17/08/2024
श्री चौमुखा भैरव चालीसा
॥दोहा॥
गज बेली गजकन्थड को मनाइके, सुमरूं चौमुखा भैरवनाथ।
भव सागर पार हो जाएगा, प्रभु रहे आपका साथ॥
चौमुखा भैरवनाथ बसे, ले संग में बीर हनुमान।
मन इच्छा पूरी करो, प्रभु तारो जगत जहान॥
॥चौपाई॥
जय श्री भैरव नाथ निरंजन।
भव तारण भव भय भंजन॥
रुद्र रूप में आप सुहावे।
आदि नाथ के अंश कहावे॥
शीश जटा अति सुन्दर कारी।
कानन कुण्डल की छवि न्यारी॥
गले में सेली नाद विराजे।
कर त्रिशूल खप्पर अति साजे॥
तन पर सुन्दर भस्म लगावे।
डिमक डिमक डिम डमरु बजावे॥
चौसठ योगनी बावन बीरा।
भैरव नाम जपत रणधीरा॥
सुर नर मुनि सब ध्यान लगावे।
नारद शारद मिल गुण गावे॥
शिव अपमान सहन नहीं कीन्हा।
सृष्टि पति को शिक्षा दीन्हा॥
शंकर के अवतार कृपाला।
रहो मस्त पीकर मद प्याला॥
काली के लाला बलधारी।
कहीं न जाये शोभा तुम्हारी॥
काशी के कोतवाल कहाये।
प्रेमी जन के मन को भाये॥
यतियों में भी नाम तुम्हारा।
निज भक्तों को पल में तारा॥
भक्त जनों के तुम रखवारे।
हरो कष्टों को प्रभु नाथ हमारे॥
योग युक्ति है तुमको प्यारी।
भक्तों की करते रखवारी॥
दीनन के प्रभु हो हितकारी।
धीर गम्भीर श्रेष्ठ मति धारी॥
देवन के सब काज सुधारें।
दानव दैत्य को मार विदारे॥
रुप अनेक जगत में धारे।
चौमुखा भैरव अति भये सुखारे॥
अकथ अथाह आपकी शक्ति।
जानो श्रेष्ठ योग की युक्ति॥
भक्तन के तुम होत सहाई।
संत जनों के हो सुखदाई॥
जो जन तुम्हारा ध्यान लगावे।
सब सुख भोग अमर पद पावे॥
चौमुखा भैरव को जपत हमेशा।
होय अभय मिट जाय कलेशा॥
चौमुखा भैरव की महिमा भारी।
जपे जो नर पावै फल चारी॥
भैरव नाम जो नर उच्चारहि।
आप सहज भव सिन्धु तारहि॥
काम क्रोध नहीं उसे सतावे।
चौमुखा भैरव का गुण गावे॥
काल बली भी अति डर पावै।
भैरव भगत के पास न जावै॥
भैरव नाम जहाँ होत उचारा।
भूतादिक गण भागत सारा॥
डंकनी शंखनी निकट न आवे।
चौमुखा भैरव की रट जो लावे॥
श्री चौमुखा भैरव भूतों के राजा।
बाधा हरो करो सकल शुभ काजा॥
सुर नर मुनि गन्धर्व पुकारे।
नित्य भैरव का नाम उच्चारे॥
पुत्र हिन नर करें जो सेवा।
पुरे इच्छा श्री भैरव देवा॥
रोट लंगोट से भोग लगावे।
करें धूप और ज्योति जगावे॥
शनिवार दिन श्रेष्ठ कहावें।
कर पुजा भैरव को मनावें॥
चौमुखा भैरव अति बलिकारी।
भक्तों की करते रखवारी॥
जो इच्छा हो मन के माहीं।
भैरव कृपा से दुर्लभ नाहीं॥
करो कृपा मो पर गुरु ज्ञानी।
निश दिन नाम जपे मम बानी॥
रोगी हो जो पाठ सुनावें।
कर स्नान चालीसा गावें॥
चालीसा पाठ करें नित जोई।
मनोकामना सब पुरण होई॥
महिमा आपकी अति घनेरी।
कह ना सके मन्द मति मेरी॥
चौमुखा भैरव तुम्हें मनाऊं।
बार बार पद शीश नवाऊं॥
नाथ सिया है शरण तुम्हारी।
करो कृपा हरो विपत हमारी॥
॥दोहा॥
श्री भैरव चालीसा नित्य पढें, भाव धरि जन कोई।
चौमुखा भैरव नाथ कृपा करें, मनवांछित फल होई।।
चौमुखा भैरवनाथजी, श्री चरणो में कोटी कोटी आदेश।
जिनकी कृपा से टरत हैं, भव बंधन के सब क्लेश॥
चौमुखा भैरव नाथ सबडावली दौसा राजस्थान