Yugparivartak-युगपरिवर्तक

Yugparivartak-युगपरिवर्तक धर्मरक्षा,राष्ट्ररक्षा एवं मानवता की सेवा हेतु संकल्पित।

06/09/2025

जय माता की
जय गुरुवर की

आजकल समाज में बच्चों के विवाह को लेकर इतनी सजगता आ गई है कि आपसी रिश्ते नहीं हो पा रहे हैं। 27-28-32 वर्ष की बहुत सी लड़...
25/07/2024

आजकल समाज में बच्चों के विवाह को लेकर इतनी सजगता आ गई है कि आपसी रिश्ते नहीं हो पा रहे हैं। 27-28-32 वर्ष की बहुत सी लड़कियाँ घर बैठी हैं, क्योंकि उनके सपने हैसियत से बहुत ज्यादा हैं। यह स्थिति समाज की छवि को खराब कर रही है। सबसे बड़ा मानव सुख, सुखी वैवाहिक जीवन होता है। पैसा भी आवश्यक है, लेकिन कुछ हद तक। पैसों की वजह से अच्छे रिश्ते ठुकराना गलत है। पहली प्राथमिकता सुखी संसार और अच्छा घर-परिवार होना चाहिए। ज्यादा धन के चक्कर में अच्छे रिश्तों को नजरअंदाज करना गलत है। "संपत्ति खरीदी जा सकती है, लेकिन गुण नहीं।"

30 की उम्र के बाद विवाह नहीं होता, समझौता होता है और मेडिकल स्थिति से भी इसमें बहुत सी समस्याएँ उत्पन्न होती हैं। आज इससे भी बुरी स्थिति कुंडली मिलान के कारण हो गई है। हम अच्छे लड़के और घर के होने के बावजूद कुंडली की वजह से रिश्ते छोड़ देते हैं। 36 में से 20 या फिर 36/36 गुण मिलने पर भी जीवन में तकलीफें हो रही हैं, क्योंकि हमने लड़के के गुण नहीं देखे।

समाज में लोग बेटी के रिश्ते के लिए (लड़के में) चौबीस कैरेट का सोना खरीदने जाते हैं और चार-पाँच साल व्यतीत हो जाते हैं। उच्च "शिक्षा" या "जॉब" के नाम पर भी समय व्यतीत कर देते हैं। लड़के देखने का अंदाज भी समय व्यतीत का अनोखा उदाहरण हो गया है। खुद का मकान, फर्नीचर, कमरे, गाड़ी, रहन-सहन, खान-पान, भाई-बहन, बंटवारा, माँ-बाप का स्वभाव, नाते-रिश्तेदार, कद, रंग-रूप, शिक्षा, कमाई, बैंक बैलेंस और सोशल मीडिया पर एक्टिवनेस जैसी बातें पूछी जाती हैं।

हालात ऐसे हैं कि माँ-बाप की नींद 30 की उम्र पर खुलती है। फिर चार-पाँच साल की दौड़-धूप बच्चों की जवानी को बर्बाद कर देती है। इस वजह से अच्छे रिश्ते हाथ से निकल जाते हैं और माँ-बाप अपने ही बच्चों के सपनों को चूर-चूर कर देते हैं। एक समय था जब खानदान देखकर रिश्ते होते थे, जो लम्बे भी निभते थे। समधी-समधन में मान-मनुहार थी, सुख-दु:ख में साथ था, रिश्तों की अहमियत का अहसास था। धन-माया कम थी, मगर खुशियाँ घर-आँगन में झलकती थीं।

आज की स्थिति में, माता-पिता को जागरूक होना होगा और लड़कियों की शादी 22-24 साल की उम्र में करनी चाहिए और लड़के की 25-26 साल की उम्र में। "घर, गाड़ी, बंगला से पहले व्यवहार तौलो।" माँ-बाप भी आर्थिक चकाचौंध में बह रहे हैं। पैसे की भागमभाग में रिश्ते-नातेदार छूट रहे हैं, घर-परिवार टूट रहे हैं, प्रेम और प्यार सूख रहा है। समाज को अब जागना जरूरी है अन्यथा रिश्ते ढूंढते रह जाएंगे।





