Parshuram sena

Parshuram sena vikas Chaudhary

ब्राह्मण।रजवाड़े ब्राह्मण राजवंशपौराणिक - 1. शुक 2. गृत्‍समद 3. शोनक 4. पुलिक 5. प्रद्यौत 6. पालक 7. विशाखपुप 8. अजय 9. ...
25/06/2021

ब्राह्मण।रजवाड़े
ब्राह्मण राजवंश
पौराणिक - 1. शुक 2. गृत्‍समद 3. शोनक 4. पुलिक 5. प्रद्यौत 6. पालक 7. विशाखपुप 8. अजय 9. नन्‍दीवर्धन राजवंश। पौराणिक उल्लेख होने का कारण इनका ऐतिहासिक महत्व कम मिलता है ।।

#ऐतिहासिक_ब्राम्हण_राजवंश -

#सातवाहन_राजवंश (60 ई.पू. से 240 ई.) भारत का प्राचीन ब्राम्हण राजवंश था, जिसने केन्द्रीय दक्षिण भारत पर शासन किया था। भारतीय इतिहास में यह राजवंश ‘आन्ध्र वंश’ के नाम से भी विख्यात है।

#कण्व_राजवंश या ‘काण्व वंश’ या ‘काण्वायन वंश’ (लगभग 73 ई. पू. पूर्व से 28 ई. पू.) मेघस्‍वाती नामक राजा ने कणवायन ब्राह्मणों से ही मगध का राज्य लिया था।

#शुंग_राजवंश प्राचीन भारत का एक शासकीय वंश था जिसने मौर्य राजवंश के बाद शासन किया। इसका शासन उत्तर भारत में 187 ईसा पूर्व से 75 ईसा पूर्व तक यानि 112 वर्षों तक रहा था। पुष्यमित्र शुंग इस राजवंश का प्रथम शासक था।

#वाकाटक_राजवंश (300 से 500 ईसवी लगभग) सातवाहनों के उपरान्त दक्षिण की महत्त्वपूर्ण शक्ति के रूप में उभरा। तीसरी शताब्दी ई. से छठी शताब्दी ई. तक दक्षिणापथ में शासन करने वाले समस्त राजवंशों में वाकाटक वंश सर्वाधिक सम्मानित एवं सुसंस्कृत था।

#चुटु_राजवंश के शासकों ने दक्षिण भारत के कुछ भागों पर ईसा पूर्व पहली शताब्दी से लेकर तीसरी शताब्दी (ईसा पश्चात) तक शासन किया। उनकी राजधानी वर्तमान कर्नाटक के उत्तर कन्नड जिले के बनवासी में थी। अशोक के शिलालेखों को छोड़ दें तो चुटु शासकों के शिलालेख ही कर्नाटक से प्राप्त सबसे प्राचीन शिलालेख हैं।

#कदंब_राजवंश दक्षिण भारत का एक ब्राह्मण राजवंश। कदंब कुल का गोत्र मानव्य था और उक्त वंश के लोग अपनी उत्पत्ति हारीति से मानते थे। ऐतिहासिक साक्ष्य के अनुसार कदंब राज्य का संस्थापक मयूर शर्मन्‌ नाम का एक ब्राह्मण था जो विद्याध्ययन के लिए कांची में रहता था और किसी पल्लव राज्यधिकारी द्वारा अपमानित होकर जिसने चौथी शती ईसवी के मध्य (लगभग 345 ई.) प्रतिशोधस्वरूप कर्नाटक में एक छोटा सा राज्य स्थापित किया था। इस राज्य की राजधानी वैजयंती थी ।

#गंग_राजवंश (पश्चिमी) दक्षिण भारत (वर्तमान कर्नाटक) का एक विख्यात राजवंश था। इसका राज्य 250 ई से 1000 ई तक अस्तित्वमान था। ये लोग काण्वायन गोत्र के थे और इनकी भूमि गंगवाडी कही गई है। इस वंश का संस्थापक कोंगुनिवर्मन अथवा माधव प्रथम था। उसका शासन 250 और 400 ई. के बीच रहा। उसकी राजधानी कोलार थी।

#वर्मन_राजवंश- धर्म महाराज श्री भद्रवर्मन् जिसका नाम चीनी इतिहास में फन-हु-ता (380-413 ई.) मिलता है ने वर्मन राजवंश की स्थापना की ये एक ऐसा एकमात्र राजवंश है इतिहास में जिसने चीन पर भी शासन किया है ।

#संगम_राजवंश विजयनगर साम्राज्य के 'हरिहर' और 'बुक्का' ने अपने पिता "संगम" के नाम पर संगम राजवंश (1336-1485 ई.) की स्थापना की थी। विजयनगर साम्राज्य पर राज करने वाला प्रथम ब्राम्हण शासक ।

#सालुव_राजवंश का संस्थापक 'सालुव नरसिंह' था। 1485 ई. में संगम वंश के विरुपाक्ष द्वितीय की हत्या उसी के पुत्र ने कर दी थी, और इस समय विजयनगर साम्राज्य में चारों ओर अशांति व अराजकता का वातावरण था। इन्हीं सब परिस्थितियों का फ़ायदा नरसिंह के सेनापति नरसा नायक ने उठाया। उसने विजयनगर साम्राज्य पर अधिकार कर लिया और सालुव नरसिंह को राजगद्दी पर बैठा दिया ।

