श्रीराम जन्मभूमि सेना, राष्ट्रीय कर्यालय- दिल्ली

  • Home
  • India
  • Bela Pratapgarh
  • श्रीराम जन्मभूमि सेना, राष्ट्रीय कर्यालय- दिल्ली

श्रीराम जन्मभूमि सेना, राष्ट्रीय कर्यालय- दिल्ली धर्मो रक्षति रक्षितः
छोड दो भाषावाद, प्रांतवाद, जातीवाद करना। हिंदुओ बस तुम एक होना।
जय श्रीराम राष्ट्र हित के लिए , हिंदु संगठित होगा ,

27/05/2020

जय श्री राम
मित्रो

30/07/2016

नास्तिक, पामर, प्रमादी पुरुषोंका संग नहीं करना चाहिये।🌸
धर्म, ईश्वर, महात्मा किसीको नहीं छोड़ते, लोग ही उनको छोड़ देते हैं।🌸

30/07/2016

बहुत-से मनुष्य कहते हैं कि भगवान् का भजन-ध्यान तो हम लिखाकर ही नहीं लाये। अरे मूर्ख ! प्रारब्धपर दोष क्यों मढ़ता है ? यह तेरी ही कमजोरी है।🌸

16/07/2016

दक्षिण भारत के बाद , अब उत्तर प्रदेश में भी पैसे देकर करा रहे , धर्म परिवर्तन , दलितों और गरीबो का हो रहा है , धर्म परिवर्तन , हमें बड़े दुःख से ये कहना पड रहा है , कब तक हिन्दू जात - पात के भेदभाव में फशा रहेगा , " श्रीं राम जन्मभूमि सेना " कड़ा विरोध करते है ,

आप के आस - पास हो रहे ऐसे धर्म परिवर्तन पर कड़ा विरोध करे , और हमें संपर्क करे , उत्तर प्रदेश में जिनते भी चर्च है , उन्हें मिलरहे विदेशी फंड का जाँच के लिए " श्रीराम जन्मभूमि सेना " उनके कोर्ट में घसीटेंगे ,

" श्रीं राम जन्मभूमि सेना " ने ऐसे घटनओं पर नियंत्रण करने के लिए ,आप सब का सहयोग और साथ की अपेछा करता है , जो भी हमरे साथ है , और जो हमरे इस मुहीम से जुड़ना चाहते है , वह हमें संपर्क करे . हमें SMS या ईमेल करे , या फिर अपना मोबाइल नो दे , हिन्दू जगेगा , तो दुनिया जगेगी , धर्म की स्थापना के लिए तैयार रहे , जय श्रीं राम

E - shriramjanambhoomisena .com
Tel :७०६५६१५८००,९७१७३६७६२२,९८७१५१६१४३,९६१९५३४४०१

चाइना NSG मे समर्थन नही कर रहा  इसलिए मै संकल्प लेता / लेती  हूँ की चाइना की कोई भी  चीज या सामान  नही लुंगा / लुंगी.मेर...
25/06/2016

चाइना NSG मे समर्थन नही कर रहा इसलिए मै संकल्प लेता / लेती हूँ की चाइना की कोई भी चीज या सामान नही लुंगा / लुंगी.
मेरे घर मैं कोई चीनी सामान नहीं है .. और आप के ?

अजा देखना है, की कितने हिंदुस्तानी फेसबुक पर है , जो यह सन्देश को जादा से जादा सेयर करके चीन तक पहुंचने में भारत की मदत करेंगे ,
जय हिन्द वंदे मतरम.......

11/06/2016

हिन्दुओ, धर्मशिक्षा लेकर धर्माचरण करें !

तीर्थक्षेत्रों का पर्यटनस्थल करना अर्थात देवत्व नष्ट करना !

