श्री जेतेश्वर धाम महातीर्थ- सिणधरी

  • Home
  • India
  • Barmer
  • श्री जेतेश्वर धाम महातीर्थ- सिणधरी

श्री जेतेश्वर धाम महातीर्थ- सिणधरी Contact information, map and directions, contact form, opening hours, services, ratings, photos, videos and announcements from श्री जेतेश्वर धाम महातीर्थ- सिणधरी, Hindu temple, Barmer.

धार्मिक संगठन!!
अखिल भारतीय राईका रबारी देवासी समाज द्वारा श्री जेतेश्वर धाम भलखाड़ी [सिणधरी] बालोतरा राज.

वर्तमान मठाधीश महंत श्री श्री 1008 श्री पारसरामजी महाराज Mo. 9799687175 देवासी समाज के मार्गदर्शक श्री जेताराम जी महाराज

राजस्थान की तपोभूमि में कई संत महात्मा हुए है, कई अवतार ऒर लोक देवताओं की पुण्य भूमि है, इसी तपोभूमि पर गांव काठाड़ी "जिला बाड़मेर राजस्थान" में देवासी समाज में एक महान स

ंत अवतरित हुए, जेतरामजी महाराज जिन्हें देवासी समाज का मार्गदर्शक कहा जाता है, विक्रम सवंत 1812, वैशाख सुदी 14 रविवार के दिन श्रीमती ओखीदेवी की कोख से एक पुत्र रत्न का जन्म हुआ, पुत्र के जन्म होने पर पिताजी उमाजी गेलोतर को अपार हर्ष हुआ, गांववाशियो के घर घर मे खुशिया छाई, मंगल गीत और ढोल नगारे बजने लगे, घर घर गुड़ बटने लगा ।

जेतरामजी बचपन से ही भक्ति में लीन रहते थे, संसार की वस्तुओं का मोह नही था, बालपण से ही घर के कार्य मे हाथ बटाने लगे, किशोर अवस्था मे बालोतरा में मालियों की बाड़ी की रखवाली करते थे, उसके बदले में जो धान मिलता था, उसे रोजाना कबूतरों को चुगा देते थे, भक्ति में लीन रहते, एक बार सिणधरी जाते समय कालूड़ी गांव के पास आये तो उन्हें प्यास लगी, पानी पीने के लिए गांव के पिचके पर पानी पीने गए, तो गांव वालों ने उन्हें पानी पिलाने से मना कर दिया, तो उन्हें मन मे बहुत दुख हुआ, इससे नाराज होकर जेताराम जी ने श्राप दे दिया की पिचके का पानी खारा हो जायेगा, वहाँ से आगे चलकर गांव भूका वेरी पर जाकर बावड़ी खोदकर पानी पिया ।

कुछ दिनों बाद आप सिणधरी आ गए, वहाँ पर मोताजी माजन के वहा हाली रहकर गाय चराने लगे, साथ मे परमात्मा की माला फेरते हुए भक्ती करते रहे, इस उपरांत दोनाजी देवासी की बेटी अगरीदेवी से आपकी सगाई हुई, परम्परा के अनुसार जेताराम जी दोनाजी के यहाँ पर घर जवाई आ गए, वहाँ आकर आप भेड बकरियां और ऊँट चराने लगे, लेकिन भक्ति में लीन रहने वाले जेतारामजी दिन में भी पेड़ो के नीचे समाधि लगाकर शिवजी का ध्यान करते थे, और साथ मे नाडी निम्बली की खुदाई भी करते थे ।

एक दिन यह बात उनकी सासुजी को गांव वालों के द्वारा मालूम हुई तो उनकी सासुजी ने जेतरामजी के ससुरजी को जंगल मे देखने के लिए पीछे भेजा, तो जेतरामजी "जालकी" पेड़ के नीचे ध्यान में बैठे थे, जेतरामजी को ध्यान मग्न देखकर उनके ससुरजी ने "भाते" टिफिन से रोटी निकालकर उसकी जगह पर गोबर का उबला साणा रख दिया, और पानी पीने की दिवड़ी खाली करके रख दी,

