12/11/2014
एक दिन एक कव्वे के
बच्चे ने कहा कि हमने
लगभग हर चौपाये जीव का
माँस खाया है, मगर आजतक
दो पैर पर चलने वाले
जीव का माँस नहीं खाया है..
पापा कैसा होता है इंसानों
का माँस?
पापा कव्वे ने कहा मैंने जीवन
में तीन बार खाया है,
बहुत स्वादिष्ट होता है..
कव्वे के बच्चे ने कहा मुझे
भी खाना है..
कव्वे ने थोड़ी देर सोचने के बाद
कहा चलो खिला देता हूँ..
बस मैं जैसा कह रहा हूँ वैसे ही करना..
मैंने ये तरीका अपने पुरखों
से सीखा है..
कौवे ने अपने बेटे को
एक जगह रुकने को कहा और थोड़ी देर बाद माँस के दो
टुकड़े उठा लाया..
कव्वे के बच्चे ने खाया तो
कहा की ये तो सूअर के
माँस जैसा लग रहा है..
पापा ने कहा अरे ये खाने के
लिए नहीं है..
इस से ढेर सारा माँस बनाया
जा सकता है..
जैसे दही जमाने के लिए
थोड़ा सा दही दूध में डाल
कर छोड़ दिया जाता है,
वैसे ही इसे छोड़ कर
आना है..
बस देखना कल तक
कितना स्वादिष्ट माँस मिलेगा,
वो भी मनुष्य का..
बच्चे को बात समझ में
नहीं आई मगर वो पापा का
जादू देखने के लिए उत्सुक था..
पापा ने उन दो माँस के टुकड़ों में से एक टुकड़ा एक मंदिर में
और दूसरा पास की
एक मस्जिद में टपका दिया..
तबतक शाम हो चली थी,
पापा ने कहा अब कल
सुबह तक हम सभी को ढेर
सारा दुपाया जानवरों का
माँस मिलने वाला है..
सुबह सवेरे पापा और बच्चे
ने देखा तो सचमुच गली-गली में
मनुष्यों की कटी और जली लाशें
बिखरी पड़ीं थीं..
हर तफ़र सन्नाटा था..
पुलिस सड़कों पर घूम रही थी..
कर्फ्यू लगा हुआ था..
आज बच्चे ने पापा कव्वे से
दोपाया जानवर का शिकार
करना सीख लिया था..
बच्चे कव्वे ने पूछा अगर
दुपाया मनुष्य हमारी
चालाकी समझ गया तो
ये तरीका बेकार हो जायेगा..
पापा कव्वे ने कहा सदियाँ
गुज़र गईं मगर आज तक
दुपाया जानवर हमारे इस
जाल में फंसता ही आया है..
सूअर या बैल के माँस का एक टुकड़ा, हजारों दुपाया जानवरों
को पागल कर देता है, वो एक
दूसरे को मारने लग जाते हैं और हम आराम से उन्हें खाते हैं..
मुझे नहीं लगता कभी उसे
इतनी अक़ल आने वाली है...........
ये कुछ काैए रूपी लाैग अपने मतलब के लिये हमें लडाते
है , उगसाते है अाैर हम बिना साैचे समझे लडने झगडने लगते है
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