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18/07/2016

िन्द : क्या आप आज अपना 30 मिनट देश को दे सकते हैं .

आज हम आपसे कुछ मांगना चाहते हैं .
आज रविवार है , छुट्टी का दिन
क्या आप आज अपना 30 मिनट देश को दे सकते हैं ?

आप सोच रहे होंगे , करना क्या है .
बहुत छोटा काम करना है , देश के लिए
सिर्फ एक 'भूखे' इंसान को 'भोजन' करना है .

इस कार्य को करते हुए, आप अपने मोबाइल से एक तस्वीर भी लें
और कमेंट में पोस्ट करें . ये फोटो आपकी ख्याति के लिए नहीं है ,
हो सकता है , आपकी तस्वीर देख कर , आपका कोई मित्र भी किसी एक
'भूखे' को भोजन करवा दे .

क्या आप आज देश के लिए 30 मिनट देंगे , आपके फोटो , आपकी राय और आपकी प्रतिक्रिया , के इंतज़ार में , आपका अपना IndiaTrendingNow
िन्द

18/06/2016
12/06/2016
हिमाचल प्रदेश में लव-जिहाद : हिन्दू युवती को पडोसी धर्मांध युवक प्रेमजाल में फंसाकर भगा ले गया
12/06/2016

हिमाचल प्रदेश में लव-जिहाद : हिन्दू युवती को पडोसी धर्मांध युवक प्रेमजाल में फंसाकर भगा ले गया

क्षेत्र से १८ मई को एक कालेज छात्रा घर से गायब हुर्इ । काही देर तक घर वापस न आने से युवती के परिजनोंने पुलिस में शिकायत की ।

हो सके तो अवश्य पढ़े ।।
12/06/2016

हो सके तो अवश्य पढ़े ।।

लव जिहाद के झूठे प्रचार पर इतिहासकार चारु गुप्ता का शोध परक आलेख

संघर्षो में यदि कटता है तो कट जाए सारा जीवन..!!कदम-कदम पर समझौता मेरे बस की बात नहीं….!!!!
12/06/2016

संघर्षो में यदि कटता है तो कट जाए सारा जीवन..!!
कदम-कदम पर समझौता मेरे बस की बात नहीं….!!!!

11/06/2016
Singhast 2016 (Ujjain)
10/06/2016

Singhast 2016 (Ujjain)

महाराजा छत्रसाल जी की जन्म जयंती पर उनके अंतर्ध्यान स्थली मऊ सहानियाँ (मुकरवा) में पूजन करते महाराजा छत्रसाल महोत्सव समि...
08/06/2016

महाराजा छत्रसाल जी की जन्म जयंती पर उनके अंतर्ध्यान स्थली मऊ सहानियाँ (मुकरवा) में पूजन करते महाराजा छत्रसाल महोत्सव समिति के अध्यक्ष श्री गोविन्द सिंह बुंदेला और समिति के सदस्य।।।।।

शूरवीर सम्राट महाराणा प्रताप जी की जयंती पर शत् शत् नमन। मेवाड़ की शोर्य-भूमि धन्य है, जहां वीरता और दृढ़ प्रण वाले प्रता...
07/06/2016

शूरवीर सम्राट महाराणा प्रताप जी की जयंती पर शत् शत् नमन। मेवाड़ की शोर्य-भूमि धन्य है, जहां वीरता और दृढ़ प्रण वाले प्रताप का जन्म हुआ।
महाराणा प्रताप ने धर्म एवं स्वाधीनता के लिए अपना बलिदान दिया। जब मेवाङ की सत्ता राणा प्रताप ने संभाली, तब आधा मेवाङ मुगलों के अधीन था और शेष मेवाङ पर अपना आधिपत्य स्थापित करने के लिये अकबर प्रयासरत था । राजस्थान के कई परिवार अकबर की शक्ति के आगे घुटने टेक चुके थे, किन्तु महाराणा प्रताप अपने वंश को कायम रखने के लिये संघर्ष करते रहे | जंगल-जंगल भटकते हुए घास-पात की रोटियों में गुजर-बसर कर पत्नी व बच्चे को विकराल परिस्थितियों में अपने साथ रखते हुए भी उन्होंने कभी धैर्य नहीं खोया।
महाराणा प्रताप के पास साधन सीमित थे, किन्तु फिर भी वे झुके नही, डरे नही। उनके धैर्य और साहस का ही असर था कि 30 वर्ष के लगातार प्रयास के बावजूद अकबर महाराणा प्रताप को बन्दी न बना सका।
महाराणा प्रताप सच्चे क्षत्रिय योद्धा थे, उन्होने अमरसिंह द्वारा पकङी गई बेगमों को सम्मान पूर्वक वापस भिजवाकर अपने विशाल ह्रदय का परिचय दिया। उनके शासनकाल में अनेक विद्वानो एवं साहित्यकारों को आश्रय प्राप्त था। अपने शासनकाल में उन्होने युद्ध में उजङे गाँवों को पुनः व्यवस्थित किया। पद्मिनी चरित्र की रचना तथा दुरसा आढा की कविताएं महाराणा प्रताप के युग को आज भी अमर बनाये हुए हैं।

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