Shri Balaji Social Welfare Society - NGO

Shri Balaji Social Welfare Society - NGO Shri Balaji Social Welfare Society has been established to serve the impoverished and deprived and to

29/09/2016

संस्कृत से संस्कृति की ओर
(श्री बालाजी वेलफेयर सोसाइटी द्वारा वेद्पाठी बच्चों को निःशुल्क आवासीय सुविधा उपलब्ध करवायी )
भोपाल में प्रदेश के विभिन्न शहरों से वेदों के अध्यन हेतु ५ वर्ष से १५ वर्ष के आयु के २५ बच्चे एक भवन में रहकर गुरुकुल पद्ध्यति से अध्धयन कर रहे हैं । ये बच्चे संस्कृत के चारों वेद का अध्धयन करते हैं यजुर्वेद ,सामवेद ,ऋग्वेद और अथर्ववेद ।
एक दिन अचानक भवन मालिक ने बिना पूर्व सूचना दिए अचानक बच्चों को बेदर्दी से भरी बरसात में रात को भवन से बेदखल कर दिया । जैसे ही श्री बालाजी वेलफेयर सोसाइटी के संज्ञान में ये बात आई तो तत्काल हमारी सोसाइटी ने इन बच्चों को आश्रय देने के लिए निर्णय लिया और बच्चों को एक अन्य भवन में निःशुल्क आवासीय सुविधा उपलब्ध करवायी । आज ये बच्चे निश्चिन्त हो कर वेदों का अध्धयन कर रहे हैं । आजकल जब इस भौतिकतावादी परिवेश में भारतवर्ष महान वेदों के ज्ञानियों संख्या घटती जा रही है ऐसे में श्री बालाजी वेलफेयर सोसाइटी के इस कदम की चारो ओर भूरी भूरी प्रशंसा हो रही है ।
श्री बालाजी वेलफेयर सोसाइटी समाज से आग्रह करती है कि सभी लोग इस दिशा में पहल कर इन बच्चो कि निर्बाध शिक्षा हेतु अपना योगदान देवें तथा आवश्यकता पड़ने पर आप इन बच्चो को अपने घर में वेद पाठ हेतु आमंत्रित भी कर सकते हैं। विश्वास कीजिये इन बच्चों के मुख से वेदों की ऋचाओं के पाठ से आपके घर का वातावरण पवित्र हो जायेगा। दान के लिए इक्षुक महानुभाव कृप्या 9827301252 पर संपर्क कर सकते हैं ।

मधु तिवारी भोपाल ने श्री बालाजी सोशल वेलफेयर सोसाइटी के पेज में माहेश्वरी नाम की बच्ची का दर्द पढ़ा औरउसके पिता के अकाउंट...
25/09/2016

मधु तिवारी भोपाल ने श्री बालाजी सोशल वेलफेयर सोसाइटी के पेज में माहेश्वरी नाम की बच्ची का दर्द पढ़ा औरउसके पिता के अकाउंट में कल 24 सितंबर 2016 को 5000 rs जमा करवा दिया है। मधु तिवारी ने आगे बढ़कर सेवा कार्य में बहुत बड़ा योगदान दिया इसके लिए श्री बालाजी सोशल वेलफेयर सोसाइटी आभारी रहेगा। इस बच्ची की news हमें श्री रविंद्र जी से मिली रविंद्र सिंह क्षत्री
उन लोगो की मदद करते हैं जो पैसे के अभाव में अपना इलाज नही करवा पाते हैं। उन्हें सरकारी से ले कर के निजी मदद के साथ साथ हॉस्पिटलों का बेहतर मार्गदर्शन देते हैं।। रविंद्र बिलासपुर छत्तीसगढ़ से हैं।जो कि लोगॉ के लिए निस्वार्थ सहायतार्थ काम करते हैं। मधु तिवारी के इस बड़े योगदान का हम सब ह्रदय स्वागत करते हैं.

Madhu Tiwari Pic

आइये आज आपको milata haun एक और प्यारी बच्ची माहेश्वरी से ..बिलासपुर के पास एक गाव है करगी रोड नाम का, यह परिवार वहां का ...
23/09/2016

आइये आज आपको milata haun एक और प्यारी बच्ची माहेश्वरी से ..
बिलासपुर के पास एक गाव है करगी रोड नाम का, यह परिवार वहां का निवासी है..बच्ची के पिता मिलन केवट रिक्शा चलाकर अपने परिवार का पालन पोषण करते हैं..रिक्शा चलाने के लिए वो प्रतिदिन अपने गाव से 30 किमी दूर बिलासपुर शहर आते हैं ..फिर दिन भर रिक्शा चलाने से होने वाली आय ले कर घर को लौट जाते हैं|| घर में 4 बच्चे हैं| कोई पढ़ रहा है तो किसी की पढाई अभावो में छूट चुकी है|

