Young Engaged Buddhists of India

Young  Engaged Buddhists of India TO CONNECT THE YOUNG BUDDHISTS IN INDIA AND TO PROVIDE A WIDE SPECTRUM WORLDWIDE TO ASSOCIATE THEM

12/04/2026

सम्यक पार्टी का मुख्य उद्देश्य आम जनता की लोकतांत्रिक पार्टी बनाना है। यह पार्टी राष्ट्रीय स्तर की होगी। इसमें सभी जाति धर्म क्षेत्र वर्ग के व्यक्ति को राष्ट्रीय अध्यक्ष,मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री बनने का अवसर प्राप्त होगा। यह किसी एक परिवार एक जाति एक धर्म एक क्षेत्र की पार्टी नहीं होगी। भारत के समस्त आम जनता की लोकतांत्रिक पार्टी होगी।
इस पार्टी में बूथ अध्यक्ष से लेकर राष्ट्रीय अध्यक्ष तक 3 साल में बदल जाता है और यही बदलाव इसे आम जनता की लोकतांत्रिक पार्टी बनाती है।
लोकतंत्र में सिर्फ विभिन्न जातियों के बीच से एमपी एमएलए मंत्री बना देना ही पर्याप्त नहीं है, वरन यह भी जरूरी है कि विभिन्न जाति धर्म के लोगों के बीच से राजनीतिक दलों में राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रदेश अध्यक्ष जिला अध्यक्ष बदल बदल कर बने और बदल बदल कर मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री बने। अगर दल लोकतांत्रिक नहीं होगा,तो इस प्रकार की व्यवस्था शासन सत्ता में आने पर नहीं की जा सकती और न ही किसी प्रकार का बदलाव हो पाएगा।
भारत की आम जनता विशेष रूप से मध्यम वर्ग और हर जात बिरादरी का गरीब व्यक्ति चार प्रमुख समस्याओं से जूझ रहा है।
पहली समस्या है कि उसके बच्चों को एक समान अच्छी शिक्षा नहीं मिल पा रही है।
दूसरी समस्या है बीमार होने पर उनके चिकित्सा की नि:शुल्क व्यवस्था नहीं है।
तीसरी समस्या है की हर घर में कोई न कोई युवा बेरोजगार है ।
चौथी समस्या है कि कानून व्यवस्था इस प्रकार से है कि आम आदमी को न्याय और समता नहीं मिल पा रही है। वह सुकून से नहीं पा रहा है। अगर उसके विरुद्ध अन्याय होता है ,तो समाधान भी नहीं हो पा रहा है। आए दिन समाज के दबंग और सामंत लोग अन्याय करते रहते हैं और उसका कोई समाधान नहीं निकल पा रहा है ,क्योंकि राजनीतिक दल ऐसे लोगों के हित का प्रतिनिधित्व करते हैं और ऐसे लोगों के विरुद्ध कार्रवाई नहीं करते हैं।

इसलिए लोकतांत्रिक पार्टी सम्यक पार्टी में इस प्रकार से परिवर्तन होता रहेगा कि किसी एक वर्ग जाति का और सामंत तथा पूंजीपतियों का वर्चस्व न हो पाए।

सम्यक पार्टी का उद्देश्य है कि आम जनता की शिक्षा व्यवस्था विश्व स्तरीय की जाएगी। कक्षा 1 से लेकर 12 तक की शिक्षा शासकीय क्षेत्र में होगी और इतनी विश्वस्तरीय और गुणवत्तापूर्ण होगी कि निजी स्कूलों की जरूरत भी नही पड़ेगी।
प्राइमरी से लेकर विश्वविद्यालय तक की शिक्षा निशुल्क और विश्व स्तर की होगी और दूर दराज भी विश्व स्तरीय शिक्षा उपलब्ध कराई जाएगी।
दूसरा स्वास्थ्य सेवाएं इतनी बेहतर बनाई जाएगी कि किसी को बीमार होने पर निजी अस्पतालों की जरूरत ना पड़े और सरकारी अस्पताल में ही बिना किसी खर्च के उसे संपूर्ण चिकित्सा उपलब्ध हो जाए।

