैं। जिनका जन्म मां के गर्भ से नहीं होता। इसका वेदों में भी प्रमाण है कि पूर्ण परमेश्वर ऊपर से गति करके स्वयं प्रकट होता है। वह पृथ्वीलोक में वाणियों, कविताओं के माध्यम से तत्वज्ञान सुनाता है व कवि की उपाधि धारण करता है।

कलयुग में पूर्ण परमात्मा कबीर साहिब अपने वास्तविक नाम कबीर देव अर्थात कबीर साहिब नाम से प्रकट होते हैं। विक्रम संवत 1455 (सन 1398) जेष्ठ मास की पूर्णिमा सुबह-सुबह ब्रह्म मुहूर्त में काशी के अंदर लहरतारा नामक तालाब पर कमल के फूल पर नीरू और नीमा नामक एक दंपत्ति जो जुलाहे का काम करते थे, उन्हें मिले थे। परमेश्वर कबीर साहेब 120 वर्ष तक इस पृथ्वीलोक में रहे और अनेकों चमत्कार किए व तत्वज्ञान का प्रचार किया।

पाखण्डी धर्मगुरुओं ने अफवाह फैला रखी थी कि जो काशी में मरेगा वह स्वर्ग जायेगा तथा जो मगहर में मरेगा वह गधा बनेगा।
परमेश्वर कबीर जी कहते थे कि जैसी काशी है वैसा ही मगहर है, केवल हृदय में सच्चा राम होना चाहिए, यदि आप सतभक्ति करते हो तो आप कही भी प्राण त्यागो, मोक्ष के अधिकारी हो।

505 वर्ष पूर्व सन् 1518 वि. स. 1575 महीना माघ शुक्ल पक्ष तिथि एकादशी को कबीर साहिब सशरीर सतलोक गये थे तब हिंदू तथा मुस्लिम आपस में कबीर साहिब के शरीर के अंतिम संस्कार को लेकर लड़ाई करने की तैयारी में थे, तभी कबीर परमेश्वर ने आकाशवाणी की कोई झगड़ा न करे। जो भी चादर के नीचे मिले उसे आधा-आधा बांट ले, कबीर परमेश्वर के शरीर के स्थान पर सुगंधित फूलों के अलावा कुछ न मिला क्योंकि कबीर परमेश्वर सशरीर सत्यलोक चले गए थे।

तहां वहां चादरि फूल बिछाये, सिज्या छांडी पदहि समाये |
दो चादर दहूं दीन उठावैं, ताके मध्य कबीर न पावैं ||

हिंदू व मुसलमानों ने बिना झगड़ा किये दोनों धर्मों ने आधे-आधे फूल बांटे एवं उस पर एक यादगार बना दी। आज भी मगहर में यह यादगार विद्यमान है।

पूर्ण परमेश्वर कबीर साहेब सशरीर आये तथा अनेक लीलाएं करके पुनः सशरीर सतलोक गए क्योंकि पूर्ण परमात्मा कभी भी न जन्म लेता है और न उसकी मृत्यु होती है।

#कबीरपरमेश्वर_निर्वाणदिवस 1 फरवरी 2023
ीला


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