 #सावन महीने में भगवान शंकर से जुड़ी महत्वपूर्ण कथा-गायत्री बाबा प्रतिदिन सरयू स्नान के लिए जाया करते थे। मार्ग में एक गा...
16/07/2024

#सावन महीने में भगवान शंकर से जुड़ी महत्वपूर्ण कथा-

गायत्री बाबा प्रतिदिन सरयू स्नान के लिए जाया करते थे। मार्ग में एक गाँव पड़ता था। ब्राह्मण और क्षत्रिय कृषक लोग उसमें रहा करते थे। जिस रास्ते से गायत्री बाबा जाया करते थे, उसमें एक विधवा ब्राह्मणी की भी झोंपड़ी पड़ती थी। महामुनि जब भी उधर से निकलते विधवा या तो चरखा कातते मिलती या धान कूटते।

पूछने पर पता चला कि उसके पति के अतिरिक्त घर में आजीविका चलाने वाला और कोई नहीं था। वे किसी बंगालन जादूगरनी के पीछे प्राण गंवा बैठे और अब सारे परिवार का भरण-पोषण उसी को करना पड़ता है। एक ही पुत्र है, वह अभी अबोध है। अतीव वृद्धावस्था के सास-ससुर की सेवा सुश्रुषा की महती जिम्मेदारी भी है।

गायत्री बाबा को उसकी इस अवस्था पर बड़ी दया आई। उन्होंने उसके पास जाकर कहा,
"भद्रे! मैं इस आश्रम का अध्यक्ष हूँ। मेरे कई शिष्य राज-परिवारों से संबंध रखते हैं, तुम चाहो तो तुम्हारे लिए आजीविका की स्थायी व्यवस्था कराई जा सकती है। तुम्हारी असहाय अवस्था मुझसे देखी नहीं जाती।"

परन्तु कष्टों ने ब्राह्मणी का शरीर छीना था, उसका आत्मसम्मान और आत्मविश्वास अब भी वह्निशिखा के समान देदीप्यमान थे।
गंभीर स्वर में उसने बाबा को उत्तर दिया...
"महाराज! आपकी असीम कृपा और करुणा से आज भी दो जून की रोटी में कोई समस्या नहीं। और जिस दिन न मिले, एकादशी हो जाती है।

अब गायत्री बाबा पिघलने लगे....बोले
"पुत्र को बुलाओ..

तीन चार वर्ष का गौरांग बालक महात्मा के समक्ष समुपस्थित हुआ। बाबा ने सर पर हाथ फेरा,

"यहाँ से कुछ दूर पश्चिम दुग्धेश्वर शिव का निवास है वहाँ जा शिव से अपनी बात कह। कल्याण हो जाएगा।"

बालक की माता ने कहा .."परंतु यह इतना छोटा है ना मंत्र जानता है ना प्रार्थना ना स्तुति और वहाँ छोटी काशी में विद्वानों का जमघट...इसकी बात शिव क्यों सुनेंगे?"

" अरी! मृत्युंजय शिव अघोर उन सभी को मूक आमंत्रण देते हैं,

-- जिन्होंने कभी किसी तत्व से प्रेम किया है

-- जो, प्रेम की तलाश में भटकते रहे हैं

-- जिनके, स्वरों की प्रतिध्वनियाँ चट्टानों से टकराकर लौट आई हैं,

तुझे जो आता है वही बोल देना शिव प्रसन्न होंगे।"

बाबा चल पड़े..

