23/02/2022
🙏🙏🏻🙏🙏🏻 🌹 नमस्कार 🌹 🙏🏻🙏🙏🏻🙏
दोनों हाथों को मिलाकर नमस्कार ,प्रणाम द्वारा किसी का अभिवादन करना हमारी सनातन संस्कृति का अभिन्न अंग है ...
नमस्कारम् ये कुर्वन्ति दिने दिने ।
आयु प्रजा बलं वीर्यं तेजस्तेषां च जायते ।।
अर्थात् , हमारे शास्त्रों मे उल्लेख मिलता है कि , सनातन धर्म संस्कृति मे नमस्कार - प्रणाम द्वारा किसी अपने समान या अपने बडों का भी अभिवादन करना , हमारी , आयु , परिवार , बल , शक्ति मे दिनों दिन वृद्धि करता है ...
क्योंकि , जब हम नमस्कार करने की प्रक्रिया से गुजरते हैं , तब हमारे अन्दर कईं प्रकार से विनम्रता का उद्गम होता है ...
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जैसे कि ,
🌹 हमारे अन्दर एक प्रेम पूर्ण आदरणीय सभ्यता जागृत
होती है ...
🌹 अनुशासन की उत्पत्ति होती है ...
🌹आदर भाव पनपता है ...
🌹 मन मे शीतलता आती है ...
🌹 मन - मस्तिष्क मे सुविचार आते हैं ...
🌹यथा समय झुकने की आदत पड़ती है ...
🌹क्रोध मिटता है ...
🌹 अहंकार का नाश होता है ...
उक्त सभी क्रियाओं के एकसाथ घटने से हमारा सर्व उत्तथान होता है । अतः इस प्रकार नमस्कार करना ही हमारी प्राचीन सनातन सभ्यता को दर्शाता है और हमें , दूसरों का आदर सत्कार करना सिखाता है ...
🙏🏻🙏 प्राचीन काल से प्रणाम , नमस्कार तीन प्रकार से करने की परम्परा हमारे ऋषियों - मुनियों ने बताई है ...
🥀 सामान्य नमस्कार -ठोडी़ के नीचे छाती के आगे
रखते हुए दोनों हाथ जोडकर प्रणाम करना
🥀पद नमस्कार - बडे , बुर्जुगों के पैर छूकर नमस्कार
करना
🥀साष्टांग नमस्कार - दंड़वत् प्रणाम करना मन्दिर देव
स्थान आदि पूजनीय के निमित
🙏 नमस्कार का आध्यात्मिक एवं वैज्ञानिक महत्व 🙏🏻
जब हम दोनों हाथ मिलाकर नमस्कार मुद्रा मे प्रणाम करते हैं तो :-
💥हमारा दाहिना हाथ - आचार - अर्थात् धर्म को दर्शाता है ..
💥बांया हाथ - विचार - अर्थात् दर्शन को इंगित करता है ....
🙏🙏🏻अतः , जब दोनों हाथ जुड़ते हैं हमारे मस्तिष्क की इडा़ , पिंगला नाडियों मे सकारात्मक स्पंदन होता है , जो सीधे अन्य नाड़ी सुषुम्ना तक जाकर हमारे शरीर मे सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है , उस छण पर नकारात्मकता पूरी तरह दूर हो जाती है , और हम अपने आप को आन्नदित महसूस करते हैं ! 🙏🏻🙏
💥इस तरह से शरीर मे नव चेतना , स्फूर्ति , प्रसन्नता आती है , मन आन्नदित रहता है । 💥
🙏शास्त्रोनुसार कभी भी किसी को एक हाथ से प्रणाम या नमस्कार नहीं करना चाहिए , ऐसा करने से आपके पुण्य का कुछ भाग स्वतः ही सामने वाले के पास चला जाता है ...
🙏हमेशा मन्दिर , देवाल्य आदि के सामने से निकलते हुए नमस्कार अवश्य करना चाहिए ...
🙏कहीं कोई धार्मिक अनुष्ठान - समारोह हो रहा हो तो भी वहाँ से नमस्कार करके ही आगे बढ़ना चाहिए
कहीं कोई साधु , संत , महात्मा दिख जाये या सामने आ जाये तो उन्हें अवश्य ही नमस्कार करना चाहिए ..
🙏🙏🏻 क्योंकि , जब आप किसी उक्त विषेश को नमस्कार करते हैं तो वह स्वभावतः ही आर्शीवाद दे देते हैं , जो ना जाने कब किस रुप मे फलित् हो जाये , इसको कौन जान सकता है , जिसका सबसे बडा उदाहरण मारकण्डेय ऋषि हैं जो सिर्फ नमस्कार करने की आदत के कारण ही अल्पायु से चिरंजीवी हो गये 🙏🙏🏻
शिक्षा :-
हमे अपने बच्चों को शुरुआत से ही नमस्कार करने की आदत डालनी चाहिए !