जब जेतरामजी ध्यान से उठे, और रोटी के बारे में पूछा तो उनके ससुरजी ने भूख पानी का बहाना बनाया, लेकिन जेतरामजी को पूरा मामला समझ मे आ गया, तब भक्तराज ने तपोस्य चमत्कार किया जब भाता में रखे उबला हुआ साणा की जगह पर चूरमा और दिवड़ी में ठंडा पानी भर गया, यह देखकर ससुरजी को असम्भा हुआ, बाद में दोनों ने साथ साथ भोजन किया, इतने में एक नार ने आकर भेड़ बकरियों की टोली "एवड" में से एक बकरी को मार दिया, ससुरजी बहुत क्रोधित हुए, और जेतरामजी को भला बुरा कहने लगे, तब भक्तराज उठे और बकरी के ऊपर हाथ फेरा बकरी उठकर चलने लगी, यह चमत्कार देखकर ससुरजी को अपनी गलती पर अहसास हुआ, और भक्तराज से माफी मांगी उसी घड़ी एवड को छोड़कर घर आकर गवरीदेवी को चुनड़ी ओढाकर बहिन बनाई, और आप तपस्या करने चले गए ।

सिणधरी के रावलों से अपने कुटिया "आश्रम" के लिए आपने जमीन मांगी, लेकिन रावल गोदरसिंह जी ने मना कर दिया, तो रावल साहब को भी आपने चमत्कार दिया था, वहाँ से आगे चले आगे जेतरामजी महाराज की धर्म बहिन कवरीबाई कांचेली चारणी गांव डातेरी जो तपस्वी थी, उसने अपनी कुटिया "आश्रम" तपस्या करने के लिए दिया, उसी जगह आपने कठोर तपस्या कर कई जीवो का कल्याण किया, उसके बाद रावल साहब ने आकर आपकी तपस्या से प्रभावित होकर आपको अपने वहाँ आश्रम के लिए जमीन दी ।

जहाँ जेतरामजी महाराज ने अपना आश्रम बनाया, यहाँ पर आपने कई वर्षों तक तपस्या की, जिसे आजकल जेतरामजी की प्याऊ के नाम से जाना जाता है, यही पर जेतरामजी ने जालकी डाली से दांतुन कर वही पर रोप दिया, जो आज एक बड़े पेड़ के रूप में भी मौजूद है, अंत तक भक्ति व तपस्या करते हुए जेतरामजी महाराज देवलोक सिधार गए, आज भी जो सच्चे मन से ध्यावे उसकी मनोकामना पूर्ण होती है, यह सम्पूर्ण जानकारी रावजी व साखी के अनुसार दी गई है ।

श्री जेतेश्वर धाम महातीर्थ सिणधरी

यह तन विषय की बेलरी गुरु अमृत की खान।सीस दिये जो गुरु मिलै तो भी सस्ता जान।।
23/05/2026

यह तन विषय की बेलरी गुरु अमृत की खान।
सीस दिये जो गुरु मिलै तो भी सस्ता जान।।

23/05/2026

जय गुरूदेव री!! 🙏🚩

इस पवित्र महीने में परिवार सहित जेतेश्वर धाम में पधारकर धर्मलाभ लेवे!
18/05/2026

इस पवित्र महीने में परिवार सहित जेतेश्वर धाम में पधारकर धर्मलाभ लेवे!

