मसलक ए आला हज़रत ज़िंदाबाद

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मसलक ए आला हज़रत ज़िंदाबाद तुझसे और जन्न्त से क्या मतलब वाहाबी दुर हो
हम है रसुलुल्लाह ﷺ के जन्न्त रसुलुल्लाह ﷺ की

मसलक-ए-आला हज़रत ज़िंदाबाद
फतावा रिजविया से कुछ खास मसाइल

1 मसअला
" जो नबी ना हो वह नबी के मर्तबा को कभी नहीं पहुँच सकता।"
फतावा रज़विया जि 23 सफा 685)

2 मसअला
"काफ़िर औरत से मुसलमान औरत को पर्दा करना जरुरी है।"
फतावा रज़विया जि 23 सफा 907)

3 मसअला
"क़ुरान पाक का तर्जुमा दूसरी जुबान में करना जाइज़ है।"
फतावा रज़विया जि 23 सफा 709)

4 मसअला
"हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहे वसल्लम का ज़िक्रे पाक करना बेहतरीन इबादत है।"
फतावा रज़विया जि 23 सफा 724)

5 मसअला
"मिलाद शरीफ के एखतेताम पर खड़े होकर हुज़ूर की बारगाह में सलाम पढ़ना बेहतर है।"
फतावा रज़विया जि 23 सफा 729)

6 मसअला
"फ़ासिक़ ( जैसे नमाज़ ना पढ़ने वाला झूट बोलने वाला वगैरहुम)
से महफ़िल में किरत करवाना नात पढ़वाना तकरीर करवाना दुआ करवाना वगैरा सब हराम है।"
फतावा रज़विया जि 23 सफा 734)

7 मसअला
> मुसलमान पर अज़ाब होगा मगर
उसपर आख़िरत में अल्लाह की लानत ना होगी
(फतावा रज़विया जि. 14 सफा 287)

8मसअला
> नाचने गाने का पेशा हराम कतई है
अगर कोई उसे हलाल जाने तो कुफ़्र है
(फतावा रज़विया जि. 23 सफा 583)

9 मसअला
> किसी काफ़िर के यहां नौकरी करना उस वक़्त जाएज़ है जबकि कोई शरीअत के खिलाफ काम ना करना पड़े
(फतावा रज़विया जि.23 सफा 591)

10 मसअला
क़ादियानी बल्कि हर बद अक़ीदा वहाबी देवबंदी मौदूदी शिया तबलीगी वगैरा उसके साथ ना कुछ खाये ना पियें
ना उससे रिश्ता रखे बल्कि उससे बात ही करने की इज़ाज़त नहीं
हुज़ूर ने फ़रमाया
उनसे दूर रहो और उन्हें अपने से दूर रखो
(फतावा रज़विया जि. 23 सफा 598)

11 मसअला
शौहर बीवी के इंतेक़ाल के बाद उसको गुस्ल नहीं दे सकता है
(फतावा रज़विया जि 22 सफा 234)

12 मसअला बजने वाला जेवर औरत को इस सूरत में पहनना जाएज़ है के उसकी आवाज़ गैर मेहरम तक ना पहुचे
वरना नाजाइज़ है
(फतावा रज़विया जि. 22 सफा 128)

13 मसअला
फ़ासिक़ (दाढ़ी मुंडाने वाला नमाज़ ना पढ़ने वाला झूट बोलने वाला वगैरहुम) से महफ़िल में किरत करवाना नात पढ़वाना तकरीर करवाना दुआ करवाना वगैरा सब हराम है
(फतावा रज़विया जि.23 सफा 734)

14 मसअला
ये कहना कि..
दाढ़ी मुंडाने वाला दाढ़ी रखने वाले से बेहतर है तो ये कलमए कुफ़्र है
(फतावा रज़विया जि.23 साफ़ 736)
इंशा अल्लाह आगे भी जारी रहेगा
मसलक-ए-आला हज़रत ज़िंदाबाद

15 मसअला
अवाम पर उलमाए दीन का अदब बाप से जियादा फ़र्ज़ है
(फतावा रज़विया जि. 25 सफा 2016)

16मसअला
हुज़ूर की ताज़ीम व तौकीर करना मुसलमान के लिए ऎने ईमान है
(फतावा रज़विया जि. 23 सफा 764)


18 मसअला
किसी मय्यत को जनाजा पढ़े बगैर दफ़न कर दिया तो जबतक उसके सलामत होने का गुमान हो उसके कब्र पर जाकर नमाज़े जनाजा पढ़े
(फतावा रज़विया जि 22 सफा 478)

19 मसअला
बतौरे ताजीम क़ुरआन मुक़द्दस को सर आँख सीने से लगाना जाइज़ है
(फतावा रज़विया जि 22 सफा 478)

20 मसअला
औरतें आपस में एक दूसरे से सलाम करें
और मर्द जवान औरत को सलाम ना करें
और बूढी को करने की इजाजत है
(फतावा रज़विया जि 22 सफा 563)

28 मसअला
अज़नबी जवान औरत सलाम करे तो मर्द दिल में जवाब दें
और मर्द जवान औरत को सलाम ना करें
और बूढी को करने की इज़ाज़त है
(फतावा रज़विया जि 22 563/408)

22 मसअला
वजू करने वाले को किसी ने सलाम किया
तो वह जवाब दे सकता है
(फतावा रज़विया जि 22 सफा 569)

