Journalist Barabanki

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हमारा संकल्प और हमारी विचारधारा
जर्नालिस्ट बाराबंकी, देश और समाज में व्याप्त भ्रष्टाचार, अनैतिकता पर अंकुश लगाने और समाज को ‘‘तमसो मा ज्योर्तिगमय’’ की ओर ध्यानाकर्षण करने के उद्देश्य से एक सशक्त पहल है... जर्नालिस्ट बाराबंकी पठन-पाठन सामग्री का समायोजन मात्र नहीं है बल्कि यह जर्नालिस्ट बाराबंकी की मेहनत का फल है जिसके पास असामाजिक तत्वों के विरोध की क्षमता, नये समाज की कल्पना शक्ति और दूरदृष्टि है

, जर्नालिस्ट बाराबंकी जो परम्परागत अवरोधों को दूर कर, सामाजिक जड़ता पर विजय पाने तथा पत्रकारिता के सिद्धान्तों को व्यवहारिक और न्यायप्रिय रुप देने में सक्षम है।
जर्नालिस्ट बाराबंकी प्रोफाइल का उद्देश्य खबरों, सूचनाओं के माध्यम से पाठकों का ज्ञानवर्धन करने के साथ-साथ समाज के शोषित और पीडि़त लोगों की जंग का हथियार बनकर साथ देना भी है। जर्नालिस्ट बाराबंकी प्रकाशित हुआ है काले कारनामों की परत दर परत उधेड़ने, भ्रष्ट आचरण और प्रवृत्ति पर लगाम लगाने के लिए।
जर्नालिस्ट बाराबंकी प्रोफाइल बिना किसी दुराग्रह/पूर्वाग्रह के अपने उद्देश्य को, अपने कर्तव्यों और दायित्वों को निभायेगा। हमारे संकल्प और विचारधारा से यदि आपकी भावना मिलती है, आप भी हमारे उद्देश्य में देश और समाज में बदलाव की झलक देखते हैं तो कबीर दास जी के दोहेः-
‘‘कबीरा........लुकाटी हाथ।..........चले हमारे साथ।।’’
आपके सहयोग एंव प्रतीक्षा में... जर्नालिस्ट बाराबंकी परिवार।
जय हिन्द! जय भारत! जय पत्रकारिता!

08/11/2023
11/07/2023
05/06/2017

व्यक्तिगत रिश्तों में हावी होते है सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक

* विधायिका और न्यायपालिका पर हावी है कार्यपालिका।
* आर के वर्मा के लिए न्यायालय में विचाराधीन मामले में निर्णय लेने और क्षेत्रीय विधायक की बात को दर किनार करने में भी कोई गुरेज नहीं।
* परिचालक के फैसले पर सरेन्डर हो जाते हैं आर के वर्मा।

वैसे तो सूबे की सरकार सबको न्याय और सबका विकास की तर्ज पर काम कर रही है और उसकी मंशा भी यही है कि उसके कर्मचारी भी इसी तर्ज पर काम करें, लेकिन सरकार और सरकारी मंशा को धताबता कर बाराबंकी जिले के परिवहन विभाग के सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक आर0 के0 वर्मा अपनी लाल फीता शाही के लिए इन दिनों डिपो परिसर में चर्चा और सुगबुगाहट का विषय बने हुए हैं। ये और बात है कि कोई विभागीय कर्मचारी खुलकर बोलने की हिम्मत नहीं जुटा सकता। बाराबंकी डिपो की कमान संभालने वाले आर के वर्मा का स्थानान्तरण डिपो में कार्यरत परिचालक सर्वेश कुमार रावत अपनी पहुँच और रसूख के जरिये पिछली सरकार में अवध डिपो से बाराबंकी करा कर लाया था। तभी से आर के वर्मा के लिए बाराबंकी डिपो में या फिर डिपो के बाहर के मसलों में सर्वेश रावत की राय और बात ही सर्वोपरि रहेगी फिर मामला न्यायालय में विचाराधीन ही क्यों न हो। ऐसा ही एक मामला बाराबंकी डिपो में कम्प्यूटर आपरेटर के पद पर कार्यरत सौरभ का है जो कि रिश्ते में सर्वेश रावत का चचेरा जीजा है और जनवरी 2017 में उसकी पत्नी से आपसी विवाद में अनबन हो गई थी और बात न बनने पर मामला पारिवारिक न्यायालय में विचाराधीन है को लेकर सर्वेश और आर के वर्मा लगातार सौरभ पर दबाव बना रहे थे कि मामले को यहीं खत्म कर समझौता कर लो और अपनी पत्नी को वापस ले आओ और अगर तुम ऐसा नहीं करते हो तो डिपो में नौकरी नहीं कर पाओगे और आर के वर्मा, सर्वेश कुमार रावत ने सारे नियम कानूनों को दरकिनार करते हुए अंततः 31 मई 2017 को सौरभ की नौरकी को मिलकर खा डाला।
चूंकि मामला न्यायालय में विचाराधीन है इस बात को लेकर सौरभ थोड़ा दिमागी रुप से अस्वश्त था लेकिन बात बनती न देख उसने वर्तमान सरकार के एक विधायक के सामने अपनी व्यथा रखी विधायक जी ने भी बात को सुन और समझकर दोनों पक्षों को बुलाकर बात भी करनी चाही लेकिन कार्यपालिका विधायिका पर हावी रही और मीटिंग की बात कहकर आर के वर्मा विधायक से मिलने और उक्त संबंध में बात करना मुनासिब नही समझा। जहां बाराबंकी डिपो में परिचालकों से लूट और मनमानी का खुला खेल फरुखावादी खेला जाता है तो दूसरी तरफ एक जुनियर परिचालक सर्वेश कुमार रावत ड्यूटी इंचार्ज बनकर व्र्यिक्तगत रिस्ते को विभाग पर हावी कराकर अपनी मनमानी करने से नहीं चूकता और सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक आर के वर्मा, वरिष्ट केन्द्र प्रभारी लाल जी पाठक और केन्द्र प्रभारी बलराम बाजपेई इसकी अंगुलियों के कठपुतली बने हुए हैं।

