20/08/2026
छात्रों में अनुशासनहीनता
(१) प्रस्तावना -छात्र जीवन का तथा छात्र जीवन में अनुशासन का महत्त्व ।एकनिष्ठ साधना की समानता ।
(२) अनुशासनहीनता के कारण-
(क) पैतृक संस्कार एवं उनके कुप्रभाव । -
(ख) पारिवारिक वातावरण का कुप्रभाव ।
(ग) संसर्ग का कुप्रभाव।
(घ) माता-पिता की सन्तान के प्रति शिथिलता ।
(ङ) माता-पिता की अपनी सन्तान के प्रति कर्त्तव्यहीनता ।
(च) माता-पिता में सन्तान के पथ-प्रदर्शन की अयोग्यता, अक्षमता अथवा समय का अभाव ।
(छ) उत्तेजक पदार्थों का सेवन ।
(ज) सिनेमा, गन्दे साहित्य, जासूसी उपन्यासों का कुप्रभाव ।
(झ) निरंकुश स्वतन्त्रता उपभोग ।
(ञ)राज-भय, पितृ-भय, समाज-भय का लोप ।
(थ) कठोर दण्ड का अभाव।
(ठ) अध्यापकों में अपने दायित्व की उपेक्षा ।
(ड) भ्रष्ट व्यक्तियों द्वारा गलत पथ-प्रदर्शन ।
(३) अनुशासनहीनता से हानि-
(१) ज्ञान की अप्राप्ति ।
(२) राष्ट्रीय चरित्र का पतन ।
(३) राष्ट्रीय जीवन का पतन ।
(४) राष्ट्रीय सम्पत्ति की क्षति ।
(५) अयोग्य नागरिक ।
(६) देश में बेरोजगारी ।
(८) राष्ट्र का अन्धकारपूर्ण भविष्य ।
(४) सुधार के उपाय-
(१) माता-पिता, समाज, अध्यापक एवं राज्य की सामूहिक सतत् सतर्कवा) और जागरुकता ।
(२) कठोरतम दण्ड की वैधानिक व्यवस्था ।
(३) शिक्षा केवल विद्यार्थी के लिए।
उपसंहार- अच्छे अनुशासित विद्यार्थी ही अच्छे राष्ट्र की दृढ़ आधारशिला एवं राष्ट्र के भावी कर्णधार होते हैं। अतः उन्हें अच्छा बनना और बनाना दोनों आवश्यक हैं।
महादेव स्मरण।