छोटे ब्राह्मण पुत्र कुछ समय पश्चात दुग्धेश्वर शिव के दरबार में पहुंचे। स्तुति शुरू की----

"अ आ इ ई उ ऊ ए ऐ ओ औ अं अः ऋ ॠ ऌ ॡ
क ख ग घ ङ
च छ ज झ ञ
ट ठ ड ढ ण (ड़, ढ़)
त थ द ध न
प फ ब भ म
य र ल व
श ष स ह
क्ष त्र ज्ञ"

किसी ने मजाक उड़ाया किसी ने मखौल कोई हंसते गिरा.. किसी ने दया दिखाई और तभी चमत्कार हुआ। साक्षात मृत्युंजय महाकाल ने बच्चे को अपने अंक में भर लिया।

यह दिव्य दर्शन मुख्य पुजारी माधवेन्द्र सरस्वती जी को भी उपलब्ध हुआ।

रुद्ध कंठ से सरस्वती जी एक प्रश्न पूछने से स्वयं को न रोक पाए...
"प्रभु वर्षों से रुद्राष्टकम् लिंगाष्टकम् शिवमहिम्नस्तोत्रम तांडवस्तोत्रम रुद्र सूक्तम् पुरुष सूक्तम् की आवृत्तियां करते रहे, यह अहैतुकी कृपा नहीं हुई और हिंदी वर्णमाला पर प्रकट हो गए?"

आकाशवाणी हुई...
"सरस्वती यह उसका सर्वस्व था जो उसने मुझे अर्पित कर दिया।"

माधवेन्द्र सरस्वती अवाक। सामुद्रिक का अद्भुत विद्वान। बालक के पिछले तीन जन्मों का हिसाब लगाने लगे।

अहो! देदीप्यमान साधक। पूर्वजन्मों में त्रिक दर्शन का अभ्यासी रहा।

अहा शैवी माया!

||तत्परं ब्रह्म यत्परं ब्रह्म स एकः य एकः स रुद्रः यो रुद्रः स ईशानः य ईशानः स भगवान् महेश्वरः||





ऋषिवर का चिंतन है कि —''जीवन को सुख रूप से संचालित करने के लिए मनुष्य के पास शांति के साथ आध्यात्मिक शक्ति होनी चाहिए, आ...
06/07/2024

ऋषिवर का चिंतन है कि —
''जीवन को सुख रूप से संचालित करने के लिए मनुष्य के पास शांति के साथ आध्यात्मिक शक्ति होनी चाहिए, आत्मज्ञान होना चाहिए। जीवन में यदि दु:खों का निवारण करना है, तो शांति धारण करना कठिन है। शान्ति का प्रवाह आलस्य, अकर्मण्यता नहीं, बल्कि अन्तःकरण में पवित्रता धारण करना है, जिससे अन्तःमन सभी झंझावतों से दूर हो सके और जब अन्तःमन शान्त होगा, तब सतोगुणी कोशिकायें जाग्रत् होगा। इस शरीर में असंख्य कोशिकाएं भरी हुई हैं और हर कोशिका में अपार शक्ति निहित है। आत्मा:करण की पवित्रता के लिए सर्वप्रथम आपको अपनी अन्तर्दृष्टि हो चुकी होगी, 'ईष्र्या-द्वेष, अहंकार, दूसरों की निंदा करने की प्रवृत्ति, काम, क्रोध, लोभ' को दूर करना होगा।

हमारे शरीर के अन्दर ही रक्षात्मक प्रणाली छिपी हुई है, जो असाध्य से असाध्य परिस्थितियों को भी दूर करने में सक्षम है। जब हम मन को एकाग्र करके ध्यानावस्थित मुद्रा में रखते हैं, तो शरीर के अन्दर छिपी हुई रक्षात्मक प्रणाली सक्रिय हो जाती है। इतना ही नहीं, सतोगुणी कोशिकाओं चैतन्य से भविष्य की घटनाओं के बारे में भी संकेत देने लगते हैं, जिनसे आप बचाव कर सकते हैं। यहाँ तक कि मृत्यु को भी अपनी साधना के बल पर टाला जा सकता है।''