आइये अब केस हिस्ट्री जानते हैं ..बच्ची को 2 साल पहले कमर के पास एक छोटी सी फुंसी (पिम्पल) जैसा कुछ हुआ था| परिजनों को लगा की यह फुंसी है पक कर फुट जायेगी, या फिर बालतोड़ हुआ तो भी अपने आप पक कर फुट ही जाएगा| और इसी सोच के साथ वो अपने स्तर पर माहेश्वरी का इलाज कराते रहे -कराते रहे.... कभी कभी असहनीय दर्द हो उठता था, कमर से ले कर पेट तक फिर धीरे धीरे पुरे शरीर पर इसका प्रभाव पड़ने लगा.. आप स्वयं समझदार हैं की एक रिक्शा चलाने वाला व्यक्ति किस हद तक जागरूक हो सकता है ? उसकी आर्थिक हैसियत क्या होगी ? उसे साही मार्गदर्शक मिलेंगे भी या नहीं ? क्या वह एक ही वक़्त पर रिक्शा चलाना और बेटी का इलाज करवाना करने में आर्थिक/मानसिक रूप से सक्षम हो पायेगा? क्या इलाज के सभी चरणों की उसे सही जानकारी होगी ? अगर आप इस पोस्ट को पढ़ रहे हैं तो इन सवालो के जवाब आपको जरूर खोजने चाहिए ..और उस पर कम से कम 1% वर्कआउट भी जरूर करना चाहिए| अगर आप ऐसा कर पाए तो निश्चित ही किसी की जिंदगी समय रहते बचा लेंगे आप|| एक सप्ताह पहले मैं जब मैं इस बच्ची और इसके परिवार से मिला तो..यह एक निजी हॉस्पिटल में भर्ती थी ..जहाँ बिमारी को पकड़ने के लिए जरुरी टेस्ट किये जा रहे थे..हर टेस्ट और दवाइयों के साथ इस परिवार की गरीबी बढ़ती जा रही थी| हैसियत के नाम पर जेब में चन्द पैसे ही थे| अंत में टेस्ट रिपोर्ट भी आ गयी..जिस गठान को फोड़ा/फुंसी/बालतोड़ समझ रहे थे, वो असल में कैंसर निकला जो एक ट्यूमर का रूप ले चूका था| यह जानने के बाद रिक्शे वाले भैया ने हर उम्मीद छोड़ दी की शायद अब वो अपनी बच्ची का इलाज नहीं करवा पाएंगे कभी.. क्योंकि उनकी गरीबी इसकी इजाजत नहीं देती है उन्हें|

उनके चेहरे पर आगे इलाज ना करा पाने का दर्द साफ़ दिख रहा था...मैं उन्हें समझया और बस यही कहा की अगर आप अपनी बच्ची की ऊँगली पकड़ कर रखेंगे तो मैं भी आपके साथ कदम से कदम मिलाकर चलूंगा और इस बच्ची का बेहतर से बेहतर इलाज करवाऊंगा|| इस परिवार को मैं रायपुर के मेकाहारा हॉस्पिटल ले कर गया, जहाँ इनके रहने-खाने-पिने का प्रबंध करके हॉस्पिटल में इनकी प्रारंभिक प्रक्रिया चालू करवाई| बच्ची के कुछ मेडिकल टेस्ट होने हैं| उसके बाद अनुभवी डॉक्टर्स जल्दी निर्णय लेकर इसका इलाज चालू कर देंगे| मेकाहारा हॉस्पिटल में कैंसर के इलाज की काफी बेहतर व्यवस्था है..आधुनिक मशीने हैं, बीपीएल कार्ड वालो के लिए निशुल्क कैंसर इलाज का प्रावधान है (पर जागरूकता के अभाव में इस परिवार के पास यह कार्ड ही नहीं है ), आम नागरिको के लिए भी बहुत ही रियायती दरों पर इलाज की सुविधा है|| समय के साथ जो भी बच्ची को जरुरत होगी उसे पूरा करने के लिए निजी/सार्वजानिक/ सरकारी हर स्तर पर पूरा करने की जिम्मेदारी ले चूका हु| बस प्रार्थना कर रहा हु की यह बच्ची जल्दी ही ठीक हो जाए|| फिर इसकी छूटी हुई पढाई भी चालू करवानी है| इस बच्ची का मुस्कुराता हुआ चेहरा ही उसके जल्दी ठीक होने की उम्म्मीद है|| अगर आपके पास भी किसी भी तरह का कोई मेडिकल केस हो तो मुझे जरूर बताएं, सही जानकारी देने के साथ हर संभव मदद करने का प्रयास करूँगा|

