20/08/2024
कल 19.8.2024 को समाप्त हुए पवित्र श्रावण मास में रुद्राभिषेक व जलाभिषेक की परंपरा है। शिवजी को रुद्र इसलिए कहा जाता है कि वे 'रुत' अर्थात दैहिक, दैविक और भौतिक दुखों का नाश करते हैं।
वेद सर्वाधिक प्राचीन ग्रंथ माने जाते हैं। शास्त्रों के अनुसार, वेद: शिव: शिवो वेद:, यानी वेद शिव हैं और शिव वेद हैं। अर्थात शिव वेदस्वरूप हैं। इसके साथ ही वेद को भगवान सदाशिव का नि:श्वास बताते हुए उनकी स्तुति में कहा गया है - यस्य नि:श्वसितं वेदायो वेदेभ्योखिलं जगत, निर्ममे तमहं वंदे विद्यातीर्र्थ महेश्वरम। अर्थात, वेद जिनके नि:श्वास हैं, जिन्होंने वेदों के माध्यम से संपूर्ण सृष्टि की रचना की है, और जो समस्त विद्याओं के तीर्थ हैं, ऐसे देवों के देव 'महादेव' की मैं वंदना करता हूं। सनातन संस्कृति में वेदों की तरह शिव जी को भी अनादि कहा गया है।
ऊँ गिरिनाग धाम में श्रावण मास में श्रद्धालुओं द्वारा लगभग प्रतिदिन रुद्राभिषेक व जलाभिषेक किया गया । कल (19.8.24) अन्तिम सोमवार को भी कॉंवरियों द्वारा राजघाट से जल लाकर जलाभिषेक किया गया । कुछ चित्र :