#मोहियाल_राजवंश - (580 से 700 ईसवी)
मोहियाल दो शब्दों मोहि और आल से बनकर मिला है। मोहि यानि जमीन और आल यानि मालिक अर्थात भूमि का मालिक। इन अश्वत्थामा वंश के दत्त ब्राह्मणों को हुसैनी ब्राह्मण भी कहा जाता है ।

ाजवंश
ईस्‍वी सन् 769 के असापास अलोर चच राजवंश के
चच और चन्‍द्र ये दोनों ही राजा ब्राह्मण थे चच पुत्र दाहिर को अरब विजेता मुहम्‍मद इब्‍न कासिम ने पराजित किया था।

#भटिंडा_का_राजवंश ईस्‍वी सन् 977 के पहले जयपाल का राज्‍य था जो ब्राह्मण था।जिसे सुबुक्‍तगीन ने हराकर भटिंडा को राजधानी बनाया था।

#पेशवाई_राजवंश - (1714 - 1818 ईसवी)मराठा साम्राज्य के प्रधानमंत्रियों को पेशवा (मराठी: पेशवे) कहते थे। ये राजा के सलाहकार परिषद अष्टप्रधान के सबसे प्रमुख होते थे। राजा के बाद इन्हीं का स्थान आता था। शिवाजी के अष्टप्रधान मंत्रिमंडल में प्रधान मंत्री अथवा वजीर का पर्यायवाची पद था। 'पेशवा' फारसी शब्द है जिसका अर्थ 'अग्रणी' है।

#खण्डवाल_वंश इस राजवंश की स्थापना मैथिल ब्राह्मण जमींदारों ने 16वीं सदी की शुरुआत में की थी। ब्रिटिश राज के दौरान तत्कालीन बंगाल के 18 सर्किल के 4,495 गांव दरभंगा नरेश के शासन में थे। राज के शासन-प्रशासन को देखने के लिए लगभग 7,500 अधिकारी बहाल थे। भारत के रजवाड़ों में दरभंगा राज का अपना खास ही स्थान रहा है।

#इसके_अतिरिक्त_छोटे_छोटे_रियासते -
बनारस का राज , जौनपुर का राज, बेतिया राज , टिकारी राज, अयोध्या राज, हथुआ राज ,तमकुही राज ,अनापुर राज, अमावा राज , बभनगावां राज , भरतपुरा राज, धरहरा राज, शिवहर राज ,मकसुदपुर राज , औसानगंज राज आदि

#स्वनियंत्रित_जागीरे -
नरहन स्टेट, जोगनी एस्टेट, पर्सागढ़ एस्टेट (छपरा ), गोरिया कोठी एस्टेट (सिवान ), रूपवाली एस्टेट, जैतपुर एस्टेट, हरदी एस्टेट, ऐनखाओं जमींदारी, ऐशगंज जमींदारी, भेलावर गढ़, आगापुर स्टेट, पैनाल गढ़, लट्टा गढ़, कयाल गढ़, रामनगर जमींदारी, रोहुआ एस्टेट, राजगोला जमींदारी, पंडुई राज, केवटगामा जमींदारी, घोसी एस्टेट, परिहंस एस्टेट, धरहरा एस्टेट, रंधर एस्टेट, अनापुर एस्टेट ( इलाहाबाद), चैनपुर, मंझा, मकसूदपुर, रुसी, खैरअ, मधुबनी, नवगढ़ आदि

#विशेष -
ब्राह्मण का जीवन त्याग अथवा बलिदान का जीवन होता है। उसका प्रत्येक कार्य अपने लिए नहीं वरन् समाज के लिए होता है। ब्राह्मण स्वयं के लिए कुछ नहीं करता। इसी कारण उसे समाज में विशेष सम्मान की दृष्टि से देखा जाने लगा। अपनी साधारण सी आवश्यकता रख कर ज्ञान-विज्ञान की अनवरत साधना, और उससे समाज को उन्नत एवं स्वस्थ बनाने का परम पुनीत कर्तव्य एवं महान जिम्मेदारी ब्राह्मण पर ही है। किसी भी समाज एवम राष्ट्र का पहला सम्बंध ब्राम्हण से होता है ।
वेदानुसार -

“हरातत् सिच्यते राष्ट्र ब्राह्मणो यत्र जीयते”
अर्थात -
जिस देश का ब्राह्मण हारता है वह देश खोखला हो जाता है। इसमें कोई सन्देह नहीं कि राष्ट्र की जागृति, प्रगतिशीलता एवं महानता उसके ब्राह्मणों (बुद्धिजीवियों) पर आधारित होती है। ब्राह्मण राष्ट्र निर्माता होता है, मानव हृदयों में जागरण का संगीत सुनाता है, समाज का कर्णधार होता है। देश काल पात्र के अनुसार सामाजिक व्यवस्था में परिवर्तन करता है और नवीन प्रकाश चेतना प्रदान करता है। त्याग और बलिदान ही ब्राह्मणत्व की कसौटी है। प्राचीन काल से ही ब्राम्हण अपने दायित्वों का निर्वहन करते आये है और करते ही रहेन्गे हम सभी ब्राम्हणो को अपने गौरवशाली इतिहास की जानकारी होनी चाहिए और अपने कर्तव्यों का भी हममे अभी भी वो छमता है कि हम समाज का पुनर्निर्माण कर सकते है
जय भगवान परशुराम 🚩
हर-हर महादेव 🚩

