22/08/2025
#सत्संगके_प्रभावसे_पाँच_प्रेतोंके_उद्धारकी_कथा
'हारीतस्मृति' ने मानवमात्रके लिये कुछ सामान्य धर्मोका परिगणन किया है, जिनमें सत्संग भी है—
दानं दमस्तपः शौचमार्जवं क्षान्तिरेव च ।
आनृशंस्यं सतां संगः पारमैकान्त्यहेतवः ॥
वृद्धहारीत० ८| ३३७
संतोंकी संगतिसे लाभ-ही-लाभ होता है। संत तुलसीदासजीने कहा है कि एक क्षण भी सत्संग करनेसे जो सुख प्राप्त होता है, उसकी तुलनामें स्वर्ग और अपवर्गका सुख बिलकुल नगण्य है। यह तो हुआ सत्संगका आध्यात्मिक लाभ। आधिदैविक और आधिभौतिक लाभ भी इससे शीघ्र ही प्राप्त हो जाता है। रत्नाकर डाकूका देवर्षि नारदसे जो थोड़ी देरका संग हुआ, उसका परिणाम बहुत ही चौंकानेवाला है। वह व्यक्ति वाल्मीकि रूप महर्षि और आदिकवि बन गया। इसी तरह पद्मपुराण ( सृष्टिखण्ड ) से पता चलता है कि एक संतके साथ केवल बातचीत करनेसे कुछ ही देरमें पाँच प्रेतोंको प्रेतत्वसे छुटकारा मिल गया और वे दिव्य विमानोंपर चढ़कर ऊँचे लोकोंमें चले गये।
प्राचीन कालमें पृथु नामके एक आचारनिष्ठ ब्राह्मण थे। वे दिन-रात धर्मके ही कार्य किया करते थे। एक बार तीर्थयात्राके प्रसंगसे वे एक वनमें पहुँचे। वह वन वृक्ष और लतासे शून्य था। कहीं जल भी नहीं दिखायी देता। केवल काँटे-ही-काँटे वहाँ दिखायी पड़ते। सहसा ब्राह्मण देवताकी दृष्टि पाँच प्रेतोंपर पड़ गयी। वे देखनेमें बहुत ही भयंकर थे। देखते ही ब्राह्मण देवतामें भयका संचार हो गया, किंतु तुरंत ही उन्होंने धैर्य धारण कर लिया। उन्होंने पूछा— 'तुम लोग कौन हो? तुमसे ऐसे कौन-से कर्म हो गये हैं कि तुम्हारी आकृति इतनी विकृत हो गयी है ? इतने दुःखी एवं बेचैन क्यों हो?'
प्रेतोंमेंसे एकने कहा— 'आपने ठीक ही समझा है, सचमुच हमलोग निरन्तर दुःख-ही-दुःखमें डूबे रहते हैं। एक क्षण भी चैन नहीं पाते। हमारा ज्ञान भी लुप्त हो गया है। हम इतना भी नहीं जानते कि कौन दिशा किस ओर है। केवल दुःख-ही-दुःखका ज्ञान होता रहता है।' ब्राह्मणने याद दिलाया कि 'क्या आपको पता है कि आपलोगोंको किस-किस कर्मसे इस दुर्गतिकी प्राप्ति हुई है?' उनमेंसे एकने कहा कि 'मैं ताजा और स्वादिष्ट भोजन स्वयं खा जाता था और ब्राह्मणोंको बासी खिलाता था, इस कारण मेरा नाम पर्युषित पड़ गया है। इस पापसे मैं प्रेत बन गया हूँ और मेरा भयानक रूप हो गया है। मेरे दूसरे साथीने कुछ भूखे और अन्न माँगनेवाले ब्राह्मणोंकी हत्या कर दी। इस पापसे यह सूचीमुख नामका प्रेत हो गया है। इसका मुँह सुईकी तरह छोटा है। एक तो भोजन-पानी मिलता ही नहीं, मिलनेपर भी सुई-जितने छोटे छेदसे कितना पानी पिया जा सकता है और कितना भोजन किया जा सकता है। यह हमेशा भूख और प्याससे तड़पता ही रहता है। यह तीसरा प्रेत 'भूखे ब्राह्मणको कुछ देना न पड़े' इस भयसे शीघ्रतापूर्वक वहाँसे हट जाता था, इसलिये इसका नाम शीघ्रग हो गया। इस प्रेतयोनिमें इसको लँगड़ा बनना पड़ा। यह जो चौथा प्रेत है, वह देनेके डरसे केवल घरमें बैठकर स्वादिष्ट भोजन किया करता था, यह रोधक कहलाता है। इस प्रेतयोनिमें इसे सिर नीचा करके चलना पड़ रहा है। यह जो पाँचवाँ प्रेत है, वह किसीके माँगनेपर कुछ बोलता नहीं था, केवल सिर नीचा करके धरती कुरेदने लगता था। इसलिये इसके अङ्ग-प्रत्यङ्ग विकृत हो गये हैं और इसका नाम लेखक पड़ गया।'
ब्राह्मणने पूछा— आखिर तुम लोग खाते-पीते क्या हो ? प्रेतोंने कहा कि 'हमको बहुत ही निन्दित भोजन करना पड़ता है। जिन घरोंमें पवित्रता नहीं होती, वहीं हमें विकृत पदार्थोंका भोजन प्राप्त होता है।'
