Jat Sunil Rao

राज्य प्रशासनिक सेवाओं में भागीदारी– 1आजकल हरयाणा विधानसभा में पर्ची खर्ची की चर्चा जोरो पर है। मैं पिछड़ा आयोग की रिपोर...
26/02/2026

राज्य प्रशासनिक सेवाओं में भागीदारी– 1

आजकल हरयाणा विधानसभा में पर्ची खर्ची की चर्चा जोरो पर है। मैं पिछड़ा आयोग की रिपोर्ट में जाति जनसंख्या के प्रतिशत के हिसाब से आंकड़े देख रहा था कि किस जाति के कितने प्रतिशत अधिकारी हैं। इस रिपोर्ट में सन् 2012 तक के डाटा हैं। और किसी भी राज्य को चलाने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका अहम होती है, जैसा कि हम अक्सर पढ़ते सुनते भी हैं कि अफसरशाही हावी है। तो, मैने सोचा कि रोजाना अलग अलग महकमों के अधिकारियों के डाटा पोस्ट करूं। और फिर खुद तय करें कि पूर्व की सरकारों में पर्ची खर्ची (जैसा कि बीजेपी आरोप लगाती आई है) का सबसे ज्यादा लाभ किसने उठाया? और ताज्जुब है कि उन्हीं जाति के लोगों के दिमाग में ये बैठाया गया कि जाटों ने सबसे ज्यादा लाभ लिया। डाटा देखने से पहले जान लें कि सरकारी डाटा अनुसार प्रदेश में जाटों की आबादी 25.27% है और सिक्ख जाटों की आबादी 4% है। जाटों के बाद दूसरी बड़ी आबादी चमार जाति की है, जोकि दस प्रतिशत हैं। बाकी किसी भी जाति की आबादी दस प्रतिशत भी नहीं है, और उनकी आबादी अनुपात अनुसार प्रशासनिक सेवाओं में भागीदारी पर गौर करें।

पहली पोस्ट सुप्रिटेंडेंट इंजीनियर और उससे ऊपर के पदों के डाटा की – Rakesh Sangwan copied Sangwan

26/02/2026
Punjab’s loss, पंजाब ने एक महान पंजाबी खो दिया! 9 जनवरी, 1945 को सुबह 11:15 बजे गार्डन टाउन निवास पर चौधरी छोटूराम का हा...
09/01/2026

Punjab’s loss, पंजाब ने एक महान पंजाबी खो दिया!

9 जनवरी, 1945 को सुबह 11:15 बजे गार्डन टाउन निवास पर चौधरी छोटूराम का हार्ट अटैक से निधन हो गया। शाम 4 बजे उनके शव को लाहौर से ऐम्ब्युलन्स बस से रोहतक ले जाया गया। अगले दिन 10 जनवरी को सुबह आठ बजे पंजाब के प्रीमियर की ओर से भेंट किए हुए हल और तलवार के निशान वाले यूनियनिस्ट पार्टी के झंडे और रोहतक कांग्रेस की तरफ़ से भेंट किए हुए राष्ट्रीय झंडे से लिपटा हुआ उनका शरीर जुलूस के साथ जाट कॉलेज, रोहतक में पहुँचाया गया, दोपहर दो बजे दाह संस्कार किया गया। उनके दाग़ पर हज़ारों की संख्या में किसान इकट्ठा हुए, सबकी ज़ुबान पर एक ही बात थी, म्हारा राजा मर गया।

लाहौर में चौधरी छोटूराम की मृत्यु की ख़बर लगते ही सचिवालय, हाई कोर्ट, ज़िला कोर्ट की एक दिन के लिए छुट्टी कर दी गई। पूरे पंजाब प्रांत में शोक की लहर दौड़ गई।
सरदार कपूर सिंह, सचिव कांग्रेस विधानसभा पार्टी ने उन्हें श्रधांजलि देते हुए कहा - सर छोटूराम के निधन से ज़मींदारों ने अपना परम उत्तम मित्र खो दिया। उन्होंने ज़मींदारों को उनके महत्व का अनुभव कराया।
मौलाना मोहम्मद यासीन, अध्यक्ष, पंजाब कांग्रेस कार्यकर्ता सम्मेलन ने कहा - आगे पढ़ने के लिए अनेकों नवयुवकों की सर छोटूराम ने सहायता की और विधवाओं के हित के लिए आर्थिक सहायता देकर मूल्यवान सेवा की।
नवाब मुज़फ़्फ़र खान, सदस्य, लोकसेवा आयोग, पंजाब तथा पच्छिमोत्तर सीमा प्रांत - सर छोटूराम के निधन से पंजाब ने एक महान पंजाबी खो दिया। सर छोटूराम दृढ़ विश्वास के व्यक्ति थे। वह ग़रीबों व दलितों की सेवा के आदर्श के ईलावा किसी से प्यार न करते थे।
सी०राजगोपालचार्या - सर छोटूराम के निधन से हमारे बीच से एक गतिशील व्यक्ति चला गया। सर छोटूराम के उद्देश्य ही बड़े नहीं थे बल्कि वे उन्हें प्राप्त करना भी जानते थे। उनके निधन से पंजाब बहुत ग़रीब हो गया।

सर छोटूराम की याद में जाट कॉलेज, रोहतक में संगमरमर के पत्थर से उनकी समाधि बनाई गई है। जिसके लिए उस समय (जनवरी, 1945 में) 11,500 रु इकट्ठा किए गए थे।