इस बच्ची को Shri Balaji Social Welfare Society की ओर से Rs. 2000 की मदद राशि प्रदान की गयी है| अन्य कोई भी इस बच्ची की सहायता करना चाहता है तो हमें दिये गए नंबर के माध्यम से संपर्क कर सकता है|
Contact: 9827301252

धर्म और राजनीति का घालमेल- सुधीर दळवीधर्म का उपयोग राजनीति में नहीं होना चाहिए यह बात देश में सभी को पता है और वर्षों से...
20/08/2016

धर्म और राजनीति का घालमेल
- सुधीर दळवी

धर्म का उपयोग राजनीति में नहीं होना चाहिए यह बात देश में सभी को पता है और वर्षों से पता है बावजूद इसके वर्तमान हालात कुछ अलग ही बात कहते हैं। धर्म और राजनीति के घालमेल के कारण विचित्र परिस्थितियाँ निर्मित होते जा रही हैं। जिसमें जितने प्रश्न हैं उतने जवाब नहीं हैं। धर्म और राजनीति का घालमेल सदियों से होता आ रहा है पर वर्तमान स्वरूप काफी व्यथित करने वाला है।

धर्म के बारे में सामान्य रूप से कहा जाता है कि यह जीवन जीने का रास्ता बताता है। सभी धर्मों में इसी बात को लेकर अलग-अलग व्याख्या है। मैं विभिन्न धर्मों व पंथों के बारे में व उनके मतों के बारे में गहराई में नहीं जाना चाहता। पर मेरा मानना है कि धर्म के नाम पर गुमराह करना और लुटना बंद होना चाहिए। धर्म के नाम पर आडंबर नहीं होना चाहिए।

जॉर्ज बर्नाड शॉ क्रिश्चियन थे, पर उन्होंने अपनी वसीयत में यह लिखा था कि मेरी मृत्यु के बाद मेरे शरीर को अग्नि को समर्पित किया जाए। यह उदाहरण अपने आप में इतनी सारी बातें कहता है जिसमें व्यक्ति की स्वतंत्रता से लेकर धर्म के प्रति उसकी आसक्ति, अनासक्ति भाव सबकुछ आ जाता है। धर्म केवल नियम कानूनों में बँधना नहीं बल्कि धर्म इंसान को दूसरे इंसान के साथ इंसानियत का भाव बनाए रखने में मदद करता है। आज के परिप्रेक्ष्य में यही जरूरी है। हम न केवल धर्म को बल्कि साधारण सी समस्याओं का भी राजनीतिकरण करने से नहीं चूकते। जिसका परिणाम हम सभी देख रहे हैं।

कला, संस्कृति से लेकर भगवान भी राजनीति के कटघरे में खड़ा नजर आ रहा है। यह स्थिति क्यों बनी और क्या ऐसी ही स्थिति बनी रहेगी? मैं इसका हल शिक्षा में ढूँढता हूँ। हम धर्म का सही मायने में अर्थ ही समझ नहीं पाएँगे तब निश्चित रूप से इसका गलत उपयोग ही करेंगे। हमें अपने व्यवहार व आचरण को लेकर सोचना होगा और इस बात को ध्यान में लाना होगा कि इंसानियत से बड़ा कोई धर्म नहीं है।

हम भले ही किसी भी ओहदे पर बैठे हों और किसी भी प्रकार का काम कर रहे हों, अगर हम इंसानियत के धर्म को अपना पहला धर्म समझेंगे तब बाकी सभी कुछ आसान हो जाएगा और यह केवल शिक्षा से ही आ सकता है। धर्म के कई ठेकेदार अशिक्षित लोगों को बरगलाकर अपना उल्लू सीधा करते हैं। वे लोग शिक्षित लोगों पर अपनी दादागिरी से यह आदेश नहीं देते, क्योंकि उन्हें पता है कि शिक्षित व्यक्ति रुढ़िवादी और ढोंग में भरोसा नहीं करता, केवल अच्छे कर्म व इंसानियत को ही मानता है।

मेरा ऐसा व्यक्तिगत मत है कि धर्म की सही व्याख्या बच्चों को घरों में दिए जाने वाले संस्कारों में छिपी है। हम बच्चों को संस्कार देते समय सावधानी बरतते हैं और उन्हें भलाई, ईमानदारी के साथ जीवनयापन करने की बातें करते हैं पर स्वयं की बारी आने पर हम कायर, कपटी, झूठे, बेईमान बनने में किसी भी प्रकार की शर्म नहीं पालते।

