Panchmukhi Devi mandir

Panchmukhi Devi mandir This is the page which is of all the bhakt of panchmukhi devi.. it is situated at Balipur Pratapgarh, Uttar Pradesh.

This is the temple which is situated at balipur,pratapgarh.There are so many myths for this temple this temple is all about built in 1300 AD.this date is approx and obtained by carbon dating by archaeological survey of india.this temple saw many of centuries and many person.this is temple of panchmukhi devi and the main statue have got five heads and being the very statue it has to suffer with a l

ot of climatic as well as other situations.the statue now has been divided into several pieces.you must visit to see such this sort of divine temple and feel the power of maa panchmukhi.

19/09/2023

Kindly listen the views of Great Professor Manoranjan Parida sir, My Ph.D. Co-Supervisor and current Director of Central Road Research Institute,Delhi.

On this week's Climapreneur show, we're joined by Prof. Manoranjan Parida, Director, CSIR-Central Road Research Institute. Design and Development of Noise Ba...

जटा जूट समायुक्तमर्धेंन्दु कृत लक्षणामलोचनत्रय संयुक्तां पद्मेन्दुसद्यशाननाम।
02/06/2021

जटा जूट समायुक्तमर्धेंन्दु कृत लक्षणाम
लोचनत्रय संयुक्तां पद्मेन्दुसद्यशाननाम।

श्री सिद्धिविनायक जी की जय।पार्वती पुत्र गणेश की जय हो।। वक्र तुंड महाकाय, सूर्य कोटि समप्रभ:। निर्विघ्नं कुरु मे देव शु...
29/05/2021

श्री सिद्धिविनायक जी की जय।
पार्वती पुत्र गणेश की जय हो।।


वक्र तुंड महाकाय, सूर्य कोटि समप्रभ:। निर्विघ्नं कुरु मे देव शुभ कार्येषु सर्वदा ॥

भावार्थ :
हे हाथी के जैसे विशालकाय जिसका तेज सूर्य की सहस्त्र किरणों के समान हैं । बिना विघ्न के मेरा कार्य पूर्ण हो और सदा ही मेरे लिए शुभ हो ऐसी कामना करते है ।

नमामि देवं सकलार्थदं तं सुवर्णवर्णं भुजगोपवीतम्ं। गजाननं भास्करमेकदन्तं लम्बोदरं वारिभावसनं च॥

भावार्थ :
मैं उन भगवान् गजानन की वन्दना करता हूँ, जो समस्त कामनाओं को पूर्ण करनेवाले हैं, सुवर्ण तथा सूर्य के समान देदीप्यमान कान्ति से चमक रहे हैं, सर्पका यज्ञोपवीत धारण करते हैं, एकदन्त हैं, लम्बोदर हैं तथा कमल के आसनपर विराजमान हैं ।

एकदन्तं महाकायं लम्बोदरगजाननम्ं। विध्ननाशकरं देवं हेरम्बं प्रणमाम्यहम्॥

भावार्थ :
जो एक दाँत से सुशोभित हैं, विशाल शरीरवाले हैं, लम्बोदर हैं, गजानन हैं तथा जो विघ्नोंके विनाशकर्ता हैं, मैं उन दिव्य भगवान् हेरम्बको प्रणाम करता हूँ ।

विघ्नेश्वराय वरदाय सुरप्रियाय लम्बोदराय सकलाय जगद्धितायं। नागाननाय श्रुतियज्ञविभूषिताय गौरीसुताय गणनाथ नमो नमस्ते॥

भावार्थ :
विघ्नेश्वर, वर देनेवाले, देवताओं को प्रिय, लम्बोदर, कलाओंसे परिपूर्ण, जगत् का हित करनेवाले, गजके समान मुखवाले और वेद तथा यज्ञ से विभूषित पार्वतीपुत्र को नमस्कार है ; हे गणनाथ ! आपको नमस्कार है ।




द्वविमौ ग्रसते भूमिः सर्पो बिलशयानिवं। राजानं चाविरोद्धारं ब्राह्मणं चाप्रवासिनम्॥

भावार्थ :
जिस प्रकार बिल में रहने वाले मेढक, चूहे आदि जीवों को सर्प खा जाता है, उसी प्रकार शत्रु का विरोध न करने वाले राजा और परदेस गमन से डरने वाले ब्राह्मण को यह समय खा जाता है ।

गजाननं भूतगणादिसेवितं कपित्थजम्बूफलचारु भक्षणम्ं। उमासुतं शोकविनाशकारकं नमामि विघ्नेश्वरपादपङ्कजम्॥

