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शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशंविश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्ण शुभाङ्गम् ।लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यम्वन्दे...
23/07/2023

शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं
विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्ण शुभाङ्गम् ।
लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यम्
वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम् ॥

22/07/2023

कर्ण और अर्जुन के पिछले जन्म की कथा
कर्ण और अर्जुन के पिछले जन्म की कथा का वर्णन पद्म पुराण मे आता है एक बार भगवान ब्रह्मा और महादेव के बीच युद्ध होता है, महादेव ब्रह्माजी के पाँचवें सर को काट देते है। क्रोधित ब्रह्मदेव के शरीर से पसीना निकलता है और उस पसीने से एक वीर योद्धा उत्पन्न होता है। जो स्वेद से जन्मा इसलिए स्वेदज के नाम से जाना जाता है। स्वेदज पिता ब्रह्माजी के आदेश से महादेव से युद्ध करने जाता है। महादेव भगवान विष्णु के पास क्रोधित ब्रह्मा द्वारा जन्म लेने वाले स्वेदज का कुछ उपाय बताने को कहते हैं। भगवान विष्णु अपने रक्त से एक वीर को जन्म देते है। रक्त से जन्मा इसलिए उसे रक्तज के नाम से जाना जाता है। स्वेदज 1000 कवच के साथ जन्मा था और रक्तज 1000 हाथ और 500 धनुष के साथ । भगवान ब्रह्माजी भी विष्णु से ही उत्पन्न हुए थे इसलिए स्वेदज भी भगवान विष्णु का ही अंश था। स्वेदज और रक्तज में भयंकर युद्ध होता हे। स्वेदज, रक्तज के 998 हाथ कट देता है और 500 धनुष तोड़ देता हे। वही रक्तज, स्वेदज के 999 कवच तोड़ देता है। रक्तज बस हारने ही वाला होता है कि भगवान विष्णु समझ जाते हैं की रक्तज स्वेदज से हार जाएगा। इसलिए वे उस युद्ध को शांत करवाते हैं। स्वेदज दानवीरता दिखाते हुए रक्तज को जीवन दान देता है। भगवान विष्णु स्वेदज की जवाबदेही सूर्यनारायण को सोंपते है, और रक्तज की इंद्रदेव को। वह इंद्रदेव को वचन देते है की अगले जन्म में रक्तज अपने प्रतिद्वंद्वी स्वेदज का वध अवश्य करेगा। द्वापर युग में रक्तज अर्जुन और स्वेदज कर्ण के रुप में जन्म लेते हैं और अर्जुन अपने सबसे महान प्रतिद्वंद्वी कर्ण की युद्ध के नियमों के विरुद्ध हत्या की कर्ण एक सच्चा मित्र था जो सत्य को जानने के बाद भी कि वह भी एक पाण्व पुत्र है दुर्योधन का साथ दिया महाभारत के इस योध्दा को 🙏💕

16/07/2023

ॐ एकदन्ताय विहे वक्रतुण्डाय धीमहि तन्नो दन्तिः प्रचोदया

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