In search of true GOD KABIR

In search of true GOD KABIR साचा शब्द कबीर का, सुन सुन लागे आग l
अज्ञानी सौ जल जल मरै, ज्ञानी जाय जाग ll

29/06/2024

🔹पूर्ण गुरु से होगा मोक्ष
कबीर साहेब जी कहते हैं;
कबीर, गुरु बिन माला फेरते, गुरु बिन देते दान।
गुरु बिन दोनों निष्फल हैं, चाहे पूछो वेद पुराण।।
वर्तमान में पूर्ण गुरु संत रामपाल जी महाराज जी ही हैं।
#पूर्ण_गुरु_से_होगा_मोक्ष



28/06/2024

⚡️आज से लगभग 600 साल पहले, कबीर परमात्मा का नकली धर्म गुरु विरोध करते थे। ठीक उसी प्रकार, संत रामपाल जी महाराज के द्वारा दिए जा रहे सत्यज्ञान का विरोध भी वर्तमान समय के नकली धर्म गुरु कर रहे हैं। क्योंकि कबीर जी ही संत रामपाल जी महाराज के रूप में आए हुए हैं।
#12वें_पंथ_हम_ही_चल_आवें

#आध्यात्मिक_प्रदर्शनी


26/06/2024

🎈कबीर साहेब प्रकट दिवस जो हर साल ज्येष्ठ महीने की पूर्णिमा को मनाया जाता है। इस बार भी 20 से 22 जून 2024 तक तीन दिवसीय अखंड पाठ और भंडारे का आयोजन किया गया जो पूर्ण रूप से सफल हुआ। इस भंडारे में लाखों श्रद्धालुओं ने कबीर परमात्मा के बारे में जाना और जय जय कार की।
ुआ_विशाल_भंडारा









25/06/2024

💰सच होगा सबका सपना,
दहेजमुक्त होगा भारत अपना।।
संत रामपाल जी महाराज एक ऐसे स्वच्छ समाज का निर्माण कर रहे हैं जिसमें शादी पर कोई आडंबर नहीं, कोई खर्चा नहीं तथा बेटी बोझ नहीं।
कबीर साहेब जी के प्रकट दिवस पर संत रामपाल जी महाराज के सानिध्य में सैंकड़ों दहेज मुक्त विवाह संपन्न हुए।
ेटी_बोझ_नहीं


#दहेज

24/06/2024

⛑️ कबीर साहेब जी के प्रकट दिवस पर संत रामपाल जी महाराज के भक्तों ने किया रक्तदान।











21/06/2024

कबीर परमेश्वर जी संवत् 1455 (सन् 1398) ज्येष्ठ मास की शुक्ल पूर्णमासी सोमवार को ब्रह्म मुहूर्त में काशी के लहरतारा तालाब में कमल के पुष्प पर बालक रूप में प्रकट हुए। निःसंतान नीरू-नीमा जुलाहे दम्पति को मिले।
ना मेरा जन्म न गर्भ बसेरा, बालक होय दिखलाया।
काशी नगर जल कमल पर डेरा, तहाँ जुलाहे ने पाया।। – कबीर सागर, अध्याय "अगम निगम बोध"
#परमात्मा_की_पहचान


18/06/2024

627 वें कबीर साहेब प्रकट दिवस के उपलक्ष्य पर 20-22 जून 2024 को सभी सतलोक आश्रमों में विशाल भंडारे का आयोजन किया जा रहा है जिसमें पूरा विश्व आमंत्रित है।



16/06/2024

🍃श्री कृष्ण जी की नगरी द्वारिका पूरी तरह समुद्र में डूब गई थी। श्री कृष्ण जी के पैर के तलुए में शिकारी ने धोखे से विषाक्त तीर मारा था, जिससे उनकी मृत्यु हो गयी थी। द्वारिका से बाहर गढ्ढा खोदकर वहां उनका अंतिम संस्कार किया। वहां वर्तमान में द्वारिकाधीश मंदिर बना है। वि. सं. 1505 ( सन् 1448 ) में परमेश्वर कबीर साहेब जी द्वारिका गए वहां समुद्र के किनारे जहां गोमती नदी सागर में आकर मिलती थी, उसके पास एक बालू रेत के टीले ( कोठा ) पर बैठकर श्रद्धालुओं को तत्वज्ञान सुनाते थे। सन् 1448 सें आज तक उस टीले को समुद्र की लहरों, ज्वारभाटे ने छुआ भी नहीं। यह कबीर कोठा द्वारिकाधीश के मंदिर के बगल में है।
#कबीरसाहेब_की_प्रमाणित_लीला

16/06/2024

अविनाशी कबीर साहेब जी की अद्भुत लीलाएं
अत्याचारी शेखतकी ने परमात्मा कबीर साहेब जी को न पहचान कर गर्म तेल के कड़ाहे में बैठाना चाहा।
परमात्मा स्वयं बैठ गए, इस तरह बैठे रहे जैसे ठंडे जल में बैठे हों। लोगों ने ये चमत्कार देखकर मालिक कबीर जी की जय जयकार की।
#अत्याचार_की_अति

#अत्याचार


16/06/2024

अविनाशी कबीर साहेब जी की अद्भुत लीलाएं
अत्याचारी शेखतकी ने परमात्मा कबीर साहेब जी को न पहचान कर गर्म तेल के कड़ाहे में बैठाना चाहा।
परमात्मा स्वयं बैठ गए, इस तरह बैठे रहे जैसे ठंडे जल में बैठे हों। लोगों ने ये चमत्कार देखकर मालिक कबीर जी की जय जयकार की।
#अत्याचार_की_अति






15/06/2024

💥कबीर परमात्मा जी द्वारा 18 लाख लोगों को भंडारा करवाना......
शेखतकी ने कबीर साहेब जी के नाम पर काशी में सभी को झूठी चिट्ठियां डाल दी थी और कबीर परमात्मा ने अपनी लीला के द्वारा काशी में 3 दिन तक विशाल भंडारे का आयोजन किया जिसमें 18 लाख लोगों ने भोजन किया था l
#अत्याचार_की_अति

#अत्याचार


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