21/07/2026
आज के दिव्य दर्शन ।
।।जयसियाराम।।
अथ श्रीमद् हनुमान शतक
दोहा
बंदउँ गुरूपदरजकमल,
बंदउँ श्रीसुख धाम।
सियारामके प्रिय तनय,
बंदउँ सीताराम।।
बल , बुद्धि, विद्याहीनतनु,
सुमिरौं रावरि नाम
पवनपुत्र हे महाबीर,
अब सिद्ध करें सब काम।।
चौपाई
मंगल मूरति मारुति नंदन
कलियुग कल्प महादुख भंजन।
कुल कपीश करु कृपा कपारू
करुणाकर भव पार उतारू।। 1।।
अतुलित बल अविरल सुख नामा
करहु कृपा भय भूत अनामा।
सुनहु पवनसुत केसरि नंदन
शरण तिहारि जोरि कर वंदन।। 2।।
मंगल मूल , अमंगल हरना
कृपानिधान अबस गुन बरना
सियाराम सुत सहज सुजाना
सुनहु विनय मह मंगल माना।। 3।।
संकट मुक्त करें हनुमाना
सबल सुसंगत सकल समाना
सेवक राम सुनत सब पीरा
सगुन सुभावन संगत धीरा।। 4।।
प्रबल वेग अतिमधुर सुभावा
भक्त प्रवण अनुरक्त प्रभावा
प्रभु के पंथ पथिक बहुतेरे
कपि की कृपा मिटे दुख मेरे।।5।।
असुर, पिशाच, भूत भय भागे
नाम तुहार नियत मन लागे
आवै शक्ति सनातन सुखिया
हनुमत स्वयं जीव जग मुखिया।।6।।
शिव से स्वयं जगत उपजावे
शंकर स्वयं कपीश्वर पावे
असुर निकंदन अंजनि जाता
जापर कृपा वही सुख पाता।।7।।
श्रुति, विज्ञान, ज्ञान , गुण सागर
सकल भुवन, त्रैलोक उजागर
सागर साधि के लंका दहना
तुम कृपालु तो फिर क्या कहना।।8।।
संकट मोचक सकल सुमंगल
सुमिर तुम्हे सब मिटै अमंगल
कृपा पवन सुत जापर तुम्हरी
सुख पावै हरपल हियलहरी।।9।।
रोम रोम तुम्हरे गुन गावैं
सांस सांस तुमसे गति पावै
गुरु गन ज्ञान रावरी चरना
नहीं मनुज बस तुम्हरी बरना।।10।।
सियाराम शुभ कथा सुहावै
तुम्हरो गान सदा जग गावै
संकट कटे तुम्हारी सरना
करू समर्पण तुम्हरी चरना।।11।।
पावत ज्ञान सुहावत बानी
राउर कृपा बने गुन ज्ञानी
हे हनुमान सदा सुख दाता
बुध्दि बिमल करि ज्ञान प्रदाता।।12।।
महावीर हे बुद्धि विशारद
संकटमोचक सक्रिय पारद
बदलत बिकट समय संकेता
कृपा करो हे कृपानिकेता ।।13।।
अंगद लखन विभीषण देखा
कह सुग्रीव कहा सुख लेखा
भाई भरत भयातुर भावा
किये पवनसुत सबहि सुहावा।।14।।
तुम त्यागे अभिमान अनंता
गावै गुन मुनि प्रनवत संता
शक्ति सबल सुविचार सहावा
सुनत सकल संसार प्रभावा।।15।।
पावत प्रबल प्रवाह प्रभाऊ
तुम्हरी कृपा मिलै जो गाऊँ
राम स्नेह सिया के सरना
करूँ दंडवत तुम्हरी चरना।।16।।
गुन गन ज्ञान शील सम पावै
रावरि कृपा समुच्चय लावै
आवै अनत अगम अभिलाषा
उपजै अमित अपरिमित भाषा।।17।।
लाल देह लावण्य लियावा
बालि विजय सुग्रीव जितावा
किष्किंधा के राज दुलारे
उपजै अंगद कृपा तुम्हारे।।18।।
