शान्ति धारा एवं अभिषेक-shanti dhara abhishk

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शान्ति धारा एवं अभिषेक-shanti dhara abhishk दिगम्बर जैन मंदिरों की शांति धारा एवम अभिषेक के दर्शन करवाना

🕉️ *चिंतन प्रवाह*🕉️🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🔹1 *अपराध छिपे न छिपे पर दंड निरंतर देता है।*🔹2 *व्यक्ति अपना दृष्टिकोण ही भोगता है।*🔹3 *विचार...
01/11/2021

🕉️ *चिंतन प्रवाह*🕉️
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
🔹1 *अपराध छिपे न छिपे पर दंड निरंतर देता है।*
🔹2 *व्यक्ति अपना दृष्टिकोण ही भोगता है।*
🔹3 *विचार बिना मोह हिलता नहीं और सम्यक प्रतीति बिना जाता नही है।*
🔹4 *असहजता अर्थात अपराधियों सा जीवन जीना।*
🔹5 *राग का मरण ही ज्ञान का जागरण है।*
🔹6 *पाप का उदय बीमारी है उसे दूर करो बाकि बीमारी अपनेआप दूर हो जायेगी।*
🔹7 *धर्म वसीहत में नहीं मिलता,ये तो कमाया जाता है।*
🔹8 *निर्णय बिना किसी भी क्षेत्र मे शांति असंभव है।*
🔹9 *जीव धन से नहीं,धन में सुखबुद्धि तोड़ने से धनी होता है।*
🔹10 *लक्ष्य की अस्पष्टता ही प्रमाद का कारण है।*

✍️ *(श्रेणिक जैन जबलपुर) (1-11-21)*

🎎 मनुष्य कितना मूर्ख है |👉प्रार्थना करते समय समझता है कि भगवान सब सुन रहा है,पर निंदा करते हुए ये भूल जाता है।👉पुण्य करत...
16/10/2021

🎎 मनुष्य कितना मूर्ख है |
👉प्रार्थना करते समय समझता है कि भगवान सब सुन रहा है,
पर निंदा करते हुए ये भूल जाता है।
👉पुण्य करते समय यह समझता है कि भगवान देख रहा है,
पर पाप करते समय ये भूल जाता है।
👉दान करते हुए यह समझता है कि भगवान सब में बसता है,
पर चोरी करते हुए ये भूल जाता है।
👉प्रेम करते हुए यह समझता है कि पूरी दुनिया भगवान ने बनाई है,
पर नफरत करते हुए ये भूल जाता है।
👌..और हम कहते हैं कि मनुष्य सबसे बुद्धिमान प्राणी है।

07/09/2021

सिर्फ श्रद्धा की
जानो महत्ता
बेशक
नहीं सीखा होता
ए बी सी धर्म का
नहीं याद किया होता
णमोकार मंत्र भी
और श्रद्धा के बल पर
कैसे अंजन चोर
तिर गया संसार सागर से ,,,,
धर्म मार्ग में
कार्यकारी होती सिर्फ श्रद्धा
अरे श्रद्धा ही तो है ये
जो पाषाण में भी
भगवान की कर लेते स्थापना
श्रद्धा को अपनी
कैसे प्रगाढ़ बनायें रखें ?
इसकी दे दो कुछ टिप्स हमें ,,,,,
श्रद्धा को अपनी
प्रगाढ़ बनाये रखने के लिए
करना होता इतना सा उद्यम तुम्हें
रूचि हो या न भी हो
तो भी धर्म श्रवण
करो शास्त्र सभा में बैठ के
गुरुओं के प्रवचनों में
धर्म सभा में बैठ के
मंदिर जी में
नहीं मन लग रहा होता
पूजा / पाठ / अभिषेक में
तो भी बैठकर वहां
कर रहे होते
वो सभी क्रियाएं वहां
नहीं रूचि होते हुए भी
पुण्य कार्यों में / परमार्थ के कार्यों में
फिर भी उत्साह बना कर के
लगे होते उन कार्यों में
इस प्रकार जो करता
उसकी श्रद्धा
प्रगाढ़ बनी रहती
धर्म में ,,,,,
बेशक वो न सीखे
तत्वज्ञान को
जाने धर्म के मर्म को
फिर भी उसका
कल्याण का मार्ग
प्रशस्त बना ही रहता ,,,,,
क्षमा करना गुरुवर !
भावना सिर्फ रहती इतनी मेरी
जो भी विषय आता
चिंतन में / बुद्धि में
पढ़कर / सुनकर / अनुभव से
उसको अपनी सरल भाषा में
यहाँ प्रस्तुत कर देता
गुरु कृपा से
ज्ञानीजनो का जब मुझे
समर्थन मिल जाता
तो उसे गुरुकृपा का ही
प्रसाद मानता
नहीं इसमें मेरा कुछ होता ,,,,
मम गुरुवर आचार्यश्री विद्यासागर जी के
चरणों में कोटि कोटि नमन !!!!
मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी को
त्रिकाल वंदन !!!!
समस्त संघ के चरणों में
त्रियोग वंदन !!!
अनिल जैन "राजधानी"
श्रुत संवर्धक
६-९-२०२१

