23/02/2024
"सिखिसिद्धक"
आज का सतगुरु जी का फरमान:
सचखंड श्री हरमंदिर साहिब जी से:
श्री अमृतसर
२३-०२-२०२४ अंग:-६६४*
धनासरी महला ३ ॥
सदा धनु अंतरि नामु समाले ॥ जीअ जंत जिनहि प्रतिपाले ॥ मुकति पदारथु तिन कउ पाए ॥ हरि कै नामि रते लिव लाए ॥१॥ गुर सेवा ते हरि नामु धनु पावै ॥ अंतरि परगासु हरि नामु धिआवै ॥ रहाउ ॥
हे भाई! नाम धन को अपने अंदर संभाल कर रख। उस परमात्मा का नाम (ऐसा) धन (है जो) सदा साथ निभाता है, जिस परमात्मा ने सारे जीवों की पलना (करने की जिम्मेदारी ली हुई है। हे भाई! विकारों से खलासी करने वाला नाम धन उन मनुखों को मिलता है, जो सुरत जोड़ के परमात्मा के नाम (-रंग) में रंगे रहते हैं॥१॥ हे भाई! गुरु की (बताई) सेवा करने से (मनुख) परमात्मा का नाम-धन हासिल कर लेता है। जो मनुख परमात्मा का नाम सुमिरन करता है, उस के अंदर (आत्मिक जीवन की)समझ पैदा हो जाती है॥रहाउ॥
Gather in and cherish forever the wealth of the Lord's Name, deep within; He cherishes and nurtures all beings and creatures. They alone obtain the treasure of Liberation, who are lovingly imbued with, and focused on the Lord's Name. ||1|| Serving the Guru, one obtains the wealth of the Lord's Name. He is illumined and enlightened within, and he meditates on the Lord's Name. ||Pause||
वाहेगुरजी का खालसा.!!
वाहेगुरु जी की फ़तेह.!!