27/09/2021
आखिर छ लाख की चंप्पल,सरकार के सिस्टम को कैसे धता बता गई ...?
व्यवस्थाएं सरकार नहीं बल्कि सहकार और समाज के माध्यम से ही बेहतरीन तरीके से चाक-चौबंद रह सकती है।आज यह साबित कर दिया है, राजस्थान की रीट जैसी भारी भरकम भर्ती और उसकी सफलता के लिए सामाजिक समरसता के भाव से परिपूर्ण सेवा कार्यों ने।
तकरीबन चालिस लाख लोगों की एक साथ हलचल, जो लगभग राजस्थान रोडवेज की क्षमता के बराबर थी।उसके बावजूद बेरोजगार छात्रों के प्रति समाज का संवेदनशील रवैया रहा कि इनको कोई तकलीफ़ नहीं आवे,हम एक दिन के लिए घर पर ही रह जाएंगे।हां लोग लोकडाउन के अनुभव से सीख गए थे,घर पर रहना,जो आज असर भी दिखा। प्रदेश की बेरोजगार छात्र शक्ति के उज्जवल भविष्य की कामना में सबने सहयोग किया।कुछ तंबूरे बिगड़ेल बीज,मिलावटी डीएनए से थे,तो उन्होंने आज भी अपने नकली होने का परिचय अनेक अवैधानिक और अनुचित कृत्यों के माध्यम से दिया भी है। सरकार के इतने परिश्रम के बावजूद छल कपट करने वाले इन लोगों के हौसले बुलंद रहे हैं तो निश्चित रूप से इन बेईमान लोगों के तार सरकार में बैठे बेईमान लोगों से जुड़े हैं,जो इनको ठेठ से संरक्षण देते आ रहे हैं,उनको परख कर,खुद की साख को बेदाग रखने हेतू सरकार इनको जमींदोज और बेनकाब करें।जिससे सहकार भाव और समाज का सकारात्मक सहयोगात्मक सम्बन्ध बना रहेगा,और भविष्य में समाज आगे आएगा,बिन सामाजिक सहयोग से हम सफलता की कल्पना तक नहीं कर पाएंगे।
कुछ लोगों ने सरकार की पारदर्शी प्रणाली और उन्नत तकनीकी एक्सपर्ट टीम को भी धता बताते हुए,खुद को अभिमन्यु की भांति चक्रव्यूह के अंतिम घेरे तक को भेदने की हिमाकत की, परंतु अधबीच ही दबोचे गए, लेकिन फिर भी कई लोग डमी अभ्यर्थियों को बैठाने में अव्वल भी हो गए,जो सरकार और सिस्टम की साख पर धब्बा है।अगर ऐसे माड़ साब बण भी गए,तो कर्ज उतारने हेतू बाळ-गोपालों की गूगरी मटेरियल "पोषाहर"तक हड़प जाएंगे। सरकार के हर काम में नाकामी ही दिखाएंगे,वे कैसे समर्थ और समृद्ध राष्ट्र के भविष्य का निर्माण करेंगे,जो बेहद चिंताजनक विषय है, सरकार और समाज मिलकर ऐसे लपंटो को समय रहते धर दबोचे वरना मेहनत करने वाले विधार्थी मारे जाएंगे।
जय हिन्द, वन्दे मातरम