भावार्थ :
जो हाथी के समान मुख वाले हैं, भूतगणादिसे सदा सेवित रहते हैं, कैथ तथा जामुन फल जिनके लिए प्रिय भोज्य हैं, पार्वती के पुत्र हैं तथा जो प्राणियों के शोक का विनाश करनेवाले हैं, उन विघ्नेश्वर के चरणकमलों में नमस्कार करता हुँ।

रक्ष रक्ष गणाध्यक्ष रक्ष त्रैलोक्यरक्षकं। भक्तानामभयं कर्ता त्राता भव भवार्णवात्॥

भावार्थ :
हे गणाध्यक्ष रक्षा कीजिए, रक्षा कीजिये । हे तीनों लोकों के रक्षक! रक्षा कीजिए; आप भक्तों को अभय प्रदान करनेवाले हैं, भवसागर से मेरी रक्षा कीजिये ।

"वृच्छ पीपल का औषधीय गुण"पीपल के प्रत्येक तत्व जैसे छाल, पत्ते, फल, बीज, दूध, जटा एवं कोपल तथा लाख सभी प्रकार की आधि-व्य...
26/05/2021

"वृच्छ पीपल का औषधीय गुण"

पीपल के प्रत्येक तत्व जैसे छाल, पत्ते, फल, बीज, दूध, जटा एवं कोपल तथा लाख सभी प्रकार की आधि-व्याधियों के निदान में काम आते हैं। हिंदू धार्मिक ग्रंथों में पीपल को अमृततुल्य माना गया है। सर्वाधिक ऑक्सीजन निस्सृत करने के कारण इसे प्राणवायु का भंडार कहा जाता है। सबसे अधिक ऑक्सीजन का सृजन और विषैली गैसों को आत्मसात करने की इसमें अकूत क्षमता है।

पीपल देव : हिंदू धर्म में पीपल का बहुत महत्व है। पीपल के वृक्ष को संस्कृत में प्लक्ष भी कहा गया है। वैदिक काल में इसे अश्वार्थ इसलिए कहते थे, क्योंकि इसकी छाया में घोड़ों को बांधा जाता था। अथर्ववेद के उपवेद आयुर्वेद में पीपल के औषधीय गुणों का अनेक असाध्य रोगों में उपयोग वर्णित है। औषधीय गुणों के कारण पीपल के वृक्ष को 'कल्पवृक्ष' की संज्ञा दी गई है। पीपल के वृक्ष में जड़ से लेकर पत्तियों तक तैंतीस कोटि देवताओं का वास होता है और इसलिए पीपल का वृक्ष प्रात: पूजनीय माना गया है। उक्त वृक्ष में जल अर्पण करने से रोग और शोक मिट जाते हैं।

पीपल परिक्रमा : स्कन्द पुराण में वर्णित पीपल के वृक्ष में सभी देवताओं का वास है। पीपल की छाया में ऑक्सीजन से भरपूर आरोग्यवर्धक वातावरण निर्मित होता है। इस वातावरण से वात, पित्त और कफ का शमन-नियमन होता है तथा तीनों स्थितियों का संतुलन भी बना रहता है। इससे मानसिक शांति भी प्राप्त होती है। पीपल की पूजा का प्रचलन प्राचीन काल से ही रहा है। इसके कई पुरातात्विक प्रमाण भी है।

अश्वत्थोपनयन व्रत के संदर्भ में महर्षि शौनक कहते हैं कि मंगल मुहूर्त में पीपल वृक्ष की नित्य तीन बार परिक्रमा करने और जल चढ़ाने पर दरिद्रता, दु:ख और दुर्भाग्य का विनाश होता है। पीपल के दर्शन-पूजन से दीर्घायु तथा समृद्धि प्राप्त होती है। अश्वत्थ व्रत अनुष्ठान से कन्या अखण्ड सौभाग्य पाती है।

पीपल पूजा : शनिवार की अमावस्या को पीपल वृक्ष की पूजा और सात परिक्रमा करके काले तिल से युक्त सरसो के तेल के दीपक को जलाकर छायादान करने से शनि की पीड़ा से मुक्ति मिलती है। अनुराधा नक्षत्र से युक्त शनिवार की अमावस्या के दिन पीपल वृक्ष के पूजन से शनि पीड़ा से व्यक्ति मुक्त हो जाता है। श्रावण मास में अमावस्या की समाप्ति पर पीपल वृक्ष के नीचे शनिवार के दिन हनुमान की पूजा करने से सभी तरह के संकट से मुक्ति मिल जाती है।

"श्री भगवद् गीता"अध्याय 10 श्लोक 26 अश्वत्थः सर्ववृक्षाणां देवर्षीणां च नारदः।गन्धर्वाणां चित्ररथः सिद्धानां कपिलो मुनिः...
20/05/2021