सद्गुरुदेव जी महाराज ने हम सभी के कल्याण के लिए; दु:ख, संतरास से मुक्ति के लिए ही पंचज्योति शक्तितीर्थ सिद्धाश्रम सहित हर उस स्थान पर अपनी चेतनातरंगेंप्रवाह कर रखे हैं, जहाँ सत्यधर्म का प्रवाह है, जहाँ नित्यप्रति माता भगवती आदिशक्ति जगत् जननी जगदम्बा की स्तुति होती है। अत: मन और हृदय को सम्पूर्ण रूप से निर्मल करके अपने-अपने घरों में श्री दुर्गाचालीसा का पाठ करें। माथे पर कुंकुम का तिलक, घरों में शक्तिध्वज, गले में रक्षाकवच धारण करे, शांतिप्रद जीवन का यही मूल मंत्र है। जिस प्रकार प्रत्येक कार्य के लिए समय नियत होता है, ठीक उसी प्रकार प्रात: नित्यक्रिया से निवृत्त होने के पश्चात् कुछ समय इष्ट और सद्गुरु की पूजा-आराधना, ध्यान, साधना के लिए देना चाहिए, जिससे जीवन स्वच्छ और रमणीक बन जाए। गुरुवरश्री ने सदैव अपने चिंतन में हमें कुछ न कुछ दिया है। गुरुवरश्री ने बताया है कि सूर्योदय से पहले अपनी दोनों गर्मियों को रगड़कर चेहरे और शरीर के अन्य अंगों का स्पर्श करें, क्योंकि सूर्योदय के समय शरीर की ऊर्जा गर्मियों में एकत्रित होती है। उक्त विधि शरीर में पूर्णतः चैतन्यता लाती है। उक्त विधि के बाद मन में इस प्रकार की दिनचर्या निर्धारित करें कि समस्त कार्यो में मूल का समावेश हो और उसी के अनुरूप पूर्ण दिन व्यतीत करें, ताकि किसी प्रकार के भटकाव की स्थिति निर्मित न हो सके। । तद्नुसार ही रात्रि में सोने से पूर्व, शयन में एकाग्रचित्त पूरे दिन के कार्य का प्रकटीकरण करें, आत्मचिंतन करें। यदि भूल से भी कहीं कोई त्रुटि रह गई हो, $गलती हो गई हो तो अगले दिन ही उस त्रुटि के कारण, उस भूल के कारण प्रायश्चित करें, जिससे दूसरे दिन के अन्य सभी कार्य श्रेष्ठता के साथ उपलब्ध हो सकें।




आज से छह साल पहले जब पहली बार कैंची धाम गया था, तब मंदिर में मेरे अलावा सिर्फ तीन लोग थे। इतनी शांति और इतनी ऊर्जा महसूस...
06/07/2024

आज से छह साल पहले जब पहली बार कैंची धाम गया था, तब मंदिर में मेरे अलावा सिर्फ तीन लोग थे। इतनी शांति और इतनी ऊर्जा महसूस हुई कि सुबह गए तो शाम को ही लौटे।

इन छह सालों में आज हालत ऐसी हो चुकी है कि मंदिर में बैठना तो दूर की बात है, आप कैंची धाम में पैर भी नहीं रख सकते हैं। क्योंकि इंस्टाग्राम पर दर्जनों वीडियोज ये बता रहें हैं कि भाइयो- बहनों कैंची धाम जाइये, एप्पल और फेसबुक वहीं बने हैं..! आप भी बन जाएंगे।

हालात ये है कि हनीमून मनाने नैनीताल गए लोग भी कैंची धाम चले जा रहें हैं, "बाबू आइफोन लेकर क्या करोगी, जहां आईफोन बना है न, डायरेक्ट वहीं लेकर चलता हूँ।"

खैर...! पिछले साल ठीक यही दिन थे।

नीम करौरी बाबा के एक भक्त हनुमान दास जी ने मुझे फोन करके कहा कि अतुल जी कैंची धाम के हालात खराब हो चुके हैं, आप जैसे लोगों को कुछ लिखना चाहिए।

जिस कोसी के किनारे को बाबा ने कभी साधना स्थली बनाई होगी, वहाँ बैठकर आज लोग बियर पी रहें हैं और नदी में उतरकर अश्लील हरकते करते हुए फ़ोटो खींचवा रहें हैं।