28/05/2016

||सार्थशिवताण्डवस्तोत्रम् ||

||श्रीगणेशाय नमः ||

जटा टवी गलज्जल प्रवाह पावितस्थले, गलेऽवलम्ब्य लम्बितां भुजङ्ग तुङ्ग मालिकाम् |

डमड्डमड्डमड्डमन्निनाद वड मर्वयं, चकार चण्डताण्डवं तनोतु नः शिवः शिवम् ||१||

( जिन शिव जी की सघन जटारूप वन से प्रवाहित हो गंगा जी की धारायं उनके कंठ को प्रक्षालित क होती हैं, जिनके गले में बडे एवं लम्बे सर्पों की मालाएं लटक रहीं हैं, तथा जो शिव जी डम-डम डमरू बजा कर प्रचण्ड ताण्डव करते हैं, वे शिवजी हमारा कल्यान करें )

जटा कटाह संभ्रम भ्रमन्निलिम्प निर्झरी, विलोल वीचि वल्लरी विराजमान मूर्धनि |

धगद् धगद् धगज्ज्वलल् ललाट पट्ट पावके किशोर चन्द्र शेखरे रतिः प्रतिक्षणं मम ||२||

( जिन शिव जी के जटाओं में अतिवेग से विलास पुर्वक भ्रमण कर रही देवी गंगा की लहरे उनके शिश पर लहरा रहीं हैं, जिनके मस्तक पर अग्नि की प्रचण्ड ज्वालायें धधक-धधक करके प्रज्वलित हो रहीं हैं, उन बाल चंद्रमा से विभूषित शिवजी में मेरा अंनुराग प्रतिक्षण बढता रहे। )

धरा धरेन्द्र नंदिनी विलास बन्धु बन्धुरस् फुरद् दिगन्त सन्तति प्रमोद मानमानसे |

कृपा कटाक्ष धोरणी निरुद्ध दुर्धरापदि क्वचिद् दिगम्बरे मनो विनोद मेतु वस्तुनि ||३||

( जो पर्वतराजसुता(पार्वती जी) केअ विलासमय रमणिय कटाक्षों में परम आनन्दित चित्त रहते हैं, जिनके मस्तक में सम्पूर्ण सृष्टि एवं प्राणीगण वास करते हैं, तथा जिनके कृपादृष्टि मात्र से भक्तों की समस्त विपत्तियां दूर हो जाती हैं, ऐसे दिगम्बर (आकाश को वस्त्र सामान धारण करने वाले) शिवजी की आराधना से मेरा चित्त सर्वदा आन्दित रहे। )

लता भुजङ्ग पिङ्गलस् फुरत्फणा मणिप्रभा कदम्ब कुङ्कुमद्रवप् रलिप्तदिग्व धूमुखे |

मदान्ध सिन्धुरस् फुरत् त्वगुत्तरीयमे दुरे मनो विनोद मद्भुतं बिभर्तु भूतभर्तरि ||४||

( मैं उन शिवजी की भक्ति में आन्दित रहूँ जो सभी प्राणियों की के आधार एवं रक्षक हैं, जिनके जाटाओं में लिपटे सर्पों के फण की मणियों के प्रकाश पीले वर्ण प्रभा-समुहरूपकेसर के कातिं से दिशाओं को प्रकाशित करते हैं और जो गजचर्म से विभुषित हैं। )

सहस्र लोचनप्रभृत्य शेष लेखशेखर प्रसून धूलिधोरणी विधूस राङ्घ्रि पीठभूः |

भुजङ्ग राजमालया निबद्ध जाटजूटक श्रियै चिराय जायतां चकोर बन्धुशेखरः ||५||

( जिन शिव जी का चरण इन्द्र-विष्णु आदि देवताओं के मस्तक के पुष्पों के धूल से रंजित हैं (जिन्हे देवतागण अपने सर के पुष्प अर्पन करते हैं), जिनकी जटा पर लाल सर्प विराजमान है, वो चन्द्रशेखर हमें चिरकाल के लिए सम्पदा दें। )