01/01/2016

Happy New Year...2016
All of you

Atul Kumar "Suryanshsri"

24/12/2015

लगातार कमजोर हो रहा प्राथमिक शिक्षा का स्तर
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* राज्य व केन्द्र सरकारें नहीं दे पा रही ध्यान।
* उच्चस्तरीय पढ़ाई पर जहां ब्यूरोकेसी हावी वहीं प्राथमिक शिक्षा देश में सबसे निचले स्तर पर।

प्रदेश की प्राथमिक शिक्षा के ढांचे में आमूल-चूल परिवर्तन की जरूरत है लेकिन स्वार्थ और वोट बैंक के नफे और नुकसान की जोड़-तोड़ और राजनीतिक लाभ में लगी राज्य और केंद्र सरकारें इस पर ध्यान नहीं दे रही हैं। शिक्षा राज्य का विषय है लेकिन पुरे देश लिए उपयुक्त शिक्षा नीति बनाना केन्द्र सरकार की अहम जि़म्मेदारी है, वर्तमान समय में राज्य की प्राथमिक शिक्षा राजनीति का अड्डा बन गयी है। देश में अन्य राज्यों की सरकारें अपने मन मुताबिक इसके ढांचे में बदलाव कर रही हैं। बिना ये सोचे की यदि इस स्तर पर शिक्षा की गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखा गया तो देश की भावी पीढ़ी का भविष्य अंधकारमय होने से कोई रोक नहीं सकता, देश के सभी बड़े राज्यों में मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार पर नजर दौड़ाये तो पायेंगे कि इनकी राज्यों की सरकारें बड़ी धनराशि प्राथमिक शिक्षा पर खर्च कर रही हैं लेकिन अगर गुणवत्ता की और ध्यान दिया जाए तो मिलेगा कि इन राज्यों की प्राथमिक कक्षाओं में पढने वाले विद्यार्थी १० तक का पहाड़ा भी नहीं सुना सकते और तो और वे सामान्य गुणा-भाग के सवाल भी नहीं हल कर सकते। ये सब इसलिए हो रहा है क्योंकि इस क्षेत्र में कार्यरत लोगों का ध्यान शिक्षा की ओर कम है। वे केवल अपने लिए रुपये कमाने की चिंता में ही लगे हैं। आप के जेहन में सवाल उठता होगा कि ऐसा क्यों होता है? क्यों नहीं इस क्षेत्र में कार्यरत लोग गुणवत्ता को सुधार पा रहे हैं’ फिर आखिर इस समस्या का हल क्या है? इन सवालों के कारणों पर गौर करें तो हम पाएंगे कि इसके पीछे कंही न कंही सरकार की उदासीनता और वोटों की राजनीति ही जिम्मेदार है। उससे भी ज्यादा जि़म्मेदार है स्थितियों को यथावत बनाये रहने की अफसरों की मानसिकता। वे फर्जी आंकड़ों के बल पर प्राथिमक शिक्षा क्षेत्र की समस्याओं की अनदेखी कर रहे हैं।
प्रदेश की प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था कंही ऐसी नहीं कि हम उसे सराह सकें। इसे अतिश्योक्ति नहीं मानना चाहिए, हम बताते हैं कि जमीनी स्तर पर क्या हालात हैं प्राथमिक शिक्षा के? हम प्रदेश के प्रमुख क्षेत्र के प्राथमिक स्कूल को देखें, इसकी भौतिक दशा देखकर ही विद्यार्थियों कीं संख्या के बारे में अनुमान लगाया जा सकता है. हालाँकि ये प्राथमिक स्कूल शहर के बीचोंबीच है लेकिन १०० विद्यार्थी भी नही पढ़ते हैं यंहा। कारण कि गरीब कहे जाने वाले लोग भी जिनकी कुछ नियमित आमदनी है वे प्राथमिक स्कूल की बजाय कान्वेंट स्कूल में अपने होनहार को दाखिला दिला देते हैं। अफसरों को सब कुछ पता है लेकिन वे गलत छात्र पंजीकरण के आधार पर इस स्कूल को कागजाों में बनाये हुए हैं। गलत छात्र संख्या के आधार पर ही शिक्षकों की तैनाती भी की जाती हैं। मकसद ये की अधिक से अधिक लोगों को शहरी क्षेत्र में ही तैनात रहने का मौका मिले। प्रदेश के लगभग सभी शहरों में ऐसे स्कूल हैं। ऐसी ही स्थिति बस्ती, फैजाबाद, कानपुर, मेरठ, आगरा और गोरखपुर समेत प्रदेश के सभी मण्डलों और लगभग सभी जिलों की है। हम आपको बता दें कि यह सब कुछ होता क्यों है? दरअसल प्राथिमक शिक्षा विभाग के स्कूलों में पंजीकृत बच्चों की फीस वसूली नहीं जाती है इसलिए इनके नामांकन की प्रक्रिया में भी जमकर धांधली होती है। मैंने एक बार नहीं कई बार ये देखा है की एक ही छात्र का नाम कई स्कूलों में दर्ज है। सरकारी प्राइमरी स्कूलों में दर्ज बच्चों के नाम से ही केवल विभाग को वास्ता होता है, गैर सरकारी स्कूल में पंजीकृत छात्रों का नाम विभाग कभी मांगता नहीं है। वे नाम तो केवल रजिस्टरों में ही दर्ज होते हैं। ऐसे में सरकारी प्राइमरी स्कूलों के शिक्षक अपने यह पंजीकरण ज्यादा दिखाने की खातिर निजी यानी प्राइवेट स्कूलों के बच्चों के नाम भी अपने रजिस्टर में चढ़ा लेते हैं। फीस तो लगनी नहीं होती इसलिए उनसे इस बारे में पूछताछ भी नहीं होती है। प्राइवेट स्कूलों को फायदा ये होता है कि जरुरत पड़ने पर किसी विद्यार्थी को प्राइमरी स्कूलों से पास का प्रमाण पात्र दिल देते हैं। प्राइवेट स्कूल में ये सब हो नहीं सकता क्योंकि वंहा तो फीस पर प्रबंधन की नजर रहती हैं।
