Radha Swami Satsang Sabad Dinod

Radha Swami Satsang Sabad Dinod Satsang Video

आगामी सत्संग सूचना : परम संत हुजूर कंवर साहेब जी महाराज जी के पावन सानिध्य में आगामी जींद सत्संग।तिथि : 9 मार्च, 2025 (र...
04/03/2025

आगामी सत्संग सूचना :

परम संत हुजूर कंवर साहेब जी महाराज जी के पावन सानिध्य में आगामी जींद सत्संग।

तिथि : 9 मार्च, 2025 (रविवार)
समय : दोपहर 12:30 बजे।
स्थान : जींद आश्रम (भिवानी रोड, जींद, हरियाणा)

आप सभी सादर आमंत्रित है जी।

।। राधास्वामी जी ।।

जीवन तो वो भला जिसमें प्रभु भक्ति का चिंतन और सुमिरन हो : हुजूर कंवर साहेब जो महाराज।भिवानी।।02.03.2025।। उस जन्मदिन की ...
03/03/2025

जीवन तो वो भला जिसमें प्रभु भक्ति का चिंतन और सुमिरन हो : हुजूर कंवर साहेब जो महाराज।

भिवानी।।02.03.2025।। उस जन्मदिन की क्या खुशी मनानी जो जीवन को घटा रहा है।जीवन तो वो भला जिसमे प्रभु भक्ति का चिंतन और सुमिरन हो।जिसमें नेक काम हो।परोपकार और परमार्थ हो।अगर सदगुण है तो जीवन बेशक थोड़ा हो परन्तु अनमोल है।यह सत्संग वचन परम संत सतगुरु कंवर साहेब जी महाराज ने भिवानी के रोहतक रोड पर स्थित राधास्वामी आश्रम में फरमाया।हुजूर महाराज जी अपने 78वें जन्मदिवस पर संगत को सत्संग वचन परोस रहे थे।उलेखनीय है कि 2 मार्च को राधास्वामी सत्संग दिनोद के हुजूर कंवर साहेब जी महाराज का जन्मदिवस होता है।संगत इस दिन को बड़े हर्षोउल्लास से मनाती है।इस अवसर पर साध संगत ने पहले चरण में हुजूर महाराज जी का जन्मदिवस मनाया और दूसरे चरण में गुरु महाराज जी ने सत्संग फरमाया।सत्संग फरमाते हुए हुजूर कंवर साहेब जी ने फरमाया कि दुनिया आवागमन का खेल है।आते हैं जाते हैं।हर रोज़ एक दिन कम करते जाते हैं और खुशी भी मनाते हैं।हैरानी की बात है कि दुनियादारी की और चीजो की बढ़ोतरी पर हमें खुशी मिलती है परंतु जीवन के एक एक दिन कम होने पर भी हम खुशी मना रहे हैं।उन्होंने कहा कि सन्तो का जन्म और मरण एक जैसा ही है।ये जन्म संतो की संगत के लिए मिला था फिर दुर्जन के संग से इसे क्यों जाया कर रहे हो।दिन प्रतिदिन हमारी सांस घंट रही है इसलिए अपने अगत की चिंता करो।उन्होंने कहा कि जीवन पल पल शिक्षा देता है।मुझे भी मिली।कई अवसर ऐसे आये जब मैं भटक सकता था परन्तु मेरे गुरु ने मुझे कभी भटकने नहीं दिया।उन्होंने कहा कि मैंने कभी अपने आप को गुरु नहीं माना हमेशा शिष्य ही माना।ये अलग बात है कि गुरु बनना सहज है परंतु शिष्य तो लाखों में एक है।गुरु गोबिंद सिंह ने उपस्थित संगत से पांच शीश मांगे थे परंतु सन्नटा छा गया था।उन्होंने कहा कि शिष्य वहीं बन सकता है जो शीश अर्पण कर देता है।शीश वो नहीं जो कंधो पर रखा है शीश है आपा मारना।उन्होंने कहा कि जो उठता है उसे प्रकृति की सारी समस्याओं का सामना भी करना पड़ता है वरना एक जगह पड़े रहो।जिसने सब कुछ त्याग दिया वो दाता बन जाता है।