29/08/2016
" नुण प्रणाम "
सेव में,
श्री मान प्रधान महोदय जी,
अ.भा.वि.महासभा,
मुकाम, नोखा (बीकानेर)
सादर नम्र निवेदन हैं कि आज वर्तमान समय में पुरे विश्व में विशनोई धर्म की संस्था अखिल भारतिय विशनोई महासभा, मुकाम हैं ! जिसका गंठन हर आम बिशनोई के द्वारा हुआ है ओर हर विशनोई को इस संस्था के निर्णय पर पुरा भरोसा रहता हैं व पुर्ण रूप से पालना करते हैं !
अ.भा.वि.महासभा आज हर क्षेत्र मे विशनोई धर्म का नेत्रृत्व करती है, जिसके नेत्रृत्व से हर विशनोई संतुष्ट हैं ! क्योकिं सब को पता है कि संगठन में ही शक्ती हैं !
इन्ही आशाओं को ध्यान में रखते हुए हम आज कुछ बिन्दूऐं लिख रहें है जो हम आशा करते हैं कि अ.भा.वि.महासभा के होने वाले आगामी अधिवेशन में इस बिंदुओं पर विचार करते हुऐ सत्यता ठहराऐं ! बिंदू निचे लिखे गऐ निम्नप्रकार से हैं :-
(१). पश्चिम राजस्थान का जैसलमेर जिला, पोकरण तहसिल के ग्राम रुणिचा ( रामदेवरा ) हैं ! जो विक्रम सम्वत् 1409 माघ महीने की शुक्ल पंचमी, को बाबा रामदेव जी नामक किसी लोक देवता के जन्म स्थान पर बसा हुआ हैं !
यनि कि बाबा रामदेव जी का जन्म 1409 व समाधी विक्रम सम्वत् 1442 को भाद्रपद शुक्ल ग्यारह माना गया हैं ! यह सब तथ्य बाबा रामदेव जी की पुस्तक " श्री रामदेव बाबा की सम्पुर्ण गाथा " नामक पुस्तक के आधार पर से लिऐ गऐ हैं !
इस पुस्तक में कुल २३ ( तेबीस ) अध्याय हैं ! जिसका १२ वां अध्याय " श्री रामदेव तालाब की स्थापना " नामक आता हैं ! इस अध्याय में हमारे विशनोई धर्म के गुरू श्री जम्भेशवर जी को बाबा रामदेव का मोसेरा भाई बतलाया गया हैं, वहीं हमारे गुरूदेव श्री जाम्भोजी की बाबा रामदेव से तुलना करते हुए बहुत निचे दिखाया गया हैं , ओर श्री गुरू जाम्भोजी के प्रती घमण्डी जेसे शब्दों का प्रयोग किया गया हैं ! जो सरासर गलत, निराधार व मनघड़त हैं !
क्योकिं हमारे श्रीगुरू देव जी का पिम्पासर मे प्रगट होना, हमारे धर्म ग्रंथो के अनुसार विक्रम सम्वत 1508 के साल भाद्रपद की जन्माष्ठमी का दिन हैं ! जो "राजस्थान का इतिहास" व "भरत का इतिहास" नामक इतिहासिक पुस्तकों मे भी वि.स.1508 का साल बताया गया है जो सत् प्रतिशत सत्य है !
बाबा रामदेव की पुस्तक में हमारे गुरू श्री जम्भेशवर जी भगवान का असहनिय अपमान किया गया हैं !
वहीं कुछ ही साल