देश में प्राथमिक शिक्षा के लगातर गिरते स्तर की समस्या का समाधान यही हो सकता की प्राथमिक शिक्षा विभाग अब सभी विद्यार्थियों का डाटा अपने पास मंगवाए और उसकी जांच करे। साथ ही फर्जी नामांकन को रोकने के लिए वो हर कक्षा के विद्यार्थी फीस निर्धारित करे। और निर्धारित शुल्क की वसूली भी पूरी ईमानदारी से हो। ऐसे में ३०० या अधिक छात्र संख्या दिखाने वाले शिक्षकों की पोल खुल जाएगी। वास्तव में यदि ईमानदारी से जांच की जाए तो उत्तर प्रदेश ही नहीं सभी राज्यों के प्राइमरी शिक्षा विभाग के छात्र पंजीकरण के आंकड़ों में हो रहे खेल की पोल आसानी से खोली जा सकती है।
मैं ये बात पूरे दावे के साथ कह सकता हूँ कि यदि सभी सरकारी स्कूलों के बच्चो की संख्या का जोड़ एक साथ कर दिया जाए तो ये साफ हो जाएगा की वास्तव में उतने बच्चे जिले में हैं ही और न ही उस आयु और वर्ग के। जितने गिनाये जा रहे हैं। कान्वेंट स्कूलों के बच्चों का रिकॉर्ड रखने की जरुरत प्राइमरी शिक्षा विभाग महसूस ही नहीं करता है। सी0 बी0 एस0 ई0 और आई0 सी0 एस0 सी0 से मान्यता प्राप्त स्कूलों के विद्यार्थियों का रिकॉर्ड भी ये विभाग नहीं रखता है। अगर ये सभी छात्र स्ंख्या का डाटा बेस एक साथ जोड़ दिया जाए तो गोरख धंधे का खुलासा हो जाएगा। शायद इसलिए सरकारी कर्मचारी इन आंकडों को जुटाने की जरुरत भी महसूस नहीं करते हैं। और वे सिर्फ अपने हितों का पालन-पोषण करने में लगे हुए हैं। वास्तव में गुणवत्ता के लिए एक नहीं कई मोर्चों पर प्रयास करने की जरुरत है।
ये आंकड़े यूँ ही फर्जी नहीं भरे जाते। इसके पीछे सरकारी रकम हड़पने की मंशा काम करती है। ज्यादा संख्या होने पर मिड डे मील योजना के तहत राशन ज्यादा मिलता है। इसकी अधिकारी-कर्मचारी, विद्यालय के प्रधानाचार्य और षिक्षक, प्रधानों और जनप्रतिनिधि के बीच बंदर-बांट की जाती है। हर महीने सभी अपना निश्चित हिस्सा पा जाते हैं इसलिए वे असलियत को सामने नहीं आने देते।
इस फर्जीवाड़े को रोकने का एक और उपाय कर सकती है सरकार कि वो हर क्षेत्र के मानक तय करे की वँहा के बच्चे किस स्कूल में प्रवेश ले सकते हैं। हर शिक्षक को यह अनिवार्य कर दिया जाये कि वह अपने पास के सरकारी स्कूल में नहीं पढ़ायेगा, लेकिन कदाचित ऐसा हो नही रहा क्योंकि ज्यादातर शिक्षकों के राजनितिक रिश्ते हैं वो कानून की खुली मुखालफत करते नजर आते हैं। क्षेत्रीय और निकाय चुनाव में सरकारी स्कूल के शिक्षकों की महती भूमिका होती है इसलिए कोई भी दल इन्हे नाराज नहीं करना चाहता है। इनके विधायक भी विधान सभाओं और विधान परिषद में हैं वे भी इस समस्या की चर्चा नहीं करते हैं। एक और बात ये शिक्षक उठाते है की फीस न होने पर भी जब बच्चे स्कूल नहीं आते तो फीस लगाने पर वे क्यों आएंगे? ये भी हकीकत से कोषों दूर हैं। ज्यादातर लोगों में शिक्षा को लेकर जागरूकता पैदा हुई है। अब हर अभिभावक अपने बच्चे को पढाना चाहता है। उसकी हसरत होती है की बच्चा अच्छे से अच्छे स्कूल में पढे और यही वजह है की प्राइवेट स्कूल अब कदम कदम पर खुल गए हैं। उनकी फीस कम या ज्यादा हो सकती है लेकिन उनमें बच्चों की संख्या सरकारी स्कूलों से ज्यादा ही होती है जबकि उनके पास कम प्रशिक्षित स्टाफ होता है। जब प्राइवेट स्कूल बच्चे जुटा सकते हैं तो सरकारी स्कूल ऐसा क्यों नहीं कर सकते? इस दिशा में सरकारों को ईमानदारी से सोचना होगा। यदि केन्द्र और राज्य सरकारें ऐसा नहीं करती तो वे देश को धोखे में रखने का काम कर हैं। ये ध्यान रखना होगा कि सिर्फ मिड डे मील और ड्रेस बांटने से ही भावी पीढी को मजबूत नहीं बनाया जा सकता, सरकार का धन सही दिशा में खर्च हो और उसके सही नतीजे प्रदेश और देश को मिलें ये सोचना अब हम सबकी भी जिम्मेदारी है। हाल ही में आये सुप्रीम कोर्ट के आदेष को भी अपने आस-पास रहने वाले सरकारी अधिकारी और कर्मचारी को समझाने की जरुरत होगी कि वे भी अपने बच्चों को सरकारी स्कूलोें में पढ़ाये, ताकि अधिकारी/कर्मचारी भी सरकारी विद्यालयों पर नजर रख सके और कुछ गलत हो रहे शिक्षकों, अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों पर लगाम लगा सकें।