गुरु विज्ञान बतावै आपै
ज्ञान निछान दिखावै आपै
देत पराक्रम देत बड़ाई
रावरि कृपा से विद्या आई।।19।।
भक्ति भक्ति अनुरक्ति अजूबा
जस अनुराग नदी मह डूबा
माया जस महके संसारा
पावत जीव सहज आधारा।।20।।
गावै संत सुनावै बानी
तुम्हारे गुन बहुभाँति बखानी
महके प्राण दुसह दुख सहके
हिया हिले जस पंछी चहके।।21।।
राम भक्त तुम राम समाना
शंकर स्वयं लगावे ध्याना
शंकर सुवन केसरी नंदन
करहु अनुग्रह हे दुखभंजन।।22।।
हे अतुलित बल धाम विधाता
अष्ट सिद्धि नव निधि के दाता
कलियुग कल्प कृपा करु स्वामी
हे कपिकिंकर अंतर्यामी।।23।।
हे सुख दायक दया प्रदाता
दास रामके सुनहु ये बाता
जापर कृपा तुम्हारी होई
भागे भूत नही दुख कोई।।24।।
विनय शील अवतार समाना
तुमसे बचे लखन के प्राना
राम मुद्रिका सिया पठावा
शुभ आशीष सिया से पावा।।25।।
हे बजरंगबली रिपुनाशी
बज्रदेह बलधर अविनाशी
दानव दुष्ट दहन करि आवै
जय हनुमान ज्ञान गुन गावै।।26।।
प्रनवउँ नाथ करू तोरि ध्याना
कृपा करो मोपर हनुमाना
महाबीर के चरण धरू मैं
रावरि इच्छा सदा करू मैं।।27।।
मंगल दिवस अमंगल जारो
संकट काल सदा ही टारो
हे बजरंगबली गुरु ज्ञानी
रावरि कृपा सदा हम जानी।।28।।
जीवन जनित रोग सब नासे
जीव जनम करुणाकर आसे
सिया तनय हनुमान गोसाईं
रावरि कृपा से सबही पाई।। 29।।
आवत ज्ञान मिटे अज्ञाना
कृपा होहि तब बने सुजाना
रोग मिटे भव बंधन सगरी
रावरि कृपा भरी मम गगरी।।30।।
हर बाधा हर संकट जाए
जप ते नाम कुबुद्धि मिटाए
आये ज्ञान मिले सुख सारा
रावरि कृपा उतारे पारा।। 31।।
जगजननी से आसिस पाए
सब गुन तुम्हरी गति में आये
अष्ट सिद्धि नवनिधि के दाता
कलियुग में तुम भाग्यविधाता।।32।।
राम काजु अरु कथा प्रसंगा
राम दास रामहि के संगा
राम दुआर पहुँच जो आता
राम कृपा वह तुमसे पाता।। 33।।
रामभक्त अतिशय अनुरागी
राम शक्ति जस लहके आगी
राम राम कहि रामहि गावैं
ते हनुमान को अतिशय भावें।।34।।
राम राम अरु राम उचारें
राम राम से राम उबारें
राम राम कहि राम पुकारा
रामकृपा होहिहि भवपारा।। 35।।
हे कपीश हे मुनि मन ज्ञानी
हे अवनीश सुनहु मम बानी
हे हनुमान सदा सुख दाता
करहु कृपा हे परमविधाता।। 36।।
रामकृपा तुम अति बड़भागी
तुम्हारो नाम जपूँ सोइजागी
आवत द्वार तुम्हारे परही
गुरुसम दया दास पर करहीं।। 37।।
जेहि बिधि नाथ विभीषण तारे
जस सुग्रीव साथ निज धारे
जस अंगद पर कृपा दिखावा
जस भरतहि भवभक्ति बतावा।। 38।।
जस रघुनाथ को हाथ बटावा
जस लक्ष्मण के प्राण बचावा
लंका को जस राखिन कीन्हा
