Dandraua Dham दंदरौआ धाम

Dandraua Dham दंदरौआ धाम This is a famous temple of Hindu God Hanuman ji, believed to possess curing powers. This temple attracts many devotees every Tuesday and Saturday.
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ॐ श्री हनुमते नमः॥

भिंड जिले के मेहगांव इलाके के दंदरौआ गांव के मंदिर में सखी रूप में विराजे ‘‘श्रीहनुमान विग्रह’’ की दूर-दूर तक ‘डाक्टर हनुमान’ के नाम से भी पहचान बन गई है.
क्योंकि ऐसी मान्यता है कि इस मंदिर में जो भी उपासना करता है, रामभक्त हनुमान उनके असाध्य रोगों तथा दुखों का निवारण करते हैं.
सखी हनुमान मंदिर दंदरौआ आश्रम के महंत पुरूषोत्तम महाराज के शिष्य रामदास महाराज ने बताया कि दो दिन बाद छह नवंबर को आश्रम में रामचरित मानस के सुन्दरकाण्ड के 11111 पाठ शुरू हो रहे हैं और भक्तजनों के बैठने के लिए यहां बीस हजार वर्गफुट क्षेत्र में अस्थाई सभागार तैयार किया गया है, जिसमें सुन्दरकाण्ड के सभी साठ दोहों के बड़े-बड़े ‘कटआउट’ श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए प्रदर्शित किए जा रहे हैं.
उन्होंने बताया कि इस आयोजन में देश के विभिन्न राज्यों से श्रद्धालुओं के आगमन के मद्देनजर ठहरने एवं भोजन की सभी व्यवस्थाएं की गई हैं.
ट्रेन एवं विमान से आने वाले विशिष्ट अतिथियों के ठहरने की व्यवस्था ग्वालियर शहर में है, जबकि आसपास के स्थानों से आने वाले लोगों के लिए भिण्ड, मेहगांव, गोहद एवं मौ में सरकारी विश्राम गृह सहित अन्य स्थान आरक्षित कराए गए हैं.
इस अवसर पर देश भर से आने वाले लगभग एक लाख भक्तों के लिए रसोई तैयार कराई जाएगी. अब तक लगभग दस हजार भक्तों ने अपना पंजीयन करा लिया है.
इस सिद्ध स्थान के बारे में पूछने पर रामदास महाराज ने बताया कि ऐसी किवदंती है कि सखी रूप में श्रीहनुमानजी की मूर्ति यहां वर्ष 1532 में एक पीपल के पेड़ के गर्भ से निकली थी, जिसे सबसे पहले मिते नामक सिद्ध संत ने स्थापित कराया था.
चिकित्सक हनुमान का चमत्कारिक स्वरूप यहां लगभग 100 साल पहले लोगों को दिखाई दिया, जब गांव में महामारी फैली और मूर्ति को चढ़ने वाले चोले का टीका धारण करने से ग्रामीणों को स्वास्थ्य लाभ होने लगा.
दंदरौआ आश्रम की स्थापना श्री पुरूषोत्तम महाराज ने की और इसकी देखरेख खुद रामदास महाराज कर रहे हैं. यहां हनुमान जयंती, गुरू पूर्णिमा एवं अन्य महत्वपूर्ण त्यौहारों के अलावा प्रत्येक मंगलवार एवं शनिवार हजारों श्रद्धालु एकत्रित होते हैं.
रामभक्त हनुमान के यहां पर सखी रूप में विराजने को लेकर उन्होने कहा कि विवाह से पहले भगवान राम का जब जनकपुर की पुष्प वाटिका में सीता से मिलन हुआ था, तो सखी रूप में वहां मौजूद हनुमान ने ही इसे सम्पन्न कराया था.
जिस प्रकार सखी रूप में हनुमान ने मां सीता की मनोकामना पूरी की थी, ठीक उसी तरह दंदरौआ में वह अपने भक्तों की मनोकामना पूरी करते हैं.
असाध्य रोगों के इलाज अथवा दुख निवारण के बारे में आश्रम के सेवक बृजकिशोर शर्मा ‘कल्लू’ ने कहा कि मूर्ति के चोले का सिंदूर जब पीड़ित के रोग स्थान पर लगाया जाता है, तो ऐसी मान्यता है कि वह रोग कुछ दिनों में ठीक हो जाता है.