विश्व एड्स दिवस============विश्व में आज जो भी बिमारियां महामारी का रुप ले चुकी हैं उनमें एक बिमारी एड्स है। वैसे 1 दिसम्...
01/12/2015

विश्व एड्स दिवस
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विश्व में आज जो भी बिमारियां महामारी का रुप ले चुकी हैं उनमें एक बिमारी एड्स है। वैसे 1 दिसम्बर को विश्व एड्स दिवस के नाम से जाना जाता है। एड्स कहने में तो छोटी परन्तु है होती है बहुत भयावह बिमारी विभिन्न देशों में एड्स दिवस कई तरह से मनाया जाता है आज बाराबंकी में भी एड्स दिवस को विभिन्न स्कूल के छात्र छात्राओ ने रैली निकालकर मनाया और लोगो को जागरूक किया वहीं एच आई वी स्वास्थ्य कर्ताओ ने भी शहर के विभिन्न क्षेत्रो में जागरूकता कैम्प लगाकर लोगो को एड्स से सम्बंधित बातें बताई और इसके उपचार के बारे में भी लोगो को जागरूक किया। पूरे विश्व में मनाया जाने वाला एड्स दिवस आज चर्चा का विषय है लगभग देश के 20.25 प्रतिशत लोग एड्स से ग्रसित है। ये बीमारी दिन प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही है ।
एड्स का पूरा नाम ‘‘एक्वायर्ड इम्यूनो डेफिसिएंशी सिंड्रोम’’ है और यह बीमारी एच.आई.वी. वायरस से होती है। यह वायरस मनुष्य की प्रतिरोधी क्षमता को कमज़ोर कर देता है। एड्स एच.आई.वी. पाजी़टिव गर्भवती महिला से उसके बच्चे को, असुरक्षित यौन संबंध से या संक्रमित रक्त या संक्रमित सूई के प्रयोग से हो सकता है,
एच.आई.वी. पाजी़टिव होने का मतलब है। एड्स वायरस आपके शरीर में प्रवेश कर गया है। हालांकि इसका अर्थ यह नहीं है कि आपको एड्स है। एच.आई.वी. पाजीटिव होने के 6 महीने से 10 साल के बीच में कभी भी एड्स हो सकता है।
एड्स के लक्षण जैसे- पेट साफ न होना, चोंट लगने पर घाव का समय से न भरना और सबसे महत्वपूर्ण बात एच आई वी का जीवाणु जब आपके शरीर में प्रवेश कर जाता है तो रक्त में उपस्थित बीमारियो से लड़ने वाले जीवाणुओ को नष्ट कर देता है जिससे आप किसी न किसी बीमारी से ग्रसित रहते है अगर ऐसे लक्षण सामने आते है तो आप अपने निकट के एच आई वी स्वस्थ केंद्र में चेकअप करवाये और आप एक सुखी जीवन व्यतीत कर सकते है ।
एड्स एक रोग नहीं बल्कि एक अवस्था हैण् एड्स का फैलाव छूनेए हाथ से हाथ का स्पर्शए साथ.साथ खानेए उठने और बैठनेए एक.दूसरे का कपड़ा इस्तेमाल करने से नहीं होता हैण् एड्स पीड़ित व्यक्ति के साथ नम्र व्यवहार जरुरी है ताकि वह आम आदमी का जीवन जी सकेण्
कल एड्स का मतलब था जिंदगी का अंत, पर आज इसे एक स्थाई संक्रमण समझा जाता है, जिसे नियंत्रित किया जा सकता है। वैवाहिक जीवन की मर्यादा और एक.दूसरे के प्रति विश्वास को बनाए रखना और सावधानी ही इस रोग से बचाव का एकमात्र उपाय है। एड्स की रोकथाम ‘‘दुर्घटना से सावधानी बेहतर’’ की तर्ज पर ही मुमकिन है।

