Radha Swami Satsang Beas - Dera Beas - Sakhi Baba Ji Ki Hindi & Punjabi

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Radha Swami Satsang Beas - Dera Beas - Sakhi Baba Ji Ki Hindi & Punjabi Radha Soami Dera Beas. https://www.youtube.com/?sub_confirmation=1 Radha Soami Satsang near river Beas is not affiliated with these other movements.
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Radha Soami Beas philosophy, based on the teachings of mystics from all religions, has had its main centre at Dera Baba Jaimal Singh near the river Beas in northern India (Punjab) since 1891. Radha Soami Satsang Beas (RSSB), with centres located worldwide, is a registered non-profit, charitable society, independent of any political or commercial affiliations. 'Radha Soami(at River Beas)' means 'lo

rd of the soul' , and ‘satsang’ describes a group that seeks truth. There are a number of other contemporary movements that utilize the phrase ‘Radha Soami’. Baba Jaimal Singh Ji Maharaj(1836 - 1903): 1893 - 1903
Baba Sawan Singh Ji Maharaj(1858 - 1948): 1903 - 1948
Sardar Bahadur Jagat Singh Ji Maharaj(1886 - 1951): 1948 - 1951
Maharaj Ji Charan Singh Grewal(1918 - 1990): 1951 - 1990
Baba Gurinder Singh Ji Maharaj(1954 - ): 1990 - present

03/06/2026

नीचे दिए गए ईमेल के क्रम में, डेरा के सभी निवासियों के लिए निम्नलिखित सूचना है:

1. बाबा जी शनिवार, 06.06.2026 को old people enclosure (बुजुर्ग संगत के लिए) और मुख्य सत्संग शेड में कार दर्शन देंगे।

2. शनिवार, 06.06.2026 को शाम 4:00 बजे मुख्य सत्संग शेड में शबद पाठ और प्रश्नोत्तर सत्र होगा।

3. बाबा जी रविवार, 07.06.2026 को सुबह 8:30 बजे मुख्य सत्संग शेड में सत्संग देंगे।

4. इस सत्संग सत्र के लिए प्रवासी भारतीयों को डेरा आने की अनुमति है

जो नित अमृतवेले उठते है, वो गुरु नानक पातशाह जी के प्यारे होते है, जैसे हिरे जेवरातों को हम कैसे संभालके रखते है, वैसे ह...
10/05/2026

जो नित अमृतवेले उठते है, वो गुरु नानक पातशाह जी के प्यारे होते है, जैसे हिरे जेवरातों को हम कैसे संभालके रखते है, वैसे ही अमृतिवेले उठने वालों को गुरु नानक पातशाह जी वैसे ही संभालके रखते है !

07/05/2026

मन को नियंत्रित करने की शक्ति शब्द में ही है संतो की वाणी में शब्द धुन की महिमा कुछ इस तरह मिलती है। सिमरण से भी जरुरी शब्द धुन का अभ्यास है।

01/05/2026

*राधा स्वामी जी*

संगत से बिनती है कि आज शुक्रवार 1 मई को शाम 04:00 बजे हजूर जी ब्यास में संगत के साथ सवाल जवाब करेंगे जो भी संगत जाना चाहे वह बड़ी खुशी से जा सकती है जी..

✍️✍️   *"सत्संग, क्यों सुने".....???**हमारी आत्मा का अमृत है.....सत्संग !**मन की बेचैनी दूर करता है.....सत्संग !**स्वभाव...
18/04/2026

✍️✍️ *"सत्संग, क्यों सुने".....???*

*हमारी आत्मा का अमृत है.....सत्संग !*
*मन की बेचैनी दूर करता है.....सत्संग !*
*स्वभाव में शांति लाता है.....सत्संग !*
*शुद्ध पवित्र विचारों के लिए.....सत्संग !*
*वाणी में मिठास लानी है तो.....सत्संग !*
*नेक-भले-सचे कर्म के लिए....सत्संग !*

*"सतसंग किसको कहत है.....!*
*सो भी तुम सुन लेय".....!*
*'सतनाम सतपुरुष का जहां कीर्तन होय'*

🙏मालिक सबका भला करें जी🙏

संत समझाते हैं।                                                                                       हमें हर रोज सुबह अ...
06/04/2026

