Roshan Lal Sahu

Roshan Lal Sahu Followers of Sant Rampal Ji Maharaj

24/01/2024

( के आगे पढिए.....)
📖📖📖


हम पढ़ रहे है पुस्तक "मुक्तिबोध"
पेज नंबर 359-360

कबीर सागर के अध्याय ‘‘ज्ञान प्रकाश‘‘ का सारांश (छठा अध्याय) जैसा कि इस ग्रन्थ (कबीर सागर का सरलार्थ) के प्रारम्भ में लिखा है कि कबीर सागर
के यथार्थ अर्थ को न समझकर कबीर पंथियों ने इस ग्रन्थ में अपने विवेक अनुसार फेर-बदल किया है। कुछ अंश काटे हैं। कुछ आगे-पीछे किए हैं। कुछ बनावटी वाणी लिखकर कबीर सागर का नाश किया है। परंतु सागर तो सागर ही होता है। उसको खाली नहीं किया जा सकता। इसी प्रकार कबीर सागर में बहुत सा सत्य विवरण उनकी कुदृष्टि से बच गया है। शेष मिलावट को अब एक बहुत पुराने हस्तलिखित ‘‘कबीर सागर‘‘ से मेल करके तथा संत गरीबदास जी की अमृतवाणी के आधार से तथा परमेश्वर कबीर जी द्वारा मुझ दास (रामपाल दास) को दिया, दिव्य ज्ञान के आधार से सत्य ज्ञान लिखा गया है। एक प्रमाण बताता हूँ जो बुद्धिमान के लिए पर्याप्त है। ज्ञान प्रकाश में परमेश्वर कबीर जी द्वारा धनी धर्मदास जी को शरण में लेने का विवरण है। आपसी संवाद है, परंतु धर्मदास जी का निवास स्थान भी गलत लिखा है। पृष्ठ 21 पर पूर्व गुरू रूपदास जी से शंका का निवारण करके अपने घर चले गए। धर्मदास जी
का निवास स्थान ‘‘मथुरा नगर‘‘ लिखा है, वाणी इस प्रकार हैः-
तुम हो गुरू वो सतगुरू मोरा।
उन हमार यम फंदा तोरा (तोड़ा)।।
धर्मदास तब करी प्रणामा।
मथुरा नगर पहुँचे निज धामा।।

जबकि धर्मदास जी का निज निवास स्थान ‘‘बांधवगढ़‘‘ कस्बा था जो मध्यप्रदेश में है। संत गरीबदास जी ने अपनी वाणी में सर्व सत्य विवरण लिखा है कि धर्मदास बांधवगढ़ के रहने वाले सेठ थे। वे तीर्थ यात्रा के लिए मथुरा गए थे। उसके पश्चात् अन्य तीर्थों पर जाना था। कुछ तीर्थों पर भ्रमण कर आए थे। नकली कबीरपंथियों द्वारा किए फेर-बदल का
अन्य प्रमाण इसी ज्ञान प्रकाश में धर्मदास जी का प्रकरण चल रहा है। बीच में सर्वानन्द ब्राह्मण की कथा लिखी है जो वहाँ पर नहीं होनी चाहिए। केवल धर्मदास की ही बात होनी चाहिए। पृष्ठ 37 से 50 तक सर्वानन्द की कथा है। इससे पहले पृष्ठ 34 पर धर्मदास जी को नाम दीक्षा देने, आरती-चांका करने का प्रकरण है। पृष्ठ 35 पर गुरू की महिमा की वाणी
है जो पृष्ठ 36 तक है। फिर ‘‘धर्मदास वचन‘‘ चौपाई है जो मात्र तीन वाणी हैं। इसके बाद ‘‘सतगुरू वचन‘‘ वाला प्रकरण मेल नहीं करता। पृष्ठ 36 पर ‘‘धर्मदास वचन‘‘ चौपाई की तीन वाणी के पश्चात् पृष्ठ 50 पर ‘‘धर्मदास वचन‘‘ से मेल (स्पदा) करता है जो सर्वानन्द
के प्रकरण के पश्चात् ‘‘धर्मदास वचन‘‘ की वाणी है।
ज्ञान प्रकाश पृष्ठ 36 पर ‘‘धर्मदास वचन‘‘ चौपाई हो साहब तव पद सिर नाऊँ। तव पद परस परम पद पाऊँ।।
केहि विधि आपन भाग सराही । तव बरत गहैं भाव पुनः बनाई।।
कोधों मैं शुभ कर्म कमाया।
जो सदगुरू तव दर्शन पाया।।
ज्ञान प्रकाश पृष्ठ 50 ‘‘धर्मदास वचन‘‘
धन्य धन्य साहिब अविगत नाथा।
प्रभु मोहे निशदिन राखो साथा।।
सुत परिजन मोहे कछु न सोहाही।
धन दारा अरू लोक बड़ाई।।
इसके पश्चात् सही प्रकरण है। बीच में अन्य प्रकरण लिखा है, वह मिलावटी तथा गलत है।
नाम दीक्षा देने के पश्चात् परमेश्वर कबीर जी ने धर्मदास जी को प्रसन्न करने के लिए कहा कि जब आपको विश्वास हो जाएगा कि मैं जो ज्ञान तथा भक्ति मंत्रा बता रहा हूँ, वे सत्य हैं। फिर तेरे को गुरू पद दूँगा। आप दीक्षा लेने वाले से सवा लाख द्रव्य (रूपये या सोना) लेकर दीक्षा देना। परमात्मा ने धर्मदास जी की परीक्षा ली थी कि वैश्य (बनिया) जाति से है यदि लालची होगा तो इस लालचवश मेरा ज्ञान सुनता रहेगा। ज्ञान के पश्चात् लालच रहेगा ही नहीं। परंतु धर्मदास जी पूर्ण अधिकारी हंस थे। सतलोक से विशेष आत्मा भेजे थे।
फिर उन्होंने इस राशि को कम करवाया और निःशुल्क दीक्षा देने का वचन करवाया यानि माफ करवाया।

