27/07/2026
!!जय मकरध्वज बालाजी!! !!श्रीगोरक्षनाथोविजयतेतराम्!! !!श्री गुरूवे नमः!!
!!गुरू पुर्णिमा ,!!
।।28/29 जुलाई 2026 मंगलवार , बुधवार आषाढ़ शुक्ला पूर्णिमा ।।
श्री मकरध्वज बालाजी धाम, बलाड रोड़, ब्यावर - राजस्थान मे प्रति वर्ष की भांति इस वर्ष गुरुपूर्णिमा महोत्सव {गुरूपूजन} परम्परागत मनाया जायेगा जिसमे प्रातःकाल 8 बजे भगवान गोरक्षनाथ का अभिषेक पूजन, शिवलीन सिद्ध गुरूमुर्तियो का पूजन एवं गुरूदीक्षा का समय 2 बजे से शाम 5 बजे तक, #परमपूज्य_गुरूजी #मकरध्वज_बालाजी_पीठाधीश्वर #राष्ट्रीय_संत #मन्त्र_सम्राट #नाथ_शिरोमणि श्री श्री #महंत_डा_प्रकाश_नाथ_जी_महाराज” द्वारा गुरु दीक्षा एवं गुरूपूजन 28 जुलाई एवं 29 जुलाई दोनो दिवस होगा ,भक्त मन्दिर मे आकर गुरूपूजन 28/29 जुलाई को कर सकते है ।
!!गुरूपूर्णिमा !!
आषाढ़ मास की शुक्ल पक्ष पूर्णिमा तिथि को आषाढ़ पूर्णिमा के साथ गुरु पूर्णिमा और व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है। इस बार यह शुभ तिथि 29 जुलाई दिन बुधवार को है। गुरु पूर्णिमा को भारत में बहुत उत्साह से मनाया जाता है। इस दिन गुरु के प्रति सम्मान व्यक्त किया जाता है। मनुष्य रूप में जन्म लेकर देवताओं ने भी गुरु के चरण दबाए हैं और उनसे ज्ञान प्राप्त किया है। साथ ही इस दिन महाभारत के रचयिता वेदव्यास का भी जन्म होने की वजह से इस तिथि को व्यास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। वेद व्यासजी को प्रथम गुरु की उपाधि प्राप्त है क्योंकि मानव जाति को चारों वेदों का ज्ञान दिया था। इस दिन के बाद से आषाढ़ मास समाप्त हो जाता है और सावन मास का प्रारंभ होता है।
!!आषाढ़ पूर्णिमा का महत्व!!
आषाढ़ मास की पूर्णिमा तिथि को आषाढ़ी पूर्णिमा, गुरु पूर्णिमा और व्यास पूर्णिमा कहा जाता है। हिंदू धर्म में वैसे तो सभी पूर्णिमा का अपना विशेष महत्व है लेकिन आषाढ़ पूर्णिमा का अपना एक अलग स्थान है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान किया जाता है और जप-तप व दान के लिए बहुत महत्वपूर्ण तिथि मानी जाती है। आषाढ़ पूर्णिमा के दिन गुरु पूजन भी किया जाता है। गुरु मंत्र प्राप्त करने के लिए भी यह दिन काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन आप जिसे भी गुरु मानते हैं, उसके प्रति सम्मान व्यक्त किया जाता है और गुरु की पूजा की जाती है। क्योंकि उनके ज्ञान के प्रकाश से जीवन का अंधकार दूर होता है और गुरु द्वारा ईश्वर की प्राप्ति होती है। गुरु का ज्ञान ही जीवन के हर मार्ग को आलोकित करने में सक्षम होता है। प्राचीन काल से लेकर आज तक गुरु-शिष्य की परंपरा चली आ रही है।
!!गुरु पूर्णिमा पूजा विधि!!
भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान ईश्वर से ऊपर है। गुरु पूर्णिमा के दिन गुरु के चरण स्पर्श करके आशीर्वाद लें। इसके बाद गुरु को श्रद्धा और क्षमतानुसार गुरु दक्षिणा या उपहार भेंट स्वरूप दें। इस दिन गुरु का आभार व्यक्त करने के लिए वैसे ही तैयारी करें जैसे भगवान की पूजा के लिए करते हैं। ब्रह्म मुहूर्त में उठकर घर की साफ-सफाई व स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और फिर गुरु को टीका लगाकर प्रसाद खिलाएं, आशीर्वाद लें और फिर भेंट दें।आदेश आदेश