संत समझाते हैं। हमें हर रोज सुबह अपने मन में यह संकल्प दोहराते रहना है कि अगर हमारे मन ने भजन-सिमरन को पूरा समय नहीं दिया तो उसे भेाजन (खाना)भी नहीं दिया जाएगा!”निंदा” करना सबसे बुरा कर्म है।जब हम किसी की निंदा करते हैं, तो उसके किये बुरे कर्म अपने लेखे में जमा हो जाते हैं और अपने किए अच्छे कर्मों का फल जिसकी हम निंदा करते हैं, उसको मिल जाते हैं।संत कहते हैं, कि निंदा करने वाला मुफ़्त का धोबी है। जिसकी वह निंदा करता है, वह उसके पापों की मैल को धोता है! आज से हम किसी की निंदा नहीं करेंगे!

05/04/2026

सतगुरु हमें कुछ न बोलते हुए भी बहुत कुछ सिखाते हैं

जब बच्चे शब्द पढ़ते हैं तो बाबाजी एक टिक होकर बड़े ध्यान से सुनते हैं और शब्द होते ही एक मीठी सी मुस्काराहट देते हैं।

वे हमें इससे एक सीख दे रहे होते हैं, जब भी सत्संग हो तो हमारा काम सिर्फ चुपचाप और प्यार से सिर्फ सुनना ही होता है न कि इधर उधर तांकना या कुछ और करना।

यही बात आंतरिक शब्द पर भी लागू होती है उस समय यह शब्द सुनने का काम सुरति करती है और सुमिरन मन द्वारा करवाती है।

दर्शन का मतलब है — प्रेमी की अपने प्रियतम की तरफ़ देखने की बेबसी।यह वह ऐसी कशिश है जो हम सबके अंदर है।यही असल में दर्शन ...
05/04/2026

दर्शन का मतलब है — प्रेमी की अपने प्रियतम की तरफ़ देखने की बेबसी।
यह वह ऐसी कशिश है जो हम सबके अंदर है।
यही असल में दर्शन है।

चाहे हम नज़दीक बैठे हों या दूर — बात एक ही है।
अगर सतगुरु हमें दर्शन दे रहे हैं, तो वह सबको एक जैसे दर्शन देते हैं,
चाहे हम आगे बैठे हों या पीछे।

और अगर सतगुरु किसी को दर्शन नहीं देना चाहते,
तो चाहे वह इंसान ठीक उनके सामने ही क्यों न बैठा हो,
उसे कुछ भी हासिल होने वाला नहीं।

लेकिन अगर सतगुरु किसी को दर्शन देना चाहते हैं,
तो वह इंसान चाहे सात समुंदर पार ही क्यों न हो,
उसे सतगुरु के दर्शन हो जाएंगे।

हम जबरन उनके दर्शन नहीं कर सकते।
दर्शन तो सतगुरु की दात है।
किसे कब देना है — यह उनकी मौज है। 🙏

एक बार मेरे सतगुरु जी एक कमाई वाले संत्सगी से मिलें, और पुछा,,ये घर किसका है उस भक्त ने जवाब दिया, जी आपका, बाबाजी ने फि...
04/04/2026

एक बार मेरे सतगुरु जी एक कमाई वाले संत्सगी से मिलें, और पुछा,,ये घर किसका है उस भक्त ने जवाब दिया, जी आपका, बाबाजी ने फिर पूछा, ये गाड़ी किसकी है, उसने फिर कहा जी आपकी, फिर बाबाजी ने पूछा ये परिवार किसका है, उसने फिर कहा जी आप का, बाबाजी ने जिस के बारे में भी पुछा, उसने यही जवाब दिया अन्त में बाबा जी ने अपनी फोटो उठाई और बोले ये किस की है तभी वो सेवादार भाई रो पड़े और बोले सिर्फ यही एक मेरी खुशी है, मतलब यही तो मेरी है बाकी सब आपका ही है मेरे सतगुरु,,तन भी तेरा मन भी तेरा,तेरा पिण्ड और प्राण, प्रभु सब कुछ तेरा है एक बस तु ही मेरा है!

26/02/2026

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Radha Soami Satsang Beas
Beas
143204

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