23 मसअला
ससुर से पर्दा करना वाजिब नहीं (जवान हो तो बेहतर है) इसी तरह जवान सास के लिए दामाद से
(फतावा रज़विया जि 22 सफा 240)
24 मसअला
जवान सास के लिए दामाद से पर्दा है
(फतावा रज़विया जि 22 सफा 240)

25 मसअला
औरत का इस तरह से खुश इलहान से पढ़ना की उसकी आवाज़ गैर महरम तक जाए हराम है
(फतावा रज़विया जि 22 सफा 242)

26 मसअला
बालिग़ के बदन पर ना महरम (जिससे शादी करना जाइज़ हो) का उबटन मलना हराम है
(फतावा रज़विया जि 22 सफा 245)

27 मसअला
औरत का गैर महरम के हाथ से चूड़ी पहनना हराम है
और शौहर राजी हो तो दय्युस है(और दय्युस के लिए जहन्नम है)
(फतावा रज़विया जि 22 सफा 247)

28 मसअला
बद अक़ीदा वहाबी देवबंदी तबलीगी वगैरा से अपने बच्चों को पढ़वाना हराम है
(फतावा रज़विया जि.23 सफा 682)

29 मसअला
बदअक़ीदा उस्ताद का सुन्नी शागिर्द पर वही हक़ है जो शैतान का फरिश्तों पर है यानी फरिस्ते शैतान पर लानत भेजते हैं और क़यामत के दिन घसीट कर दोजख में फेंक देंगे
(फतावा रज़विया जि. 23सफा707)

30 मसअला
देवबंदी को मुसलमान जानकर उसकी तकरीर सुनना मसअला पूछना मेलजोल रखना कुफ़्र है (फतावा रज़विया जि.23सफा710)

31 मसअला
जाहिल को शरीअत का हाकिम बनाना हराम है
(फतावा रज़विया जि.23सफा714)

32 मसअला
वाज तकरीर करना आलिम का मंसब है जाहिल को वाज तकरीर करना हराम है
(फतावा रज़विया जि.23 सफा 717)

33 मसअला
आपस में मुआनका (गले मिलना) जाइज़ है
(फतावा रज़विया जि 22 सफा 251)

34 मसअला
दोनों हाथ से मुसाफा करना मनदुब व मसनून है
और गुनाह दरख़्त के पत्ते की तरह झड़ जाते हैं
(फतावा रज़विया जि 22 सफा 270/

35मसअला
जब कोई मुसलमान जो एक निवाला अल्लाह की राह में खर्च करता है तो अल्लाह तआला उसे इतना बढ़ाता है की वह उहद पहाड़ के बराबर हो जाता है
(फतावा रज़विया जि 22 सफा 276)

36 मसअला
इमाम बुखारी को 6 लाख
इमाम मुस्लिम को 3 लाख इमाम अहमद बिन हम्बल को 10 लाख
हदीस याद थी
(फतावा रज़विया जि 22 सफा 294)

37 मसअला
हुज़ूर का मुबारक नाम सुनकर अंगूठा चूमकर आँखों से लगाना बेहतर है
मगर ख़ुत्बा नमाज़ तिलावते क़ुरआन के वक़्त ना चूमें
(फतावा रज़विया जि 22 सफा 316)

38मसअला
काफ़िर को बिला जरुरत सलाम करना नाजाइज़ है
जरुरत पर लाला साहब या बाबू साहब वगैरा कह दें
बगैर सर झुकाये सरपर हाथ रखे और अगर वह सलाम करे तो उसके जवाब में अलैका कहें या सलाम ही कह दें
(फतावा रज़विया जि 22 सफा 317)

39 मसअला
जिस तरह मर्द के लिए हराम है की गैर महरम औरत को देखे
इसी तरह औरत के लिए हराम है की गैर महरम मर्द को देखे
(फतावा रज़विया जि 22 सफा 201)

40 मसअला
मुश्त जनी (हाथ से मनि निकालना) करना हराम है और ऐसे शख्स पर लानत है
(फतावा रज़विया जि 22 सफा 202)

41 मसअला
बुरों की सोहबत से दूर रहना जरुरी है और इसी में भलाई है
(फतावा रज़विया जि 22 सफा 205)

42 मसअला
गैर महरम पीर से भी औरत को पर्दा करना जरुरी है
(फतावा रज़विया जि 22 सफा 205)

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108वें उर्स-ए-आला हज़रत के मौके पर जायरीनों की आमद के लिए मुख्य उर्स स्थल मदरसा जामियातुर्रजा को खूबसूरत लाईटो से सजाया गया।

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18/07/2026

आला हज़रत अज़ीम उल बरकत मुजद्दीदे दीनों मिल्लत अश शाह इमाम अहमद रज़ा खान बरेलवी (अलैहिर रहमा) का 108वां अज़ीम उशशान सालाना उर्स मुबारक 6/7/8 अगस्त 2026 CE, यानी जुमेरात, जुमा और हफ्ता को बड़ी अकीदत और एहतराम के साथ मनाया जाएगा।
#आलाहज़रत

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23/06/2026

The Grand Annual URS Anniversary of AlaHazrat (Alayhir Rahmah) will be celebrated with great dignity and devotion on the 23/24/25 Safar al-Muzaffar 1448 AH corresponding to 7/8/9 August 2026 CE, i.e., Friday, Saturday and Sunday. The devotees of the beloved Prophet ﷺ should prepare to join the URS Sharif gatherings and conferences at CIS Jamiatur Raza, Center of Ahl as-Sunnah Bareilly Sharif in large numbers. Allah reward you all immensely!

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21/06/2026

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