इस देश में आम आदमी के बीच बेरोजगारी बहुत है। इसके लिए शिक्षा और तकनीकी ज्ञान तो जरूरी है ही,पूंजी और अवसर की उपलब्धता तथा सभी का काम बिना भ्रष्टाचार के और बिना पक्षपात के हो सभी के लिए रोजगार की व्यवस्था के लिए यह कदम जरूरी है।
आज आम जनता महंगे न्याय और अधिकारियों के भ्रष्टाचार के कारण अगर कहीं अन्य होता है ,तो उसका समाधान नहीं कर पाते। सम्यक पार्टी इस प्रकार की व्यवस्था करेगी कि न्याय सस्ता हो जाए और पंच न्याय प्रणाली लागू होगी तथा अधिकारियों के भ्रष्टाचार और तानाशाही व्यवहार जन विरोधी व्यवहार पर प्रभावी लगाम लग सके।
चूंकि राजनीतिक दल ही सत्ता में आते हैं। अतः जब तक राजनीतिक दल का चाल चरित्र और चेहरा आम जनता का नहीं होगा, तब तक आम जनता की चिंता सत्ता में आने पर संभव नहीं है। आम जनता की पार्टी तभी बनेगी ,जब पार्टी में सभी को अवसर हो। अवसर तभी मिलेगा ,जब पार्टी में हर पद पर बदलाव हो और बिना किसी जाति धर्म क्षेत्र के भेदभाव के। जो भी सक्षम प्रतिभाशाली और दल तथा दल की नीतियों के प्रति ईमानदार हो ,उन्हें हर पद पर पहुंचने का अवसर उपलब्ध हो।
सम्यक पार्टी इसी दिशा में काम कर रही है। आप सभी लोगों का स्वागत है लिए इस आम जनता के लोकतांत्रिक पार्टी के आंदोलन को मजबूत करिए ।
आपकी अपनी पार्टी
सम्यक पार्टी

कल दिनांक 23 March 2025 को फर्रुखाबाद के भारत सभागार में तथागत संभ्रांत नागरिक सामाजिक संगठन संस्था द्वारा आयोजित कार्यक...
24/03/2025

कल दिनांक 23 March 2025 को फर्रुखाबाद के भारत सभागार में तथागत संभ्रांत नागरिक सामाजिक संगठन संस्था द्वारा आयोजित कार्यक्रम में भाग लिया, जिसमे भारी तादात में समाज के जागरूक लोग उपस्थित थे। समाज के तमाम चिंतको बुद्धिजीवियों ने समाज में सशक्तिकरण के लिए सत्ता,शिक्षा और समृद्धि के लिए विभिन्न मुद्दों और उपायों पर चर्चा की गई।

01/10/2024

विश्व इतिहास में सम्राट अशोक ऐसे ही महान की पदवी से नहीं नवाजे गए हैं।उन्होंने लोक कल्याणकारी राज्य की अवधारणा की शुरुआत की।
किन मूल्यों और नीतियों का अनुपालन अधिकारियों से अपेक्षित था,उसकी विस्तृत रूपरेखा और दिशा निर्देश दिया।
उनके शिलालेखों से आज लोकतांत्रिक देश में शासन सत्ता और प्रशासनिक अधिकारियों को लोक कल्याण जनकल्याण और सुशासन तथा जनभावना के सम्मान और जनोन्मुख प्रशासन के संचालन के लिए प्रेरणा और सीख लेनी चाहिए।
अशोक के शिलालेखों में अंकित दिशा निर्देश लोकतांत्रिक भारत देश के लिए और अधिक प्रासंगिक हो गये हैं।अशोक के ये कालजयी दिशा निर्देश हैं और प्रशासनिक अधिकारियों के मनोविज्ञान का सूक्ष्म अध्ययन करके उन्हें सुशासन की ओर प्रेरित करने के लिए दिशा निर्देश हैं।इनसे प्रेरणा लेना चाहिए।