भारतीय सुरक्षाकर्मियों नेपाल ने किया रिहा=============================नेपाल में हिरासत में लिए गए दो भारतीय सुरक्षाकर्मि...
30/11/2015

भारतीय सुरक्षाकर्मियों नेपाल ने किया रिहा
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नेपाल में हिरासत में लिए गए दो भारतीय सुरक्षाकर्मियों को रिहा कर दिया गया है। ये दोनों सुरक्षाकर्मी तस्करों का पीछा करते हुए नेपाल की सीमा में चले गए थे। भारत के सशस्त्र सीमा बल ;एसएसबीद्ध के एक अधिकारी ने बताया कि एसएसबी के 13 सदस्यीय गश्ती दल ने तस्करों का पीछा किया था। इसी दौरान कांस्टेबल रोशन और राम गलती से नेपाल सीमा में चले गए। कोहरे की वजह से वे जगह का अनुमान नहीं लगा सके। दोनों को नेपाल के अधिकारियों ने हिरासत में ले लिया था। नेपाली मीडिया ने पहले जानकारी दी थी कि एसएसबी के 13 सुरक्षाकर्मियों को हिरासत में लिया गया है।

एसएसबी अधिकारी ने बताया कि दोनों सुरक्षाकर्मियों को अपराह्न् छोड़ दिया गया। वे भारत लौट आए हैं। अधिकारी ने कहा कि नेपाल के झापा जिले में केछना गांव में पहुंचे दोनों भारतीय सुरक्षाकर्मियों के पास हथियार नहीं था। उन्होंने बतायाए ष्हमारे लोगों को गांव वालों ने पकड़ कर नेपाल के सशस्त्र पुलिस बल ;एपीएफद्ध को सौंप दिया। उनके साथ मारपीट नहीं की गई।ष्

यह पूछने पर कि नेपाली मीडिया में यह खबर आई है कि एपीएफ ने एसएसबी के 13 लोगों को पकड़ा हैए अधिकारी ने कहाए ष्यह सही नहीं है। हमारे 13 सदस्यीय गश्ती दल के दो लोगों ने सीमा पार की थी और हिरासत में लिए गए थे।ष्
अधिकारी ने आईएएनएस से कहाए ष्एसएसबी दल के बाकी 11 सदस्यों ने बाद में एपीएफ से संपर्क साधा और अपने साथियों को छोड़ने के लिए कहा। हमारे लोगों ने उन्हें बताया कि कैसे तस्करों का पीछा करते हुए दोनों गलती से सीमा पार कर गए। इसके बाद एपीएफ अधिकारियों ने दोनों को छोड़ दिया।ष्
उन्होंने कहा कि भारत.नेपाल सीमा पर धड़ल्ले से तस्करी हो रही है। उन्होंने बताया कि शनिवार को एसएसबी टीम को उस वक्त भी विवाद का सामना करना पड़ा थाए जब टीम ने तस्करी के लिए लाया गया 1500 लीटर डीजल पकड़ा था। इससे पहले द काठमांडू पोस्ट ने बताया था कि नेपाल के सशस्त्र पुलिस बल ;एपीएफद्ध ने 13 एसएसबी कर्मियों को झापा के केछना में हिरासत में लिया। ये सुरक्षाकर्मी तेल तस्करों का पीछा करते हुए नेपाल की सीमा में पहुंच गए थे। इन्हें केछना के एपीएफ शिविर में रखा गया है।