उन्होंने फ़रमाया की मैं आज जो कुछ हूँ वो नाम की शक्ति के कारण हूँ जो मुझे मेरे गुरु ने दिया था।हमारे मन में भरी पड़ी ईर्ष्या द्वेष उस दीमक की भांति हैं जो पौधे को अंदर से खोखला कर रही है।जैसे दीमक लगने के बाद कुछ दिन तक पौधा हरा भरा दिखता फिर अचानक गिर जाता है वैसे मन भी ईर्ष्या चुगली द्वेष अंदर रखकर कुछ दिन तो खुशहाल दिखता है परंतु अचानक गिर जाता है।हुजूर ने कहा कि जैसे पौधों के पत्तो पर पानी देने भर से उनकी ताजगी जिंदा नहीं रहती।उसके लिए हम पौधों की जड़ में पानी देना होगा।इसी प्रकार हम दुनियादारी की भक्ति करके मन को नहीं हेर सकते उसके लिए तो हमें भक्ति को व्यवहार में उतारनी पड़ेगी।गुरु महाराज जी ने कहा कि अंतर को सुधारने के लिए हमे पहले बाहरी क्रियाओ को सुधारना पड़ेगा।परमात्मा के विदेह रूप को प्रेम करना चाहते हो तो पहले सतगुरु के देह रूप को प्रेम करना होगा।उन्होंने कहा कि जीवन को आदर्श स्वरूप बनाना चाहते हो तो आंखों से बुरा मत देखो,कानो से बुरा मत सुनो और मुंह से बुरा मत बोलो।आंख सतगुरु के दर्शन के लिए खोलो,कान उनके वचन सुनने के लिए और मुंह सतगुरु महिमा गाने के लिए ही खोलो।उन्होंने कहा कि आपको मानुष देह मिली है तो उसके लायक काम भी करो।मत भूलो कि आप जो आज बो रहे हो कल आप वही काटोगे।इसलिए बच्चों को शिक्षाप्रद कहानियां सुनाओ।इंसान हो तो अपनी नस्ल को इंसानीयत सिखाओ।अपनी संतान को अपनी संस्कृति और संस्कार सिखाओ।आप स्वयं अपने माँ बाप की सेवा करोगे तो ही आपकी सन्तान आपकी सेवा करेगी।श्रवण कुमार केवल माँ बाप की सेवा करने मात्र से अमर हो गया।उन्होंने कहा कि सन्तो की बानी सुनकर कर तो बड़े बड़े शैतान सुधर गए तो फिर आप क्यों बिगड़े,आपकी सन्तान क्यों बिगड़ी।सतगुरु तो सबको ही देता है परन्तु हम लेते तो नहीं क्योंकि हम अपना मूल नहीं सुधारते।भक्ति करने से पहले अपने मूल को सुधारो।हुजूर कँवर साहेब ने फरमाया कि सत्संग सुनकर भी आपका जीवन और सोच नहीं बदली तो आपकी हालत उस काग की भांति है जो चारो वेद पढ़कर भी भिष्टा पर ही अपनी चोंच मारता है।हुजूर कंवर साहेब जी महाराज ने कहा कि जीवन तो थोड़ा ही अच्छा है यदि परमात्मा की भक्ति में उसे लगाते हो।परमात्मा के बाद इंसान का दर्जा आता है लेकिन माया और काल के प्रपंच में उलझ कर इंसान ने अपने आप को सबसे नीचे दर्जे का बना लिया है।उन्होंने कहा कि इंसान की हालत उस चींटी की भांति है जिसके मुँह में नमक भरा है और मिश्री खा कर भी उसे मिठास नहीं आ पा रहा।जब तक हमारे अंदर की विषय वासना नहीं हटेगी तब तक भक्ति का रस हमें नहीं आएगा।गुरु महाराज जी के अवतरण दिवस के अवसर पर आश्रम में रक्तदान शिविर का आयोजन भी किया गया।शिविर में साधको द्वारा 300 यूनिट रक्त का दान किया गया।इस रक्त का उपयोग थैलीसीमिया व कैंसर पीड़ित रोगियों के इलाज में काम आता हैं

।। राधास्वामी । राधास्वामी दयाल की दया । राधास्वामी सहाय । राधास्वामी ।।परम संत हुजूर कंवर साहेब जी महाराज जी के 78वें अ...
02/03/2025