14/05/2026

कल डॉ. नरसीराम जी देवासी मेडिप्लस हॉस्पिटल सांचौर में जाकर आशिर्वाद प्रदान किया।

भव्य वैशाख पूर्णिमा मेला! 💐🙏
30/04/2026

भव्य वैशाख पूर्णिमा मेला! 💐🙏

30/04/2026

देवासी समाज के आराध्य, परम पूजनीय संत जेतेश्वर महाराज की जन्म जयंती पर सादर नमन।

24/04/2026

जय गुरूदेव श्री जेतेश्वर भगवान!! 💐🙏

मालाणी की ध्वल धोरों की धरती के बिच सोने की तरह तपकर,स्वयं को कुंदन की भांति वातावरण में स्थापित करने वाले पूज्य संत श्र...
24/04/2026

मालाणी की ध्वल धोरों की धरती के बिच सोने की तरह तपकर,स्वयं को कुंदन की भांति वातावरण में स्थापित करने वाले पूज्य संत श्री जेतेश्वर जी महाराज जी की जयंती पर हार्दिक शुभकामनाएं।

सती शूरमा,ज्ञानी अर गजदंत।
इतरा पाछा न पड़े,चाहे पल्ट जावे ब्रह्मांड।।

जय धरती मां ,जय धोरा धर ,जग जोत, जय मात महान।
संत सूरमा देव जल्म ल्हे,आ खांण वीरां री,आ है राजस्थान २

मायड़ धरती मरूधरा,आ हैं वीरां री खांण।
नग-कण हिरा निपजे,इण धरती रे पांण।।

भगवान रो ना कोई रूप है,ना कोई नाम।जगत् पिता अनाम है अर् भगत जिण रूप रो नाम जपे अर माला फैरे , ध्यान धरे,प्रभू उण ही रूप में प्रगट व्हे जावे।इण कारण ही भारत भौम माथे जल्म लैवण सारूं देव-देवादि आत्मावां तरसे है।अर् बे पावन कोख री तलाश में रैवे है।क्यूंकि केवल मिनख जमारो ही मुक्ती रो द्वारो है।बाकि चौरासी लाख जीवा-जूंण तो संसार है।
इण ही भांत बाड़मेर जिला के सिवाना क्षेत्र के काठाड़ी गांव के ऊमा जी देवासी गैलोतर गोत्र और उनकी धर्मपत्नी ओखी देवी की रत्न कुक्षी से सन 1686 में भगतों की आराध पर भगवान भोलेनाथ ने अपने दिव्य अंश के रूप में एक बालक के रूप में जन्म लिया,जिनका नाम जेता राम रखा गया।कहते हैं न कि जगत अर भगत के सदैव बैर रहा है।ठीक ऐसा ही जेताराम जी के साथ घटित होना प्रारम्भ हो गया। बाल्यावस्था में ही वटवृक्ष रूपी छाया प्रदाता मां-बाप का छाया ऊपर से उठ गया।अपने रिश्तेदारों के ऐवड़ चराते और अपना गुजारा करते।समय के साथ साथ उनकी जिंदगी में अनेकों उतार चढ़ाव आए,मगर बालक जैताराम जी अपने लक्ष्य पथ पर निरंतर आगे बढ़ते रहे।जब वो प्रोढ़ अवस्था की तरफ बढ़ने लगे तो उनकी सगाई करने का प्रसंग आया मगर मां-बाप ना होने के कारण उसके लिए घर गवाड़ी,आटा-साटा की व्यवस्था कौन करें।तब दानाराम जी देवासी थे,उनके पुत्रियों थी,मगर पुत्र नहीं थे।उनके घर-जमाई रहने का निर्णय लिया गया।यह समय सात साल तक अग्नि परीक्षा का होता है।जंवाई को जो काम दिया जाता है, उसमें कोई कमी पेशी नहीं रहनी चाहिए।उस समय पशुपालन और खेती-बाड़ी का काम मुख्यतया होता था।साथ ही साथ वो उस नामित कन्या से किसी प्रकार से संपर्क में नहीं रह सकते थे।अगर इन नियमों में कोई उल्लंघन हो जाता तो वापिस घर भेज देते थे। जैताराम जी पूर्ण निष्ठा और ईमानदारी से घर-जमाई की जिम्मेदारी का निर्वहन किया।
मगर पूर्व जन्म से संत होने के प्रमाण वो अब जाने अनजाने में देने लगे थे।सीम-सीमाड़े में जाकर प्रभू भजन में लीन हो जाना,जीव जंत के प्रति पूर्ण दया भाव रखते हुए उसकी सार संभाल लेते रहते थे।एक समय ऐसा आया कि मारवाड़ क्षेत्र भयंकर अकाल की चपेट में आ गया,धान की फली भी नहीं फटी।इससे मवेशियों और मानवियों के पेट पालने भी मुश्किल हो गये थे।ऐसे विकट समय में लोगों को अनाज के लाले पड़ने लगे,वे किसी प्रकार से मवेशियों के दूध के सहारे दुख के दिन काटने लगे।उस समय जब भेड़ बकरियों का प्रजनन होने लगा,तब लोग नर बच्चों की बिक्री ना होने के कारण जंगल में ही फेंककर आने लगे। जेताराम जी दयालुपन के चलते उनको अपनी बकरीयों का दूध पिलाकर बचाते रहे। अंततः एक दिन उनकी सास को इसकी खबर लगी कि जमाई घर पर दूध नहीं लाते हैं,जिससे बच्चों को भोजन तक नहीं करवा पा रही हूं,इधर जमाई तो पराये लोगों के माल को धपा रहा है।इससे नाराज होकर उन्होंने जेताराम को सख्त हिदायत दी कि आज के बाद यह पंपाल अगर देख लिया तो मेरे से कोई बुरा नहीं होगा।