दूत बने जस माता चीन्हा।। 39।।
तस हे रामकथा के स्रोता
मन मो चहत लगावनि गोता
अस करि स्रवहिं कृपा की गंगा
प्रभु जब रचहि पुनीत प्रसंगा।। 40।।
आवत जीव नसावत पापा
जीवन बने सदा निष्पापा
हे कपि हे गुरु हे अनिकेता
कृपा करहु जस बनहुँ विजेता।।41।।
राम काज कीन्हे जेहि भाँती
सुमिरौं तात तुम्हे दिन राती
ओहि जस संकट हमरी टारो
शरण देहि हमको उद्धारो।। 42।।
जापर कृपा तुम्हारी होई
उसको कष्ट मिले ना कोई
भक्ति बढ़े अनुराग बढ़ावे
जीवन भर तुम्हरी गुन गावै।।43।।
आवत बुद्धि बढ़ावत ज्ञाना
मुक्त करें यह आना जाना
नहि अभिमान न कोई शंका
भस्म करें जो मन की लंका।। 44।।
हे अधिपति हे सृष्टि सुजाता
हे गुरुदेव हे विनय प्रदाता
हे सिय सुत हे शिव सन्यासी
रामदूत हे जग अविनाशी।। 45।।
सुमिरूं सदा तुम्हे हनुमाना
बंदउँ चरण राम के जाना
गाऊँ गुन अरु सीस नवाऊँ
तुमसे कृपा रामकी पाऊँ।।46।।
अगम निगम श्रुति कथा पुराना
गावै गुन पावै विज्ञाना
आवे ज्ञान बने जस रसना
हे हनुमान हिया मम बसना।।47।।
कृपासिंधु के तुम रखवारे
करहुँ कृपा हम तुम्हरी द्वारे
किष्किंधा के भाग्यविधाता
तुमसे सब सुंदर बन जाता।। 48।।
सुंदर सत्य सनातन बानी
प्राण पवन परिणाम प्रमानी
आवत नेह बतावत बाता
तुम्हरी कथा सुनावै ताता।। 49।।
जस संजीवनि लेकर आये
जस लक्ष्मण के प्राण बचाये
तस मोपर करि कृपा विधाना
टारो संकट हे हनुमाना।। 50।।
युग ते कल्प, कल्प ते आगे
सुमिरहु तुम्हे नींद अरु जागे
तुम्हरे सुमिरन सदा सुहावै
तुम्हरे गुन सब सासन गावै।। 51।।
ब्रह्म बिप्र विज्ञान विधाना
ताकर नाम परे हनुमाना
गन गुन सकल निधान बतावै
जगत सदा तुम्हरो जस गावै।। 52।।
आवत तेज बढ़ावत प्रीती
रावरि कृपा रहे जस रीती
रावरि नाम उतारे पारा
रावरि से सक्रिय संसारा।। 53।।
युग ते अमर कल्प ते ऊपर
रावरि ताप रहे जस भूपर
रावरि में जस जगत निहारा
रावरि बेग रावरी धारा।। 54।।
याद करीं दस्कन्दर बाता
मुष्ठि युद्ध जब रचे बिधाता
एकहि में रावन छितराया
देव सकल कुल मन घबराया।। 55।।
राम जन्म के कारन आना
ब्रह्मा की चिंता तब जाना
अतुलित बल लंकेश बतावा
संकर सुवन सदा सुख पावा।। 56।।
हे महाबीर बजरंग प्रभाऊ
रामकथा जस राग सुनाऊ
शरण तिहारी हे हनुमाना
हरिये रोग विविध मम नाना।। 57।।
गाऊँ जस अनुराग तुम्हारे
तुम्हरी कृपा सभी दुख हारे
कृपासिंधु के तुम बड़भागी
तुम्हरी शरण अनुग्रह लागी।।58।।
हे कलिकल्प महादुखभंजक
संकटमोचक दया प्रभंजक
रावरि से रावरि के बाता
बरसे कृपा तुम्हारी ताता।। 59।।
मनोजवं मारुत जस बेगा