14/05/2021
Jai shree parshuram ji
14/05/2021

Jai shree parshuram ji

18/11/2020

सरयूपारीण ब्राहमणों के मुख्य गाँव :

गर्ग (शुक्ल- वंश)

गर्ग ऋषि के तेरह लडके बताये जाते है जिन्हें गर्ग गोत्रीय, पंच प्रवरीय, शुक्ल बंशज कहा जाता है जो तेरह गांवों में बिभक्त हों गये थे| गांवों के नाम कुछ इस प्रकार है|

(१) मामखोर (२) खखाइज खोर (३) भेंडी (४) बकरूआं (५) अकोलियाँ (६) भरवलियाँ (७) कनइल (८) मोढीफेकरा (९) मल्हीयन (१०) महसों (११) महुलियार (१२) बुद्धहट (१३) इसमे चार गाँव का नाम आता है लखनौरा, मुंजीयड, भांदी, और नौवागाँव| ये सारे गाँव लगभग गोरखपुर, देवरियां और बस्ती में आज भी पाए जाते हैं|

उपगर्ग (शुक्ल-वंश)

उपगर्ग के छ: गाँव जो गर्ग ऋषि के अनुकरणीय थे कुछ इस प्रकार से हैं|

बरवां (२) चांदां (३) पिछौरां (४) कड़जहीं (५) सेदापार (६) दिक्षापार

यही मूलत: गाँव है जहाँ से शुक्ल बंश का उदय माना जाता है यहीं से लोग अन्यत्र भी जाकर शुक्ल बंश का उत्थान कर रहें हैं यें सभी सरयूपारीण ब्राह्मण हैं|

गौतम (मिश्र-वंश)

गौतम ऋषि के छ: पुत्र बताये जातें हैं जो इन छ: गांवों के वाशी थे|

(१) चंचाई (२) मधुबनी (३) चंपा (४) चंपारण (५) विडरा (६) भटीयारी

इन्ही छ: गांवों से गौतम गोत्रीय, त्रिप्रवरीय मिश्र वंश का उदय हुआ है, यहीं से अन्यत्र भी पलायन हुआ है ये सभी सरयूपारीण ब्राह्मण हैं|

उप गौतम (मिश्र-वंश)

उप गौतम यानि गौतम के अनुकारक छ: गाँव इस प्रकार से हैं|

(१) कालीडीहा (२) बहुडीह (३) वालेडीहा (४) भभयां (५) पतनाड़े (६) कपीसा

इन गांवों से उप गौतम की उत्पत्ति मानी जाति है|

वत्स गोत्र ( मिश्र- वंश)

वत्स ऋषि के नौ पुत्र माने जाते हैं जो इन नौ गांवों में निवास करते थे|

(१) गाना (२) पयासी (३) हरियैया (४) नगहरा (५) अघइला (६) सेखुई (७) पीडहरा (८) राढ़ी (९) मकहडा

बताया जाता है की इनके वहा पांति का प्रचलन था अतएव इनको तीन के समकक्ष माना जाता है|

कौशिक गोत्र (मिश्र-वंश)

तीन गांवों से इनकी उत्पत्ति बताई जाती है जो निम्न है|

(१) धर्मपुरा (२) सोगावरी (३) देशी

बशिष्ट गोत्र (मिश्र-वंश)

इनका निवास भी इन तीन गांवों में बताई जाती है|

(१) बट्टूपुर मार्जनी (२) बढ़निया (३) खउसी

शांडिल्य गोत्र ( तिवारी,त्रिपाठी वंश)

शांडिल्य ऋषि के बारह पुत्र बताये जाते हैं जो इन बाह गांवों से प्रभुत्व रखते हैं|

(१) सांडी (२) सोहगौरा (३) संरयाँ (४) श्रीजन (५) धतूरा (६) भगराइच (७) बलूआ (८) हरदी (९) झूडीयाँ (१०) उनवलियाँ (११) लोनापार (१२) कटियारी, लोनापार में लोनाखार, कानापार, छपरा भी समाहित है

इन्ही बारह गांवों से आज चारों तरफ इनका विकास हुआ है, यें सरयूपारीण ब्राह्मण हैं| इनका गोत्र श्री मुख शांडिल्य त्रि प्रवर है, श्री मुख शांडिल्य में घरानों का प्रचलन है जिसमे राम घराना, कृष्ण घराना, नाथ घराना, मणी घराना है, इन चारों का उदय, सोहगौरा गोरखपुर से है जहाँ आज भी इन चारों का अस्तित्व कायम है|

उप शांडिल्य ( तिवारी- त्रिपाठी, वंश)

इनके छ: गाँव बताये जाते हैं जी निम्नवत हैं|

(१) शीशवाँ (२) चौरीहाँ (३) चनरवटा (४) जोजिया (५) ढकरा (६) क़जरवटा

भार्गव गोत्र (तिवारी या त्रिपाठी वंश)

भार्गव ऋषि के चार पुत्र बताये जाते हैं जिसमें चार गांवों का उल्लेख मिलता है जो इस प्रकार है|

(१) सिंघनजोड़ी (२) सोताचक (३) चेतियाँ (४) मदनपुर

भारद्वाज गोत्र (दुबे वंश)

भारद्वाज ऋषि के चार पुत्र बताये जाते हैं जिनकी उत्पत्ति इन चार गांवों से बताई जाती है|

