10/06/2026
🕉️ श्रीराम नाम लेखन जप – शतगुण पुण्य का सरल साधन 🕉️
दानेन पाणिर्न तु कङ्कणेन,
स्नानेन शुद्धिर्न तु चन्दनेन।
मानेन तुष्टिर्न तु भोजनेन,
ज्ञानेन मुक्तिर्न तु मुण्डनेन॥
— चाणक्य नीति (17/12)
भावार्थ :
हाथों की शोभा कंगन पहनने से नहीं, अपितु दान देने से होती है। शरीर की शुद्धि चन्दन लेप से नहीं, स्नान से होती है। मनुष्य केवल भोजन से नहीं, बल्कि सम्मान और आदर से संतुष्ट होता है। उसी प्रकार मोक्ष केवल बाह्य आडम्बरों से नहीं, बल्कि तत्वज्ञान से प्राप्त होता है।
इसी प्रकार संत-महापुरुषों ने भी नामजप की अपेक्षा नाम लेखन जप को अधिक प्रभावकारी साधना माना है—
"जपाच्छतगुणं पुण्यं रामनाम प्रलेखने"
अर्थात् राम नाम का लेखन, सामान्य जप की अपेक्षा शतगुण (सौ गुना) पुण्यदायक माना गया है।
✍️ आइए, श्रीराम नाम लेखन जप को अपने दैनिक जीवन का भाग बनाएं।
✍️ प्रतिदिन कुछ समय निकालकर प्रभु श्रीराम का पावन नाम लिखें।
✍️ अपने मन को एकाग्र करें, जीवन को राममय बनाएं और आध्यात्मिक उन्नति की ओर अग्रसर हों।
🌺 लेखन जप ही कलियुग की सरल, सुलभ एवं कल्याणकारी साधना है। 🌺
॥ श्रीराम जय राम जय जय राम ॥
अमित शुक्ल, एडवोकेट
प्रबंधक
अंतर्राष्ट्रीय श्री राम नाम लेखन बैंक, प्रतापगढ़
📞 8948482222
🌐 shreeramnaamlekhan.in
"आइए, साथ-साथ लिखें प्रभु श्रीराम का पावन नाम और जीवन को शुभ, शांत एवं राममय बनाएं।" 🙏🏻🚩