अब ‘‘ज्ञान प्रकाश‘‘ के पृष्ठ 9 से आवश्यक वाणी लेते हैं क्योंकि जो अमृतवाणी परमेश्वर कबीर जी के मुख कमल से बोली गई है, उसके पढ़ने-सुनने से भी अनेकों पाप नाश होते हैं। ज्ञान प्रकाश पृष्ठ 9 से वाणीः-
धर्मदास बोध = ज्ञान प्रकाश
निम्न वाणी पुराने कबीर सागर ग्रन्थ के अध्याय ‘‘ज्ञान प्रकाश‘‘ से हैं :-
बांधवगढ़ नगर कहाय।
तामें धर्मदास साह रहाय।।
धन का नहीं वार रू पारा।
हरि भक्ति में श्रद्धा अपारा।।
रूप दास गुरू वैष्णव बनाया।
उन राम कृष्ण भगवान बताया।।
तीर्थ बरत मूर्ति पूजा।
एकादशी और सालिग सूजा।।
ताके मते दृढ़ धर्मनि नागर।
भूल रहा वह सुख का सागर।।
तीर्थ करन को मन चाहा।
गुरू आज्ञा ले चला उमाहा।।
भटकत भ्रमत मथुरा आया।
कृष्ण सरोवर में उठ नहाया।।
चौका लीपा पूजा कारण।
फिर लगा गीता सलोक उचारण।।
ताही समय एक साधु आया।
पाँच कदम पर आसन लाया।।
धर्मदास को कहा आदेशा।
जिन्दा रूप साधु का भेषा।।
धर्मदास देखा नजर उठाई।
पूजा में मगन कछु बोल्या नाहीं।।
जग्यासु वत देखै दाता।
धर्मदास जाना सुनत है बाता।।
ऊँचे सुर से पाठ बुलाया।
जिन्दा सुन-सुन शीश हिलाया।।
धर्मदास किया वैष्णव भेषा।
कण्ठी माला तिलक प्रवेशा।।
पूजा पाठ कर किया विश्रामा।
जिन्दा पुनः किया प्रणामा।।
जिन्दा कहै मैं सुना पाठ अनुपा।
तुम हो सब संतन के भूपा।।
मोकैं ज्ञान सुनाओ गोसाँई।
भक्ति सरस कहीं नहीं पाई।।
मुस्लिम हिन्दू गुरू बहु देखे।
आत्म संतोष कहीं नहीं एके।।
धर्मदास मन उठी उमंगा।
सुनी बड़ाई तो लागा चंगा।।

◆ धर्मदास वचन

जो चाहो सो पूछो प्रसंगा।
सर्व ज्ञान सम्पन्न हूँ भक्ति रंगा।।
पूछहूँ जिन्दा जो तुम चाहो।
अपने मन का भ्रम मिटाओ।।