(१) बड़गईयाँ (२) सरार (३) परहूँआ (४) गरयापार

कन्चनियाँ और लाठीयारी इन दो गांवों में दुबे घराना बताया जाता है जो वास्तव में गौतम मिश्र हैं लेकिन इनके पिता क्रमश: उठातमनी और शंखमनी गौतम मिश्र थे परन्तु वासी (बस्ती) के राजा बोधमल ने एक पोखरा खुदवाया जिसमे लट्ठा न चल पाया, राजा के कहने पर दोनों भाई मिल कर लट्ठे को चलाया जिसमे एक ने लट्ठे सोने वाला भाग पकड़ा तो दुसरें ने लाठी वाला भाग पकड़ा जिसमे कन्चनियाँ व लाठियारी का नाम पड़ा, दुबे की गददी होने से ये लोग दुबे कहलाने लगें|

सरार के दुबे के वहां पांति का प्रचलन रहा है अतएव इनको तीन के समकक्ष माना जाता है|

सावरण गोत्र ( पाण्डेय वंश)

सावरण ऋषि के तीन पुत्र बताये जाते हैं इनके वहां भी पांति का प्रचलन रहा है जिन्हें तीन के समकक्ष माना जाता है जिनके तीन गाँव निम्न हैं|

(१) इन्द्रपुर (२) दिलीपपुर (३) रकहट (चमरूपट्टी)

सांकेत गोत्र (मलांव के पाण्डेय वंश)

सांकेत ऋषि के तीन पुत्र इन तीन गांवों से सम्बन्धित बताये जाते हैं|

(१) मलांव (२) नचइयाँ (३) चकसनियाँ

कश्यप गोत्र (त्रिफला के पाण्डेय वंश)

इन तीन गांवों से बताये जाते हैं|

(१) त्रिफला (२) मढ़रियाँ (३) ढडमढीयाँ

ओझा वंश

इन तीन गांवों से बताये जाते हैं|

(१) करइली (२) खैरी (३) निपनियां

चौबे -चतुर्वेदी, वंश (कश्यप गोत्र)