अपने अंतिम दिनों में सर छोटूराम पंजाब में बढ़ती संप्रदायिकता को रोकने के लिए देहात में ज़मींदारा लीग को मज़बूत करने के लिए दिन में तीन तीन सभाए करते। कट्टरपंथियों के प्रॉपगैंडा को रोकने के लिए उन्होंने एक दैनिक समाचार पत्र शुरू करने की योजना बनाई थी जिसके लिए उन्होंने धन जुटाना शुरू कर दिया था और विभाजनकारी साम्प्रदायिक ताक़तों को रोकने की अपनी मुहीम में वो कामयाब भी हो रहे थे पर अफ़सोस कि अत्यधिक व्यस्त रहने के कारण उनका स्वास्थ्य बिगड़ता चला गया और आख़िर नो जनवरी को वह इस दुनिया से अलविदा हो गए। अख़बारों ने लिखा था कि सर छोटूराम की मृत्यु से विभाजनकारी ताक़तों को नया जीवन मिला है।

( Punjab’s loss,
The Times of India, 11 January, 1945) #अरावली

10 मार्च 1944, पंजाब असेंबली राजस्व मंत्री (माननीय चौधरी सर छोटू राम) (उर्दू): महोदय, मैं एक संक्षिप्त भाषण देना चाहता ह...
09/01/2026

10 मार्च 1944, पंजाब असेंबली

राजस्व मंत्री (माननीय चौधरी सर छोटू राम) (उर्दू): महोदय, मैं एक संक्षिप्त भाषण देना चाहता हूँ जिसमें मैं कुछ माननीय सदस्यों द्वारा उठाई गई आपत्तियों पर विचार करना चाहता हूँ। सबसे पहले मैं अपने द्वारा की गई टिप्पणियों पर विचार करूँगा।

माननीय मित्र सरदार गोपाल सिंह खालसा ने कहा कि स्वर्गीय सर सिकंदर हयात खान की मृत्यु के बाद अनुसूचित जातियों के लाभ के लिए कुछ भी ठोस नहीं किया गया। मैं स्वर्गीय सर सिकंदर हयात खान के शासनकाल के दौरान और उसके बाद पंजाब सरकार ने इन लोगों के लिए क्या किया है, इसका विस्तृत विवरण देने का प्रस्ताव नहीं रखता। मुझे खुशी है कि मेरे माननीय मित्र ने स्वीकार किया कि स्वर्गीय सर सिकंदर के शासनकाल के दौरान अनुसूचित जातियों के लिए कुछ ठोस किया गया था। यदि उनका ध्यान एक पुस्तिका की ओर नहीं गया है, जिसकी एक प्रति मेरे हाथ में है, तो मैं उसे उन्हें भेंट करना चाहूंगा। इस पुस्तिका को पढ़ने पर उन्हें पता चलेगा कि 1940 से पहले उनके वर्ग के लिए कितना कुछ किया गया था। तब से लेकर अब तक उनके बीच लगभग 3,000 एकड़ जमीन वितरित की जा चुकी है। इसके अलावा, 1,000 एकड़ जमीन आपराधिक जनजातियों के सदस्यों के बीच वितरित की गई, जिनमें से पचहत्तर प्रतिशत उनके वर्ग के लोग हैं। मेरे माननीय मित्र ने शिकायत की है कि अनुसूचित जातियों के किसी भी सदस्य को एग्जेक्युटिव शपंक्ति में नियुक्त नहीं किया गया है। क्या मैं उन्हें यह बताने की स्वतंत्रता ले सकता हूं कि पिछले दो-तीन वर्षों से कार्यकारी पदों पर किसी हिंदू, मुसलमान, सिख या ईसाई की भर्ती नहीं हुई है? ये सभी पद उन लोगों के लिए आरक्षित किए जा रहे हैं जो सेना में भर्ती हो चुके हैं। अब मैं बताऊंगा कि सरकार ने अतीत में अनुसूचित जातियों के लिए क्या किया है। यूनियनिस्ट सरकार के निर्णय के अनुसार उप-न्यायाधीश के पदों में से एक पद अनुसूचित जातियों में से किसी एक सज्जन की नियुक्ति से भरा गया था। यह पद उनके लिए आरक्षित था। सिंचाई विभाग में मुंशी और जिलेदार के पदों के लिए अनुसूचित जातियों के उम्मीदवारों के लिए रिक्तियां आरक्षित थीं। ऐसा ही एक उम्मीदवार श्री इस्माइल परवेज़, उप रजिस्ट्रार और सहकारी समितियों के कार्यालय के माध्यम से मिला। उन्हें जिलेदार के रूप में नियुक्त किया गया। कुछ सप्ताह पहले ही उसी पद के लिए एक और का चयन किया गया था। अनुसूचित जातियों के एक सदस्य को उम्र की शर्त माफ करके मुंशी नियुक्त किया गया। गुड़गांव से एक को नायब तहसीलदार, रोहतक से एक को आबकारी उपनिरीक्षक तथा अंबाला से एक को गिरदावर नियुक्त किया गया।

(PLAD, वॉल्यूम। XXII, 10 मार्च, 1944, पृ. 488-494)

इस स्पीच को सिविल एंड मिलिट्री गजट अखबार ने दिनांक 11 मार्च, 1944, शनिवार, पृष्ठ 4 पर प्रकाशित किया था। जिसकी कटिंग फोटो में देख सकते हैं। #अरावली Sarvesh Phougat

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