13/02/2025
राधास्वामी आश्रम में हजारों श्रद्धालुओं को किया संबोधित।
सिवानी।
।12.02.2025।।
भले ही यह कलयुग हो लेकिन हम भाग्यशाली जीव है कि हम ऐसे काल में जन्में हैं जिसमें अनेकों सन्तो का अवतरण हुआ।इस कलि काल में ना केवल सन्त शिरोमणि रविदास जी प्रकट हुए बल्कि नानक,कबीर,मीरा,चैतन्य महाप्रभु,पलटू, गरीबदास,दादू से लेकर ताराचंद जी जैसे सन्त अवतरित हुए।परमात्मा को याद करवाने और इंसान की अंतर शक्तियों का एहसास करवाने के लिए ही संत देह धारण कर इस जगत में आते हैं।जब सन्त सतगुरु महात्मा इस धरा पर आते हैं तो तीन ताप से दुखी जीवो को बड़ी शांति मिलती है।इसी परमार्थ के लिए संत रविदास जी भी इस जगत में आए थे और आज हम उन्हीं संत शिरोमणि रविदास जी की जयंती मना रहे हैं।यह सत्संग वचन परमसंत सतगुरु हुजूर कंवर साहेब जी महाराज ने सिवानी में स्थित राधास्वामी आश्रम में फरमाए।हुजूर कँवर साहेब ने कहा कि ये सब तत्ववेत्ता सन्त हैं।ये काल के ताप से जीवों को सांत्वना देने आते हैं कि हम आपको परमात्मा को पाने का तरीका सुझाते हैं आगे आपका भाव और भाग।उन्होंने कहा कि भक्ति के लिए स्वच्छ वातावरण की आवश्यकता है।जैसा अन्न खाओगे आपका मन भी वैसा ही हो जाएगा।भक्ति के रास्ते मे तो ये और भी ज्यादा काम करता है।भक्त तो सदा प्रभु का गुणगान ही करेगा।गुरु महाराज जी ने रविदास जी के जीवन वृत सुनाते हुए कहा कि अपने पहले जन्म में सन्त रविदास जी की किसी बात से नाराज होकर रामानन्द जी ने उन्हें श्राप दिया।गुरु महाराज जी ने कहा कि जैसे बिना हथियार के सुरमा नही लड़ सकता वैसे ही बिना इष्ट के व बिना गुरु के भक्ति नही की जा सकती लेकिन हम तो दूसरे ही झमेलों में उलझे हैं।हम और खोज तो बहुत कर रहे हैं।चाँद सूरज का मार्ग तक खोज लिया लेकिन परमात्मा को पाने का मार्ग हम नहीं खोज सकते।उन्होंने हैरानी जताते हुए कहा कि जो यंहा रह जायेगा उसको तो हम जोड़ रहे हैं और जो साथ जा सकता है उसको हम छोड़ रहे हैं।साथ जाएगा इंसान का नेक किया कर्म प्रभु की भक्ति।इंसानी यौनि में आये तो थे भक्ति का खजाना लूटने लेकिन हम इक्कनी दुकन्नी लूटने में ही अपना समय गँवा लेते हैं।गुरु महाराज जी ने कहा कि सन्त रविदास जी ने अपने पास रखे हीरे को देखा तक नहीं उन्होंने हाथ से कमा कर खाया।वे माया के फेर में कभी नहीं फंसे।माया का फेर उस सुखी हड्डी की भांति है जिसे कुत्ता चबा कर अपने ही जबड़े में खून निकाल रहा है और मानता यह है कि यह खून हड्डी से निकल रहा है।हुजूर महाराज जी ने कहा कि आज जिसे देखो वही विषयो का गुलाम दिखता है।जो खुद नशे विषयो में फंसा है वो अपने बच्चे को अच्छी शिक्षा कैसे दे सकता है।उन्होंने कहा कि समाज उन्नत होगा तो देश उन्नत होगा और समाज उन्नत तब होगा जब इंसान उन्नत होगा।उन्नति की सारी शक्तियां इंसान के अंतर में ही मौजूद है लेकिन हम उन शक्तियों को भुला बैठे है क्योंकि हम परमात्मा को भूल गए हैं।गुरु महाराज जी ने फरमाया कि सन्त रविदास जी के विचार उच्च कोटि के थे।वे जाती पाति के घोर विरोधी थे।वो कहते थे कि जाति पाती है नहीं कोई।हरि को भजे सो हरि का होइ।गुरु महाराज जी ने कहा कि जाति पाती का मोल नहीं होता,मोल तो ज्ञान का होता है जैसे महता तलवार की होती है ना कि म्यान की।उन्होंने कहा कि ये दुनियादारी ऐसी है की आप अच्छा काम करना शुरू कर दो आपको कई टोकने वाले मिल जायेंगे।जगत और भगत का तो बैर बहुत पुराना है।हुजूर कंवर साहेब जी ने फरमाया कि भक्ति काल के दौरान एक समय ऐसा आया था जब विदेशी ताकत हिंदुस्तान पर राज कर रही थी।हिंदुस्तान के आदि धर्म की जगह दूसरी मान्यताओं का जोर था जिसके कारण अनेकों आडम्बर फेल गए थे। उन आडंबरों और पाखंडों को नेस्तनाबूद करने के लिए अनेको संतो ने अपना अमूल्य योगदान दिया।इन्ही संतो में संत शिरोमणी रविदास जी नाम अग्रणी तौर पर लिया जाता है।यही रविदास जी के साथ भी हुआ था लेकिन भक्ति ऐसा प्रकाश है जो पाताल में भी प्रकट होगा तो उसकी चमक आकाश में दिखती है।गुरु महाराज जी ने फरमाया कि आज हम रविदास जी के अवतरण दिवस पर यही संकल्प ले कि जीवन मे नेक काम करते हुए अपनी इंसानी यानि को सार्थक करेंगे।घर गृहस्थी के सारे काम करते हुए परमात्मा का सुमिरन करो।बड़े बुजुर्गो की सेवा में सब देवताओं की पूजा है।किसी को कटु वचन मत बोलो।अपने आचरण से दुसरो को प्रेरणा दो।जाति पाती धर्म की नहीं सद्गुणों की पूजा करो।यदि अपने अंदर इन गुणों को ले आए तो समझो कि आपने संत रविदास जी के जीवन को अपना लिया।