"श्री भगवद् गीता"
अध्याय 10 श्लोक 26

अश्वत्थः सर्ववृक्षाणां देवर्षीणां च नारदः।
गन्धर्वाणां चित्ररथः सिद्धानां कपिलो मुनिः।।
अर्थात् ~ मैं समस्त वृक्षों में अश्वत्थ (पीपल) हूँ और देवर्षियों में नारद हूँ मैं गन्धर्वों में चित्ररथ और सिद्ध पुरुषों में कपिल मुनि हूँ।।

।।मूलतः ब्रह्म रूपाय मध्यतो विष्णु रुपिणः। अग्रतः शिव रुपाय अश्वत्त्थाय नमो नमः।।
भावार्थ-अर्थात इसके मूल में ब्रह्म, मध्य में विष्णु तथा अग्रभाग में शिव का वास होता है। इसी कारण 'अश्वत्त्थ'नामधारी वृक्ष को नमन किया जाता है।

स्कन्द पुराण में वर्णित है कि अश्वत्थ (पीपल) के मूल में विष्णु, तने में केशव, शाखाओं में नारायण, पत्तों में श्रीहरि और फलों में सभी देवताओं के साथ अच्युत सदैव निवास करते हैं।
[क] पीपल भगवान विष्णु का जीवन्त और पूर्णत:मूर्तिमान स्वरूप है।
भगवान कृष्ण कहते हैं- समस्त वृक्षों में मैं पीपल का वृक्ष हूँ।
[ख] स्वयं भगवान ने उससे अपनी उपमा देकर पीपल के देवत्व और दिव्यत्व को व्यक्त किया है।

@ Panchmukhi Devi mandir

तुलसी पूजनतुलसिका सदा पुज्याः 🙏😇
20/05/2021

तुलसी पूजन
तुलसिका सदा पुज्याः 🙏😇

शिव कैलाशोें के वासी, धौली धामों के राजा।शंकर संकट हरना।।
19/05/2021

शिव कैलाशोें के वासी, धौली धामों के राजा।
शंकर संकट हरना।।

17/05/2021

श्री हनुमान जी की जय।
पवनपुत्र की जय हो।
अंजनीपुत्र की जय हो।
सीता राम, सीता राम

Jai jai Bhole... Baba Bholenath ki jaiPanchmukhi Devi mandir
17/05/2021

Jai jai Bhole... Baba Bholenath ki jai
Panchmukhi Devi mandir

16/05/2021

श्री सिद्धेश्वर विनायक जी
प्रथम पूजन, श्री गणेश पूजन

मुख्य प्रतिमा पुरातन ऐतिहासिक स्थल श्री पंचमुखी देवी मंदिर की। #पुरातन विभाग के सर्वे द्वारा पाया गया कि या प्रतिमा लगभग...
16/05/2021

मुख्य प्रतिमा पुरातन ऐतिहासिक स्थल श्री पंचमुखी देवी मंदिर की।
#पुरातन विभाग के सर्वे द्वारा पाया गया कि या प्रतिमा लगभग 14०० वर्ष पूर्व की है।

आज बचे हुए पेड़ों का वृक्षारोपण किया गया अब परिसर में मंदार, नीम, पीपल, बर्गद, पाकड़, गूलर, गुलमोहर, बोतल पाम, अशोक, गुड...
28/03/2021

आज बचे हुए पेड़ों का वृक्षारोपण किया गया अब परिसर में मंदार, नीम, पीपल, बर्गद, पाकड़, गूलर, गुलमोहर, बोतल पाम, अशोक, गुड़हल, कनेर, केला, बेगम~बेलिया, चमेली, गुलाबी गुड़हल, गंधराज, चांदनी, दिन राजा, शमी, तुलसी, रातरानी, आम, दूब~ दुर्वा तथा कुश व गेंदा इत्यादि लगे हैं। अतः अब परिसर में एक सुंदर नवग्रह वाटिका और भव्य पंचवटी वाटिका का पूर्ण निर्माण किया गया हैं।
आप सब के सहयोग के बिना यह सब मुमकिन नहीं था। आप सब के छोटे बड़े सभी सहयोगों के बदौलत यह मुमकिन हो सका इसके लिए आप सभी का दिल से बहुत-बहुत आभार और उम्मीद करता हूं कि हमारा आपका साथ बदस्तूर कायम रहेगा।

इस अवसर पर श्री हेमंत नंदन ओझा जी ने सभी भक्तों और सहयोगियों को हृदय से बहुत-बहुत धन्यवाद ज्ञापित किया है।

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Balipur
Bela Pratapgarh
230001

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Tuesday 4:30am - 10:30pm
Wednesday 4:30am - 10:30pm
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