रावरि कृपा बने मम नेगा
दुख दारिद्र्य निकट नहि आवै
रावरि नाम सदा मन गावै।। 60।।
आवे बुद्धि बतावै करनी
जारे ताप सबे दुख हरनी
उपजे ज्ञान सदा विज्ञाना
रावरि कृपा रहे हनुमाना।। 61।।
रावरि जस रावरि अनुकंपा
रावरि देह गंध जस चंपा
जस जस कृपा रावरी होई
दास की आस पुरावे सोई।। 62।।
रावरि जस रावरि पुर पम्पा
रावरि पर रामहि अनुकंपा
रावरि राग रावरी नामा
बरसे कृपा हरखि उर रामा।।63।।
जस सुग्रीव कृपा पुर पावा
बालि निवारि तबे सुख आवा
रामकृपा बरसे पुर भारी
किष्किंधा जस नगरी न्यारी।।64।।
धरती धरित जहां बसि हम्पी
धूरि धुरी बन दल बल डंपी
अंजनि सुत अंजन जस आवे
दिवस मास सीतहि समुझावे।।65।।
जोजन सौ अनुमान लगावा
तब अशोकवाटिका को धावा
पावत जस आसीस प्रानकी
जस अपनावे मातु जानकी।।66।।
त्रिजटा सपन मंदोदरि मंसा
देखि दशानन की अनुशंसा
हिया सिया के जस जुड़वावे
पुत्र रूप माता सुख पावे।। 67।।
दुष्ट दलन सुख मन मुनि रंजक
दानव दुष्ट दलिद्दर भंजक
रावरि कृपा ते बेगि प्रभाऊ
लंका दहन सो शंका जाऊ।।68।।
आवहि तेज बढावहि ज्ञाना
पावहि प्रबल प्रनत बिग्याना
जानहि जगत जुगत जीवनहि
जागहि जीव मनावहि सबही।।69।।
रावरि ते रावरि करि बाता
रावरि अंक सुवित्र सुहाता
रावरि बल रावरि बरियाना
रावरि शरण सजी सुख पाना।। 70।।
हे सुख सागर हे दुखभंजक
है अतुलितबलधाम सुसंजक
है गुरुकृपा खान हनुमाना
जीव ब्रह्म सब एक समाना।। 71।।
अगम निगम सगरो बिग्याना
रावरि में रावरि को जाना
प्रनवउँ सांस सांस हनुमाना
रामदास तुम शंभु समाना।। 72।।
जीवन जीव जगत जे जनहीँ
रावरि में रावरि को मनहीँ
रावरि तेज रावरी बेगा
रावरि में रावरि कर नेगा।।73।।
रामहि कृपा राम के नामा
राम नाम प्रिय सकल सुकामा
रामहि इच्छा राम दुलारे
सदा उपस्थित राम दुआरे।।74।।
रावरि अनुमति मिले प्रबेसा
सियाराम की कृपा बिसेसा
रावरि इच्छा राम पियारा
भागे कष्ट मिटे दुख सारा।।75।।
जीवन के संकट संहारक
जीवन जीव जगत उद्धारक
जीवन कष्ट मुक्त करवावें
सब पर रामकृपा बरसावै।।76।।
हे गुरु ज्ञान गणित गणनायक
हे दुखभंजक हे सुखदायक
हे हरिकृपा सुमंगलकारी
हे हनुमान सदा हितकारी।।77।।
हे कविकुल कोविद कल्याना
हे कपीश हे पवन प्रनाना
हे सियसुत संकर सम ज्ञानी
शरण तिहार जीव अज्ञानी।।78।।
रावरि में रावरि को देखा
रावरि में रघुनाथ बिसेखा
रावरि आस रावरी नामा
रावरि चरनन कोटि प्रनामा।।79।।
रावरि लंका जस दुख दहना
रावरि से रावरि कर कहना
जीवन के सब कष्ट मिटावै
रावरि गुन जे नर मन गावै।।80।।
