Nusrat Khan's Blog

Nusrat Khan's Blog TO recall the people their duties that they have been forgotten. TO uproot the religious supremacy.

08/11/2023

बुखारी शरीफ (पहली जिल्द)

वही का बयान

हदीस न.04

सरकार सल्ललाहो अलैहि वसल्लम इरशाद फरमाते हैं
कि जिस वक्त मैं जा रहा था तो मैंने आसमान से एक आवाज़ सुनी। मैंने नज़र उठाई तो मैंने देखा के वही फरिश्ता था,जो मेरे पास हिरा में आया था। वो आसमान और जमीन के दरमियान कुर्सी पर बैठा हुआ था। मैं उस से डर कर घर लौट आया।मैने कहा," मुझे चादर उड़ाओ"। फिर अल्लाह ने ये आयात नाजिल की।
"ऐ चादर ओढने वाले"!
उठिए और लोगों को अल्लाह के अज़ाब से डराइये।
और अपने रब की किब्रियाई बयान कीजिए।
और अपने कपड़ों को पाक रखिए।
और बुतों के तर्क(छोड़ने) पर कायम रहिए।

फिर बा कसरत वही का नुजूल हुआ और लगातार वही आने लगी।

आपका अपना भाई
नुसरत खान
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06/11/2023

आगर दुनिया में दो शब्द ना होते तो लोग खुदकुशी कर लिया करते
1..खुदा
2.. क़िस्मत

05/11/2023

बुखारी शरीफ (पहली जिल्द)

वही का बयान

हदीस न. 02

हज़रत हारिस बिन हिशाम ने आका से सवाल किया " या रसूल अल्लाह आप के पास वही किस तरह आती है?"
तो हुज़ूर ने फरमाया कभी कभी वही मेरे पास घंटी की झंकार की मिसल आती है और वो मुझ पर सख्त दुश्वार होती है।फिर जब वो वही मुझ से मुनकता (अलग) होती,तो मैं याद कर चुका होता हूं के फरिश्ता ने क्या कहा था। और कभी फरिश्ता मेरे लिए मर्द की शक्ल में आता है और वो मुझ से बात करता रहता है और मैं याद करता रहता हूं के वो क्या कह रहा है। हज़रत आयशा बयान करतीं हैं के बेशक मैं ने देखा के सख्त सर्द दिन में आप पर वही नाजिल होती तो जिस वक्त वही आप से मुनकता (अलग) होती तो आप की पेशानी (माथा)से पसीना बह रहा होता था।

05/11/2023

बुखारी शरीफ (पहली जिल्द)

वही का बयान

हदीस न. 01

रसूललल्लाह सललल लाहौ अलैहि वसल्लम ने फरयामा

आमाल का मदार सिर्फ़ नियतों पर है और हर शख्स के अमल का फल वही होगा जिस की उस ने नियत की, इसलिए जिस शख्स की हिजरत दुनिया की तरफ हो, जिस को वो हासिल करे या किसी औरत की तरफ हो,जिस से वो निकाह करे तो उस की हिजरत उसी की तरफ (शुमार) होगी जिस की तरफ हिजरत करने की उस ने नियत की थी।

15/10/2023

और उजड़ गया घोंसला।

वो रात क्या वो रात थी
मानो जैसे बारात थी
खुश थी वो,खुश थे वो
हर ओर खुशी थी।
उस रात ने खुशियों की
चादर जो ढकी थी।

खुशियों को नजर लग गई कहीं से
और आ पड़े दानव कहीं से
खूं था कहीं, कहीं चीथड़े
लाशों में मानव गिर पड़े

फिर क्या था

एक दानव इधर भी था
जो अति मैं इतना गुजर गया
ये मिसाइल,वो फायर
बन गया जनरल डायर
लाशों का ढेर लग गया
मानव से दानव बन गया
अपना वो काम कर गया

कुछ आए उनको सही ठहराने
कुछ आए इनको सही ठहराने

उधर दानव को दानव ने सही ठहराया
इधर दानव को दानव ने सही ठहराया

पर चुप था मानव, मानवता के लिए
साथ था दानव, दानवता के लिए

क्या खुश हुए मुस्तफा
या खुश हुए मूसा
या खुश हुआ खुदा?

हां खुश हुआ दानव
मारा गया मानव

क्या सोचा आपने
जो दोनों तरफ समान हैं।
खून,लाश,तबाही और मौत
वीराना,ज़ख्म और मर्दे फौत

जो समान नहीं हैं
दोनों तरफ
धर्म, जाति,मत और विश्वास
नाम,अमल और खुदा से आस।

नुसरत के कलम से।

11/10/2023

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