◆ जिन्द वचन

तुम काको पाठ करत हो संता।
निर्मल ज्ञान नहीं कोई अन्ता।।
मोकूं पुनि सुनाओ बाणी।
जातें मिलै मोहे सारंग पाणी।।
तुम्हरे मुख से ज्ञान मोहे भावै।
जैसे जिह्ना मधु टपकावै।।
धर्मदास सुनि जब कोमल बाता।
पोथी निकाली मन हर्षाता।।

क्रमशः_______________
••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
आध्यात्मिक जानकारी के लिए आप संत रामपाल जी महाराज जी के मंगलमय प्रवचन सुनिए। संत रामपाल जी महाराज YOUTUBE चैनल पर प्रतिदिन 7:30-8.30 बजे। संत रामपाल जी महाराज जी इस विश्व में एकमात्र पूर्ण संत हैं। आप सभी से विनम्र निवेदन है अविलंब संत रामपाल जी महाराज जी से नि:शुल्क नाम दीक्षा लें और अपना जीवन सफल बनाएं।
https://online.jagatgururampalji.org/naam-diksha-inquiry

24/01/2024

अधिक जानकारी के लिए अवश्य देखिए *SANT RAMPAL JI MAHARAJ* YouTube Channel

24/01/2024

Episode : 21 || विशेष संदेश || क्या हुआ जब कबीर परमेश्वर जी ने शंकर भगवान जी को मंत्र दीक्षा दी? || By Sant Rampal Ji_______________________________________...

23/01/2024

Sadhna TV Satsang 23-01-2024 || Episode: 2836 || Sant Rampal Ji Maharaj Live Satsang

पूर्ण गुरु तीन प्रकार के मंत्रों (नाम) को तीन बार में उपदेश करेगा जिसका वर्णन कबीर सागर ग्रंथ पृष्ठ नं. 265 बोध सागर में...
23/01/2024

पूर्ण गुरु तीन प्रकार के मंत्रों (नाम) को तीन बार में उपदेश करेगा जिसका वर्णन कबीर सागर ग्रंथ पृष्ठ नं. 265 बोध सागर में मिलता है व गीता जी के अध्याय नं. 17 श्लोक 23 व सामवेद संख्या नं. 822 में मिलता है।

कौन है सच्चा हिंदू? | जनता की आवाज | SA NEWS __________________________________________For More Update Follow Us On Social Media Facebook: https://facebook.c...

कबीर,सतगुरु के दरबार मे, जाइयो बारम्बारभूली वस्तु लखा देवे, है सतगुरु दातार।हमे सच्चे गुरु की शरण मे आकर बार बार उनके दर...
23/01/2024

कबीर,सतगुरु के दरबार मे, जाइयो बारम्बार
भूली वस्तु लखा देवे, है सतगुरु दातार।
हमे सच्चे गुरु की शरण मे आकर बार बार उनके दर्शनार्थ जाना चाहिए और ज्ञान सुनना चाहिए।

कौन है सच्चा हिंदू? | जनता की आवाज | SA NEWS __________________________________________For More Update Follow Us On Social Media Facebook: https://facebook.c...

संत रामपाल जी महाराज ही एकमात्र सच्चे सतगुरु हैं जो शास्त्रों के बताए अनुसार तीन समय की भक्ति एवं तीन प्रकार के मंत्र जा...
23/01/2024

संत रामपाल जी महाराज ही एकमात्र सच्चे सतगुरु हैं जो शास्त्रों के बताए अनुसार तीन समय की भक्ति एवं तीन प्रकार के मंत्र जाप अपने साधकों को देते हैं जिससे उन्हें सर्व सुख मिलता है तथा उनका मोक्ष का मार्ग भी आसान हो जाता है।

"SA True Story".SA True Story | शारीरिक और आर्थिक रूप से बहुत कमजोर हो चुका था | Gyaneshwar Lokare, Nagpur (MH)________________________________________ संत र...

 Jesus was bornWhereas the definition of God says –God doesn’t take birth from a mother.Lord Kabir appeared on a lotus f...
25/12/2023


Jesus was born
Whereas the definition of God says –
God doesn’t take birth from a mother.
Lord Kabir appeared on a lotus flower. He does not take birth from a mother’s womb.
Kabir Is SupremeGod





👉 For more information, order the book "Gyan Ganga" written by . Book & Its Delivery, Both are completely free.
Click on the link below.
⬇️𝙊𝙧𝙙𝙚𝙧 𝙉𝙤𝙬⬇️

https://docs.google.com/forms/d/e/1FAIpQLSeK2lraEMOrkS43j-f4t6-oL8aFshPCCSQ4ijuhHeSismwoZA/viewform?usp=sf_link

Or

Whatsapp us your name, full address, pincode and mobile number⤵️
+91 7496801825

➡️ Install 'Sant Rampal Ji Maharaj' App from Playstore. In this app, you will be able to listen to the Gyan-Ganga Audio Book.