झापा के मुख्य जिला अधिकारी तेज प्रसाद पौडल ने कहा था कि इस बात का पता लगाया जा रहा है कि क्या एसएसबी के जवान गलती से नेपाल की सीमा में आ गए थे। रपट में बताया गया था कि स्थानीय लोगों ने बताया कि एसएसबी कर्मियों ने तस्करों की तलाश के दौरान मोहम्मद आलम नामक एक नेपाली को पीटा था। एसएसबी के 13 कर्मी आलम के घर में तलाशी ले रहे थे। इनमें से चार के पास हथियार थे। एपीएफ टीम तुरंत ही आलम के घर पहुंच गई थी और भारतीयों को हिरासत में ले लिया था।

नेपाल में मधेसी आंदोलन की वजह से भारत.नेपाल सीमा पर नाकेबंदी जैसे हालात हैं। नेपाल में जरूरी चीजों की कमी हो गई है। इस वजह से सीमावर्ती इलाकों में बड़े पैमाने पर पेट्रोल.डीजल की तस्करी हो रही है। द काठमांडू पोस्ट ने यह भी बताया है कि नेपाल के कंचनपुर में भारतीय नंबर प्लेट वाली एक जीप में तोड़फोड़ की गई। इस मामले में पांच माओवादियों को हिरासत में लिया गया है। नेपाल पुलिस ने इस जीप को अपनी सुरक्षा में भारत पहुंचाया।

मुसलमान ही नहीं हैं आजम खान, टूटेगा घमंड: इमाम बुखारी=========================================कानपुर। अपने बयानों की वजह...
29/11/2015

मुसलमान ही नहीं हैं आजम खान, टूटेगा घमंड: इमाम बुखारी
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कानपुर। अपने बयानों की वजह से विवादों में रहने वाले आजम खान को लेकर जामा मस्जिद के शाही इमाम बुखारी ने तीखा बयान दिया है। इमाम बुखारी ने कहा है कि आजम खान मुसलमान ही नहीं है, वो खुद को खुदा समझते हैं लेकिन जल्‍द उनका घमंड टूटेगा।
खबरों के अनुसार एक निजी कार्यक्रम में शामिल होने आए इमाम अहमद बुखारी ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि आजम खान को इस बात का घमंड है कि उपर खुदा है और नीचे आजम खान है। ऐसा आदजमी जो खुद को खुदा समझता है उसे क्‍या कहें।
उन्‍होंने आगे कहा कि उत्‍तर प्रदेश में 2017 में होने वाले चुनाव में सपा आजम खान की वजह से हार जाएगी। मुसलमान एक तरफा फैसला करेगा। उन्‍होंने आमिर खान के बयान पर ज्‍यादा कुछ बोलने से परहेज करते हुए कहा कि उन्‍हें इस देश में डर लगता है या नहीं वो तो आमिर ही बता सकते हैं।
पुरस्‍कार लौटाने वालों को लेकर उन्‍होंने कहा कि जो लोग अवार्ड वापस कर रहे हैं और देश का माहौल खराब बता रहे हैं उन्‍हें जानना चाहिए कि यह माहौल पिछले 60 सालों से लेकिन लोग अब बोल रहे हैं।
गोहत्‍या को लेकर उनका कहना था कि हिन्‍दूओं की गाय पर आस्‍था है और इसलिए गोहत्‍या रोकने के लिए कानून बनाया जाना चाहिए।

25/11/2015

अब दो अंधियारी जिंदगियों को ज्योति देगी जगवंती
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* अमरता की कहानी लिख डाली।

सिद्धौर ब्लाॉक के ग्राम न्योछना की रहने वाली जगवंती देवी का देहांत तो हुआ लेकिन वह एक मिसाल कायम कर गईं। जगवंती के एक संकल्प देहदान की बदौलत अब दो अंधियारी जिंदगियों को ज्योति मिलेगी। साथ ही देह का परीक्षण कर मेडिकल के विद्यार्थी शिक्षित होंगेए जिनका लाभ आम जनमानस को मिलेगा। साथ ही जगवंती का शव शोध कार्य में लंबे समय तक प्रयोग हो सकेगा जिससे चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में नया आयाम भी मिल सकेगा।
सिद्धौर की ग्राम न्योछना में रहने वाली जगवंती ;70द्धए पत्नी स्वण् राम प्यारे ने चार फरवरी 2014 को कोठी कस्बा में आयोजित एक कार्यक्रम में देहदान का संकल्प लिया था। रविवार की रात जगवंती देवी ने सदा के लिए आंखें मूंद लीं। केजीएमयू लखनऊ के नेत्र विभाग की टीम जगवंती देवी की कॉर्निया रात में ही निकाल कर ले गई है। सुबह करीब दस बजे केजीएमसी के देहदान विभाग की टीम गांव पहुंच गई थी। सीडीओ से शिकायत होने पर डॉण् हरप्रीत ने मौके पर पहुंच डेड सर्टिफिकेट दिया इसके बाद बॉडी को लखनऊ ले जाया जा सका।

