वैदिक कर्म फाउंडेशन

वैदिक कर्म फाउंडेशन हर हर महादेव🙏
ॐ असतो मा सद्गमय। तमसो मा ज्योतिर्गमय। मृत्योर्मामृतं गमय।।

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19/05/2026

हर हर महादेव 🙏
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हिंदू धर्म में 16 संस्कार (षोडश संस्कार) जन्म से लेकर मृत्यु तक मनुष्य के जीवन को सुसंस्कृत, पवित्र और अनुशासित बनाने वा...
29/01/2026

हिंदू धर्म में 16 संस्कार (षोडश संस्कार) जन्म से लेकर मृत्यु तक मनुष्य के जीवन को सुसंस्कृत, पवित्र और अनुशासित बनाने वाले महत्वपूर्ण अनुष्ठान हैं, जो गर्भाधान से शुरू होकर अंत्येष्टि पर समाप्त होते हैं। ये मानसिक, शारीरिक और आध्यात्मिक विकास के लिए आवश्यक हैं।

•ब्राह्मण गोत्रावली या वंशावली क्या है?•••√•कोई भी व्यक्ति जिस वंश में जन्म लेता है तो उनकी पीढ़ी- दर-पीढ़ी अर्थात् पिता...
06/01/2026

•ब्राह्मण गोत्रावली या वंशावली क्या है?•••

√•कोई भी व्यक्ति जिस वंश में जन्म लेता है तो उनकी पीढ़ी- दर-पीढ़ी अर्थात् पिता, दादा, परदादा आदि के नामों को जानना ही सामान्य शब्दों में वंशावली कहलाता है और उस वंश के मूल प्रख्यात पुरुष जिनके नाम से वह वंश जाना जाने लगा उसे गोत्र कहते हैं।

जैसे कि रघु, अज, दिलीप, दशरथ आदि रामजी की वंशावली है और रामजी के वंश में रघु परम प्रतापी हुये अतः इनके वंशज इन्ही के नाम पर रघुवंशी कहलाए।

ऐसे ही ब्राह्मणों में हर-एक ब्राह्मण के मूल में कोई न कोई प्रसिद्ध ऋषि हैं, जिनसे वह ब्राह्मण जाना जाता है।

इन प्रसिद्ध ऋषियों के वंशज उन्ही के नाम से उनका गोत्र एवं प्रवर हुआ ।

प्रवर अर्थात श्रेष्ठ, अर्थात आपकी गोत्र श्रंखला के श्रेष्ठ ऋषि।

ब्राह्मण कुल परम्परा में गोत्र, प्रवर, वेद, उपवेद, शाखा, सूत्र, छन्द, देवता, शिखा, पाद आदि का प्रचलन है, इसे ही ब्राह्मण गोत्रावली या वंशावली कहते हैं।

#गोत्र #वंशावली #ब्राह्मण #ब्राह्मणत्व #प्रवर #शाखा #शिखा #वेद #उपवेद #रक्तश्रंखला #माता #महादेव

🕉️ गृहस्थ जीवन की नींव: पंचमहायज्ञ 🕉️(जानिये क्यों हर गृहस्थ के लिए अनिवार्य हैं ये 5 दैनिक कर्म?)हमारे धर्मशास्त्रों मे...
30/12/2025

