श्रीरामकथावाचक मानस लव-कुश बरेली उ०प्र०

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श्रीरामकथावाचक मानस लव-कुश बरेली उ०प्र० राम नाम के हीरे मोती हम बिखराए गली गली?

महादेव स्मरण।
26/08/2026

महादेव स्मरण।

25/08/2026

पर उपदेश कुशल बहुतेरे"
(१) प्रस्तावना - उपदेश का महत्त्व, प्रभाव ।
(२) उपदेशक का महत्व एवं गौरव - राष्ट्र-निर्माण, समाज सुधारक, पथ प्रदर्शक, आकाश दीप की भाँति दिशा निर्देशक ।
(३) उपदेशक की कथनी और करनी में साम्य की आवश्यकता साम्य प्रभावशाली कृत्रिमता सारहीन ।
(४) करनी के अभाव में उपदेशों की निर्जीवता सजीव और निर्जीव उपदेश। सजीव उपदेश की सार्थकता ।
(५) उपसंहार-उपदेश देना सरल है। आन्तरिक और बाह्य आचरण में साम्य रखते हुए उपदेश देना प्रभावपूर्ण होता है।
महादेव स्मरण।

शुभ सोमवार।मंगलमय सावन।महादेव स्मरण।
24/08/2026

शुभ सोमवार।
मंगलमय सावन।
महादेव स्मरण।

20/08/2026

छात्रों में अनुशासनहीनता
(१) प्रस्तावना -छात्र जीवन का तथा छात्र जीवन में अनुशासन का महत्त्व ।एकनिष्ठ साधना की समानता ।
(२) अनुशासनहीनता के कारण-
(क) पैतृक संस्कार एवं उनके कुप्रभाव । -
(ख) पारिवारिक वातावरण का कुप्रभाव ।
(ग) संसर्ग का कुप्रभाव।
(घ) माता-पिता की सन्तान के प्रति शिथिलता ।
(ङ) माता-पिता की अपनी सन्तान के प्रति कर्त्तव्यहीनता ।
(च) माता-पिता में सन्तान के पथ-प्रदर्शन की अयोग्यता, अक्षमता अथवा समय का अभाव ।
(छ) उत्तेजक पदार्थों का सेवन ।
(ज) सिनेमा, गन्दे साहित्य, जासूसी उपन्यासों का कुप्रभाव ।
(झ) निरंकुश स्वतन्त्रता उपभोग ।
(ञ)राज-भय, पितृ-भय, समाज-भय का लोप ।
(थ) कठोर दण्ड का अभाव।
(ठ) अध्यापकों में अपने दायित्व की उपेक्षा ।
(ड) भ्रष्ट व्यक्तियों द्वारा गलत पथ-प्रदर्शन ।
(३) अनुशासनहीनता से हानि-
(१) ज्ञान की अप्राप्ति ।
(२) राष्ट्रीय चरित्र का पतन ।
(३) राष्ट्रीय जीवन का पतन ।
(४) राष्ट्रीय सम्पत्ति की क्षति ।
(५) अयोग्य नागरिक ।
(६) देश में बेरोजगारी ।
(८) राष्ट्र का अन्धकारपूर्ण भविष्य ।
(४) सुधार के उपाय-
(१) माता-पिता, समाज, अध्यापक एवं राज्य की सामूहिक सतत् सतर्कवा) और जागरुकता ।
(२) कठोरतम दण्ड की वैधानिक व्यवस्था ।
(३) शिक्षा केवल विद्यार्थी के लिए।
उपसंहार- अच्छे अनुशासित विद्यार्थी ही अच्छे राष्ट्र की दृढ़ आधारशिला एवं राष्ट्र के भावी कर्णधार होते हैं। अतः उन्हें अच्छा बनना और बनाना दोनों आवश्यक हैं।
महादेव स्मरण।

19/08/2026

काल धर्म ब्यापहिं नहिं ताही।
रघुपति चरन प्रीति अति जाही।।
महादेव स्मरण।

18/08/2026

मार्कण्डेय पुराण के अनुसार अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व और वशित्व- ये आठ सिद्धियां होती हैं। ब्रह्मवैवर्तपुराण के श्रीकृष्ण जन्म खंड में यह संख्या अठारह बताई गई है।
महादेव स्मरण।

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