07/09/2021

🕉️ *चिंतन प्रवाह*🕉️
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
🔹1 *अपने को परिपूर्ण देखे बिना,अकेले रह पाना असंभव है।*
🔹2 *अपनी जिंदगी अपने हाथ मे है चाहे तो बिगाड़ो या बनाओ?*
🔹3 *जो सीखने में कंजूस है वो मूर्ख ही रहने वाला है।*
🔹4 *जिज्ञासा,समाधान बिना शांत नहीं होती है।*
🔹5 *काटने के लिए तो सिर्फ एक ही चीज है और वो है कर्म।*
🔹6 *मोह में जीव कर्ता पहले है और सोचता बाद में है।*
🔹7 *जिन्हें संयम में शर्म आये,वो असंयम का समर्थक।*
🔹8 *झूठ का सहारा हल्के लोग लेते हैं।*
🔹9 *निराबलम्बन के बिना सुख असंभव है।*
🔹10 *पाप दूर करने की चीज न कि भरपूर करने की।*

✍️ *(श्रेणिक जैन जबलपुर) (7-9-21)*

07/09/2021

🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷
भारतीय समयानुसार
आजका दिन:मंगलवार
दिनांक-७-९-२०२१
भगवान महावीर निर्वाण संवत-२५४७.
📜नक्तव्रत समाप्त.📜
🔱मौन व्रतारंभ🔱
🕉️आजकी दूसरी है- विनयसंपन्नता भावना🕉️
सूर्योदय-०६:१५/ए.एम.
चंद्रोदय-०६:२१/ए.एम.
तिथि-अमावस्या-०६:२१/ए.एम.।।तक।।.
प्रतिपदा-०४:३७/ए.एम. सितंबर.०८.।।तक।। द्वितीया.
नक्षत्र- पूर्वाफाल्गुनी-०५:०५/पी.एम.।।तक।। उत्तराफाल्गुनी.
योग-साध्य-०२:२२/ए.एम. सितंबर.०८.।।तक।। शुभ.
पक्ष-कृष्ण.
सूर्य राशि- सिंह.
चंद्र राशि- सिंह-१०:५०/पी.एम.।।तक।।. कन्या.
सूर्य नक्षत्र- पूर्वाफाल्गुनी.
अभिजित मुहूर्त-११:५९/ए.एम.से.१२:४८/पी.एम.।।तक।।.
अमृत काल-१०:५४/ए.एम.से.१२:२७/पी.एम.।।तक।।
राहुकाल-०३:२८/पी.एम.से.०५:०१/पी.एम.।।तक।।
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

06/09/2021

सजि आठों दरब पुनीत, आठों अंग नमौं ।
पूजौं अष्टम जिन मीत, अष्टम अवनि गमौं ।।
श्री चंद्रनाथ दुति चंद, चरनन चंद लसै ।
मन वच तन जजत अमंद-आतम-जोति जगे ।

ॐ ह्रीं श्रीचन्द्रप्रभ जिनेन्द्राय अनर्घ्यपदप्राप्तये-अर्घ्यं निर्वपामीति स्वाहा ।
🙏देवाधिदेव श्री१००८चन्द्रप्रभ् भगवान की जय🙏
🌹🙏P जय जिनेन्द्र देव की D🙏🌹

05/09/2021

🕉️ *चिंतन प्रवाह*🕉️
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
🔹1 *स्वभाव की स्वाध्याय ही आत्मार्थी की खुराक है।*
🔹2 *पर में अपनापन अर्थात जहर का सेवन।*
🔹3 *सेवा का मूल्य,सेवा से ही चुकाया जा सकता है।*
🔹4 *समर्पण,बहाने नहीं खोजता है।*
🔹5 *शिष्य,गुरु की सुनी अनसुनी नहीं करता है*
🔹6 *साथी वो ही है जो अहित से बचाये।*
🔹7 *धुन,कार्य को सरल कर देती है।*
🔹8 *विनय,व्यक्ति का मूल्य बढ़ा देती है।*
🔹9 *मिथ्यात्व समान कोई दूसरा रोग नही है।*
🔹10 *समय काटने वाले,समय समय पर अनंत बार कटते हैं।*

✍️ *(श्रेणिक जैन जबलपुर) (5-9-21)*

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म. गा. मार्ग
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456771

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+919424016240

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