31/07/2026
सनातन परंपरा में भगवान भैरव को साक्षात शिव का ही अवतार माना गया है। वे संकटों को हरने वाले और अत्यंत शीघ्र प्रसन्न होने वाले देवता हैं। भय, कोर्ट-कचहरी के विवाद, अज्ञात शत्रु और मानसिक तनाव जैसी समस्याओं में भैरव बाबा की पूजा अचूक मानी जाती है।
भैरव जी के अलग-अलग रूपों की पूजा और मंत्र जाप से अलग-अलग कष्टों का निवारण होता है। यहाँ मुख्य कष्ट और उनके समाधान के लिए विशिष्ट पूजा-जाप की जानकारी दी जा रही है:
1. भय, डिप्रेशन और मानसिक तनाव (बटुक भैरव साधना)
यदि जीवन में किसी भी प्रकार का अज्ञात भय हो, राहु-केतु के कारण मानसिक तनाव या डिप्रेशन रहता हो, तो भगवान भैरव के सौम्य रूप 'बटुक भैरव' की आराधना करनी चाहिए।
मंत्र: ॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं नमः शिवाय॥
समाधान: इस मंत्र के जाप से मानसिक शांति मिलती है, आत्मविश्वास बढ़ता है और हर प्रकार का आंतरिक व बाहरी भय समाप्त होता है।
2. शत्रु बाधा, कोर्ट-कचहरी और तंत्र बाधा (काल भैरव साधना)
यदि गुप्त शत्रु परेशान कर रहे हों, मुकदमों में सफलता न मिल रही हो, या किसी नकारात्मक ऊर्जा (तंत्र बाधा) का अहसास होता हो, तो 'काल भैरव' रूप की पूजा की जाती है। वे न्याय के देवता हैं।
मंत्र: ॐ भं कालभैरवाय फट्॥ या ॐ ह्रीं बं बटुकाय आपदुद्धारणाय बटुकाय ह्रीं फट्॥
समाधान: काल भैरव का यह मंत्र शत्रुओं को शांत करता है, ऊपरी बाधाओं का नाश करता है और आपको कोर्ट-कचहरी के मामलों में न्याय दिलाता है।
3. भारी कर्ज और आर्थिक तंगी (स्वर्णाकर्षण भैरव साधना)
यदि लाख कोशिशों के बाद भी कर्ज का बोझ कम नहीं हो रहा हो या व्यापार-नौकरी में लगातार धन हानि हो रही हो, तो भगवान भैरव के सात्विक और धन-धान्य प्रदाता रूप 'स्वर्णाकर्षण भैरव' की पूजा की जाती है।
मंत्र: ॐ ऐं क्लां क्लीं क्लूं ह्रां ह्रीं ह्रूं सः वं आपदुद्धारणाय अजांमलबंधनाय लोकेश्वराय स्वर्णाकर्षणभैरवाय मम् दारिद्र्यविद्वेषणाय महाभैरवाय नमः॥
समाधान: इस मंत्र के नियमित जाप से दरिद्रता का नाश होता है और रुके हुए धन या आय के नए स्रोत बनते हैं।
कष्ट निवारण के लिए कुछ सरल और प्रभावी उपाय (गृहस्थों के लिए)
यदि आप बड़े अनुष्ठान या कठिन मंत्रों का जाप नहीं कर सकते, तो गृहस्थ जीवन में रहते हुए शनिवार या रविवार को ये सरल उपाय कर सकते हैं:
काले कुत्ते की सेवा: भैरव बाबा का वाहन कुत्ता (श्वान) है। शनिवार या रविवार के दिन काले या किसी भी आवारा कुत्ते को मीठी रोटी, दूध या बिस्कुट खिलाने से राहु-केतु के दोष शांत होते हैं और आकस्मिक संकट टल जाते हैं।
कड़वे तेल (सरसों के तेल) का दीपक: शनिवार की शाम को किसी भैरव मंदिर में जाकर सरसों के तेल का दीपक जलाएं। इससे शनि जनित पीड़ा और शारीरिक कष्टों में तुरंत आराम मिलता है।
इमरती या जलेबी का भोग: भैरव बाबा को इमरती, जलेबी या उड़द की दाल के वड़े का भोग लगाने से ऊपरी बाधाएं और काम में आ रही रुकावटें दूर होती हैं।
विशेष नोट: गृहस्थों को हमेशा भगवान भैरव के सात्विक या सौम्य रूप (जैसे बटुक भैरव या स्वर्णाकर्षण भैरव) की ही पूजा करनी चाहिए। काल भैरव की उग्र साधनाएं किसी योग्य गुरु के मार्गदर्शन में ही की जानी चाहिए। पूजा में शुद्धता, सात्विकता (मांस-मदिरा से दूरी) और सेवा का भाव होना अनिवार्य है।
जय श्री भैरव नाथ री सा