सियाराम मय जगत सुहावा
जिन हनुमान सदा गुन गावा
रीझहि राम रावरि रीती
रावरि रामकृपा रस प्रीती।।81।।
अगम निगम विज्ञान बतावा
जिनके गुन सगरो जग गावा
जिनकी कृपा जगत विख्याता
जाकी रीति सदा सुखदाता।।82।।
कलियुग काल कटे गुन तोरे
हनुमत हिया भजे मन मोरे
जो शरणागत होत तिहारे
संकट से हनुमान उबारे।। 83।।
पूज्य पवनसुत करूँ प्रनामा
रावरि कृपा रावरी नामा
रावरि चरन रावरी सरना
रावरि आस सदा सुखकरना।।84।।
आंजनेय अनुराग अपारा
अतुलित बल जाने संसारा
आवत अनुनय विनय बिसेखी
अगनित अमित जीव जग लेखी।।85।।
राम राम कह राम अधारा
रावरि दास कहे संसारा
रावरि रंग रावरी भेसा
रावरि ते रावरि उपदेसा।। 86।।
संकट शमन सकल संधाना
सुफल सुभाव सुभग सम्माना
संगति साधु सभय सुखकरना
सागर साधि सकल दुख हरना।।87।।
सुनत राम गुन जगत सुहावा
व्यथा जीव की तुमहि मिटावा
तुमहि सिया प्रिय सुत अति भावा
कृपा निधान सबै सुख पावा।। 88।।
हे कपीश हे कलियुग स्वामी
हे करुणामय अंतरयामी
हे रघुनाथ सीय प्रिय दासा
हे हनुमान रावरी आसा।। 89।।
जगत जीव बंधन बहुभाँती
रावरि दिया रावरी बाती
हे बजरंगबली अस कीजे
रावरि शरण सदा मम दीजे।।90।।
जब जब जीव जगत पथ भूला
देहि रामपथ सजग अशूला
आवहि शरण शमन संकट के
पावहि रामनाम मन भटके।।91।।
जबहि जनावत जन्म जगत में
आप जगावत राम भगत में
रामहि कृपा राम दुख हरना
आपहि से आपहि को कहना।।92।।
कष्ट, काल, जंजाल मिटावै
हे कपीश रावरि गुन गावै
रावरि शरण चरण आधारा
रावरि कृपा होहि उद्धारा।। 93।।
रावरि मंत्र राम कर नामा
रावरि तंत्र राम जप कामा
रावरि आस एक विस्वासा
एकहि सूत्र एकही आसा।। 94।।
जीवन जीव जगत जब जाना
एक नाम उपजा हनुमाना
एकहि दिया एकही बाती
रावरि कृपा रहे बहुभाँती।।95।।
जब जब जेहि जनावत जाना
बिप्र रूप धरि जात बताना
आवत आस सदा प्रभुताई
रावरि जस रावरि ते आयी।।96।।
रावरि जगत रावरी नाता
रावरि नेह रावरी ताता
रावरि कृपा रावरी बाती
रावरि से रावरि अनुपाती।।97।।
रावरि रीति रहत अनुकंपा
रावरि रीति रमत रत पम्पा
प्रिय पुर हम्पी जस रजधानी
रावरि स्वयं रावरी जानी।।98।।
हे रघुपति प्रिय कृपा निधाना
कलिमल हरन परम विज्ञाना
हे आधार जगत के जैसे
करहुँ कृपा अब मोपर तैसे।।99।।
जै जै जै हे जगसुख दाता
जै जै जै हे भाग्य विधाता
जै जै जै सियराम दुलारे
जै जै जै भगवान हमारे।।100।।
दोहा
जो गावै हनुमत शतक,
संजय शुभ अनुमान।
राम,लखन सीता सहित,
हिया बसैं हनुमान।।
।। इतिश्रीमद हनुमत शतक सम्पूर्णम।।
।।श्री सीताराम नाम महाराज की जय।।