11/10/2025
त्वामाश्नितानां न विपन्नराणां
त्वामाश्रिता ह्याश्रयतां प्रयान्ति॥
जो लोग तुम्हारी शरणमें जा चुके हैं, उनपर विपत्ति तो आती ही नहीं। तुम्हारी शरणमें गये हुए मनुष्य दूसरोंको शरण देनेवाले हो जाते हैं।
शेरते प्राणिनो यत्र स शिवः
अनन्त पापो से तप्त उद्विग्न होकर विश्राम हेतु प्राणी जहाँ शयन करे उसी सर्वश्राय को शिव (शिवा) कहा जाता है।
जय श्री श्री 108 श्री बड़ी माता।