मेरे जैसे लोग, जो कई सालों से इस आश्रम को देख रहें हैं, उनसे ये सब देखा नही जाता। महाराज जी अगर आज जिंदा होते तो कैंची धाम बन्द करके कहीं और चल गए होते।"

मैंने कहा, जाने दीजिए भइया, भारत में धार्मिक पर्यटन अपने सबसे बड़े उफान पर है। पहाड़ की लोकल इकोनॉमी बूस्ट हो रही है। लोकल लोगो के पास पैसे आ रहें हैं, पलायन रुकेगा, रोजगार मिलेगा।

लेकिन हनुमान दास जी का भक्त मन, मेरे इन तमाम बाजारवादी तर्कों से तुष्ट न हुआ। वो कहते रहे कि भैया ये लोग भक्त नहीं हैं। ये चमत्कार की आस में आए हुए लोग हैं। इनको ध्यान और पूजा से मतलब नही है। मंदिर से बाहर निकलते ही ये भक्त नही रहते, उद्दंड हो जातें हैं।

लोगों का यहां आना बुरी बात नही है, बुरी बात है यहां की शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा और इसकी पहचान को नष्ट करना। आप लिखिए कि लोग आएं लेकिन इसकी ऊर्जा को नष्ट न करें। ये हल्ला-गुल्ला करने की जगह नही है, ये आंख बंद करके राम-राम करने और जय हनुमान जी करने की जगह है।

मैनें कहा, कैसे लिखूं, भारत अभी धार्मिक रूप से इतना साक्षर नही हुआ कि ये सब बातें वो समझ पाए।

मेरे तो कुछ जानने वाले लोग अपना-अपना काम-धाम छोड़कर पर्ची निकलवाने बाबा बागेश्वर धाम जा चुके हैं।

अब बागेश्वर धाम जाकर उनकी अर्जी तो नही लगी, न ही पर्ची निकली। लेकिन उसी बागेश्वरधाम में आज कई लोग पर्ची निकालने वाले बाबा बन चुके हैं, क्योंकि धीरेंद्र बाबा के पास चार्टर प्लेन से नीचे उतरने का समय नही है।

अब धीरेंद्र बाबा को सनातन धर्म के रक्षक जैसी उपाधियों से नवाजने वाले लोग तीर कमान लेकर मुझ पर हमला कर सकतें हैं। वो करें...!

लेकिन कहना गलत न होगा कि उनके यहां जो भी इकट्ठा हुई भीड़ है..उसे रामकथा और भागवद कथा नहीं सुनना है, उसे अर्जी लगवानी है, बिगड़ा काम बनवाना है।

ये बिगड़ा काम बनाने वाली वही भीड़ है जो चमत्कारों के सहारे जीवन गुजार रही है। वो बागेश्वरधाम नही जाएगी तो किसी चर्च में चली जाएगी।

किसी राम रहीम, आशाराम, किसी भोले बाबा के आश्रमो में रहीम आरती और आशुमल चालीसा गाएगी।

लेकिन कहीं न कहीं जरूर जाएगी....

इस भीड़ को आर्थिक, मानसिक, शारीरिक समस्या से तुरंत मुक्ति चहिये। एक झटके में छुटकारा चाहिए।

तभी तो इस भीड़ को सैंडल पहनकर भोले बाबा अपनी पैरों की धूल बेच देता है। कोई बाबा अपने खेतो में बैगन और मूली उगाकर एक-एक मूली लाखो में खरीदने पर बाध्य कर देता है। ये भीड़ मरती है, लुटती, पीटती है लेकिन बाबा के पास जाती जरूर है।

वो देखती है कि फलाना नेता भी बाबा के चरण में पड़े हुए हैं। फलाना आईएएस अफसर तो चरणामृत पीता है तो हम क्या चीज हैं।

लेकिन उसे समझ नहीं आता कि नेता तो इनके यहां वोट के लिए जाएंगे। अधिकारी जुगाड़ के लिए जाएंगे। बागेश्वर धाम की जरूरत भाजपा और कांग्रेस को होगी , भोले बाबा की जरूरत मायावती और अखिलेश यादव को रहेगी।

लेकिन आपको क्या जरूरत है भाई साहब ?

