Dini Diary

Dini Diary .

इमाम हुसैन को यज़ीद की ज़ालिम फ़ौज ने 3दिन का भूखा-प्यासा शहीद किया था।इसीलिए कहा जाता है   यानि आप पानी की अहमियत समझें...
12/05/2018

इमाम हुसैन को यज़ीद की ज़ालिम फ़ौज ने 3
दिन का भूखा-प्यासा शहीद किया था।
इसीलिए कहा जाता है यानि आप पानी की अहमियत समझें
पर अफ़सोस इस बात का कि कुछ
कट्टरपंथियों को रायपुर स्टेशन पर एक NGO
के लगाए प्याऊ पर हुसैन का नाम लिखा चुभने
लगा और इसे ज़बरन हटा दिया।

05/09/2017
19/08/2017

#आखरी_किस्त

वो जब पेहली मर्तबा सादिया के घर गये थे जब
रिश्ते के लिए हां हुई थी - दोस्तो का शादी कि
खबर पर छेड छाड़ हसी मजाक.... उमर कि
आंखो में नमी उतर आयी...
एक दाडी कि बात नहीं है-मेरी पूरी आख़िरत कि
बात है.. पलको पर कुछ कतरे बिखर गये
अल्लाहु अकबर अल्लाहु अकबर... करीबी
मस्जिद से अजान कि आवाज गूंजने लगी
अल्लाहु अकबर.. अल्लाह सबसे बड़ा है बेशक
अल्लाह सबसे बड़ा है सबसे पहले भी और सब
ख्वाशियात से ऊपर भी है-उमर दिल ही दिल में
बे इख्तियार कह उठा
आज मुझे भी एक बदर लड़नी है एक उहद पर
कुर्बान होना है फिर मेरी दफा मैदान मेरा दिल
बना है.. हर ख्वाहिश कुर्बान है तुझ पर मेरे
अल्लाह
इस दिल पर आज मे ख़ुद छुरी चला दूँगा--दुख
से आवाज रंद गयी
तुम क्या जानो के अदाए इब्राहिमी क्या है रब
कि रजा कि खातिर ख़ुद का दिल दुखा देना

***************

(एक साल बाद)
आइये ना प्लीज़ खाना खाले प्लीज जारा
मुहब्बत से अपने शोहर से कह रही थी - अभी
नहीं एक घंटे तक कुछ नहीं कर सकता जारा,
आज वाक़ई बहुत काम है "उमर ने लेपटॉप थोड़ा
और करीब करते हुये जवाब दिया - *मैंने भी
अभी तक कुछ नहीं खाया कि आपके साथ ही
खउंगी --जारा ने कुछ देर खामोशी से बेठने के
बाद धीमी सी आवाज कहा - क्या ??? जी
जनाब, मलिकाए आला भूखी हो और हम ख्याल
न करे ऐसा मुमकिन है भला ? उमर शरारतन
उससे बोला
लेपटॉप अब वंद कर चुका था और चार्जर उतार
कर वापिस रख रहा था -
जारा शर्माती आँखो से हँसती हुई किचन कि
जानिब चल दि ***,, सादिया के ठुकरा देने के
मामले को एक साल बीत चुका था - उमर ने
अपनी मंगेतर और सुन्नत कि दाड़ी मे से सुन्नत
को चुना था - इस फैसले पर वो दुनियादार लोगो
कि नज़र में बेवकूफ़ तरीन अपनो और वालीदेन
तक के ताने और गालिया सुनी थी और खानदान
वालों कि बाते अलग-
खानदान वाले कितनी बाते बनाये गये दाड़ी जब
तक हे कोई अच्छा रिश्ता नहीं मिलेगा - तुमने
तो जलील कर दिया है बुड़े माँ बाप को अपनी
जिद के खातिर - वगेरह वगेरह जैसी बाते पूरा
एक साल अकेला ही सुनता रहा - जिस का जो
दिल में आया कहता रहा - लेकिन उमर का
फैसला एक दिन के लिये भी न बदला हां
तकलीफ तो बहुत हुई थी ऐसे बातो से लेकिन
अल्लाह का कुरान और जिक्र ऐसी चीजे थी
जो उसकी हिम्मत बनी रही - सच है नमाज़ और
जिक्र न हो तो इन्सान पागल ही हो जाये -
अल्लाह ने ऐसा सब्र पर इसतिकामत भी फिर
कमाल कि अता कि - हकीकी बात है कि वो रब
अपनी खातिर अड़े इन्सान को कभी मरने के
लिये अकेला नहीं छोड़ देता - लेकिन इस मुकाम
तक आने के लिये पहला कदम ख़ुद को उठाना
पड़ता है - सबूत देना पड़ता है कि वाक़ई आप के
लिये अल्लाह ही सबसे ज्यादा कीमती हैं -
उसके बाद डरपोक से डरपोक तरीन इन्सान का
दिल भी पहाड़ कि तरह मजबूत अता करदी
जाती है जो उसके कदमो को अल्लाह के रास्ते
पर जमादे इस तरह कि फिर दुनिया कि कितनी
भी सख्त हवाए चले उसे गिरा नहीं सकती, उस
रास्ते से हटा नहीं सकती - लेकिन इस राह पर
सिर्फ दुख तकलीफ और मेहरूमियां ही नहीं
मिलती बल्कि इन्सान वक्ता फोक्ता ईनाम से
भी नवाजा जाता है - जैसे आज उमर को नवाजा
गया था - अर्से से खौफ अंधेरो और तूफानों के
बाद उसकी कश्ती को भी किनारा लगा दिया
गया था - उसे सारा जैसी ईमान वाली, मुहब्बत
करने वाली, शर्म व हया वाली एक पर्दादार
खूबसूरत बीवी अता कर दी गयी थी - सादिया
को अल्लाह के लिये खो देने पर उसको दुनिया
में ही जन्नत सी दे दी गयी थी - उमर को कभी
कभी लगता था जैसे अल्लाह ने उसकी सारी
फिलिंगज को समेटकर एक इन्सान का रूप दे
दिया हो - जारा के नाम से जैसे वो हकीकन कोई
इन्सान नहीं थी बल्कि उमर कि जरुरत का
जवाबी अक्स उसकी आँखों कि ठंडक, उसकी
रूह का सुकून जबकि दूसरी जानिब सादिया उसे
ठुकरा पर आज भी कुँवारी बेठी थी वो शायद
भूल गयी थी कि जिसे एक दाड़ी समझ कर
ठुकरा रही थी वो महज एक दाड़ी नहीं थी बल्कि
सून्नत ए रसूल थी सल्लल्लाहु अलैहि
वसल्लम थी - असल में तौहीन उसने उमर कि
नहीं कि थी बल्कि अल्लाह और उसके नबी
सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कि की थी - और
ये कोई छोटा गुनाह नहीं था - सादिया कि तरह
आज कितनी ही नाम निहाद मुसलमान दाड़ी
पर्दा और दीन कि दूसरी कई बातो के लिए
कितनी आराम से नफरत का इजहार करते रेहते
हैं इन पर अमल करने वालों का मजाक उड़ाते
रेहते हैं -सोचे बिना कि इनका ये सब करना
इनको तबाही के किस किस घड़े में फेंकता जा
रहा है - इनहे तबाह व बर्बाद करता जा रहा है -
जिन्दगी से सुकून ऎसे ही नहीं छीन गया ऎसे
लोगो के !!