➡️Must Listen to the spiritual discourses of Saint Rampal Ji :-
➜ Sadhana TV 📺/Popular TV 📺 - 7:30 pm

Visit 👉 Satlok Ashram YouTube channel....

 Jesus was the son of GodLuke 1:35Therefore the child to be born will be called holy- the Son of God.Lord Kabir is the e...
25/12/2023


Jesus was the son of God
Luke 1:35
Therefore the child to be born will be called holy- the Son of God.
Lord Kabir is the eternal father of all souls. He never dies nor He takes birth from a mother.
God Kabir only is worthy of being worshipped.
Kabir Is SupremeGod





👉 For more information, order the book "Gyan Ganga" written by . Book & Its Delivery, Both are completely free.
Click on the link below.
⬇️𝙊𝙧𝙙𝙚𝙧 𝙉𝙤𝙬⬇️

https://docs.google.com/forms/d/e/1FAIpQLSeK2lraEMOrkS43j-f4t6-oL8aFshPCCSQ4ijuhHeSismwoZA/viewform?usp=sf_link

Or

Whatsapp us your name, full address, pincode and mobile number⤵️
+91 7496801825

➡️ Install 'Sant Rampal Ji Maharaj' App from Playstore. In this app, you will be able to listen to the Gyan-Ganga Audio Book.

➡️Must Listen to the spiritual discourses of Saint Rampal Ji :-
➜ Sadhana TV 📺/Popular TV 📺 - 7:30 pm

Visit 👉 Satlok Ashram YouTube channel....

               ा मसीह परमेश्वर नहींवह काल के भेजे अवतार थे, उनके द्वारा किये चमत्कार व उनकी मृत्यु पहले से ही निर्धारित ...
25/12/2023



ा मसीह परमेश्वर नहीं
वह काल के भेजे अवतार थे, उनके द्वारा किये चमत्कार व उनकी मृत्यु पहले से ही निर्धारित थी।
यह सब काल ज्योति निरंजन (ब्रह्म) का सुनियोजित जाल है। जिस कारण उसके द्वारा भेजे अवतारों की महिमा बन जाए तथा
आस पास के सभी प्राणी उस पर आसक्त होकर उसके द्वारा बताई ब्रह्म साधना पर अटल हो जाऐं। जब परमेश्वर का संदेशवाहक आए तो कोई भी विश्वास न करे।

                ईसा जी पाप नहीं काट सकतेहजरत यीशु का जन्म तथा मृत्यु व जो जो भी चमत्कार किए वे पहले ब्रह्म(ज्योति निरंजन...
25/12/2023



ईसा जी पाप नहीं काट सकते
हजरत यीशु का जन्म तथा मृत्यु व जो जो भी चमत्कार किए वे पहले ब्रह्म(ज्योति निरंजन) के द्वारा निर्धारित थे। यह प्रमाण पवित्र बाईबल में है कि एक व्यक्ति जन्म से अंधा था। वह हजरत यीशु मसीह के आशीर्वाद से वह ठीक हो गया। शिष्यों ने पूछा इस व्यक्ति ने कौन-सा पाप किया था। यीशु जी ने कहा कि इसका कोई पाप नहीं है। यह तो इसलिए हुआ है कि प्रभु की महिमा प्रकट करनी है। भावार्थ यह है कि यदि पाप होता तो हजरत यीशु आँखे ठीक नहीं कर सकते थे।