 #हरियाली_अमावस्या_आज
12/08/2026

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11/08/2026

#पुस्तक_प्रकाशन_हेतु_संस्मरण_आमंत्रित👏

 #भगवान_को_प्रशाद_कैसे_खिलाएं💐
05/08/2026

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 #डॉ_हनुमानवाणी_का_अगस्त_2026अंक_प्रकाशित
31/07/2026

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 #गुरुपूर्णिमा_आज     वर्ष 2026 में गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व  आज 29 जुलाई, 2026 (बुधवार) को मनाया जाएगा। यह हिंदू चंद्...
29/07/2026

#गुरुपूर्णिमा_आज
वर्ष 2026 में गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व आज 29 जुलाई, 2026 (बुधवार) को मनाया जाएगा। यह हिंदू चंद्र कैलेंडर के अनुसार आषाढ़ मास की पूर्णिमा तिथि होती है, जो आध्यात्मिक और शैक्षणिक गुरुओं के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए समर्पित है। हिंदू पंचांग के अनुसार, पूर्णिमा तिथि का प्रारंभ 28 जुलाई 2026 (मंगलवार) को शाम 06:18 बजे होगी, और तिथि का समापन 29 जुलाई 2026 (बुधवार) को रात 08:05 बजे तक रहेगा।उदया तिथि और शास्त्रों की मान्यता के अनुसार पूजा और व्रत 29 जुलाई को ही किया जाएगा।
🌟 गुरु पूर्णिमा का महत्व महर्षि वेद व्यास जयंती से है। यह दिन महाभारत के रचयिता और चारों वेदों के संकलनकर्ता महर्षि वेद व्यास की जयंती (व्यास पूर्णिमा) के रूप में भी मनाया जाता है। संस्कृत में 'गु' का अर्थ है 'अंधकार' और 'रु' का अर्थ है 'प्रकाश'। गुरु वह है जो हमारे जीवन से अज्ञान के अंधकार को मिटाकर ज्ञान का प्रकाश लाता है। गुरुपूर्णिमा का आध्यात्मिक महत्व हिंदू धर्म के अलावा, बौद्ध धर्म (गौतम बुद्ध द्वारा पहला उपदेश देने की स्मृति में) और जैन धर्म में भी है। जैन इतिहास के अनुसार, यह दिन भगवान महावीर के सम्मान में मनाया जाता है, जो इसी दिन अपने पहले शिष्य गौतम स्वामी के गुरु बने थे।
✨ इस दिन पूजा कैसे करें ?
प्रातः स्नान: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें। अपने आध्यात्मिक गुरु, शिक्षक या बड़ों के चरण धोकर उन्हें फूल, माला, फल और मिष्ठान अर्पित करें। घर में महर्षि वेद व्यास जी की तस्वीर या मूर्ति रखकर उनकी विशेष पूजा-अर्चना करें। इस दिन जरूरतमंदों को दान करना अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है।
■ गुरुपूर्णिमा का संक्षिप्त इतिहास
गुरु पूर्णिमा से जुड़ी पौराणिक कथा का संबंध ऋषि वेद व्यास के जन्म से है, जिन्हें महाभारत और पुराणों का रचयिता माना जाता है। कहा जाता है कि उन्होंने ही वेदों को चार भागों में विभाजित और संपादित किया था, जो आज ज्ञात हैं।
हिंदू धर्म में गुरु पूर्णिमा को व्यास पूजा के रूप में भी मनाया जाता है। कुछ आश्रमों में, गुरु के पांव की पूजा की जाती है, यह मानते हुए कि यह ऋषि वेद व्यास की पूजा है। अन्य लोग अपने आध्यात्मिक गुरुओं के दर्शन करते हैं और अपना जीवन और आध्यात्मिक मार्ग उन्हें समर्पित करते हैं। कुछ लोग इस दिन अपने गुरुओं को ' दीक्षा' नामक भेंट देकर अपनी आध्यात्मिक यात्रा या अध्ययन की शुरुआत भी करते हैं। भारतीय शास्त्रीय संगीत के विद्यार्थी इस दिन को अपने संगीत शिक्षकों के प्रति सम्मान व्यक्त करके मनाते हैं, जिससे गुरु-शिष्य परंपरा के रूप में जाने जाने वाले गुरु और शिष्य के बीच के पवित्र बंधन को सुदृढ़ किया जाता है ।
देश भर के स्कूलों, कॉलेजों और अन्य शैक्षणिक संस्थानों में, वर्तमान और पूर्व छात्र अपने शिक्षकों से मिलने जाते हैं और उन्हें उपहार और कृतज्ञता एवं सम्मान के शब्द भेंट करते हैं। कविताएँ सुनाई जाती हैं और शिक्षक छात्रों को आशीर्वाद देते हैं। इन कविताओं के लिए प्रतियोगिताएँ भी आयोजित की जाती हैं। संक्षेप में कहें तो, भारत में प्राचीन काल से ही गुरु पूर्णिमा को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता रहा है।
@ कुलदीप सेंगर, संपादक:डॉ हनुमानवाणी

28/07/2026

#डॉ_हनुमानवाणी_सहसंपादक_आचार्य_चन्द्रशेखर_शर्मा
डॉ हनुमानवाणी के सह संपादक आचार्य चन्द्रशेखर शर्मा ग्वालियर के एक प्रतिष्ठित और प्रखर विद्वान हैं, जिन्होंने भारतीय संस्कृति के ओजस्वी प्रवक्ता एवं स्वर्णपदक विजेता के रूप में अपनी विशेष पहचान प्राप्त की है। वे अपने ओजपूर्ण व्याख्यानों, धार्मिक प्रवचनों और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के प्रसार के लिए मध्य प्रदेश और देश के अन्य हिस्सों में जाने जाते हैं।