।। राधास्वामी । राधास्वामी दयाल की दया । राधास्वामी सहाय । राधास्वामी ।।

परम संत हुजूर कंवर साहेब जी महाराज जी के 78वें अवतरण दिवस की अरब खरब बधाईयाँ।

।। राधास्वामी जी ।।

28/02/2025

आगामी सत्संग सूचना :

परम संत हुजूर कंवर साहेब जी महाराज जी के पावन सानिध्य में अवतरण दिवस -हुजूर महाराज जी के पावन उपलक्ष में भिवानी सत्संग।

सेवादार सत्संग:
तिथि : 1 मार्च, 2025 (शनिवार)
समय : दोपहर 1:30 बजे।
स्थान : भिवानी आश्रम (रोहतक रोड, भिवानी, हरियाणा)

अवतरण दिवस सत्संग:
तिथि : 2 मार्च, 2025 (रविवार)
समय : दोपहर 12:30 बजे।
स्थान : भिवानी आश्रम (रोहतक रोड, भिवानी, हरियाणा)

आप सभी सादर आमंत्रित है जी।

।। राधास्वामी जी ।।

24/02/2025

24 Feb | क्या फल पाया सत्संगत आए | Morning
Satsang -Dinod Asharam | RadhaSwamiDinod

20/02/2025

सत्संग एक, फल अनेक | Fatehabad Satsang 2025
| Radha Swami Dinod |

Satsang by Param Sant Huzur Kanwar Saheb Ji Maharaj Ji at Fatehabad Ashram (Sirsa Road, Fatehabad, HR) on 18th Feb, 2025.

कर्म बिगाड़ना व सुधारना इंसान के हाथ में : परम संत हुजूर कंवर साहेब जी महाराजदिनोद ।।16.02.2025।।सन्तो का प्रथम ध्येय सम...
17/02/2025

कर्म बिगाड़ना व सुधारना इंसान के हाथ में : परम संत हुजूर कंवर साहेब जी महाराज

दिनोद
।।16.02.2025।।

सन्तो का प्रथम ध्येय समाज का कल्याण है।सन्त परमात्मा का ही स्वरूप हैं।परमात्मा की भांति सन्त भी किसी से भेदभाव नहीं करते।सन्त का अर्थ सत्य है और सत्य कभी बदलता नहीं है।यह सत्संग वचन परमसंत सतगुरु कँवर साहेब जी महाराज ने दिनोद गांव में स्थित राधास्वामी सत्संग दिनोद के मुख्यालय में साध संगत के समक्ष फरमाये।हुजूर महाराज जी ने कहा कि अपनी शिक्षा और दीक्षा अच्छी रखो।शिक्षा आपको सभ्यता और आदर्शों से रूबरू कराती है और दीक्षा आपको परमात्मा से रूबरू कराती है।इसलिए शिक्षा अच्छे गुरु से लो और दीक्षा सच्चे सतगुरु से लो।उन्होंने कहा कि पल पल चेतो और समय की कद्र करो।गुरु महाराज ने फरमाया कि कर्म बिगाड़ना और सुधारना इंसान के अपने हाथ में है।आपके किये कर्म का दोष आप किसी और के सर पर नहीं मढ़ सकते।परमात्मा की नजर से कोई नहीं बच सकता।वो सबका लेखा रखता है।उन्होंने कहा कि प्रारब्ध कर्म के कारण आपको यह जन्म मिला,इंसानी शरीर मिला,अच्छा घर कुल मिला।इसका सदुपयोग करो।हुजूर महाराज जी ने हैरानी जताते हुए कहा कि सन्त इस दुनिया के समस्त पदार्थो को जिनमे हम सुख खोजते हैं उनको ही दुखो का असल कारण मानते हैं।सुख परमात्मा के नाम में है।नाम मिलता है सेवा से और सेवा शुरू होती है घर से।सेवा आपके जगत को बनाती है और नाम भक्ति आपके अगत को बनाती है।आप मुक्ति की नहीं भक्ति की चाह रखो।उन्होंने फ़रमाया कि दुनियादारी में रहकर आप भक्ति कमाओ।परधन पर त्रिया से नेह ना लगाओ।हक हलाल की कमाई खाओ।किसी का दिल ना दुखाओ।स्वयं की निरख परख करते रहो।स्वयं के आचरण पर दृष्टि रखो कि क्या हम सन्त महात्माओ की बानी के अनुसार चल रहे हैं।मन की चाल को साधो क्योंकि मन आपको बार बार भटकाएगा।बार बार समझो कि क्या जो हम कर रहे हैं वो निस्वार्थ और परोपकारी है।