इनके लिए तीन गांवों का उल्लेख मिलता है|

(१) वंदनडीह (२) बलूआ (३) बेलउजां

एक गाँव कुसहाँ का उल्लेख बताते है जो शायद उपाध्याय वंश का मालूम पड़ता है|

🌇ब्राह्मणों की वंशावली🌇
भविष्य पुराण के अनुसार ब्राह्मणों का इतिहास है की प्राचीन काल में महर्षि कश्यप के पुत्र कण्वय की आर्यावनी नाम की देव कन्या पत्नी हुई। ब्रम्हा की आज्ञा से
दोनों कुरुक्षेत्र वासनी
सरस्वती नदी के तट
पर गये और कण् व चतुर्वेदमय
सूक्तों में सरस्वती देवी की स्तुति करने लगे
एक वर्ष बीत जाने पर वह देवी प्रसन्न हो वहां आयीं और ब्राम्हणो की समृद्धि के लिये उन्हें
वरदान दिया ।
वर के प्रभाव कण्वय के आर्य बुद्धिवाले दस पुत्र हुए जिनका
क्रमानुसार नाम था -
उपाध्याय,
दीक्षित,
पाठक,
शुक्ला,
मिश्रा,
अग्निहोत्री,
दुबे,
तिवारी,
पाण्डेय,
और
चतुर्वेदी ।
इन लोगो का जैसा नाम था वैसा ही गुण। इन लोगो ने नत मस्तक हो सरस्वती देवी को प्रसन्न किया। बारह वर्ष की अवस्था वाले उन लोगो को भक्तवत्सला शारदा देवी ने
अपनी कन्याए प्रदान की।
वे क्रमशः
उपाध्यायी,
दीक्षिता,
पाठकी,
शुक्लिका,
मिश्राणी,
अग्निहोत्रिधी,
द्विवेदिनी,
तिवेदिनी
पाण्ड्यायनी,
और
चतुर्वेदिनी कहलायीं।
फिर उन कन्याआं के भी अपने-अपने पति से सोलह-सोलह पुत्र हुए हैं
वे सब गोत्रकार हुए जिनका नाम -
कष्यप,
भरद्वाज,
विश्वामित्र,
गौतम,
जमदग्रि,
वसिष्ठ,
वत्स,
गौतम,
पराशर,
गर्ग,
अत्रि,
भृगडत्र,
अंगिरा,
श्रंगी,
कात्याय,
और
याज्ञवल्क्य।
इन नामो से सोलह-सोलह पुत्र जाने जाते हैं।
मुख्य 10 प्रकार ब्राम्हणों ये हैं-
(1) तैलंगा,
(2) महार्राष्ट्रा,
(3) गुर्जर,
(4) द्रविड,
(5) कर्णटिका,
यह पांच "द्रविण" कहे जाते हैं, ये विन्ध्यांचल के दक्षिण में पाये जाते हैं|
तथा
विंध्यांचल के उत्तर में पाये जाने वाले या वास करने वाले ब्राम्हण
(1) सारस्वत,
(2) कान्यकुब्ज,
(3) गौड़,
(4) मैथिल,
(5) उत्कलये,
उत्तर के पंच गौड़ कहे जाते हैं।
वैसे ब्राम्हण अनेक हैं जिनका वर्णन आगे लिखा है।
ऐसी संख्या मुख्य 115 की है।
शाखा भेद अनेक हैं । इनके अलावा संकर जाति ब्राम्हण अनेक है ।
यहां मिली जुली उत्तर व दक्षिण के ब्राम्हणों की नामावली 115 की दे रहा हूं।
जो एक से दो और 2 से 5 और 5 से 10 और 10 से 84 भेद हुए हैं,
फिर उत्तर व दक्षिण के ब्राम्हण की संख्या शाखा भेद से 230 के
लगभग है |
तथा और भी शाखा भेद हुए हैं, जो लगभग 300 के करीब ब्राम्हण भेदों की संख्या का लेखा पाया गया है।
उत्तर व दक्षिणी ब्राम्हणां के भेद इस प्रकार है
81 ब्राम्हाणां की 31 शाखा कुल 115 ब्राम्हण संख्या, मुख्य है -
(1) गौड़ ब्राम्हण,
(2)गुजरगौड़ ब्राम्हण (मारवाड,मालवा)
(3) श्री गौड़ ब्राम्हण,
(4) गंगापुत्र गौडत्र ब्राम्हण,
(5) हरियाणा गौड़ ब्राम्हण,
(6) वशिष्ठ गौड़ ब्राम्हण,
(7) शोरथ गौड ब्राम्हण,
(8) दालभ्य गौड़ ब्राम्हण,
(9) सुखसेन गौड़ ब्राम्हण,
(10) भटनागर गौड़ ब्राम्हण,
(11) सूरजध्वज गौड ब्राम्हण(षोभर),
(12) मथुरा के चौबे ब्राम्हण,
(13) वाल्मीकि ब्राम्हण,
(14) रायकवाल ब्राम्हण,
(15) गोमित्र ब्राम्हण,
(16) दायमा ब्राम्हण,
(17) सारस्वत ब्राम्हण,
(18) मैथल ब्राम्हण,
(19) कान्यकुब्ज ब्राम्हण,
(20) उत्कल ब्राम्हण,
(21) सरवरिया ब्राम्हण,
(22) पराशर ब्राम्हण,
(23) सनोडिया या सनाड्य,
(24)मित्र गौड़ ब्राम्हण,
(25) कपिल ब्राम्हण,
(26) तलाजिये ब्राम्हण,
(27) खेटुवे ब्राम्हण,
(28) नारदी ब्राम्हण,
(29) चन्द्रसर ब्राम्हण,
(30)वलादरे ब्राम्हण,
(31) गयावाल ब्राम्हण,
(32) ओडये ब्राम्हण,
(33) आभीर ब्राम्हण,
(34) पल्लीवास ब्राम्हण,
(35) लेटवास ब्राम्हण,
(36) सोमपुरा ब्राम्हण,
(37) काबोद सिद्धि ब्राम्हण,
(38) नदोर्या ब्राम्हण,
(39) भारती ब्राम्हण,
(40) पुश्करर्णी ब्राम्हण,
(41) गरुड़ गलिया ब्राम्हण,
(42) भार्गव ब्राम्हण,
(43) नार्मदीय ब्राम्हण,
(44) नन्दवाण ब्राम्हण,
(45) मैत्रयणी ब्राम्हण,
(46) अभिल्ल ब्राम्हण,
(47) मध्यान्दिनीय ब्राम्हण,
(48) टोलक ब्राम्हण,
(49) श्रीमाली ब्राम्हण,
(50) पोरवाल बनिये ब्राम्हण,
(51) श्रीमाली वैष्य ब्राम्हण
(52) तांगड़ ब्राम्हण,
(53) सिंध ब्राम्हण,
(54) त्रिवेदी म्होड ब्राम्हण,
(55) इग्यर्शण ब्राम्हण,
(56) धनोजा म्होड ब्राम्हण,
(57) गौभुज ब्राम्हण,
(58) अट्टालजर ब्राम्हण,
(59) मधुकर ब्राम्हण,
(60) मंडलपुरवासी ब्राम्हण,
(61) खड़ायते ब्राम्हण,
(62) बाजरखेड़ा वाल ब्राम्हण,
(63) भीतरखेड़ा वाल ब्राम्हण,
(64) लाढवनिये ब्राम्हण,
(65) झारोला ब्राम्हण,
(66) अंतरदेवी ब्राम्हण,
(67) गालव ब्राम्हण,
(68) गिरनारे ब्राम्हण
सभी ब्राह्मण बंधुओ को मेरा नमस्कार बहुत दुर्लभ जानकारी है जरूर पढ़े। और समाज में शेयर करे हम क्या है
इस तरह ब्राह्मणों की उत्पत्ति और इतिहास के साथ इनका विस्तार अलग अलग राज्यो में हुआ और ये उस राज्य के ब्राह्मण कहलाये।
ब्राह्मण बिना धरती की कल्पना ही नहीं की जा सकती इसलिए ब्राह्मण होने पर गर्व करो और अपने कर्म और धर्म का पालन कर सनातन संस्कृति की रक्षा करें।

*************************************
नोट:आप सभी बंधुओं से अनुरोध है कि सभी ब्राह्मणों को भेजें और यथासम्भव अपनी वंशावली का प्रसार करने में सहयोग करें।

 #राम_मंदिर_की_रक्षा_के_लिए_ब्राह्मण_अनंतराम_ #द्विवेदी_के_नेतृत्व_में_लड़ा_गया_मीर_बाकी_से_युद्ध ' #सबसे_पहला_महायुद्ध_...
25/08/2020