🕉️ गृहस्थ जीवन की नींव: पंचमहायज्ञ 🕉️
(जानिये क्यों हर गृहस्थ के लिए अनिवार्य हैं ये 5 दैनिक कर्म?)
हमारे धर्मशास्त्रों में एक गृहस्थ (परिवार में रहने वाले व्यक्ति) के लिए प्रतिदिन पाँच अनिवार्य कर्तव्य बताए गए हैं, जिन्हें 'पंचमहायज्ञ' कहा जाता है। मनुस्मृति के अनुसार, इन यज्ञों को करने से ही गृहस्थ जीवन सफल और दोषमुक्त होता है।
ये 5 महायज्ञ केवल कर्मकांड नहीं, बल्कि सुखी, शांत और समृद्ध जीवन जीने का सूत्र हैं।
ये 5 महायज्ञ कौन से हैं?
1️⃣ ब्रह्मयज्ञ (ऋषि ऋण से मुक्ति)
क्या है: वेदों, धार्मिक ग्रंथों का नियमित अध्ययन करना, मंत्र जाप (जैसे गायत्री मंत्र) करना और दूसरों को ज्ञान देना।
लाभ: इससे बुद्धि तीव्र होती है, मन में पवित्र विचार स्थिर होते हैं और मानसिक शांति मिलती है।
2️⃣ पितृयज्ञ (पितृ ऋण से मुक्ति)
क्या है: अपने पूर्वजों का स्मरण करना, उनके निमित्त तर्पण, पिंडदान या श्राद्ध कर्म करना।
लाभ: याज्ञवल्क्य स्मृति के अनुसार, इससे पितर तृप्त होकर लंबी आयु, संतान सुख, धन-धान्य और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करते हैं।
3️⃣ देवयज्ञ (देव ऋण से मुक्ति)
क्या है: प्रतिदिन घर के मंदिर में देवी-देवताओं का पूजन और हवन (अग्निहोत्र) करना।
लाभ: हवन से घर का वातावरण शुद्ध होता है, स्वास्थ्य सुधरता है और दैवीय कृपा से विघ्न दूर होते हैं।
4️⃣ भूतयज्ञ (प्राणियों के प्रति कर्तव्य)
क्या है: अपने भोजन में से अन्य प्राणियों (जैसे- गाय, कुत्ता, कौवा, चींटी आदि) के लिए अन्न का कुछ भाग निकालना (गो-ग्रास आदि)।
लाभ: यह करुणा और परोपकार का भाव दर्शाता है। इससे समस्त जीवों की सेवा का पुण्य मिलता है।
5️⃣ नृयज्ञ या अतिथियज्ञ (मनुष्यता का कर्तव्य)
क्या है: 'अतिथि देवो भव' की भावना से घर आए मेहमान का आदर-सत्कार करना और उन्हें भोजन कराना।
लाभ: शास्त्रों के अनुसार, जिस घर से अतिथि निराश लौटता है, वह उस घर के पुण्य ले जाता है। अतिथि सत्कार से गृहस्थी में बरकत बनी रहती है।
✨ निष्कर्ष:
महर्षि विश्वामित्र कहते हैं कि जो गृहस्थ इन नित्यकर्मों को नियत समय पर श्रद्धापूर्वक करता है, वह इस लोक में परम सुख और अंत में विष्णुलोक को प्राप्त करता है।
आइए, अपनी दिनचर्या में इन पाँचों यज्ञों को शामिल करने का प्रयास करें। 🙏

#महादेव #माता

श्री सोमनाथ ज्योतिर्लिंग जी के आज के  मंगला शृंगार आरती दिव्य दर्शन 12.07.2025
12/07/2025

श्री सोमनाथ ज्योतिर्लिंग जी के आज के मंगला शृंगार आरती दिव्य दर्शन 12.07.2025

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श्री ॐकारेश्वर ज्योतिर्लिंग जी के आज के मंगला आरती श्रृंगार दर्शन 12.07.2025

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हर हर महादेव 🔱🌿 श्रावण मास — भगवान रुद्र को समर्पितशास्त्रवचन:सर्वतीर्थमयं तीर्थं रुद्राभिषेकसमं न हि।*(अर्थात: समस्त ती...
30/06/2025

हर हर महादेव 🔱
🌿 श्रावण मास — भगवान रुद्र को समर्पित

शास्त्रवचन:
सर्वतीर्थमयं तीर्थं रुद्राभिषेकसमं न हि।
*(अर्थात: समस्त तीर्थों का फल एक ओर और एक रुद्राभिषेक एक ओर)

🕉️ सावन में रुद्राभिषेक हेतु पावन द्रव्य एवं उनके दिव्य फल
पंचांग के अनुसार, इस साल सावन का महीना 11 जुलाई 2025 से शुरू होगा और इसका समापन 9 अगस्त 2025 को होगा.

वैदिक कर्म फाउंडेशन  #नवरात्रि     मार्कण्डेयकृतं स्तोत्रं पठेन्नित्यं शुभावहम्।भुक्तिमुक्तिप्रदा दुर्गा भवत्यस्य न संशय...
02/04/2025

वैदिक कर्म फाउंडेशन
#नवरात्रि
मार्कण्डेयकृतं स्तोत्रं पठेन्नित्यं शुभावहम्।
भुक्तिमुक्तिप्रदा दुर्गा भवत्यस्य न संशय:।।
संहितायाम्

दुर्गापूजाके समय मार्कंडेयपुराणमें सन्निहित देवीस्तोत्र जो #सप्तशती के नामसे प्रसिद्ध है, उस कल्याणकारी स्तोत्रका नित्य पाठ करें जिससे भगवती दुर्गा प्रसन्न होकर भोगके साथ-साथ मोक्ष भी प्रदान कर देती हैं, इसमें संशय नहीं है।

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भागलपुर, बिहार
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