25/12/2023

( के आगे पढिए.....)
📖📖📖


हम पढ़ रहे है पुस्तक "मुक्तिबोध"
पेज नंबर 307-308

’’सब पंथों के हिन्दुओं को भक्ति-शक्ति में कबीर जी द्वारा पराजित करना‘‘

◆ पारख के अंग की वाणी नं. 649-702 :-
पंडित सिमटे पुरीके, काजी करी फिलादी।
गरीबदास दहूँ दीन की, जुलहै खोई दादि।।649।।
च्यारि बेद षटशास्त्र, काढे अठारा पुराण।
गरीबदास चर्चा करैं, आ जुलहै सैतान।।650।।
तूं जुलहा सैतान है, मोमन ल्याया सीत।
गरीबदास इस पुरी में, कौन तुम्हारा मीत।।651।।
तूं एकलखोर एकला रहै, दूजा नहीं सुहाय।
गरीबदास काजी पंडित, मारैं तुझै हराय।652।।
सुनि ब्रह्मा के बेद, तूं नीच जाति कुल हीन।
गरीबदास काजी पंडित, सिमटैं दोनौं दीन।।653।।
च्यारि बेद षटशास्त्र, अठारा पुराण की प्रीति।
गरीबदास पंडित कहैं, सुन जुलहे मेरे मीत।।654।।
ज्ञान ध्यान असनान करि, सेवौ सालिग्राम।
गरीबदास पंडित कहैं, सुनि जुलहे बरियाम।।655।।
बोलै जुलहा अगम गति, सुन पंडित प्रबीन।
गरीबदास पत्थर पटकि, हौंना पद ल्यौ लीन।।656।।
अनंत कोटि ब्रह्मा गये, अनंत कोटि गये बेद।
गरीबदास गति अगम है, कोई न जानैं भेद।।657।।
अनंत कोटि सालिग गये, साथै सेवनहार।
गरीबदास वह अगम पंथ, जुलहे कूं दीदार।।658।।
काजी पंडित सब गये, शाह सिकंदर पास।
गरीबदास उस सरे में, सबकी बुद्धि का नाश।।659।।
कबीर और रैदास ने, भक्ति बिगारी समूल।
गरीबदास द्वै नीच हैं, करते भक्ति अदूल।।660।।
हिंदूसैं नहीं राम राम, मुसलमान सलाम।
गरीबदास दहूँ दीन बिच, ये दोनों बे काम।।661।।
उमटी काशी सब गई, षट दर्शन खलील।
गरीबदास द्वै नीच हैं, इन मारत क्या ढील।।662।।
दंडी सन्यासी तहां, सिमटे हैं बैराग। गरीबदास तहां कनफटा, भई सबन सें लाग।।663।।
एक उदासी बनखंडी, फूल पान फल भोग।
गरीबदास मारन चले, सब काशी के लोग।।664।।
बीतराग बहरूपीया, जटा मुकुट महिमंत।
गरीबदास दश दश पुरुष, भेडौं के से जन्त।।665।।
भस्म रमायें भुस भरैं, भद्र मुंड कचकोल।
गरीबदास ऐसे सजे, हाथौं मुगदर गोल।।666।।
छोटी गर्दन पेट बडे़, नाक मुख शिर ढाल।
गरीबदास ऐसे सजे, काशी उमटी काल।।667।।
काले मुहडे जिनौं के, पग सांकल संकेत।
गरीबदास गलरी बौहत, कूदैं जांनि प्रेत।।668।।
गाल बजावैं बंब बंब, मस्तक तिलक सिंदूर।
गरीबदास कोई भंग भख, कोई उडावैं धूर।।669।।
रत्नाले माथे करैं, जैसैं रापति फील। गरीबदास अंधे बहुत, फेरैं चिसम्यौं लील।।670।।
लीले चिसम्यौं अंधले, मुख बांवै खंजूस।
गरीबदास मारन चले, हाथौं कूंचैं फूस।।671।।
जुलहे और चमार परि, हुई चढाई जोर। गरीबदास पत्थर लिये, मारैं जुलहे तोर।।672।।
तिलक तिलंगी बैल जूं, सौ सौ सालिगराम।
गरीबदास चौकी बौहत, उस काशी के धाम।।673।।
घर घर चौकी पथरपट, काली शिला सुपेद।
गरीबदास उस सौंज पर, धरि दिये चारौं बेद।।674।।
ताल मंजीरे बजत हैं, कूदै दागड़ दुम। गरीबदास खर पीठ हैं, नाक जिन्हौं के सुम।।675।।
पंडित और बैराग सब, हुवा इकठा आंनि।
गरीबदास एक गुल भया, चौकी धरी पषांन।।676।।
एक पत्थर भूरी शिला, एक काली कुलीन।
गरीबदास एक गोल गिरद, एक लाम्बी लम्बीन।।677।।
एक पीतल की मूरती, एक चांदी का चौक।