16/02/2025

16 Feb | Morning Satsang - Dinod Ashram |
Satsang by Param Sant Huzur Kanwar Saheb Ji Maharaj Ji at Dinod Ashram (Bhiwani, Haryana, India) on 16th Feb, 2025 (Sunday).

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15/02/2025

आगामी सत्संग सूचना :

परम संत हुजूर कंवर साहेब जी महाराज जी के पावन सानिध्य में आगामी फतेहाबाद सत्संग।

तिथि : 18 फरवरी, 2025 (मंगलवार)
समय : दोपहर 12:30 बजे।
स्थान : फतेहाबाद आश्रम (सिरसा रोड, फतेहाबाद, हरियाणा)

आप सभी सादर आमंत्रित है जी।

।। राधास्वामी जी ।।

आगामी सत्संग सूचना :परम संत हुजूर कंवर साहेब जी महाराज जी के पावन सानिध्य में आगामी फतेहाबाद सत्संग।तिथि : 18 फरवरी, 202...
14/02/2025

आगामी सत्संग सूचना :
परम संत हुजूर कंवर साहेब जी महाराज जी के पावन सानिध्य में आगामी फतेहाबाद सत्संग।

तिथि : 18 फरवरी, 2025 (मंगलवार)
समय : दोपहर 12:30 बजे।
स्थान : फतेहाबाद आश्रम (सिरसा रोड, फतेहाबाद, हरियाणा)

आप सभी सादर आमंत्रित है जी।

।। राधास्वामी जी ।।

राधास्वामी आश्रम में हजारों श्रद्धालुओं को किया संबोधित।सिवानी।।12.02.2025।।भले ही यह कलयुग हो लेकिन हम भाग्यशाली जीव है...
13/02/2025