जेताराम जी ने उस दिन के बाद उन छोटे नर मिंडो और बकरी के मेमनों को अपने हाथ की अंगुली चुंगाकर बड़े किये। एक दिन किसी खुराफाती ने जेताराम जी के ससुर जी से शिकायत करी कि तुम्हारे एवड़ का ग्वाला जमाई पूरा दिन जाल वृक्ष की छाया में नींद लेता रहता है, तुम्हारे रेवड़ को जंगली हिंसक जानवर परेशान करते हैं ।इस बात की भनक लगते ही उनकी सास और ससुर बड़े क्रोधित हुए और इसकी हकीकत का पता करवाने के लिए, वह घर से जंगल की तरफ चल दिए। आगे जाकर एक लोमहर्षक घटना देखी कि एक जंगली भेड़िए ने उनके एवड़ की सबसे प्रिय बकरी को मार दिया है इससे क्रोधित होकर दानाराम जी ने जेताराम जी को फटकार लगाते हुए कहा कि तेरे को मैंने मेरे एवड़ माल का नाश करवाने के लिए नहीं रखा है। जेताराम जी ने आंखें खोली और देखा तो उधर प्रिय बकरी मरी हुई पड़ी है उन्होंने बड़े विश्वास के साथ भगवान का जाप करके बकरी के ऊपर हाथ फेरा ।बकरी सजीवन होकर अन्य बकरियों के साथ उछलने कूदने लगी।

इस घटना से उनके ससुर जी पानी पानी हो गए और उनके पैर पकड़कर कहने लगे मुझसे गलती हो गई ।आप प्रभु मुझे माफ कर लो। आप पूजनीय हो ,अब आप की सेवा हम नहीं ले सकते अब आपकी मैं शादी करके मेरी बेटी को आपके साथ विदा करूंगा। लेकिन शादी करके जगत के माया जाल में किसको फसना था, वह तो भगवान की माला फेरने के लिए धरती पर आए थे। दूसरे दिन उन्होंने दाना जी देवासी की बेटी सगरती को सुंनरी ओढ़ाकर, अपनी धर्म की बहन बनाकर वहां से निकल गए। धीरे धीरे वो जहां गए , वहां खूब परचे दिए चमत्कार दिखाएं,बालोतरा में महाजनों की गायों को चराते हुए तालाब खुदवाना,जीवों को चुगा देना, वहां रवाना होकर सिणधरी आते वक्त भूंका क्षेत्र में खारे कुएं के जल को मीठा करने समेत पग पग पर भगवान के दिव्य अंश और चमत्कारी पुरूष होने के प्रमाण दिए।