भारतीय इतिहास में अशोक महान ने लोक कल्याणकारी राज्य की आधारशिला रखी ।अशोक का राजतंत्र सिर्फ राजा द्वारा कर वसूलना और राज करना नहीं था, बल्कि उसके लिए राज करने का अर्थ हुआ कि कितना अधिक से अधिक लोक कल्याण और लोकमंगल के कार्य हो ।इसीलिए उसने यह सुनिश्चित किया कि उसके अधीनस्थ अधिकारियों कर्मचारियों में ऐसे गुण विकसित हो, जिससे कि यह लोक मंगल और लोक कल्याण का कार्य भली-भांति सुनिश्चित किया जा सके। वह अपने अधीनस्थ तमाम अधिकारियों से उच्च नैतिक मूल्यों के प्रति समर्पण और जन सरोकारों के प्रति प्रतिबद्धता के लिए निरंतर निर्देशित करता रहा, प्रशिक्षित करता रहा और यह सुनिश्चित भी करता रहा कि तमाम निरीक्षण और पर्यवेक्षण के माध्यम से वे इन गुणों से भली भांति सुसज्जित हो।
इसी क्रम में वह स्तंभ लेख चार और चट्टान लेख 3 में राजूक नामक बहुत ही वरिष्ठ अधिकारी के अधिकारों में वृद्धि करते हुए उन्हें कार्य और निर्णय की स्वतंत्रता भी दी। यह स्वतंत्रता इसलिए दी कि उसके अधीनस्थ लोग निर्भय होकर और पूर्ण विश्वास से काम कर सके और लोगों के हित और सुख का ध्यान रखें लोगों पर अनुग्रह करें लोगों के सुख दुख का कारण जानने का प्रयत्न करेंगे। इसी स्तंभ लेख 4 में उसने प्रजा के लिए उनके हित और सुख हेतु नियुक्त रज्जूकों को
निर्भय ,
निस्वार्थ और
प्रसन्नचित्त
होकर अपने कर्तव्य पालन का निर्देश दिया है।
धौली के पृथक प्रथम शिलालेख में महामात्य को मझं पटिपदा यानी मध्यम प्रतिपदा यानी मार्ग के अनुसरण का निर्देश दिया है।
अशोक ने उसके प्रशासनिक व्यवस्था के अंतर्गत कार्य करने वाले अधिकारियों में ऐसी प्रवृत्तियां न फैले, जिससे लोक हित लोक सुख के कार्य में बाधा पड़े, इसलिए वह नकारात्मक प्रवृत्तियों को त्यागने की भी बात करता है। कलिंग लेख एक में उसने प्रशासनिक अधिकारियों में स्वाभाविक रूप से पनप जाने वाली नकारात्मक और उनके दायित्व निर्वहन के अयोग्य बनाने वाली प्रवृत्तियों का उल्लेख किया है और आगाह किया है कि सतत प्रयास करना चाहिए कि ऐसी प्रवृत्तियां उनमें न आने पाए ।

उसने उल्लेख किया है कि
ईर्ष्या,(इसाय)
क्रोध,आशुलोप (आसलोपेन)
निष्ठुरता ,(निठूलियेन)
जल्दी बाजी ,त्वरा (तुलनाय)
अभ्यास का अभाव, (अनावुतिय)
आलस्य और (आलसियेन)
तंद्रा (कलमथेन)
ये ऐसे नकारात्मक प्रवृत्तियां है जिनसे प्रशासनिक अधिकारियों कर्मचारियों को यह चेष्टा करनी चाहिए कि उनके मध्य यह प्रवृत्तियां न पनप पाए।उसने इन सब का मूल कारण भी बताया है कि हम लोगों को क्रोध का त्याग करने के साथ-साथ जल्दी में कोई निर्णय लेने की आदत नहीं डालनी चाहिए (अनाशुलोप और अत्वरा )।उसने यह भी कहा कि जो आलस्य करेगा।उसका उत्थान नहीं होगा ।उसने यह भी कहा कि चलते रहिए और आगे बढ़कर प्रयत्न करते रहिए।