भौतिकवादी जीवनशैली के चलते हम संस्कारों से लेकर धर्म को अपने अनुसार बदलने पर तुले हैं पर यह तय नहीं कर पा रहे हैं कि यह बदलाव हमारे लिए भविष्य में सकारात्मक होगा या नकारात्मक। निश्चित रूप से अब तक जो स्वरूप सामने आया है वह नकारात्मक है। इस कारण अब हमें धर्म की व्याख्या करते समय इस बात का ध्यान आवश्यक रूप से रखना होगा कि हम राजनीति को अलग रखें और धर्म को अलग तभी इंसानियत धर्म के संस्कारों का बीजारोपण आगे आने वाली पीढ़ी में कर पाएँगे।

(लेखक विख्यात फिल्म व टीवी कलाकार हैं।)

11/03/2016

We, Shri Balaji Social Welfare Society, a non-government organization (NGO), came into existence in March 2015. We are based in Bhopal (M.P.), India. We are. Our organization comprises of young enthusiasts who are engaged in social causes and really want to do their bit for the welfare of the people in need. We strive to bring awareness among the people about various issues like health, social, education, religious & others.
contact us-9827301252

24/12/2015
श्री बालाजी वेलफेयर सोसायटी के दारा पंचफ़ुला नाम की महिला को पैर टूटने पर श्री बालाजी वेलफेयर सोसायटी की तरफ से  वाकर प्र...
24/08/2015

श्री बालाजी वेलफेयर सोसायटी के दारा पंचफ़ुला नाम की महिला को पैर टूटने पर श्री बालाजी वेलफेयर सोसायटी की तरफ से वाकर प्रदान की गयी जिससे वह अपनी चलने की असमर्थता को दूर कर पा रही है श्री बालाजी वेलफेयर सोसायटी एक ऐसी संस्था है जो आर्थिक व शारीरिक रूप से असहाय व्यक्तियो को प्रत्येक समय सहायता प्रदान भी करती है और सहायता प्रदान करने के लिए अग्रसर भी रहती है इनके दारा समय समय पर असहाय व्यक्तियो की सहायता की जाती है
श्री बालाजी वेलफेयर सोसायटी ( एन . जी . ओ)

13/08/2015

एक गरीब वृद्ध पिता के पास अपने अंतिम समय में दो बेटों को देने के लिए मात्र एक आम था। पिताजी आशीर्वादस्वरूप दोनों को वही देना चाहते थे, किंतु बड़े भाई ने आम हठपूर्वक ले लिया। रस चूस लिया छिल्का अपनी गाय को खिला दिया। गुठली छोटे
भाई के आँगन में फेंकते हुए कहा- ' लो, ये पिताजी का
तुम्हारे लिए आशीर्वाद है।' छोटे भाई ने ब़ड़ी श्रद्धापूर्वक गुठली को अपनी आँखों
व सिर से लगाकर गमले में गाढ़ दिया। छोटी बहू पूजा के बाद बचा हुआ जल गमले में डालने लगी। कुछ समय बाद आम का पौधा उग आया, जो देखते ही देखते बढ़ने लगा।
छोटे भाई ने उसे गमले से निकालकर अपने आँगन में लगा
दिया। कुछ वर्षों बाद उसने वृक्ष का रूप ले लिया।वृक्ष के कारण घर की धूप से रक्षा होने लगी, साथ ही प्राणवायु भी मिलने लगी। बसंत में कोयल की मधुर कूक
सुनाई देने लगी। बच्चे पेड़ की छाँव में किलकारियाँ
भरकर खेलने लगे।पेड़ की शाख से झूला बाँधकर झूलने लगे। पेड़ की छोटी-छोटी लक़िड़याँ हवन करने एवं बड़ी लकड़ियाँ घर के दरवाजे-खिड़कियों में भी काम आने लगीं। आम के
पत्ते त्योहारों पर तोरण बाँधने के काम में आने लगे। धीरे-धीरे वृक्ष में कैरियाँ लग गईं। कैरियों से अचार व मुरब्बा डाल दिया गया। आम के रस से घर-परिवार के सदस्य रस-विभोर हो गए तो बाजार में आम के अच्छे दाम मिलने से आर्थिक स्थिति मजबूत हो गई।रस से पाप़ड़ भी बनाए गए, जो पूरे साल मेहमानों व घर वालों को आम रस की याद दिलाते रहते। ब़ड़े बेटे को
आम फल का सुख क्षणिक ही मिला तो छोटे बेटे को पिता का ' आशीर्वाद' दीर्घकालिक व सुख-
समृद्धिदायक मिला।यही हाल हमारा भी है परमात्मा हमे सब कुछ देता है सही उपयोग हम करते नही हैं दोष परमात्मा और किस्मत को देते हैं।