अन्तमें प्रेतोंने ब्राह्मणसे प्रार्थना की कि 'आप तपस्वी हैं, आप बतायें कि वह कौन-सा कर्म है, जिस कर्मसे जीव प्रेतयोनिमें नहीं पड़ता।' ब्राह्मणने कहा— 'जो मनुष्य एक या तीन कृच्छ्र-चान्द्रायण-व्रत करता है, वह कभी प्रेतयोनिमें नहीं जाता। जो मान-अपमानमें और शत्रु-मित्रमें समानभाव रखता है, वह भी प्रेतयोनिमें नहीं जाता। जिसने क्रोध, ईर्ष्या, तृष्णा तथा लोभ आदिको जीत लिया है, वह प्रेत नहीं होता। जिसके हृदयमें सम्पूर्ण प्राणियोंके प्रति दया भरी हुई है तथा जो गौ, ब्राह्मण, तीर्थ, पर्वत, नदी और देवताओंको प्रणाम करता है, वह मनुष्य प्रेत नहीं होता।'
पृथु जब इस प्रकार उपदेश दे रहे थे, उसी समय आकाशमें सहसा नगारे बजने लगे, आकाशसे पुष्प-वृष्टि होने लगी और चारों ओरसे उन पाँच प्रेतोंके लिये विमान आ गये। आकाशवाणी हुई— 'एक संतके साथ वार्तालाप करनेके कारण तुम सब प्रेतोंकी दिव्य गति हुई है।' इस प्रकार सत्संगके प्रभावसे उन प्रेतोंका उद्धार हो गया।
ो_नारायणाय_______ॐ_नमो_भगवते_वासुदेवाय
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यस्यावतारगुणकर्मविडम्बनानि
नामानि येऽसुविगमे विवशा गृणन्ति ।
ते नैकजन्मशमलं सहसैव हित्वा
संयान्त्यपावृतमृतं तमजं प्रपद्ये 💞🙏💞
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‼️ २१ अगस्त २०२५ ‼️
📜🏵️ #पञ्चाङ्गम् 🏵️📜
🔯 #पुष्य रा. १|६ यावद् तदुपरि—
🔯 #श्लेषा रा. १|६ उ. ⏩ |
🌝 #कर्कराशिः ति. १२ बुधे रा. ७|४६ उ. ⏩ |
👉 दधिभाद्रपदे त्यजेत | नात्रत्यागस्तक्रादीनाम् |
🕉️ #मासशिवरात्रि_१३_व्रतम् |
◍ भवेद्यत्र त्रयोदश्यां भूतव्याप्ता महानिशत्युक्तेः |
🪩 #कलियुगादिः_१३ |
🚩 #अघोरचतुर्दशी_१४ ( प्रदोषे ) |
■ सर्वार्थामृतसिद्धियोगः रा. १|६ या. |
🌅 #सूर्योदयः प्रा. ५|३६ वादने |
🌄 #सूर्यास्तः सा. ६|२४ वादने | ------------------------------------------------------------------------
🌞 #विविधमुहूर्त्ताः🌞
🌳 ❈ ति. १३ गुरौ मासान्तादिदोषः।
🌀 ❈ ति. १३ गुरु को मासान्तदोष है।
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🔴 #मूलविचार 🔴
#रेवती/ #अश्विनी — ति. ४ बुधे दि. १२|४९ उ. — ति. ७ शुक्रे दि. ९|४८ या. |
#श्लेषा/ #मघा — ति. १३ गुरौ रा. १|६ उ. — ति. ३० शनौ रा. १|३५ या. |
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🎊🏵️🕉️ #व्रत_पर्व_एवं_त्योहार 🕉️🏵️🎊
👉 फलम् - षष्ठी तिथि का क्षय हो जाने के कारण यह पक्ष १४ दिन का ही है। ऐसा माना जाता है कि भादों के महीने में सजाव दही नहीं खाना चाहिए किन्तु मट्ठे का सेवन कया जा सकता है।
🎊🏵️🎊▪️मास शिवरात्रि व्रत का मान आज २१ अगस्त गुरुवार को होगा ।
🎊🏵️🎊▪️सन्त अघोराचार्य का अवतरणोत्सव २२ अगस्त शुक्रवार को मनाया जायेगा। काशी के क्रीं कुण्ड एवं पड़ाव तथा सबसे बढ़कर सन्त कीनाराम की जन्मस्थली चन्दौली (वाराणसी) जनपद के रामगढ़ नामक गाँव में विशेष समारोह मनाया जायेगा।
🎊🏵️🎊▪️ श्राद्ध के लिये अमावस्या का मान २२ अगस्त शुक्रवार को होगा।
🎊🏵️🎊▪️ जबकि स्नानदान के लिए अमावस्या तथा कुशोत्पाटिनी अमावस्या २३ अगस्त शनिवार को होगी। 'ॐ हूँ फट्कर' मन्त्रोच्चार के साथ उखाड़ा गया कुशा पूजनादि कार्य में वर्ष भर प्रयोग में लाया जायेगा।
👉 मघा नक्षत्र सिंह राशि की सूर्य संक्रान्ति १७ अगस्त रविवार को दिन ४।१ बजे से आयेगी। इससे अच्छी वृष्टि होने की सम्भावना बन रही है। शनिवार की अमावस्या भारी पड़ेगी। दैवी-प्राकृतिक घटनाएँ घट सकती हैं।
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📜 #श्रीशुभ_कालयुक्त_संवत्_२०८२_भाद्रपदकृष्णपक्षःI
#याम्यायनं_सौम्यगोलःl #वर्षर्त्तुःl #गुरुवारl
#त्रयोदशी दिन १२|२६ यावद् तदुपरि— #चतुर्दशीl
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❀༺꧁||🙏जय माँ🙏||꧂༻❀
#दुर्गा_मन्दिर_शक्ति_पीठ_वाटिका