ललाट चत्वरज्वलद् धनञ्जयस्फुलिङ्गभा निपीत पञ्चसायकं नमन्निलिम्प नायकम् |

सुधा मयूखले खया विराजमानशेखरं महाकपालिसम्पदे शिरोज टालमस्तु नः ||६||

( जिन शिव जी ने इन्द्रादि देवताओं का गर्व दहन करते हुए, कामदेव को अपने विशाल मस्तक की अग्नि ज्वाला से भस्म कर दिया, तथा जो सभि देवों द्वारा पुज्य हैं, तथा चन्द्रमा और गंगा द्वारा सुशोभित हैं, वे मुझे सिद्दी प्रदान करें। )

कराल भाल पट्टिका धगद् धगद् धगज्ज्वल द्धनञ्जयाहुती कृतप्रचण्ड पञ्चसायके |

धरा धरेन्द्र नन्दिनी कुचाग्र चित्रपत्रक प्रकल्प नैक शिल्पिनि त्रिलोचने रतिर्मम ||७||

( जिनके मस्तक से धक-धक करती प्रचण्ड ज्वाला ने कामदेव को भस्म कर दिया तथा जो शिव पार्वती जी के स्तन के अग्र भाग पर चित्रकारी करने में अति चतुर है ( यहाँ पार्वती प्रकृति हैं, तथा चित्रकारी सृजन है), उन शिव जी में मेरी प्रीति अटल हो।

नवीन मेघ मण्डली निरुद् धदुर् धरस्फुरत्- कुहू निशीथि नीतमः प्रबन्ध बद्ध कन्धरः |

निलिम्प निर्झरी धरस् तनोतु कृत्ति सिन्धुरः कला निधान बन्धुरः श्रियं जगद् धुरंधरः ||८||

( जिनका कण्ठ नवीन मेंघों की घटाओं से परिपूर्ण आमवस्या की रात्रि के सामान काला है, जो कि गज-चर्म, गंगा एवं बाल-चन्द्र द्वारा शोभायमान हैं तथा जो कि जगत का बोझ धारण करने वाले हैं, वे शिव जी हमे सभि प्रकार की सम्पनता प्रदान करें। )

प्रफुल्ल नीलपङ्कज प्रपञ्च कालिम प्रभा- वलम्बि कण्ठकन्दली रुचिप्रबद्ध कन्धरम् |

स्मरच्छिदं पुरच्छिदं भवच्छिदं मखच्छिदं गजच्छि दांध कच्छिदं तमंत कच्छिदं भजे ||९||

( जिनका कण्ठ और कन्धा पूर्ण खिले हुए नीलकमल की फैली हुई सुन्दर श्याम प्रभा से विभुषित है, जो कामदेव और त्रिपुरासुर के विनाशक, संसार के दु:खो6 के काटने वाले, दक्षयज्ञ विनाशक, गजासुर एवं अन्धकासुर के संहारक हैं तथा जो मृत्यू को वश में करने वाले हैं, मैं उन शिव जी को भजता हूँ )

अखर्व सर्व मङ्गला कला कदंब मञ्जरी रस प्रवाह माधुरी विजृंभणा मधुव्रतम् |

स्मरान्तकं पुरान्तकं भवान्तकं मखान्तकं गजान्त कान्ध कान्त कं तमन्त कान्त कं भजे ||१०||

( जो कल्यानमय, अविनाशि, समस्त कलाओं के रस का अस्वादन करने वाले हैं, जो कामदेव को भस्म करने वाले हैं, त्रिपुरासुर, गजासुर, अन्धकासुर के सहांरक, दक्षयज्ञविध्वसंक तथा स्वयं यमराज के लिए भी यमस्वरूप हैं, मैं उन शिव जी को भजता हूँ। )

जयत् वदभ्र विभ्रम भ्रमद् भुजङ्ग मश्वस – द्विनिर्ग मत् क्रमस्फुरत् कराल भाल हव्यवाट् |