#राम_मंदिर_की_रक्षा_के_लिए_ब्राह्मण_अनंतराम_
#द्विवेदी_के_नेतृत्व_में_लड़ा_गया_मीर_बाकी_से_युद्ध
' #सबसे_पहला_महायुद्ध_मदारपुर_( #चौबेपुर_कानपुर)'
#में_1528_में_लड़ा_गया_था
एक ओर अत्यंत युद्ध-कुशल, समर्पित, धर्मनिष्ठ हज़ारों हज़ार कान्यकुब्ज "ब्राह्मण (जमीदारों)" की श्रेष्ठ सेना थी, #जिसका_नेतृत्व_ब्राह्मण_सेनापति_वीर_विक्रमी_कुशल #योद्धा ( #अनंत_राम_द्विवेदी) कर रहे थे जिसमें दुबे चौबे तिवारी टाइटल के जमीदार ब्राह्मण युद्ध किए थे!
दूसरी ओर आधुनिक शस्त्रों (तोपों) से सुसज्जित बाबर व उसकी सेना, जिसका सिपहसालार मीर बक़ी था.
राणासांगा और उनकी सेना को परास्त कर पानीपत के युद्ध से जीत हासिल कर आगे बढ़ती व रास्ते का हर युद्ध जीतती बाबर की आधुनिक तोपों से सुसज्जित सेना से लड़ते हुए पचासों हज़ार ब्राह्मण योद्धा वीरगति को प्राप्त हुए थे, कहते हैं कि गंगा का पानी लाल हो गया था.
ये ब्राह्मण महायोद्धा मात्र इसलिए लड़े थे तकि बाबर की सेना अयोध्या पहुंचकर राममंदिर नष्ट न करने पाये, इसके अलावा इन्हें किसी राज-पाठ या अन्य किसी भी बात का स्वार्थ न था.

नमन है उन वीर हुतात्माओं को.
राम मंदिर का पुनः निर्माण उन धर्मप्राण वीर योद्धाओं को सच्ची श्रद्धांजलि होगी.
#मदारपुर_युद्ध_वर्णन
1)पंडित दुर्गा दत्त त्रिपाठी व पंडित मुकुंद राम कृत कान्यकुब्ज वंशावली
2)पंडित मुन्नीलाल मिश्रा कृत कान्यकुब्ज भूषण
3) पंडित हरिप्रसाद भागीरथ द्वारा प्रकाशित बृहद कान्यकुब्ज दर्पण खेमराज प्रकाशन
4) गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित 'सतसई' दोहावली मैं दोहा नंबर 89 मैं भी इसका वर्णन है

और बहुत सारे इतिहासकर्ताओं ने इस युद्ध का वर्णन किया!

्री_परशुराम!!
🚩जयति ब्राह्मण जयति सनातन🚩

Jai dada parshuram ji
21/07/2020

Jai dada parshuram ji

एक गरीब किसान के बेटे अनुराग तिवारी ने 12 वी कक्षा मे 98% नम्बर हासिल किये है शुभकामनाएं पंडित जी
17/07/2020

एक गरीब किसान के बेटे अनुराग तिवारी ने
12 वी कक्षा मे 98% नम्बर हासिल किये है
शुभकामनाएं पंडित जी

एक बार फिर से  #ब्राह्मण_रेजिमेंट की मांग जोरों पर हो रही है... क्या थी  ब्राह्मण रेजिमेंट और क्यों इसे खत्म कर दिया गया...
16/06/2020

एक बार फिर से #ब्राह्मण_रेजिमेंट की मांग जोरों पर हो रही है...
क्या थी ब्राह्मण रेजिमेंट और क्यों इसे खत्म कर दिया गया...?
कोई जानता है ब्राह्मण रेजिमेंट के बारे में....?
चलिए जान लेते हैं पहले जिसको बनाने की मांग आए दिन फिर से हो रही है...
सोशल डब्बा: ट्वीटर पर लोगो ने जोर शोर से मांग रखी की वापस एक बार फिर ब्राह्मण रेजिमेंट को भारतीय सेना में शामिल किया जाना चाहिए जोकि अंग्रेज़ो के शासन में गठित की गई थी।
ब्राह्मणो का भारत में युद्ध कौशल सिखाने का लम्बा इतिहास रहा है जिसमे #पांडवो के गुरु रहे #द्रोणाचार्य जिन्होंने मिलिट्री साइंस अर्थार्त धनुर्विद्या, युद्ध कौशल पांडवो को सिखाया था।

1857 में #मंगल_पांडेय द्वारा की कई पहली क्रांति को भी देश भली भांति जानता है। लेकिन जिस *ब्राह्मण रेजिमेंट* की आज बात हम कर रहे है उसे शायद ही कोई जानता हो....

दरअसल पहली पूर्ण #ब्राह्मण_रेजिमेंट की शुरुआत वर्ष 1776 से हुई जिसको *30th बंगाल नेटिव इन्फेंट्री बटालियन* के नाम से जाना जाता था। वहीं समय के साथ हुए बदलाव के साथ वर्ष 1901 में इसका नाम पहली बार *1st ब्राह्मण इन्फेंट्री पड़ा* ।

महज दो वर्षो बाद ही इसका नाम फिर बदल कर *1st Brahmans* कर दिया गया था । 1st Brahmans भारत की प्रोफेशनल सेनाओ में से एक थी जिसको उसकी आकर्षित वर्दी के लिए भी जाना जाता था।