आपको जरूरत है, मानसिक इलाज़ की।

पूजा पाठ करना है तो सबसे पहले गीता उठाइये... और पढ़िए कि कर्म से बड़ी कोई पूजा नही है, गीता से बड़ा कोई गुरु नही है, न ही कृष्ण से बड़ा कोई उपदेशक है।



इन २० इस्लामी शब्दों का प्रयोग हिंदू न करे१. शहीद (इस्लामी युद्ध में मरने वाला ही शहीद होता है)उचित शब्द - हुतात्मा, वीर...
28/06/2024

इन २० इस्लामी शब्दों का प्रयोग हिंदू न करे

१. शहीद (इस्लामी युद्ध में मरने वाला ही शहीद होता है)
उचित शब्द - हुतात्मा, वीर, वीरगत, बलिदानी, अमर

२. औरत (यह शब्द स्त्री के लिए गाली से निकृष्ट है। सभ्य समाज में इस पर प्रतिबंध होना चाहिए।
उचित - स्त्री, महिला, नारी, देवी, माँ (बहुत भाषाओं में बेटी के लिए भी माँ का प्रयोग होता है)

३. हिसाब (वह प्रक्रिया जिसके द्वारा यह निर्णय किया जाएगा कि कौन जन्नत जाएगा और कौन जहन्नुम)
उचित - गणना, गिनती, अंकण, लेखा, लेखा जोखा, कलना (इसी से Calculation बना है)

४. आखिर (उनके लिए जो कयामत और संसार के अंत को मानते हैं)
उचित - अंतिम, अंत में

५. सही (वह जो इस्लाम के मोमिनों द्वारा मान्य हो)
उचित - उचित, सत्य, वास्तविक, सच्चा, सच, सच्ची

६. कुदरत (जो अल्लाह ने जादू से बनाया)
उचित - प्रकृति

७, ८. नसीब, किस्मत - जो अल्लाह ने पहले ही लिख दिया लोेहे महफूज में
उचित - भाग्य (जो कर्म से ही बनता है), दैव, संयाग, विधि का विधान

९. कानून - जो नियम अल्लाह ने बना दिए
उचित - नियम, विधि, विधान, दण्डनीति

१०. वक्त (जो समाप्त हो जाएगा कयामत के बाद)
उचित - समय, काल (जिसका न आदि है न अंत)

११. किताब - जो अल्लाह ने आसमाँ से डाउनलोड कर दिया
उचित - पुस्तक, ग्रंथ

१२. जरूरी - जो जन्नत पाने के लिए आवश्यक हो
उचित - आवश्यक, अपरिहार्य, महत्त्वपूर्ण, प्रधान

१३. ईमानदार (जो अल्लाह पर ईमान लाए)
उचित - सत्यनिष्ठ, सत्यवादी, सात्त्विक, सच्चा, निष्ठावान, साधु, धार्मिक, कर्त्तव्यपरायण, कर्तव्यनिष्ठ

१४. रूह (पता नहीं क्या है)
उचित - आत्मा
(भूत का अर्थ अतीत है। ये डराने वाली भटकती आत्मा वैदिक धर्म का भाग नहीं है)

१५. इंसान
उचित - मनुष्य, मानव, व्यक्ति

१६. चीज
उचित - वस्तु, पदार्थ (अधिकांश में वाक्य से चीज हटा दो। अर्थ भी वही रहेगा और वाक्य और सभ्य बन जाएगा।
उदाहरण - "वह क्या चीज है" से "वह क्या है" अधिक सभ्य है)