अशोक ने धौली शिलालेख प्रथम में राज्य के अधिकारियों के लिए
अखखसे यानी अकर्कश यानी कर्कश न होना यानी सरल,
अचंडे यानी चंड यानी क्रोधी न होना,
संखिनालंभे यानी हिंसक प्रवृत्ति का ना होना जैसे स्वभाव की अपेक्षा की है।
इस प्रकार अशोक ने प्रशासनिक अधिकारियों में अधिकार संपन्नता के साथ ही पनप जाने वाले दुष्ट प्रवृत्तियों का बड़े सूक्ष्मता से अध्ययन किया है और उन्हें इन प्रवृत्तियों से दूर रहकर जनहित जनकल्याण में निर्भयता पूर्वक और पूर्ण विश्वास काम करने का निर्देश दिया है।
अशोक ने अपने पूरे राज्य में तमाम शिलालेखों पर यह निर्देश अंकित कराएं ।ये उसके अधिकारियों कर्मचारियों के लिए भी थे और आम जनता के लिए भी थे ।
ये बातें अधिकारी कर्मचारी और आम जनता भूल न जाएं,उनका बीच-बीच में अध्ययन मनन चिंतन जरूरी है ,इसीलिए कलिंग लेख 2 में उसने निर्देश दिया है कि साल में तीन बार पुष्य नक्षत्र के दिन के साथ हर महीने तिष्य के दिन और बीच-बीच में कभी-कभी लिखी बातों को पढ़ना सुनना चाहिए।जब अवसर हो तब हर एक को इसे सुनना चाहिए।
आज जब लोकतंत्र है और तमाम तरह के प्रशासनिक प्रशिक्षण दिए जा रहे हैं, फिर भी ज्यादातर प्रशासनिक अधिकारी नकारात्मक प्रवृत्तियों के शिकार हैं। कदाचित जनकल्याण ,जनहित,लोक मंगल और लोकहित के प्रति प्रतिबद्ध होने के लिए इन सकारात्मक मूल्यों से लैस होने के लिए अधिकारियों कर्मचारियों को प्राचीन भारत में जिस अद्भुत परंपरा की शुरुआत अशोक महान ने की थी,उसकी आज भी प्रशासनिक व्यवस्था में कितनी बड़ी प्रासंगिकता और सार्थकता है और हम आज इतने आधुनिक विचारों और संस्थाओं से लैस होकर के भी इन मूल्यों को नहीं विकसित पा रहा है।यही अशोक की महानता थी और और इसी कारण से अशोक अपने समय से बहुत आगे थे।

शायद इतिहास में विरला ही शासक होगा जो इतनी सूक्ष्मता से अपने अधीनस्थ अधिकारियों कर्मचारियों को निर्देश देता हो और उनसे लोक सरोकार के प्रति समर्पण के लिए गुणों का निर्धारण इतनी सूक्ष्मता और स्पष्टता से करता है।
आज के लोकतांत्रिक भारत देश में भी प्रशासनिक अधिकारियों में कहां इन मूल्यों की अपेक्षा है और कौन इसके लिए खुद अपने कार्य व्यवहार ,कृतित्व और व्यक्तित्व और शब्दों से प्रेरित करने का कार्य कर रहा है?