आजम ने आमिर से कहा, दुआ है विरोध से कमजोर ना हो इरादे=============================================* मुल्क के बंटवारे के ...
25/11/2015

आजम ने आमिर से कहा, दुआ है विरोध से कमजोर ना हो इरादे
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* मुल्क के बंटवारे के वक्त दो नजरियेl
* साध्वी बोलीं, पत्नी को पाकिस्तान भेजकर देखें आमिर।

एक तरफ देश में सहिष्णुता की बहस चल रही है वंही दूसरी तरफ आमिर जैसे कलाकार ने बचकाना बयान देकर बहस का मुद्दा तैयार कर दिया है। वहीं प्रदेश के नगर विकास एवं अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री आजम खां ने फिल्म अभिनेता आमिर खान के समर्थन में आगे आते हुए उन्हें पत्र लिखा है। इसमें उन्होंने दुआ की है कि लोगों के विरोध से उनके इरादे कमजोर न हों। उन्होंने कहा, इंतेहा तब होती है जब जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग दिल तोड़ने की बात करते हैं। किसी भी घर के टूटने की शुरुआत दिल के टूटने से ही होती है।

आजम ने मंगलवार को लिखे पत्र में उनकी हौसला आफजाई की है, उन्हें मुल्क के बंटवारे से जुड़े इतिहास की जानकारी दी है। उन्होंने आमिर से कहा है, जब आप और आपकी पत्नी जैसे लोग इस सच को महसूस कर सके हैं, तो फिर उन कमजोरए लाचार और बेसहारा लोगों के बारे में यकीनन सोचने की हमारी जिम्मेदारी है जिनके लिए आए दिन अनुचित शब्दों का इस्तेमाल किया जाता है। उन्होंने इंतेहा तब होती है जब दस्तूरी कुर्सियों पर बैठे हुए लोग वह कहते हैं, जिससे दिल टूटते हैं।

आजम ने कहा है कि मुल्क के बंटवारे के वक्त दो नजरिये सामने आए थे। एक मजहब के नाम हिंदुस्तान से अलग हुआ टुकड़ा जिसे पाकिस्तान कहा गया और दूसरा अजीम हिंदुस्तान जिसकी आजादी की लड़ाई के लिए मुल्क के लोगों ने कुर्बानियां दीं। आजम ने कहा है कि इन हालात में बहुत ज्यादा चिंतित होने की जरूरत नहीं है। जब आप जैसे लोग कुछ बोलते हैं तो उसकी गूंज बहुत दूर तक सुनाई देती है। ऐसे कई मौके खुद हमारी जिंदगी में भी आए लेकिन खुद को संभालने की कोशिश की और कामयाब भी रहे।

उन्होंने फिल्म अभिनेता को निमंत्रण दिया है कि वे अपनी सलाहियत को अपने फन के साथ.साथ अनपढ़ और मजबूरों की तालीम देने की तरफ भी लगाएं। उन्होंने खत में मशहूर शायर नवाज देवबंदी के ये शेर लिखे हैं।

"मंजिल पे न पहुंचे उसे रस्ता नहीं कहते ।
दो चार कदम चलने को चलना नहीं कहते।।
एक हम हैं कि गैरों को भी कह देते हैं अपना।
एक वो हैं कि अपनों को भी अपना नहीं कहते।।
माना कि मियां हम तो बुरों से भी बुरे हैं।
कुछ लोग तो अच्छों को भी अच्छा नहीं कहते।।"

उन्होंने मशहूर कवि और शायर प्रोफेसर उदय सिंह साहब का एक शेर भी उन्हें भेजा है.
"न तेरा हैए न मेरा है, यह हिंदुस्तान सबका है।
नहीं समझी गयी यह बात, तो नुकसान सबका है।