१७. मेहनत - परिश्रम, श्रम, पुरुषार्थ

१८. दिल - मन, ह्रदय

१९, २०. मुहब्बत/ इश्क - प्रेम, स्नेह, प्रीति, प्यार

बोनस:
२१. बॉलिवुड (लाहौर से निकला वह कचरा-व्यापार जिसका आधार व उद्देश्य है - हिन्दू का अपमान, संस्कृत का अपमान, पाकिस्तान की राजभाषा का प्रचार, जिस्म की गर्मी, बाल व स्त्री शोषण का विस्तार, वेश्यावृत्ति आदि)
उचित - उर्दूवुड, दाउदवुड, वेश्यावुड, कचरावुड, Pedowood etc


#भाषाशुद्धि

 #भारतीय संस्कृति की पुन: स्थापना एवं मानवीय मूल्यों की रक्षा के लिए निरंतर प्रयासरत ऋषिवर सद्गुरुदेव परमहंस योगीराज श्र...
28/06/2024

#भारतीय संस्कृति की पुन: स्थापना एवं मानवीय मूल्यों की रक्षा के लिए निरंतर प्रयासरत ऋषिवर सद्गुरुदेव परमहंस योगीराज श्री शक्तिपुत्र जी महाराज का चिंतन है कि "भौतिकतावाद की आंधी में आत्मिक आनंद की अनुभूति समाप्त हो रही है और समाज के लोगों के पास इतना समय नहीं है कि यह तूफान को स्थिर करके अपनी मूल संस्कृति के लिए कुछ समय निकालना आवश्यक है। ध्यान, योग और 'माँ' की स्तुति के बल पर सोई हुई अन्तःचेतना को जागृत करके अपनी अस्मिता को वापस लाना होगा, अन्यथा भरपूर प्रयास कर लें, किनारा मिल सम्भव नहीं। वह मानव, मानव नहीं, जो अपनी मूल संस्कृति को, माता आदिशक्ति जगत् जननी जगदम्बा (मूल प्रकृतिसत्ता) को भूल जाए। विकास के अन्धानुकरण में हम अपनी अस्मिता, आत्मनिर्भरता और आत्माभिव्यक्ति को भूलते जा रहे हैं, मानव मात्र की परिभाषा भूल चुके हैं और यह विशाल परक अमूल्य जीवन निजी स्वार्थ तक सीमित रह गया है।

प्रकृतिसत्ता ने हमारे शरीर में आत्मारूपी अंश को स्थापित किया है, साधना प्रक्रियाओं के बल पर सतोगुणी कोशिकाओं को जागृत करने की आवश्यकता है। इस अन्तर्निहित शक्ति के बल पर आप आधुनिकता से उभरकर, आधुनिक विज्ञान के ऐसे आविष्कारकों को जो विकास कम और विनाश परक अधिक हैं, वह कहीं अधिक विशिष्ट रचनाएँ करके समाज के लिए सही विकास का मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं। गुलामी की मानसिकता से युक्त जीवन जीने वाले समाज के अधिसंख्यक वर्ग को आत्मसम्मानयुक्त, आत्मनिर्भरता का मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं।''

सद्गुरुदेव भगवान के चिन्तन मधुर हैं, जो आत्मज्ञान करते हैं, उनका जीवन धन्य होजाता है। जीवन के विविध रंग-रूप हैं और यदि गहराई से देखा जाए, तो उसमें अद्भुत आनंद छिपा हुआ है। जरूरत है, तो केवल भौतिक जगत की भूल-भुलैया से निकलकर कुछ समय आध्यात्मिक जगत में प्रवेश करने की। फिर देखिए कि किस तरह काम, क्रोध, लोभ, मोह, वशीकरण आध्यात्मिक आनन्दानुभूति की प्राप्ति होती है।








21/06/2024
20/06/2024

मेरे लिए दुनिया का कोई भी कार्य असंभव नहीं-योगीराज श्री शक्तिपुत्र जी महाराज




 #ब्रह्मचर्य भारतीय धार्मिक परंपरा में  वर्णित अष्टांग योग का एक मत्वपूर्ण अंग है।यह केवल तपस्वी और साधको के लिए ही नहीं...
20/06/2024