29/08/2024

उत्तर प्रदेश में सत्ता के दौरान समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के बौद्धिक मठाधीशों को क्यों नहीं दिखाई दिया कि इसी तर्ज पर सर्वे करा कर डाटा इकट्ठा करके ओबीसी के आरक्षण का वर्गीकरण कर दिए होते।
वर्गीकरण के लिए न जातिवार जनगणना की जरूरत है न बहुत ज्यादा आर्थिक सामाजिक सर्वेक्षण की जरूरत है क्योंकि मंडल आयोग ने सामाजिक शैक्षणिक पिछड़े वर्गों में आने वाली जातियां को चिन्हित कर लिया था और उन्हें 27 परसेंट आरक्षण मिला है।
सिर्फ इसी आरक्षण की एक समीक्षा करके सरकारी नौकरियों में प्रतिनिधित्व के आंकड़े इकट्ठा करके इन दोनों के सत्ता में रहने के समय वर्गीकरण किया जा सकता है।
वर्गीकरण के लिए जातिवार जनगणना की बात निराधार और आंख में धूल झोंकने जैसा है।
हां जातिवाद जनगणना होनी चाहिए,क्योंकि 1931 की जातिवार जनगणना के आंकड़े ही सारे राज्यों में प्रयुक्त हो प्रयुक्त हो रहे हैं और इसी 1931 की जनगणना के आधार पर मंडल आयोग की रिपोर्ट प्रस्तुत की गई और तमाम राज्यों में इसी जातिवार जनगणना का उपयोग करके उप वर्गीकरण में विभिन्न जातियों के लिए आरक्षण की संख्या निर्धारित की गई।
जातिवाद जनगणना से नए सिरे से प्रतिनिधित्व की समीक्षा करके इसकी वृद्धि की जा सकती है।इसमें संशोधन किया जा सकता है और पुनः वर्गीकरण में भी संख्यात्मक संशोधन किया जा सकता है।
अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की जातिवाद जनगणना हर जनगणना में होती है तो इस जनगणना का कौन सा सकारात्मक उपयोग किया गया?
वर्गीकरण के लिए या उनकी सामाजिक शैक्षणिक राजनीतिक आर्थिक दशा में सुधार के लिए।
जरूरी है कि सत्ता में बैठे लोगों की मनसा क्या है? यदि मनसा है तो सामाजिक सच्चाई ही बोलती है ।आज जिन जातियों का शासकीय नौकरियों में बिल्कुल प्रतिनिधित्व नहीं है,वह आंकड़ा सामने नंगी आंखों से दिखाई दे रहा है और यह सच्चाई को भी यदि सर्वे से ही देखने की जिद है,तो मंडल आयोग की रिपोर्ट भी फर्जी है। मंडल आयोग बिना किसी औपचारिक जातिवाद जनगणना हुए और इसके आंकड़े कोई इकट्ठा किया लागू किया गया।
सरकारी नौकरियों में प्रतिनिधित्व के आंकड़े तो एक दो महीने में पूरे देश में और पृथक पृथक राज्यों में भी इकट्ठे किए जा सकते हैं इसमें कौन सी जातिवाद जनगणना की जरूरत है और वर्गीकरण किया जा सकता है?
बाकी जातिवाद जनगणना की मांग सबकी है और सब इसके समर्थक है और इस जनगणना के बाद पुन: आरक्षण और वर्गीकरण तथा सामाजिक शैक्षणिक शासकीय नौकरियों में प्रतिनिधित्व के मुद्दे की समीक्षा करके नई रणनीति बनाई जा सकती है।

22/08/2024

वर्गीकरण और राजनीति के लोकतांत्रिकरण-इन दो मुद्दों को बिना हल किये,अब दलित पिछड़ों की राजनीति इस देश में सफल होने वाली नहीं है।

22/08/2024

वोट सबका,
राज एक परिवार और जाति का।
नहीं चलेगा।

19/08/2024

वोट सबका और राज एक व्यक्ति परिवार और जाति का भी नहीं चलेगा।
हमारा राजनीतिक भविष्य लोकतांत्रिक राजनीति में ही उज्जवल होगा।

जिस राजनीतिक दल में आंतरिक लोकतंत्र नहीं होगा और एक परिवार की मुखियागीरी में राजनीतिक दल की जगह लोकतांत्रिक संविधान के र...
18/08/2024

जिस राजनीतिक दल में आंतरिक लोकतंत्र नहीं होगा और एक परिवार की मुखियागीरी में राजनीतिक दल की जगह लोकतांत्रिक संविधान के रहते राजवंशीय राजनीतिक दल स्थापित करने का प्रयास किया जाएगा,वहाँ देर सबेर ऐसे ही परिणाम आना है।

परिवार और राजवंश आधारित दलों का यही हश्र होना है।

लोकतंत्र में लोकतांत्रिक पार्टी ही सफल होगी,जिसमें विभिन्न जातियों कबीलों वर्गों क्षेत्रों को निर्धारित समय के बाद पार्टी बागडोर संभालने का अवसर मिले।