आपका जन्म-5 सितंबर 1965(अध्यपक दिवस)पर
ग्राम-मोहनपुरा,गोरमी,भिण्ड (म. प्र.) में हुआ था। आपके पिता एवं माता- श्री डॉ. गणेशराम जी शर्मा ,श्रीमती श्रीकुँअर जी पाराशर हैं। आपकी
प्राथमिक शिक्षा अपने पैतृक ग्राम मोहनपुरा में, तथा
उच्चशिक्षा गुरुकुलीय शिक्षा एवं संस्कृत व्याकरण गुरुकुल एटा,चित्तौड़गढ़ एवं नई दिल्ली में हुई। आप शास्त्री सम्पूर्णानन्द संस्कृत वि. वि.वाराणसी, एवं जीवाजी वि. वि. ग्वालियर से एम.ए.-संस्कृत, में स्वर्णपदकप्राप्त शिक्षा शास्त्री हैं। आपने श्री लालबहादुरशास्त्री संस्कृत विद्यापीठ,नई दिल्ली ( राष्ट्रीय संस्कृत वि. वि. नई दिल्ली ), से एम. फिल् व शोधकार्य- दिल्ली वि. वि. दिल्ली से किया है।
आपने अध्यापनकार्य- संस्कृत-प्रवक्ता, केन्द्रीय विद्यालय संगठन,नई दिल्ली ( शिक्षा मंत्रालय,भारत सरकार )अहमदाबाद, मुंबई, नई दिल्ली, गुरुग्राम एवं पीएम श्री के. वि. नंबर-1,ग्वालियर में किया है, वर्ष 2026 में ही आप सेवानिवृत्त हुए हैं।
आप की अभिरुचि-भारतीय संस्कृति एवं साहित्य के चिंतक, लेखक एवं प्रवक्ता (भारतीय सनातन संस्कृति,वेद,उपनिषद् ,पुराण,रामामण,गीता आदि का स्वाध्याय,लेखन एवं प्रवचन में है। वर्तमान में आपका निवास- स्वरित-सदन 10,आदित्यनगर,सी.पी. कॉलोनी मुरार, ग्वालियर ( म. प्र. ) है।
आपको अपनी शैक्षणिक योग्यता, वाद-विवाद प्रतियोगिताओं या संस्कृत शास्त्रों की उच्चस्तरीय परीक्षा में सर्वोत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रतिष्ठित मंचों द्वारा स्वर्ण पदक (Gold Medal) से सम्मानित किया गया है।
आचार्य जी का व्यक्तित्व एक प्रखर और प्रभावशाली वक्ता का है। उनकी वाणी में गजब का आकर्षण और ओज है, जो युवाओं और आम जनमानस को अपनी संस्कृति की ओर प्रेरित करता है।सरल एवं संन्यासी स्वभाव: उच्च कोटि का विद्वान होने के बावजूद उनका जीवन बेहद सरल, सात्विक और पारंपरिक भारतीय मूल्यों के अनुकूल है। आप केवल धार्मिक उपदेशक नहीं हैं, बल्कि आपके विचारों में राष्ट्रवाद, राष्ट्र निर्माण और सामाजिक समरसता की गहरी झलक देखने को मिलती है।
आपने श्रीमद्भागवत कथा, श्रीराम कथा और शिव महापुराण के माध्यम से सनातन संस्कृति के संदेश को देश-विदेश में फैलाया है। और आधुनिक समाज और युवाओं को पश्चिमी सभ्यता के अंधानुकरण से बचाकर भारतीय संस्कारों और नैतिक मूल्यों से जोड़ने का निरंतर कार्य कर रहे हैं। समाज में फैली कुरीतियों, अंधविश्वासों को दूर करने और सनातन धर्म की वैज्ञानिकता को तार्किक रूप से सिद्ध करने में आपका महत्वपूर्ण योगदान है।
आपको अनेकसम्मान एवं प्रशस्तिपत्र मिले हैं, जिनमें भारतरत्न पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी के करकमलों से नई दिल्ली में सम्मान,डी.ए. वी. संस्थान,नई दिल्ली द्वारा सम्मान,केन्द्रीय विद्यालय संगठन द्वारा सम्मान,धार्मिक,साममाजिक एवं शैक्षणिक संस्थानों द्वारा सम्मान शामिल हैं।
◆साहित्यिक योगदान:
आप डॉ हनुमानवाणी मासिक के अवतरण स्तंभ में सुंदर काण्ड की सौंदर्य महिमा और गीतामृत स्तंभ के लिए श्रीमद्भागवत गीता पर धारावाहिक लेख लिखते हैं। इसके अलावा भी आपके विभिन्न धार्मिक पत्र-पत्रिकाओं में लेख, विचार और व्याख्यान नियमित रूप से प्रकाशित होते रहते हैं, जो समाज को दिशा देने का काम करते हैं।
@ कुलदीप सेंगर संपादक डॉ हनुमानवाणी
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Gram Dandraua, Tehsil Mehgaon
Bhind
477557

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