आमिर खान के असहिष्णुता के मुद्दे पर केंद्रीय मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति ने कटाक्ष करते हुए कहा कि भारत में तो कुछ भी नहीं पड़ोसी देश पाकिस्तान, ईरान और इराक के हालात देखने पर पता चल जाएगा कि कहां असहिष्णुता का बोलबाला है।
फिर भी यदि आमिर को विश्वास नहीं है तो अपनी पत्नी को पाकिस्तान भेजकर देख लें, उन्हें स्वयं ही वहां की सुरक्षा का हाल पता चल जाएगा। आमिर हों या शाहरुख उन्हें मजहबी चश्मा हटाना चाहिए, उन्हें नहीं भूलना चाहिए कि इसी भारत देश ने उन्हें जाति धर्म से परे रख उनकी कला को सम्मानित किया है।
कलाकारों को यदि एवार्ड लौटाना ही था तो 84 के दंगे, भागलपुर और मुजफ्फरपुर कांड में क्यो नहीं लौटाए, दादरी तो प्रदेश का मसला था, इससे केंद्र का क्या मतलब। खाद्य एवं प्रसंस्करण राज्य मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति ने कहा है कि अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण जरूर होगा। यह कार्य चाहे संसद के माध्यम से हो या कोर्ट से। विहिप नेता अशोक सिंघल का राम मंदिर निर्माण का सपना अवश्य साकार होगा। यह बात उन्होंने मंगलवार को दिल्ली से फतेहपुर जाते समय सेंट्रल स्टेशन पर पत्रकारों से बातचीत में कही। उन्होंने कहा कि भाजपा की 18 महीने की सरकार में विश्व पटल में भारत छाया हुआ है।
साध्वी ने अशोक सिंघल को याद करते हुए कहा कि उनकी पहचान अकेले रामजन्म भूमि आंदोलन से नहीं हुई। उनका संत समाज को एकजुट करने और वनवासी एकल विद्यालयों के निर्माण में भी योगदान रहा है। साध्वी ने कहा कि उन्होंने कई सालों तक विश्व हिंदू परिषद में अशोक सिंघल के साथ काम किया है। उन्होंने रामजन्म भूमि आंदोलन के माध्यम से हिंदू समाज को एकजुट किया। केंद्रीय मंत्री ने देर शाम नौबस्ता स्थित गणेश पार्क में चल रही श्रीमद भागवत कथा में हिस्सा लिया। इस मौके पर पूर्व मेयर रवींद्र पाटनी, सुरेंद्र मैथानी, कार्यक्रम संयोजक देवेश दिवेदी आदि मौजूद रहे।

बेहतर होगी प्रदेश की चिकित्सा सेवाएं==========================* प्राइवेट प्रैक्टिस बंद न की तो जेल जाएंगे ये डॉक्टर।* अस...
25/11/2015

बेहतर होगी प्रदेश की चिकित्सा सेवाएं
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* प्राइवेट प्रैक्टिस बंद न की तो जेल जाएंगे ये डॉक्टर।
* असाध्य रोगों के इलाज के लिए बीपीएल कार्ड नहीं होगा जरूरी।

उत्तर प्रदेश-उत्तम प्रदेश की तर्ज को आगे बढ़ाते हुए प्रदेश के चिकित्सा शिक्षा राज्यमंत्री राधेश्याम सिंह ने मेडिकल कॉलेजों के उन शिक्षकों को चेतावनी दी है जो अपने काम के बजाय प्राइवेट प्रैक्टिस पर ज्यादा ध्यान देते हैं। उन्होंने कहा कि एक बार सभी को सुधरने का मौका दूंगाए यदि इसके बाद भी न सुधरे तो ऐसे डॉक्टरों को जेल भेजा जाएगा। राज्यमंत्री मंगलवार को विभागीय अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक के बाद पत्रकारों से मुखातिब थे। उन्होंने बताया कि विभाग में शिक्षकों के काफी पद खाली पड़े हैं। इन पदों पर जल्द भर्ती करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही मेडिकल कॉलेजों की कमियों को तत्काल दूर करने के लिए भी कहा गया है। मंत्री ने कहा कि वे खुद मेडिकल कॉलेजों का औचक निरीक्षण करेंगे। उस दौरान यदि कमी मिली तो संबंधित के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। मंत्री ने कहा कि मेडिकल कॉलेजों में आने वाले मरीजों के साथ सहानुभूतिपूर्वक व्यवहार किया जाना चाहिएए जबकि आए दिन जूनियर डॉक्टरों व तीमारदारों के बीच संघर्ष के मामले सामने आते रहते हैं। इसे देखते हुए प्रिंसिपलों से कहा गया है कि वे अपने यहां जूनियर डॉक्टरों की बैठक बुलाकर उन्हें इस बारे में समझाएं। तीमारदारों के साथ उनका व्यवहार ठीक होए इसके लिए कड़े दिशा.निर्देश दिए जाएं। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग प्रदेश सरकार की प्राथमिकता में है। अधिकारियों को नए मेडिकल कॉलेजों के निर्माण कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं। गोरखपुर में बन रहे 500 बेड के अस्पताल का निर्माण कार्य दिसंबर 2016 तक पूरा करने के लिए कहा है। जेई.एईएस की बीमारी से निपटने के लिए शत.प्रतिशत टीकाकरण कराया जाएगा। मंत्री ने कहाए बीपीएल परिवारों का असाध्य रोगों का इलाज मुफ्त होता हैए लेकिन इसके लिए बीपीएल कार्ड की जरूरत होती है। बीमार व्यक्ति कार्ड लेकर अस्पताल नहीं पहुंचता है। इसे देखते हुए वे सीएम से बात कर बीपीएल कार्ड की अनिवार्यता खत्म कराएंगे। मंत्री ने बताया कि गोरखपुर मेडिकल कॉलेज को कैंसर के इलाज के लिए कोबाल्ट मशीन दे दी गई है। वहां आगामी एक जनवरी से रेडियोथेरेपी के साथ ही एमआरआई व सीटी स्कैन की सुविधा मुहैया कराने के निर्देश दिए गए हैं।

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