कोई भी व्यक्ति एक परिवार या जाति का स्थायी तौर पर पार्टी का मुखिया न हो,वह चाहे जितना प्रतिभाशाली हो,चाहे जितना संघर्षशील हो,चाहे जितना जुझारू हो,चाहे जितना उसके जाति क़बीले की संख्या हो।

18/08/2024

१-आरक्षण सही अर्थों में न्यायपूर्ण ढंग से ईमानदारी से हर क्षेत्र में लागू हो,शासकीय और ग़ैर शासकीय।

२-आरक्षण OBC समाज को जनसंख्या के अनुपात में प्रावधानित किया जाए-यह माँग भी सामाजिक न्याय और सभी वर्गों को राष्ट्र की मुख्यधारा में लाने के लिए ज़रूरी है और एक समावेशी राष्ट्रीय विकास की नीति तहत भी ज़रूरी है।
इसके लिए जातिवार जनगणना की ज़रूरत है,जिसका सभी पिछड़ा दलित वर्ग समर्थन कर रहा है और करता रहेगा।
३-आरक्षण के साथ खिलवाड़ करने वाले सभी अधिकारियों के विरूद्ध कठोर दंड का प्रावधान हो,इसकी भी बहुत बड़ी आवश्यकता है।
जैसा कि उत्तरप्रदेश में 69, हज़ार शिक्षकों की भर्ती में आरक्षण के अनुसार चयन प्रक्रिया न करके इसमें भयंकर मनमाना और निर्लज्ज अनियमितता की गई।

४-देश में जो भी राजनीतिक दल और OBC/ST/SCको राष्ट्र में समुचित भागीदारी देने में कोताही बरत रहे हैं,उनका भी विरोध किया जाना ज़रूरी है।

लेकिन इन सबके साथ अगर आरक्षण का वर्गीकरण न हुआ,तो इस देश की 40 पर्सेंट OBC समाज को इस आरक्षण बचाने और बढ़ाने आन्दोलन का कोई लाभ नहीं होने वाला है।
बिना वर्गीकरण का समर्थन किये इन मुद्दों पर लड़ाई सिर्फ़ धूर्तता तथा और पाखंड है और चंद जातियों को छोड़कर बहुसंख्यक OBC को मूर्ख बनाना है और प्रमुख मुद्दे से लोगों का ध्यान भटकाना है।
इसलिए उपरोक्त सारे मुद्दे वर्गीकरण के साथ समर्थित किया जाएं,तो बेहतर सकारात्मक परिणाम आएगा और OBC वर्ग में एकता भी अधिक बढ़ेगी। संघर्ष में तेज़ी आएगी,मज़बूती आएगी और जल्द ही परिणाम भी मिल पाएगा।

11/08/2024

न क्रीमी लेयर लगेगा और न उपवर्गीकरण होगा।

वंचित जातियों में न कोई जागृति है और न इनकी औक़ात है तथा न इनके पास कोई मज़बूत संगठन है और न ही समूह में शोर मचाने की क्षमता ही है कि वे इसे लागू करा सके।

आरक्षण का सर्वाधिक लाभ ले रही जातियों के राजनीतिक दल राज्यों में सत्ता में रहे हैं और गत सत्ता के दौरान उन्होंने वर्गीकरण नहीं किया और न कभी करना चाहते हैं।

पूरे देश में पाँच सात जातियों के लोग,जो प्रभावशाली भी है और आरक्षण का सबसे ज़्यादा लाभ भी प्राप्त किया है,उन्हीं की सिविल सोसायटी है।उन्हीं के मज़बूत राजनीतिक दल हैं और उन्हीं के नेता वर्गीकरण के विरोध में मुखर हैं ।

न भाजपा,न कांग्रेस और न इंडिया गठबंधन का कोई घटक दल, न दबंग पिछड़े दलित जातियों के दल वर्गीकरण के पक्ष में हैं।

इसलिए वंचित जातियों को अभी न्याय के लिए और प्रतीक्षा करनी पड़ेगी।

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