बाबा राजा हरदौल मंदिर , नगरह

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बाबा राजा हरदौल मंदिर , नगरह यह मंदिर (बाबा हरदौल चबूतरा) ,1942-43 ई0 के करीब ओरछा के राजकुमार हरदौल की स्मृति में बनाया गया था।

1942-43 ई के करीब ओरछा के राजकुमार हरदौल की स्मृति में बनाया गया उनका हीं समाधि मंदिर है। बाबा राजा हरदौल की प्रचलित कथा :-
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यह कहानी करीब 400 साल पहले ओरछा के दीवान हरदौल, उनकी बहन कुंजाबाई और उनकी भाभी चंपावती की है। मरने के बाद भी भांजी की शादी में भात लेकर पहुंचे...


:- कहा जाता है कि हरदौल की समाधि दतिया के पास बनाई गई। जुझार सिंह और हरदौल की बहन कुंजाबाई ने जब अपने जीवित भाई जुझार सिंह को अपनी बेटी की शादी में आने का न्योता भेजा, तो जुझार सिंह ने कहा कि वह अपने प्रिय भाई हरदौल को आमंत्रित करे।
:- इसके बाद कुंजाबाई अपने भाई हरदौल की समाधि पर जाकर रोने लगी। बहन के रोने पर हरदौल प्रकट हुए और उन्होंने अपनी बहन से वादा किया कि वे भांजी की शादी में भात लेकर जरूर आएंगे।
:- कहा जाता है कि राजा हरदौल ने अदृश्य रहकर अपनी भांजी की शादी में भात दिया। इसके बाद से बुंदेलखंड के हर घर में शादी के मौके पर हरदौल को याद किया जाता है और उन्हें शादी में आमंत्रित किया जाता है।

भाभी की इज्जत बचाने के लिए खुद पी लिया जहर :-

:- हरदौल ओरछा के राजा वीर सिंह देव के बेटे थे। वीर सिंह देव ने अपने बड़े बेटे जुझार सिंह को ओरछा की राजगद्दी सौंपी और हरदौल को ओरछा का दीवान बनाया।
- जुझार सिंह कई बार मुगलों से उलझते रहते थे। ऐसे में रियासत का सारा काम हरदौल ही देखते थे।
:- ओरछा के गजेटियर में इस बात का उल्लेख है कि हरदौल से जलकर किसी ने राजा जुझार सिंह से शिकायत कर दी कि उनकी पत्नी चंपावती और हरदौल सिंह के बीच अवैध संबंध है।
- इस पर राजा जुझार सिंह ने रानी चंपावती को अपने हाथों से हरदौल को जहर परोसने का आदेश दिया। रानी जब यह न कर सकी, तो हरदौल ने अपनी भाभी का दामन पाक साफ रखने के लिए खुद जहर पी लिया।

हर धार्मिक आयोजनों में बाबा हरदौल को दिया जाता है निमंत्रण :-

:- ओरछा के बुजुर्ग बताते हैं कि कुंजावती की बेटी की शादी में हुए चमत्कार के बाद आस-पास के हर गांव में ग्रामीणों ने प्रतीक के तौर पर एक-एक ‘हरदौल चबूतरा' का निर्माण कराया था, जो कई गांवों में अब भी मौजूद हैं।
इन्हीं में से एक नगरह पंचायत में स्थित है ।

शादी-विवाह हो या यज्ञ-अनुष्ठानों का भंडारा, लोग सबसे पहले चबूतरों में जाकर राजा हरदौल को आमंत्रित करते हैं। कहा जाता है कि उन्हें निमंत्रण देने से भंडारे में कोई कमी नहीं आती।


॥ बाबा हरदौल की जय ॥

हर वर्ष की भांति बाबा राजा हरदौल का वार्षिक पुजनोत्सव दिनांक 12 जुलाई 2026 से शुरू होकर 13 जुलाई 2026 को समापन हुआ । अपन...
13/07/2026

हर वर्ष की भांति बाबा राजा हरदौल का वार्षिक पुजनोत्सव दिनांक 12 जुलाई 2026 से शुरू होकर 13 जुलाई 2026 को समापन हुआ । अपने गाँव के इस पारंपरिक पूजन सह एकदिवसीय सीताराम संकीर्तन के साथ आज अंतिम दिवस में परंपरानुसार ब्राह्मण भोजन व प्रसाद वितरण हुआ।

।। जय हो बाबा हरदौल की ।।

13/07/2026

हर वर्ष की भांति बाबा राजा हरदौल का वार्षिक पुजनोत्सव दिनांक 12 जुलाई 2026 से शुरू होकर 13 जुलाई 2026 को समापन हुआ । अपने गाँव के इस पारंपरिक पूजन सह एकदिवसीय सीताराम संकीर्तन के साथ आज अंतिम दिवस में परंपरानुसार ब्राह्मण भोजन व प्रसाद वितरण हुआ।

।। जय हो बाबा हरदौल की ।।

26/06/2026

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