12/04/2025
संकट तें हनुमान छुड़ावै।
मन क्रम बचन ध्यान जो लावै।।
हनुमान चालीसा में एक दोहा है -
"जुग सहस्त्र जोजन पर भानु.
लील्यो ताहि मधुर फल जानू.."
इसी दोहे में सूरज और धरती के बीच की दूरी बताई गई है. आइए जानते हैं इसका क्या अर्थ है और कैसे इससे सूरज और पृथ्वी के बीच की दूरी पता चलती है.
कितनी है सूरज और धरती के बीच की दूरी
हनुमान चालीसा के इस दोहे में ही सूरज और धरती के बीच की दूरी का गणित छिपा है. इस दोहे का अर्थ यह है कि हनुमान जी ने एक युग सहस्त्र योजन की दूरी पर स्थित भानु (सूर्य) को मीठा फल (आम) समझकर खा लिया था. बता दें कि योजन पहले दूरी के लिए इस्तेमाल की जाने वाली ईकाई थी. इसमें एक युग का मतलब 12000 वर्ष, एक सहस्त्र का मतलब 1000 और एक योजन यानी 8 मील होता है. अब देखा जाए तो युग x सहस्त्र x योजन = 12000x1000x8 मील. इस प्रकार यह दूरी 96000000 मील है. किलोमीटर में अगर इस दूरी को देखें तो एक मील में 1.6 किमी होते हैं तो.इस हिसाब से 96000000x1.6= 153600000 किमी. इस गणित के आधार गोस्वामी तुलसीदास ने प्राचीन समय में ही बता दिया था कि सूर्य और पृथ्वी के बीच की दूरी करीब 15 करोड़ किलोमीटर है.