गरीबदास एक नाम बिन, सूना है त्रिलोक।।678।।
एक सौने का सालिगं, जरीबाब पहिरांन।
गरीबदास इस मनुष्य सैं, अकल बडी अक श्वान।।679।।
काशीपुरी के सालिगं, सबै समटे आय। गरीबदास कुत्ता तहां, मूतैं टांग उठाय।।680।।
कुत्ता मुख में मूति है, कैसै सालिगराम। गरीबदास जुलहा कहै, गई अकल किस गाम।।681।।
धोय धाय नीके किये, फिरि आय मारी धार।
गरीबदास उस पुरी में, हंसें जुलाहा और चमार।।682।।
तीन बार मुख मूतिया, सालिग भये अशुद्ध।
गरीबदास चहूँ बेद में, ना मूर्ति की बुद्धि।।683।।
भृष्ट हुई काशी सबै, ठाकुर कुत्ता मूंति। गरीबदास पतथर चलैं, नागा मिसरी सूंति।।684।।
किलकारैं दुदकारहीं, कूदैं कुतक फिराय।
गरीबदास दरगह तमाम, काशी उमटी आय।।685।।
होम धूप और दीप करि, भेख रह्या शिर पीटि।
गरीबदास बिधि साधि करि, फूकैं बौहत अंगीठ।।686।।
काशीके पंडित लगे, कीना होम हजूंम। गरीबदास उस पुरी में, परी अधिकसी धूम।।687।।
चौकी सालिगराम की, मसकी एक न तिल।
गरीबदास कहै पातशाह, षटदर्शन कि गल।।688।।
धूप दीप मंदे परे, होम सिराये भेख। दास गरीब कबीर ने, राखी भक्ति की टेक।।689।।
सत कबीर रैदासतूं, कहै सिकंदर शाह। गरीबदास तो भक्ति सच, लीजै सौंज बुलाय।।690।।
कहै कबीर सुनि पातशाह, सुनि हमरी अरदास।
गरीबदास कुल नीचकै, क्यौं आवैं हरि पास।।691।।
दीन बचन आधीनवन्त, बोलत मधुरे बैन।
गरीबदास कुण्डल हिरद, चढे गगन गिरद गैंन।।692।।
लीला की पुरूष कबीर ने, सत्यनाम उचार।
गरीबदास गावन लगे, जुलहा और चमार।।693।।
दहनैं तौ रैदास है, बामी भुजा कबीर। गरीबदास सुर बांधि करि, मिल्या राग तसमीर।694।।
रागरंग साहिब गाया लीला कीन्ही ततकाल।
गरीबदास काशीपुरी, सौंज पगौं बिन चाल।।695।।
सौंज चली बिन पगौंसैं, जुलहै लीन्ही गोद।
गरीबदास पंडित पटकि, चले अठारा बोध।।696।।
जुलहे और चमारकै, भक्ति गई किस हेत।
गरीबदास इन पंडितौंका, रहि गया खाली खेत।।697।।
खाली खेत कुहेतसैं, बीज बिना क्या होय।
गरीबदास एक नाम बिन, पैज पिछौड़ी तोय।।698।।
तत्वज्ञान हीन श्वान ज्यों, ह्ना ह्ना करै हमेश।
दासगरीब कबीर हरि का दुर्लभ है वह देश।।699।।
दुर्लभ देश कबीर का, राई ना ठहराय। गरीबदास पत्थर शिला, ब्राह्मण रहे उठाय।।700।।
पत्थर शिलासैं ना भला, मिसर कसर तुझ मांहि।
गरीबदास निज नाम बिन, सब नरक कूं जांहि।।701।।
जटाजूट और भद्र भेख, पैज पिछौड़ी हीन।
गरीबदास जुलहा सिरै, और रैदास कुलीन।।702।।

क्रमशः______________
••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
आध्यात्मिक जानकारी के लिए आप संत रामपाल जी महाराज जी के मंगलमय प्रवचन सुनिए। साधना चैनल पर प्रतिदिन 7:30-8.30 बजे। संत रामपाल जी महाराज जी इस विश्व में एकमात्र पूर्ण संत हैं। आप सभी से विनम्र निवेदन है अविलंब संत रामपाल जी महाराज जी से नि:शुल्क नाम दीक्षा लें और अपना जीवन सफल बनाएं।
https://online.jagatgururampalji.org/naam-diksha-inquiry

Address

Sh*tla Para Hathkhoj
Bhilai
490025

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Roshan Lal Sahu posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Share