अंततः आकर वर्तमान भलखाड़ी सिणधरी के धौरों में बैठकर घोर तपस्या करने लगे। उस समय के लोग काळ-दुकाळ में सिंध क्षेत्र की तरफ पलायन करते थे।वो मुख्य मार्ग भी यही से होकर गुजरता था। जैसे-जैसे लोगों की आवाजाही बढ़ी,लोग आश्रय देखकर ठहरने लगे,उन राहगीरों की सेवा हेतु आपने ऊंठो पर पानी की पखाल और लोगों के घरों से अनाज लाकर उन राहगीरों की खूब सेवा करते हुए धर्म का प्रचार करते रहें।जिससे वह स्थान जोतराम जी महाराज की पोह मतलब प्याऊ के रूप मैं ख्याति प्राप्त हुआ।तदुपरांत आपने वहां जीवित समाधी ली।

तकरीबन 400 वर्ष बाद आज भी उस संजीवन भौम पर जाकर हम खुद को सकारात्मक ऊर्जा से आध्यात्मिक महसूस करते हैं। वहां के अध्यात्म की चुंबकीय आकर्षण पूरे भारत वर्ष के निज भक्तों को धर्म और सुकर्म की ओर आज भी अग्रसर कर रहा है।

यह स्थान आज अखिल भारतीय रेबारी समाज के गुरु गादी धाम के रूप में पूरे समाज और क्षेत्र को अपने आलोक से प्रकाशित कर रहा है। वर्तमान में यह धाम जेतेश्वर धाम के नाम से पूरे भारत भर में विख्यात है।

आगामी तीन दिवसीय कार्यक्रम श्री जेतेश्वर धाम भलखाड़ी सिणधरी की शाखा सरवाणा में श्री जेतेश्वर भगवान व कानाराम जी महाराज क...
17/04/2026

आगामी तीन दिवसीय कार्यक्रम श्री जेतेश्वर धाम भलखाड़ी सिणधरी की शाखा सरवाणा में श्री जेतेश्वर भगवान व कानाराम जी महाराज के मंदिर की भव्य प्राण प्रतिष्ठा एवं श्री श्री 1008 श्री देवाराम जी महाराज का जीवित भंडारा महोत्सव निर्मिते!

सादर आमंत्रण।।

राजस्थान की पावन मरूधरा में नेहड़ क्षेत्र के सरवाणा नगरे शुभारंभ वि.सं. 2083 वैशाख शुक्ला 6 22 अप्रैल 2026 बुधवार।देवारा...
07/04/2026

राजस्थान की पावन मरूधरा में नेहड़ क्षेत्र के सरवाणा नगरे शुभारंभ वि.सं. 2083 वैशाख शुक्ला 6 22 अप्रैल 2026 बुधवार।
देवारामजी महाराज जीवित भण्डारा गुरु श्री जेतारामजी एवं कानारामजी महाराज के नवनिर्मित मन्दिर में मूर्ति स्थापना एवं प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव।

!!भावभरा हार्दिक!!

आयोजक ::

अखिल भारतीय रेबारी समाज गुरुद्वारा श्री जेतेश्वर धाम सरवाणा समस्त ग्रामवासी सरवाणा, तह. सांचौर

श्री श्री 1008 महत श्री देवारामजी महाराज श्री जेतेश्वर धाम सरवाणा

श्री श्री 1008 महंत श्री पारसरामजी महाराज श्री जेतेश्वर धाम भलखाड़ी सिणधरी

जिला-जालोर (राज.) मो. 9636511008, 8233508543, 9602293593

Address

Barmer

Telephone

+919664443289

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when श्री जेतेश्वर धाम महातीर्थ- सिणधरी posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Share

Category