#ब्रह्मचर्य भारतीय धार्मिक परंपरा में वर्णित अष्टांग योग का एक मत्वपूर्ण अंग है।
यह केवल तपस्वी और साधको के लिए ही नहीं है बल्कि गृहस्थ जीवन में रहकर भी इसका पालन किया जा सकता है।

हमारे ऋषि मुनि हजारों वर्ष पहले यह बता चुके हैं कि ब्रह्मचर्य पालन करने के कई लाभ हैं लेकिन आधुनिक विज्ञान भी अब इस तथ्य को स्वीकार चुका है।

ब्रम्हचर्य व्रत के पालन से शारीरिक बल,मानसिक स्थिरता,चेहरे पर तेज व बीमारियों से लड़ने की चमत्कारिक क्षमताओं के साथ ही स्वस्थ जीवन और लंबी आयु प्राप्त होती है।

ब्रह्मचर्य का पालन करनेवाले लोग मानसिक रूप से बहुत मजबूत होते हैं। उन्हें जीवन के उतार-चढ़ाव दिमागी रूप से तोड़ नहीं पाते हैं। इनका मन बलवान होता है साथ ही निराशा व अवसाद जैसे रोग भी इन्हें जल्दी प्रभावित नहीं कर पाते।

इसलिए शारीरिक-मानसिक और आध्यात्मिक रूप से सुदृढ़ होने के लिए ऋषि मुनियों के इस प्राचीन नियम का पालन करना मानव के लिए अत्यंत लाभकारी है।





दिन विशेष:  #वटसावित्री आज जयेष्ठ मास की अमावस्या यानि 6 जून 2024 है, आज के दिन ही सती सावित्री के पतिव्रता धर्म से प्रस...
06/06/2024

दिन विशेष: #वटसावित्री
आज जयेष्ठ मास की अमावस्या यानि 6 जून 2024 है, आज के दिन ही सती सावित्री के पतिव्रता धर्म से प्रसन्न होकर यमराज ने उनके पति सत्यवान के प्राण लौटाये थे। जाने विस्तार से...
सनातन धर्म इतना सहिष्णु माना गया है कि वह प्रकृति तक से कृतज्ञता ज्ञापित करता है। सूर्य, चंद्र, वायु, जल, पृथ्वी जो भी कुछ देता है उसे देवता तुल्य माना गया है। इसी प्रकार #बरगद के वृक्ष को भी महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। भारत का राष्ट्रीय वृक्ष होने के साथ यह धार्मिक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। इस पेड़ के पत्ते, फल और छाल शारीरिक बिमारियों को दूर करने के काम आते हैं।

वट वृक्ष का धार्मिक महत्व
इस वृक्ष को वट के नाम से भी जाना जाता है। इसकी जड़ें जमीन में दूर-दूर तक फैल जाती हैं। मान्यता है कि इसकी छाल में विष्णु, जड़ों में ब्रह्मा और शाखाओं में शिव विराजते हैं। जैन धर्म में मान्यता है कि तीर्थंकर ऋषभदेव ने अक्षय वट के नीचे तपस्या की थी। यह स्थान प्रयाग में ऋषभदेव तपस्थली के नामसे जा ना जाता है।

उपचार में है मददगार

पेड़ की पत्तियां एक घंटे में 5 मिली लीटर ऑक्सीजन देती हैं। यह वृक्ष दिन में 20 घंटे से ज्यादा समय तक ऑक्सीजन देता है। आयुर्वेद के अनुसार इसके पत्तों से निकलने वाले दूध को चोट, मोच और सूजन पर दिन में दो से तीन बार मालिश करने से काफी आराम मिलता है। यदि कोई खुली चोट है तो बरगद के पेड़ के दूध में आप हल्दी मिलाकर चोट वाली जगह बांध लें, घाव जल्द भर जाएगा, इसके साथ ही महिलाओं में होने वाले श्वेत व रक्तप्रदर में अत्यधिक लाभदायक है।




Address

Bhopal

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Yugparivartak-युगपरिवर्तक posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Share