Lakha Banjara Pon Baba Ji

Lakha Banjara Pon Baba Ji Lakha Banjara baba ki jai ho ....

जय माता मसानी की 🙏🙏🙏🙏
11/05/2021

जय माता मसानी की 🙏🙏🙏🙏

11/11/2020

Jai baba guru gorkhnath ji🙏🙏🙏

Jai baba...
09/11/2020

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09/11/2020

चिपियाना गांव के भैरव मंदिर के पास स्थित एक कुत्ते की समाधि की भी रोचक कहानी है। इसे भी लोग अपनी आस्था के साथ जोड़कर देखते हैं और श्रद्धाभाव से काफी संख्या में यहां पहुंचकर पूजा करते हैं।

सतपाल चौधरी, गाजियाबाद
बेशक आस्था से जुड़े लोग हजारों मंदिरों व मस्जिदों में अपने शीश नवाते हैं। इसके पीछे उनकी धारणा होती है कि यहां पर मांगी हुई सारी मुरादें पूरी होंगी। ठीक इसी तरह चिपियाना गांव के भैरव मंदिर के पास स्थित एक कुत्ते की समाधि की भी रोचक कहानी है। इसे भी लोग अपनी आस्था के साथ जोड़कर देखते हैं और श्रद्धाभाव से काफी संख्या में यहां पहुंचकर पूजा करते हैं।
चिपियाना गांव का भैरव मंदिर आसपास के इलाके में अपनी अलग पहचान रखता है। यहां पर मंदिर परिसर में बनी कुत्ते की समाधि लोगों के लिए आस्था का केंद्र है। कुत्ते की समाधि के पास एक हौदी बनी हुई है। ग्रामीण सतपाल चौधरी के अनुसार मान्यता है कि हौदी में नहाने से कुत्ते के काटने का असर समाप्त हो जाता है। कुत्ते की प्रतिमा पर लोग बकायदा प्रसाद चढ़ाते हैं और उसे एक-दूसरे को बांटते हैं।

रविवार और शनिवार को उमड़ती है भीड़
मंदिर के महंत पंडित मोहन भारद्वाज ने बताया कि रेबीज के मरीज यहां पर आते हैं। रविवार और शनिवार को इनकी संख्या काफी रहती है। यहां न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि देश के विभिन्न हिस्सों और नेपाल तक से लोग आते हैं। कुत्ते की पूजा को लेकर एक मान्यता यह भी है कि बाबा काल भैरव की सवारी कुत्ता है। इसलिए यहां पर कुत्ते की पूजा-अर्चना की जाती है।

ऐसे बनी कुत्ते की समाधि
बेशक आस्था से जुड़े लोग हजारों मंदिरों व मस्जिदों में अपने शीश नवाते हैं। इसके पीछे उनकी धारणा होती है कि यहां पर मांगी हुई सारी मुरादें पूरी होंगी। ठीक इसी तरह चिपियाना गांव के भैरव मंदिर के पास स्थित एक कुत्ते की समाधि की भी रोचक कहानी है। इसे भी लोग अपनी आस्था के साथ जोड़कर देखते हैं और श्रद्धाभाव से काफी संख्या में यहां पहुंचकर पूजा करते हैं।
ग्रामीण बताते हैं कि जब कुत्ता लक्खा बंजारे के पास आया तो उसने सोचा कि कुत्ते ने सेठ को दिए उसके वचन को तोड़ दिया और लौट आया है। उसने गुस्से में अपने कुत्ते को गोली मार दी थी। उसके बाद जब वास्तविकता का पता चला तो उसे बहुत पछतावा हुआ। उसने पश्चाताप के रूप में भैरव बाबा के मंदिर में कुत्ते की समाधि बनवा दी। ऐसी मान्यता है कि आज भी रैबीज के मरीज यहां प्रसाद चढ़ाते ही ठीक हो जाते हैं। वहीं मंदिर के बाहर बने हौदी में नहाने से कुत्ते के काटने का असर समाप्त हो जाता है और कई असाध्य रोग ठीक हो जाते हैं। इसके बाद कुत्ते की समाधि पर प्रसाद चढ़ाया जाता है।

चिपियाना गांव में रहने वाले लोगों का कहना है कि करीब 100 साल पहले लक्खा नाम के बंजारे ने ही भैरव मंदिर के अंदर ही एक स्थान पर कुत्ते की समाधि बनवाई थी। इस समाधि के बारे में प्रचलित है कि बंजारे के पास एक कुत्ता था। बंजारे ने एक सेठ से कुछ कर्ज उधार लिया था। समय पर कर्ज न चुका पाने के कारण उसने अपना कुत्ता सेठ के पास गिरवी रख दिया। कुछ दिन बाद सेठ के घर चोरी हुई। कुत्ता बदमाशों पर न तो भोंका और न ही सेठ को जगाया। सुबह सेठ को जब चोरी होने का पता लगा तो उसे कुत्ते पर गुस्सा आ गया। कुछ देर बाद ही कुत्ता अपने सेठ की धोती पकड़कर उस स्थान पर ले गया, जहां लुटेरों ने चुराया गया सामान दबाया था। चोरी गया माल मिलने पर सेठ खुश हो गया। उसने कुत्ते को इनाम के रूप में मुक्त कर लक्खा के पास वापस भेज दिया।

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