धिमिद्धिमिद्धिमिध्वनन्मृदङ्गतुङ्गमङ्गल ध्वनिक्रमप्रवर्तित प्रचण्डताण्डवः शिवः ||११||

( अतयंत वेग से भ्रमण कर रहे सर्पों के फूफकार से क्रमश: ललाट में बढी हूई प्रचंण अग्नि के मध्य मृदंग की मंगलकारी उच्च धिम-धिम की ध्वनि के साथ ताण्डव नृत्य में लीन शिव जी सर्व प्रकार सुशोभित हो रहे हैं। )

स्पृषद्विचित्रतल्पयोर्भुजङ्गमौक्तिकस्रजोर्- – गरिष्ठरत्नलोष्ठयोः सुहृद्विपक्षपक्षयोः |

तृष्णारविन्दचक्षुषोः प्रजामहीमहेन्द्रयोः समप्रवृत्तिकः ( समं प्रवर्तयन्मनः) कदा सदाशिवं भजे ||१२||

( कठोर पत्थर एवं कोमल शय्या, सर्प एवं मोतियों की मालाओं, बहुमूल्य रत्न एवं मिट्टी के टूकडों, शत्रू एवं मित्रों, राजाओं तथा प्रजाओं, तिनकों तथा कमलों पर सामान दृष्टि रखने वाले शिव को मैं भजता हूँ। )

कदा निलिम्पनिर्झरीनिकुञ्जकोटरे वसन् विमुक्तदुर्मतिः सदा शिरः स्थमञ्जलिं वहन् |

विमुक्तलोललोचनो ललामभाललग्नकः शिवेति मंत्रमुच्चरन् कदा सुखी भवाम्यहम् ||१३||

( कब मैं गंगा जी के कछारगुञ में निवास करता हुआ, निष्कपट हो, सिर पर अंजली धारण कर चंचल नेत्रों तथा ललाट वाले शिव जी का मंत्रोच्चार करते हुए अक्षय सुख को प्राप्त करूंगा। )

इदम् हि नित्यमेवमुक्तमुत्तमोत्तमं स्तवं पठन्स्मरन्ब्रुवन्नरो विशुद्धिमेतिसंततम् |

हरे गुरौ सुभक्तिमाशु याति नान्यथा गतिं विमोहनं हि देहिनां सुशङ्करस्य चिंतनम् ||१४||

पूजा वसान समये दशवक्त्र गीतं यः शंभु पूजन परं पठति प्रदोषे |

तस्य स्थिरां रथगजेन्द्र तुरङ्ग युक्तां लक्ष्मीं सदैव सुमुखिं प्रददाति शंभुः ||१५||

इति श्रीरावण- कृतम् शिव- ताण्डव- स्तोत्रम् सम्पूर्णम्

03/03/2016
मित्रो संगठन का विचार .. जय श्री राम
03/02/2016

मित्रो संगठन का विचार .. जय श्री राम

आज का पंचाग . जय श्री राम
25/01/2016

आज का पंचाग .
जय श्री राम

http://www.amarujala.com/feature/samachar/national/barack-obama-always-keep-small-statue-of-bajarang-bali-with-him-hindi...
18/01/2016

http://www.amarujala.com/feature/samachar/national/barack-obama-always-keep-small-statue-of-bajarang-bali-with-him-hindi-news/

हिंदू धर्म में बल और बुद्धि के निधान हनुमानजी के प्रति अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की भी गहरी श्रद्धा है। वह भी बजरंगबली के सच्चे भक्तों में शामिल हैं।

Address

Rajgarh
Bela Pratapgarh
230131

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when श्रीराम जन्मभूमि सेना, राष्ट्रीय कर्यालय- दिल्ली posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Place Of Worship

Send a message to श्रीराम जन्मभूमि सेना, राष्ट्रीय कर्यालय- दिल्ली:

Share