प्रभु विनोदानंद

प्रभु विनोदानंद spiritual leader
सत्य हमारा धर्म
मौन हमारी भाषा
प्रेम हमारा स्वभाव

त्याग का अर्थ छोड़ना नहीं है। त्याग का अर्थ जाग कर देखना है कि मेरा कुछ है ही नहीं, छोडूं कैसे ?🍁
13/08/2026

त्याग का अर्थ छोड़ना नहीं है। त्याग का अर्थ जाग कर देखना है कि मेरा कुछ है ही नहीं, छोडूं कैसे ?🍁

तुम्हें कोई नहीं समझ सकता तुम्हारे सिवा व्यर्थ अपने अल्फाजों को जाया मत करो 💐
30/07/2026

तुम्हें कोई नहीं समझ सकता तुम्हारे सिवा व्यर्थ अपने अल्फाजों को जाया मत करो 💐

इस पृथ्वी पर ना कुछ खोने को है ! और ना पाने को, बस वर्तमान के पल से प्रेम कर लो, काफी है🍁
20/07/2026

इस पृथ्वी पर ना कुछ खोने को है ! और ना पाने को, बस वर्तमान के पल से प्रेम कर लो, काफी है🍁

मन मे उठने वाले प्रत्येक विचार में एक मंद ऊर्जा शक्ति होती है, एक ही विचार को दोहरा कर हम उसे शक्तिशाली बना देते है।🌱
16/07/2026

मन मे उठने वाले प्रत्येक विचार में एक मंद ऊर्जा शक्ति होती है, एक ही विचार को दोहरा कर हम उसे शक्तिशाली बना देते है।🌱

मैं शरीर नहीं, एक अमर आत्मा हूँ। यही तुम्हें जानना है हर व्यक्ति का सुख और दुख का स्रोत उसके अपने भीतर ही है।
10/07/2026

मैं शरीर नहीं, एक अमर आत्मा हूँ। यही तुम्हें जानना है
हर व्यक्ति का सुख और दुख का स्रोत उसके अपने भीतर ही है।

मृत्यु जो छीन लेगी उसके लिए इतना दुख और चिंता क्यों🍁🌱
06/07/2026

मृत्यु जो छीन लेगी उसके लिए इतना दुख और चिंता क्यों🍁🌱

एक पल में मौत सब छीन लेगी उसके लिए इतना चिंतित क्यों हो जो मौत नहीं छीन पाती उसके लिए जीना शुरू करो🍁
29/06/2026

एक पल में मौत सब छीन लेगी उसके लिए इतना चिंतित क्यों हो जो मौत नहीं छीन पाती उसके लिए जीना शुरू करो🍁

हम ऐसे मनुष्य नहीं हैं जिन्हें आध्यात्मिक अनुभव हो रहा है। हम आध्यात्मिक प्राणी हैं जिन्हें मानवीय अनुभव हो रहा है।🌱🍁
27/06/2026

हम ऐसे मनुष्य नहीं हैं जिन्हें आध्यात्मिक अनुभव हो रहा है। हम आध्यात्मिक प्राणी हैं जिन्हें मानवीय अनुभव हो रहा है।🌱🍁

जो चीज़ें स्थायी नहीं हैं, उनके बारे में चिंता न करें; उस चीज़ को समझें जो हमेशा बनी रहती है।💐
20/06/2026

जो चीज़ें स्थायी नहीं हैं, उनके बारे में चिंता न करें; उस चीज़ को समझें जो हमेशा बनी रहती है।💐

शरीर रहते शरीर से मुक्त हो जाना सभी दुखों से मुक्ति है और कोई दूसरा उपाय नहीं है तुम्हारे समस्या का स्रोत तुम्हारे भीतर ...
05/06/2026

शरीर रहते शरीर से मुक्त हो जाना सभी दुखों से मुक्ति है और कोई दूसरा उपाय नहीं है तुम्हारे समस्या का स्रोत तुम्हारे भीतर है

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