03/08/2015

आप सबके सहयोग से शेषराव मिस्त्री का ऑपरेशन सफलता पूर्वक हो गया ! आप सबके सहयोग के लिए धन्यवाद बिना आप सबके सहायता के यह कार्य पूर्ण नहीं हो सकता था ! जल्द ही शेषराव की अच्छे होने की बाद की तस्वीर प्रकाशित की जाएगी , अभी स्वास्थय लाभ के लिए वह अस्पताल मे है !
9827301252

काम करते वक्त  हुई दुर्घटनाएक  मिस्त्री  की काम करते वक्त दो  मजिला  से गिरने के कारन  कुलहे  की हड्डी फेक्चर  हुई जिसका...
29/07/2015

काम करते वक्त हुई दुर्घटना
एक मिस्त्री की काम करते वक्त दो मजिला से गिरने के कारन कुलहे की हड्डी फेक्चर हुई जिसका इलाज कालोनी केयर अस्पताल में चल रहा है वह अत्यंत गंभीर स्तिथि में है जिसको श्री बालाजी वेलफेयर सोसायटी के द्वारा 7000 सहायता राशि प्रदान की गयी है प्रतेक नागरिक से विनती है जो भी इस व्यक्ति की सहायता करना चाहे वहा तुरंत इस नंबर पर संपर्क करे ----
9827301252
धन्यवाद
श्री बालाजी वेलफेयर सोसायटी (NGO)

कर्म की महानता| एक बार बुद्ध एक गांव में अपने किसान भक्त के यहां गए। शाम को किसान ने उनके प्रवचन का आयोजन किया। बुद्ध का...
05/06/2015

कर्म की महानता|

एक बार बुद्ध एक गांव में अपने किसान भक्त के यहां गए। शाम को किसान ने उनके प्रवचन का आयोजन किया। बुद्ध का प्रवचन सुनने के लिए गांव के सभी लोग उपस्थित थे, लेकिन वह भक्त ही कहीं दिखाई नहीं दे रहा था। गांव के लोगों में कानाफूसी होने लगी कि कैसा भक्त है कि प्रवचन का आयोजन करके स्वयं गायब हो गया। प्रवचन खत्म होने के बाद सब लोग घर चले गए। रात में किसान घर लौटा। बुद्ध ने पूछा, कहां चले गए थे? गांव के सभी लोग तुम्हें पूछ रहे थे।

किसान ने कहा, दरअसल प्रवचन की सारी व्यवस्था हो गई थी, पर तभी अचानक मेरा बैल बीमार हो गया। पहले तो मैंने घरेलू उपचार करके उसे ठीक करने की कोशिश की, लेकिन जब उसकी तबीयत ज्यादा खराब होने लगी तो मुझे उसे लेकर पशु चिकित्सक के पास जाना पड़ा। अगर नहीं ले जाता तो वह नहीं बचता। आपका प्रवचन तो मैं बाद में भी सुन लूंगा। अगले दिन सुबह जब गांव वाले पुन: बुद्ध के पास आए तो उन्होंने किसान की शिकायत करते हुए कहा, यह तो आपका भक्त होने का दिखावा करता है। प्रवचन का आयोजन कर स्वयं ही गायब हो जाता है।

बुद्ध ने उन्हें पूरी घटना सुनाई और फिर समझाया, उसने प्रवचन सुनने की जगह कर्म को महत्व देकर यह सिद्ध कर दिया कि मेरी शिक्षा को उसने बिल्कुल ठीक ढंग से समझा है। उसे अब मेरे प्रवचन की आवश्यकता नहीं है। मैं यही तो समझाता हूं कि अपने विवेक और बुद्धि से सोचो कि कौन सा काम पहले किया जाना जरूरी है। यदि किसान बीमार बैल को छोड़ कर मेरा प्रवचन सुनने को प्राथमिकता देता तो दवा के बगैर बैल के प्राण निकल जाते। उसके बाद तो मेरा प्रवचन देना ही व्यर्थ हो जाता। मेरे प्रवचन का सार यही है कि सब कुछ त्यागकर प्राणी मात्र की रक्षा करो। इस घटना के माध्यम से गांव वालों ने भी उनके प्रवचन का भाव समझ लिया।

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A/430, BDA Colony, Shahpura
Bhopal
462039

Telephone

07552422648

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