1st Brahmans ब्रिटिश इंडियन आर्मी की इन्फेंट्री विंग से सम्बन्ध रखती थी जिसको अवध के राज्य में सन 1776 में कप्तान टी नैलोर ने बनाया था। आगे चल कर 1922 में इसे बदलकर ‘4th Battalion 1st Punjab Regiment’ के नाम से जाने जाना लगा था। हालाँकि 1931 में इस इन्फेंट्री यूनिट को कई कारणों की वजह से बंद कर दिया गया था।

इन युद्धों में अपने कौशल के लिए मिले थे सर्वोच्च तमगे
ब्राह्मण रेजिमेंट को अपने युद्ध कौशल के लिए जाना जाता रहा था जिस कारण से उसके आकर्षक वर्दी पर कई तमगे भी देखने को मिल जाते थे।
1st Brahmans Infantry
जिनमे से सेकंड मराठा वॉर 1803-05, एंग्लो-नेपालीज वॉर 1814-16, सेकंड एंग्लो-बर्मीज़ वॉर 1824-26 व भुरटपोरे कैंपेन 1826 में उनके कौशल का परचम आज तक लहराता है।

1st Brahmans के साथ ही ब्रिटिश राज में 3rd Brahmans भी हुआ करती थी जोकि 1798 में गठित की गई थी। वहीं वर्ष 1922 में सेकंड एंग्लो-अफ़ग़ान वॉर व द्वित्य विश्व युद्ध में भाग लेने के बाद इसे बंद कर दिया गया था।

क्यों बंद कर दिया गया....?
शायद जब पढे लिखे ब्राह्मण के हाथों में शास्त्रों के साथ अस्त्र-शस्त्र भी थमा दिए जाएं तो उन्हें परशुराम बनने से कोई नहीं रोक सकता...

जय परशुराम
जयतु भारतम

रणवीर_सेना... एक ऐसा नाम जो आज अपनी सार्थकता जता रहा है....मैं बार बार रणवीर सेना के इतिहास के बारे में बताता हूँ जो आज ...
01/06/2020

रणवीर_सेना... एक ऐसा नाम जो आज अपनी सार्थकता जता रहा है....

मैं बार बार रणवीर सेना के इतिहास के बारे में बताता हूँ जो आज हिंदुओं की जरुरत है। 90 के दशक में जब नक्सलियों ने याने दलितों और मुल्लों ने चुन चुन कर भूमिहार, राजपूत, ब्राह्मण जैसे अगड़ी जातियों का सामूहिक नरसंहार शुरू कर दिया था। बिहार में हाहाकार मचा था। जो सवर्ण अपने गाँव जाता वो लौट कर नहीं आता था। जो गाँव में थे सब भाग कर शहर आ गए थे। पूरा बिहार कश्मीर और कैराना बन चुका था। अपनों की लाश जलाने के लिए भी गाँव में जाने की हिम्मत नहीं थी। लाखों एकड़ जमीन परती पड़ी थी। प्रशासन लालू की थी इसलिए सुनने वाला कोई नहीं था। ये वर्ग लालू का वोटर नहीं था इसलिए लालू वामपंथियों के साथ मिलकर इसका नामोनिशान मिटा देना चाहता था।

लेकिन सवर्णों में एक बुजुर्ग ने सीना ठोंका, एक छोटी सी जगह पर कुछ लोगों के साथ बैठक की, और हाथों में हथियार उठाने का संकल्प लिया। इतना अपमान बर्दाश्त ना था। सबसे पहले कुछ सवर्णों ने अपने लाइसेंसी हथियार आगे किये और सहायता दी। इसके बाद जो हुआ वो इतिहास बन गया। खून की नदी बाह चली। नक्सलियों की क्रूरता भी इनकी क्रूरता के सामने बौनी पड़ गयी। उस वक़्त बिहार सरकार में हाशिये पर गए कई बीजेपी नेताओ का समर्थन मिलना शुरू हो गया। रणवीर सेना का नाम सुनकर बड़े बड़े पुलिस अधिकारीयों के हाथ पाँव फूल जाते थे। मंत्री विधायक सांसदों में खौफ समा गया था।

नक्सली जो कल तक कहीं भी किसी सवर्ण को मारकर निश्चिन्त रहते थे, वो अब एक भी सवर्ण को मारने के पहले दस बार सोचते थे, क्योंकी एक के बदले दस अपने मारे जाएंगे ये तय था। पुरे बिहार में अमन चैन लौट आया। नक्सली वापिस भाग कर बंगाल में घुस गए। लाखों सवर्ण अपने गाँव लौट कर खेती करने लगे। सभी के अंदर गर्व का भाव था, सभी निर्भय हो चुके थे। वह बुजुर्ग आदमी ब्रह्मेश्वर मुखिया लोगों के लिए अवतार बन कर आये।
यहाँ चुन्नु शर्मा के जिक्र के बिना ये पोस्ट अधूरा माना जायेगा
चुन्नु शर्मा गया के बेला का रहनेवाला था और उसका खौफ का आलम ये था कि बेला विधायक उसके डर से उसके जिंदा रहते बेला नहीं गये उसन एलान कर रखा था कि विधायक बेला आयेगा तो मार देगे.
वो विधायक MCC का supporter था
और हाँ ब्रह्मेश्वर मुखिया जी को 2बार पुलिस गिरफ्तार करने के बाद उनके घर पहुँचाकर आयी थी और वो भी लालू के कहने पे मतलब लालू भी डरता था मुखिया दा से,

बिहार में ब्रह्मेश्वर मुखिया का नाम आज भी लोग इज्जत से #मुखिया_दादा कह के लेते है

