12/05/2026
हमलोग संतों के ज्ञान के अनुकूल सत्संग करते हैं। संतों ने ईश्वर का ज्ञान दिया है कि जो इन्द्रिय-ज्ञान में नहीं आता केवल आत्मा के ही ज्ञान में आता है, वह है ईश्वर। इन्द्रियों में चेतन आत्मा की धारा है, तब इन्द्रियों में ज्ञान है। इन्द्रियों के संग में रहकर आत्मा को जो ज्ञान होता है और इन्द्रियों के संग को छोड़कर तब जो चेतन आत्मा को ज्ञान होता है, दोनों में बड़ी भिन्नता है। इन्द्रिय-ज्ञान में संसार के पदार्थों को पकड़ते हैं और केवल चेतन आत्मा के ज्ञान से ईश्वर की पकड़ होती है। ईश्वर का प्रत्यक्ष ज्ञान केवल चेतन आत्मा से ही होता है। जो देश-काल में है और अदलता-बदलता है, वह माया है।
- संत सद्गुरु महर्षि मेँहीँ परमहंस जी महाराज