09/07/2023
🕉️🙏ओ३म् सादर नमस्ते जी 🙏🕉️
🌷🍃 आपका दिन शुभ हो 🍃🌷
दिनांक - - ०९ जुलाई २०२३ ईस्वी
दिन - - रविवार
🌗 तिथि - - सप्तमी ( १९:५९ तक तत्पश्चात अष्टमी )
🪐 नक्षत्र - - उत्तराभाद्रपद ( १९:२९ तक तत्पश्चात रेवती )
पक्ष - - कृष्ण
मास - - श्रावण
ऋतु - - वर्षा
सूर्य - - दक्षिणायन
🌞 सूर्योदय - - प्रातः ५:३० पर
🌞 सूर्यास्त - - १९:२२ पर
🌗 चन्द्रोदय - - २३:५४ पर
🌗 चन्द्रास्त - - ११:४१ पर
सृष्टि संवत् - - १,९६,०८,५३,१२४
कलयुगाब्द - - ५१२४
विक्रम संवत् - - २०८०
शक संवत् - - १९४५
दयानंदाब्द - - १९९
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🚩‼️ओ३म्‼️🚩
🔥महर्षि दयानन्द सरस्वती के अनुयायी क्यों बनें ?
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🌷( १) दयानन्द का सच्चा अनुयायी भूत-प्रेत, पिशाच, डाकिनी, शाकिनी आदि कल्पित पदार्थों से कभी भयभीत नहीं होता ।
🌷(२ ) आप फलित ज्योतिष, जन्म-पत्र, मुहूर्त, दिशा-शूल, शुभाशुभ ग्रहों के फल, झूठे वास्तु शास्त्र आदि धनापहरण के अनेक मिथ्या जाल से स्वयं को बचा लेंगें ।
🌷 ( ३) कोई पाखण्डी साधु, पुजारी, गंगा पुत्र आपको बहका कर आपसे दान-पुण्य के बहाने अपनी जेब गरम नहीं कर सकेगा ।
🌷 ( ४ ) शीतला, भैरव, काली, कराली, शनैश्चर आदि अप-देवता, जिनका वस्तुतः कोई अस्तित्व ही नहीं है, आपका कुछ भी अनिष्ट नहीं कर सकेंगे । जब वे हैं ही नहीं तो बेचारे करेंगे क्या ?
🌷( ५ ) आप मदिरापान, धूम्रपान, विभिन्न प्रकार के मादक से बचे रह कर अपने स्वास्थ्य और धन की हानि से बच जायेंगे ।
🌷( ६ ) बाल-विवाह, वृद्ध-विवाह, नारी-प्रताडना, पर्दा-प्रथा, अस्पृश्यता आदि सामाजिक बुराइयों से दूर रहकर सामाजिक सुधार के उदाहरण बन सकेंगे ।
🌷 ( ७ ) जीवन का लक्ष्य सादगी को बनायेंगे और मित व्यवस्था के आदर्श को स्वीकार करने के कारण दहेज, मिलनी, विवाहों में अपव्यय आदि पर अंकुश लगाकर आदर्श उपस्थित करेंगे ।
🌷( ८ ) दयानन्द का अनुयायी होने के कारण अपने देश की भाषा, संस्कृति, स्वधर्म तथा स्वदेश के प्रति आपके हृदय में अनन्य प्रेम रहेगा ।
🌷 ( ९ ) आप पश्चिम के अन्धानुकरण से स्वयं को तथा अपनी सन्तान को बचायेंगे तथा फैशन परस्ती, फिजूलखर्ची, व्यर्थ के आडम्बर तथा तडक-भडक से दूर रहेंगे ।
🌷 ( १० ) आप अपने बच्चों में अच्छे संस्कार डालेंगे ताकि आगे चलकर वे शिष्ट, अनुशासन प्रिय, आज्ञाकारी बनें तथा बडों का सम्मान करें ।
🌷 ( ११ ) आप अपने कार्य, व्यवसाय, नौकरी आदि में समय का पालन, ईमानदारी, कर्त्तव्यपरायणता को महत्त्व देंगे ताकि लोग आपको मिसाल के तौर पर पेश करें ।
🌷 ( १२ )वेदादि सद् ग्रन्थों के अध्ययन में आपकी रुचि बढेगी, फलतः आपका बौद्धिक स्तर ऊंचा होगा ।
इसलिए आओं लौट चले वेदों की ओर ।
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💐🙏आज का वेद मंत्र 💐🙏
🌷ओ३म् स्वस्ति नो मिमीतामश्विना भग: स्वस्ति देव्यदितिरनर्वण: । स्वस्ति पूषा असुरो दधातु न: स्वस्ति द्यावापृथिवी सुचेतुना।( ऋग्वेद ५|५१|११ )
💐 अर्थ :- परमेश्वर हमारा कल्याण करें ।ऐश्वर्यरूप । आपका जल और वायु सुख का सम्पादन करें ।अखण्डित प्रकाश वाली विधुत- विद्या हम लोगों का कल्याण करक।पुष्टिकारक अन्न, दुग्धादि पदार्थ तथा प्राणों को बल देने वाले मेघादि हमें कल्याण को देने वाले हों
।द्यौ तथा पृथ्वी उत्तम् विज्ञान के साथ हमारे लिए कल्याणकारी हो।
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🔥विश्व के एकमात्र वैदिक पञ्चाङ्ग के अनुसार👇
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🙏 🕉🚩आज का संकल्प पाठ🕉🚩🙏
(सृष्ट्यादिसंवत्-संवत्सर-अयन-ऋतु-मास-तिथि -नक्षत्र-लग्न-मुहूर्त) 🔮🚨💧🚨 🔮
ओ३म् तत्सत् श्रीब्रह्मणो द्वितीये परार्द्धे श्रीश्वेतवाराहकल्पे वैवस्वतमन्वन्तरे अष्टाविंशतितमे कलियुगे कलिप्रथमचरणे 【एकवृन्द-षण्णवतिकोटि-अष्टलक्ष-त्रिपञ्चाशत्सहस्र- चतुर्विंशत्युत्तरशततमे ( १,९६,०८,५३,१२४ ) सृष्ट्यब्दे】【 अशीत्युत्तर-द्विसहस्रतमे ( २०८०) वैक्रमाब्दे 】 【 द्विशतीतमे ( २००) दयानन्दाब्दे, पिंगल-संवत्सरे, रवि- दक्षिणायने, वर्षा -ऋतौ, श्रावण - मासे, कृष्ण - पक्षे, सप्तम्यां
तिथौ, उत्तराभाद्रपद
नक्षत्रे, रविवासरे
तद्नुसार ०९ जुलाई , २०२३ ईस्वी , शिव -मुहूर्ते, भूर्लोके जम्बूद्वीपे भारतवर्षे भरतखण्डे
आर्यावर्तान्तर्गते.....प्रदेशे.... जनपदे...नगरे... गोत्रोत्पन्न....श्रीमान .( पितामह)... (पिता)...पुत्रोऽहम् ( स्वयं का नाम)...अद्य प्रातः कालीन वेलायाम् सुख शांति समृद्धि हितार्थ, आत्मकल्याणार्थ,रोग,शोक,निवारणार्थ च यज्ञ कर्मकरणाय भवन्तम् वृणे
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