आज का कोई भी हिन्दू संगठन रणवीर सेना जैसा नहीं। ये भी सच है कि यहां रणवीर सेना की स्थापना तब हुयी जब पानी सर से ऊपर गुजर चूका था और जीने का रास्ता सिर्फ हथियारों से होकर जाता था।

यही एकमात्र तरीका है, कोई पार्टी कोई नेता साथ नहीं देगा। लेकिन जब खड़े होंगे तो मैं आस्वस्त हूँ पूरी दुनिया से समर्थन मिलेगा। हिंसा का जवाब अहिंसा पहले भी कभी नहीं था, ना आज है।

16/04/2020

ब्राह्मणों के आस्पद (उपाधियां)

1- पंडित
2- पांडेय
3- पंड्या
4- पंत
5- पाठक
6- मिश्रा
7- षड़ंगी
8- कौल
9- सुयाल
10- श्रोत्रिय
11- उप्रेती
12- अवस्थी
13- चोबे
14- अग्निहोत्री
15- चतुर्वेदी
16- द्विवेदी
17- त्रिवेदी
18- भार्गव
19- राजगुरु
20- गौड़
21- ओझा
22- झा
23- जोशी
24- शुक्ला
25- दीक्षित
26- यजुर्वेदी
27- दुबे
28- तिवारी
29- त्रिपाठी
30- उपाध्याय
31- भट्ट
32- त्यागी
33- मठपाल
34- व्यास
35- कुलकर्णी
36- बक्शी
37- सप्रू
38- चौधरी
39- दत्त
40- बाजपेई
41- गांगुली
42- तेंदुलकर
43- अतुलकर
44- गंजू
45- ओली
46- ठाकुर
47- मैनाली
48- पोख्रेल
49- अय्यर
50- राजपुरोहित
51- देशपांडे
52- देशमुख
53- नौटियाल
54- सुंद्रियाल
55- रावल
56- गोखले
57- खेर
58- आचार्य
59- टिक्कू
60- शास्त्री
61- वैद्य
62- मैथिल
63- गोस्वामी
64- पुरोहित
65- सारस्वत
66- सनाढ्य
67- झा
68- बंदोपाध्याय
69- चट्टोपाध्याय
70- मुखर्जी
71- चटर्जी
72- बनर्जी
73- भट्टाचार्य
74- भूमिहार
75- शर्मा

शर्मा गैर ब्राह्मण भी उपयोग कर रहे हैं।

बाकी कोई बचा तो आप बताइए 🙏
✍️पंडित पवन उप्रेती
जय ब्राह्मण जय परशुराम

लेफ्टिनेंट जरनल मनोज नारवाने सेना प्रमुख बनने के साथ ही भारत के 27वें सेना प्रमुख होंगे ।इसके अलावा वह भारतीय सेना के इस...
19/12/2019

लेफ्टिनेंट जरनल मनोज नारवाने सेना प्रमुख बनने के साथ ही भारत के 27वें सेना प्रमुख होंगे ।

इसके अलावा वह भारतीय सेना के इस सर्वोच्च पद पर अपने शौर्य और वीरता के बल पर पहुंचने वाले 12वें ब्राह्मण हैं। आइये जानें ऐसे ही अन्य ब्राह्मण रत्नों को।

1. जरनल KS थिमैया (1957-1961), तमिल ब्राह्मण
2. जरनल जयंतो नाथ चौधरी (1963-1966), बंगाली जिमिंदार ब्राह्मण
3. जरनल पी. कुमारमंगलम (1966-1969), तमिल ब्राह्मण
4. जरनल तापेश्वर रैना (1975-1978) , कश्मीरी पंडित
5. जरनल कृष्णा राव (1981-1983), तेलगु ब्राह्मण
6. शहीद जरनल अरुण वैद्य (1983-1986), मराठी ब्राह्मण
7. जरनल कृष्णस्वामी सुंदरजी (1986-1988), तमिल ब्राह्मण
8. जरनल विश्वनाथ शर्मा (1988-1990), पंजाबी ब्राह्मण
9. जरनल बिपिन चन्द्र जोशी (1993-1994), गढ़वाली ब्राह्मण
10. जरनल शंकर रॉय चौधरी (1994-1996), बंगाली जिमिंदार ब्राह्मण
11. जरनल सुंदरराजन पद्मनाभन (2000-2002), मलयाली निम्बूदरी ब्राह्मण
12.लेफ्टिनेंट जरनल मनोज मुकुंद नारवाने (2019-2022), मराठी चितपावन ब्राह्मण

*जरनल अरुण वैद्य शहादत को प्राप्त होने वाले एक मात्र सेना प्रमुख हैं। उनकी रिटायरमेंट के बाद उनकी हत्या सिख आतंकवादियों ने कर दी थी।

*जरनल जोशी सेना प्रमुख होते हुए मृतक होने वाले एकमात्र सेना प्रमुख हैं। स्वास्थ्य बिगड़ जाने के कारण उनकी मृत्यु सेना प्रमुख रहते हुए ही हो गयी थी।

* अगर लेफ्टिनेंट जरनल पंडित प्रवीण बख्शी को उनकी वरीयता के आधार पर सेना प्रमुख बनाया जाता तो 2016 से 2019 तक वह सेना प्रमुख रहते।

Address

Bharthana
206242

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Parshuram sena posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Place Of Worship

Send a message to Parshuram sena:

Share