राधास्वामी आश्रम में हजारों श्रद्धालुओं को किया संबोधित।

सिवानी।

।12.02.2025।।

भले ही यह कलयुग हो लेकिन हम भाग्यशाली जीव है कि हम ऐसे काल में जन्में हैं जिसमें अनेकों सन्तो का अवतरण हुआ।इस कलि काल में ना केवल सन्त शिरोमणि रविदास जी प्रकट हुए बल्कि नानक,कबीर,मीरा,चैतन्य महाप्रभु,पलटू, गरीबदास,दादू से लेकर ताराचंद जी जैसे सन्त अवतरित हुए।परमात्मा को याद करवाने और इंसान की अंतर शक्तियों का एहसास करवाने के लिए ही संत देह धारण कर इस जगत में आते हैं।जब सन्त सतगुरु महात्मा इस धरा पर आते हैं तो तीन ताप से दुखी जीवो को बड़ी शांति मिलती है।इसी परमार्थ के लिए संत रविदास जी भी इस जगत में आए थे और आज हम उन्हीं संत शिरोमणि रविदास जी की जयंती मना रहे हैं।यह सत्संग वचन परमसंत सतगुरु हुजूर कंवर साहेब जी महाराज ने सिवानी में स्थित राधास्वामी आश्रम में फरमाए।हुजूर कँवर साहेब ने कहा कि ये सब तत्ववेत्ता सन्त हैं।ये काल के ताप से जीवों को सांत्वना देने आते हैं कि हम आपको परमात्मा को पाने का तरीका सुझाते हैं आगे आपका भाव और भाग।उन्होंने कहा कि भक्ति के लिए स्वच्छ वातावरण की आवश्यकता है।जैसा अन्न खाओगे आपका मन भी वैसा ही हो जाएगा।भक्ति के रास्ते मे तो ये और भी ज्यादा काम करता है।भक्त तो सदा प्रभु का गुणगान ही करेगा।गुरु महाराज जी ने रविदास जी के जीवन वृत सुनाते हुए कहा कि अपने पहले जन्म में सन्त रविदास जी की किसी बात से नाराज होकर रामानन्द जी ने उन्हें श्राप दिया।गुरु महाराज जी ने कहा कि जैसे बिना हथियार के सुरमा नही लड़ सकता वैसे ही बिना इष्ट के व बिना गुरु के भक्ति नही की जा सकती लेकिन हम तो दूसरे ही झमेलों में उलझे हैं।हम और खोज तो बहुत कर रहे हैं।चाँद सूरज का मार्ग तक खोज लिया लेकिन परमात्मा को पाने का मार्ग हम नहीं खोज सकते।उन्होंने हैरानी जताते हुए कहा कि जो यंहा रह जायेगा उसको तो हम जोड़ रहे हैं और जो साथ जा सकता है उसको हम छोड़ रहे हैं।साथ जाएगा इंसान का नेक किया कर्म प्रभु की भक्ति।इंसानी यौनि में आये तो थे भक्ति का खजाना लूटने लेकिन हम इक्कनी दुकन्नी लूटने में ही अपना समय गँवा लेते हैं।गुरु महाराज जी ने कहा कि सन्त रविदास जी ने अपने पास रखे हीरे को देखा तक नहीं उन्होंने हाथ से कमा कर खाया।वे माया के फेर में कभी नहीं फंसे।माया का फेर उस सुखी हड्डी की भांति है जिसे कुत्ता चबा कर अपने ही जबड़े में खून निकाल रहा है और मानता यह है कि यह खून हड्डी से निकल रहा है।हुजूर महाराज जी ने कहा कि आज जिसे देखो वही विषयो का गुलाम दिखता है।जो खुद नशे विषयो में फंसा है वो अपने बच्चे को अच्छी शिक्षा कैसे दे सकता है।उन्होंने कहा कि समाज उन्नत होगा तो देश उन्नत होगा और समाज उन्नत तब होगा जब इंसान उन्नत होगा।उन्नति की सारी शक्तियां इंसान के अंतर में ही मौजूद है लेकिन हम उन शक्तियों को भुला बैठे है क्योंकि हम परमात्मा को भूल गए हैं।गुरु महाराज जी ने फरमाया कि सन्त रविदास जी के विचार उच्च कोटि के थे।वे जाती पाति के घोर विरोधी थे।वो कहते थे कि जाति पाती है नहीं कोई।हरि को भजे सो हरि का होइ।गुरु महाराज जी ने कहा कि जाति पाती का मोल नहीं होता,मोल तो ज्ञान का होता है जैसे महता तलवार की होती है ना कि म्यान की।उन्होंने कहा कि ये दुनियादारी ऐसी है की आप अच्छा काम करना शुरू कर दो आपको कई टोकने वाले मिल जायेंगे।जगत और भगत का तो बैर बहुत पुराना है।हुजूर कंवर साहेब जी ने फरमाया कि भक्ति काल के दौरान एक समय ऐसा आया था जब विदेशी ताकत हिंदुस्तान पर राज कर रही थी।हिंदुस्तान के आदि धर्म की जगह दूसरी मान्यताओं का जोर था जिसके कारण अनेकों आडम्बर फेल गए थे। उन आडंबरों और पाखंडों को नेस्तनाबूद करने के लिए अनेको संतो ने अपना अमूल्य योगदान दिया।इन्ही संतो में संत शिरोमणी रविदास जी नाम अग्रणी तौर पर लिया जाता है।यही रविदास जी के साथ भी हुआ था लेकिन भक्ति ऐसा प्रकाश है जो पाताल में भी प्रकट होगा तो उसकी चमक आकाश में दिखती है।गुरु महाराज जी ने फरमाया कि आज हम रविदास जी के अवतरण दिवस पर यही संकल्प ले कि जीवन मे नेक काम करते हुए अपनी इंसानी यानि को सार्थक करेंगे।घर गृहस्थी के सारे काम करते हुए परमात्मा का सुमिरन करो।बड़े बुजुर्गो की सेवा में सब देवताओं की पूजा है।किसी को कटु वचन मत बोलो।अपने आचरण से दुसरो को प्रेरणा दो।जाति पाती धर्म की नहीं सद्गुणों की पूजा करो।यदि अपने अंदर इन गुणों को ले आए तो समझो कि आपने संत रविदास जी के जीवन को अपना लिया।

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