28/07/2026
#डॉ_हनुमानवाणी_सहसंपादक_आचार्य_चन्द्रशेखर_शर्मा
डॉ हनुमानवाणी के सह संपादक आचार्य चन्द्रशेखर शर्मा ग्वालियर के एक प्रतिष्ठित और प्रखर विद्वान हैं, जिन्होंने भारतीय संस्कृति के ओजस्वी प्रवक्ता एवं स्वर्णपदक विजेता के रूप में अपनी विशेष पहचान प्राप्त की है। वे अपने ओजपूर्ण व्याख्यानों, धार्मिक प्रवचनों और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के प्रसार के लिए मध्य प्रदेश और देश के अन्य हिस्सों में जाने जाते हैं।
आपका जन्म-5 सितंबर 1965(अध्यपक दिवस)पर
ग्राम-मोहनपुरा,गोरमी,भिण्ड (म. प्र.) में हुआ था। आपके पिता एवं माता- श्री डॉ. गणेशराम जी शर्मा ,श्रीमती श्रीकुँअर जी पाराशर हैं। आपकी
प्राथमिक शिक्षा अपने पैतृक ग्राम मोहनपुरा में, तथा
उच्चशिक्षा गुरुकुलीय शिक्षा एवं संस्कृत व्याकरण गुरुकुल एटा,चित्तौड़गढ़ एवं नई दिल्ली में हुई। आप शास्त्री सम्पूर्णानन्द संस्कृत वि. वि.वाराणसी, एवं जीवाजी वि. वि. ग्वालियर से एम.ए.-संस्कृत, में स्वर्णपदकप्राप्त शिक्षा शास्त्री हैं। आपने श्री लालबहादुरशास्त्री संस्कृत विद्यापीठ,नई दिल्ली ( राष्ट्रीय संस्कृत वि. वि. नई दिल्ली ), से एम. फिल् व शोधकार्य- दिल्ली वि. वि. दिल्ली से किया है।
आपने अध्यापनकार्य- संस्कृत-प्रवक्ता, केन्द्रीय विद्यालय संगठन,नई दिल्ली ( शिक्षा मंत्रालय,भारत सरकार )अहमदाबाद, मुंबई, नई दिल्ली, गुरुग्राम एवं पीएम श्री के. वि. नंबर-1,ग्वालियर में किया है, वर्ष 2026 में ही आप सेवानिवृत्त हुए हैं।
आप की अभिरुचि-भारतीय संस्कृति एवं साहित्य के चिंतक, लेखक एवं प्रवक्ता (भारतीय सनातन संस्कृति,वेद,उपनिषद् ,पुराण,रामामण,गीता आदि का स्वाध्याय,लेखन एवं प्रवचन में है। वर्तमान में आपका निवास- स्वरित-सदन 10,आदित्यनगर,सी.पी. कॉलोनी मुरार, ग्वालियर ( म. प्र. ) है।
आपको अपनी शैक्षणिक योग्यता, वाद-विवाद प्रतियोगिताओं या संस्कृत शास्त्रों की उच्चस्तरीय परीक्षा में सर्वोत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रतिष्ठित मंचों द्वारा स्वर्ण पदक (Gold Medal) से सम्मानित किया गया है।
आचार्य जी का व्यक्तित्व एक प्रखर और प्रभावशाली वक्ता का है। उनकी वाणी में गजब का आकर्षण और ओज है, जो युवाओं और आम जनमानस को अपनी संस्कृति की ओर प्रेरित करता है।सरल एवं संन्यासी स्वभाव: उच्च कोटि का विद्वान होने के बावजूद उनका जीवन बेहद सरल, सात्विक और पारंपरिक भारतीय मूल्यों के अनुकूल है। आप केवल धार्मिक उपदेशक नहीं हैं, बल्कि आपके विचारों में राष्ट्रवाद, राष्ट्र निर्माण और सामाजिक समरसता की गहरी झलक देखने को मिलती है।
आपने श्रीमद्भागवत कथा, श्रीराम कथा और शिव महापुराण के माध्यम से सनातन संस्कृति के संदेश को देश-विदेश में फैलाया है। और आधुनिक समाज और युवाओं को पश्चिमी सभ्यता के अंधानुकरण से बचाकर भारतीय संस्कारों और नैतिक मूल्यों से जोड़ने का निरंतर कार्य कर रहे हैं। समाज में फैली कुरीतियों, अंधविश्वासों को दूर करने और सनातन धर्म की वैज्ञानिकता को तार्किक रूप से सिद्ध करने में आपका महत्वपूर्ण योगदान है।
आपको अनेकसम्मान एवं प्रशस्तिपत्र मिले हैं, जिनमें भारतरत्न पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी के करकमलों से नई दिल्ली में सम्मान,डी.ए. वी. संस्थान,नई दिल्ली द्वारा सम्मान,केन्द्रीय विद्यालय संगठन द्वारा सम्मान,धार्मिक,साममाजिक एवं शैक्षणिक संस्थानों द्वारा सम्मान शामिल हैं।
◆साहित्यिक योगदान:
आप डॉ हनुमानवाणी मासिक के अवतरण स्तंभ में सुंदर काण्ड की सौंदर्य महिमा और गीतामृत स्तंभ के लिए श्रीमद्भागवत गीता पर धारावाहिक लेख लिखते हैं। इसके अलावा भी आपके विभिन्न धार्मिक पत्र-पत्रिकाओं में लेख, विचार और व्याख्यान नियमित रूप से प्रकाशित होते रहते हैं, जो समाज को दिशा देने का काम करते हैं।
@ कुलदीप सेंगर संपादक डॉ हनुमानवाणी
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