Baba Gangeshwarnath Dham

Baba Gangeshwarnath Dham पश्चिम वाहिनी गंगा के सम्मुख होने के कारण इस मंदिर को बाबा गंगेश्वर नाथ कहा गया है ।

बाबा गंगेश्वर नाथ धाम मंदिर गंगा नदी से तीनो दिशाओ से घिरे कोनिया क्षेत्र के इटहरा गाँव में स्थित है यह भगवान शिव का मंदिर है ,पश्चिम वाहिनी गंगा के सम्मुख होने के कारण इस मंदिर को बाबा गंगेश्वर नाथ कहा गया है ।

हर हर महादेव
24/05/2018

हर हर महादेव

04/04/2017

रामनवमी का त्यौहार चैत्र शुक्ल की नवमी मनाया जाता है. हिंदू धर्म शास्त्रों के अनुसार इस दिन भगवान श्री राम जी का जन्म हुआ था | यह पर्व भारत में श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाता है। रामनवमी के दिन ही चैत्र नवरात्र की समाप्ति भी हो जाती है। हिंदु धर्म शास्त्रों के अनुसार इस दिन भगवान श्री राम जी का जन्म हुआ था अत: इस शुभ तिथि को भक्त लोग रामनवमी के रुप में मनाते हैं एवं पवित्र नदियों में स्नान करके पुण्य के भागीदार होते है

14/03/2017

आखिर क्यों नही की जाती है शिव के आत्मलिंग की पूरी परिक्रमा???

हिन्दू धर्म पंचांग के पांचवे माह श्रावन यानी सावन में शिव पूजा का विशेष महत्व है। हर शिव भक्त अपनी श्रद्धा, आस्था और शक्ति से शिव पूजा कर अपनी कामनाओं को पूरा करना चाहता है। लेकिन शास्त्रों में शिव उपासना के लिए शिवलिंग पूजा की मर्यादाएं भी नियत है। इसकी जानकारी के अभाव में कुछ देव अपराध हो जाते हैं।

क्यों करते हैं शिवलिंग की आधी परिक्रमा
क्यों करते हैं शिवलिंग की आधी परिक्रमा


समय समय पर भगवान शिव ने धरती पे अपनी आत्मा के स्वरुप आत्मलिंग अलग अलग 12 जगहों पर स्थापित किये है, लेकिन फिर भी उन आत्मलिंगो के आज भी पूरी परिक्रमा नही की जाती है। लेकिन क्या रहस्य है की प्रथा के पीछे जिस कारण से सब लोग इस अत्यंत ही सुखदाई परिक्रमा को नही करने को बाध्य है।
आज हम आपको ये रहस्य बता रहे है जो शायद पहले किसी ने कभी भी नही बताया होगा।
इस परंपरा के पीछे जुडी है एक परम भक्त की भक्ति

भगवान शिव की शिव स्तुति “शीश गंग अर्धांग पार्वती नंदी भृंगी नृत्य करत है” में भृंगी नाम आपने सुना होगा, ये एक पौराणिक कालीन ऋषि थे जो की शिव के परम भक्त थे।लेकिन भक्त कुछ ज्यादा ही कट्टर थे, इतने की शिव की तो आराधना करते लेकिन बाकि भक्तो की भांति पार्वती को नहीं भजते थे।
उनकी भक्ति अदम्य थी लेकिन वो पार्वती जी को हमेशा ही शिव से अलग समझते थे या यु कहे उन्हें कुछ नही समझते थे।
शिवलिंग परिक्रमा
शिवलिंग परिक्रमा
एक बार तो ऐसा हुआ की वो कैलाश पर भगवान शिव की परिक्रमा करने गए लेकिन वो पार्वती की परिक्रमा नही करना चाहते थे, इस पार्वती ने ऐतराज जताया और कहा की हम दो जिस्म एक जान है तुम ऐसा नही कर सकते पर कट्टरता देखिये भृंगी ने पार्वती को अनसुना किया और शिव की परिक्रमा लगाने बढे। लेकिन तब पार्वती शिव से सट के बैठ गई, मामले में और नया मोड़ आया भृंगी ने सर्प का रूप धरा और दोनों के बीच से होते हुए शिव की परिक्रमा देनी चाही।
अर्धनारीश्वर रूप
अर्धनारीश्वर रूप
तब शिव ने पार्वती का साथ दिया और संसार में अर्धनारीश्वर रूप धरा, तब भृंगी क्या करते पर गुस्से में आके उन्होंने चूहे का रूप धरा और शिव और पार्वती को बीच से कुतरने लगे।पर तब शक्ति को क्रोध आया और उन्होंने भृंगी को श्राप दिया की जो शरीर तुम्हे अपनी माँ से मिला है वो तुरंत तुम्हारी देह छोड़ देगा।तब उन्हें अपनी भूल का एहसास हुआ और उन्होंने माँ पार्वती से अपनी भूल की क्षमा मांगी।
हालाँकि तब पार्वती ने अपना श्राप वापस लेना चाहा पर अपराध बोध से भृंगी ने मना कर दिया, पर उन्हें खड़ा रहने के लिए सहारे स्वरुप एक और (तीसरा) पैर प्रदान किया गया जिसके सहारे वो चल और खड़े हो सके।
इस दिन से भी शिव ने ही ये कहा की मेरे अत्मलिंगो की पूरी परिक्रमा नही की जानी चाहिए, क्योंकि वो मेरा अधूरा रूप है।जो कोई भी व्यक्ति ऐसा करेगा उसे दोष लगेगा, तो ऐसे भृंगी ऋषि की कट्टरता के कारन ही शिव के आत्मलिंगो की पूरी परिक्रमा नही की जाती है, उन पीठो की बनावट ही इस हिसाब से कर दी गई के ऐसा न किया जा सके।
।।हर हर महादेव ।।

24/02/2017

जो अमृत पीते हैं उन्हें देव कहते हैं,
और जो विष पीते हैं उन्हें देवों के देव
"महादेव" कहते हैं ... !!!

♨ ॐ नमः शिवाय ♨

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25/06/2014

कहते है सब का मालिक एक है ...लेकिन हमारा मालिक देवो के देव महादेव है ...जो सब दुनिया के मालिक है...वो महादेव है ...जिनके चरणों मैं चारो धाम ...बोलो जय भोले नाथ ...मेरे भोले नाथ
हर हर महादेव...मेरे भोले बाबा

16/03/2014

Har Har Mahadev

28/11/2013
Jay baba gangeshwarnath
04/11/2013

Jay baba gangeshwarnath

Har har mahadev
04/09/2013

Har har mahadev

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