*** *** ***

#पहली_किस्त_कमेंट_बॉक्स_में

16/08/2017

#किस्त_1

उसकी ये डिमांड है कि तुम दाड़ी शेव कर लो तो
फिर ही वो शादी करेगी "उमर कि अम्मी उसके
करीब आ बेठी -
उमर को ये खबर सुनकर ढ़चका सा लगा - साथ
ही
दिल पर तकलीफ का एक भारी बोझ उभरा"
क्या ??? ये सादिया ने कहा ??? उसे जैसे
यकीन नहीं आ रहा था शादी को सिर्फ एक
हफ्ता रह जाने पर मंगेतर कि तरफ से ऐसी बात
सुनना - और वो भी ईस हाल में की अब दिल में
जगह
बन चुकी हो मुहब्बत सी महसूस होने लगी हो-
तकलीफ का आलम नाकाबिल था-हां बेटा मुझे
भी यकीन नहीं आ रहा था इसलिये ख़ुद से ही
पूछकर आ रही हू मेरी मानो तो उसकी बात
मानलो - क्या हे इसमे एक दाड़ी ही कि बात है -
आजकल तो लोग दो कोडी कि जॉब के लिए भी
दाड़ी छोड़ देते हैं "तो तुम्हारा तो पूरी जिन्दगी
का सवाल है बेटा - इतनी अच्छी लड़की है पड़ी
लिखी खूबसूरत जवान है खुद डॉक्टर है और
क्या चाहिये - अब जिद ना करना बेटा - सारा
साहिबा बेटे को समझाने लगी!
पहले मंगेतर और अब माँ - और किस किस का
मुकाबला करना था - उमर का सदमे से हलक
घुटने लगे थे
अम्मी जान - जब उसने मुझे पहले कबुल किया
था तो इस दाड़ी के साथ ही किया था - आज
अगर वो डॉटर बनकर उसकी सोंच आसमान पर
पहुंच गयी है तो उसमें मेरा कोई कसूर नहीं दिल
गम से चूर चूर था * * * *एक तरफ दिल है और
दूसरी तरफ #ईमान - एक जानिब दुनिया कदमों
में है और दूसरी जानिब अल्लाह
एक रास्ता पसंद जिन्दगी कि तरफ है जाता है
और एक हिज्र कि तन्हाइयों कि तरफ - उमर
सुनसान पार्क में बेठा ख़ुद से मुखातिब था
आज बहुत बड़ा इम्तेहान ले लिया था उससे
उसके रब ने - आज पता चलना था जो दीन -
दीन के नारे लगाने वाला उमर था वो वाक़ई दिल
से ईमान लाया था या रब से मुहब्बत के सारे
दावे खोखले थे **
उमर के जहन से पुरानी खूबसूरत य़ांदे गुजरने
लगी -
वो जब पेहली मर्तबा सादिया के घर गये थे

08/08/2017

#मैं_सहाबी_बनना_चाहता_हूँ

एक स्कूल मे उस्ताद बच्चो को आने वाले
वक्त के बारे मे समझा रहे थे की किस तरह बड़े
होकर दीन के रास्ते पर चलना हॆ कोम के खातिर
नेक काम करना हॆ कुछ बनकर कोम की खिदमत
करना हॆ नेक इन्सान बनना हॆ फ़िर बच्चो से
खास मूतवज्जो होते हुये पूछने लगे की सभी
बच्चे बताईये वो बड़े होकर क्या बनना पसंद
करेंगे.
बच्चे एक एक करके उस्ताद को बताने लगे मे
बड़ा होकर आलिम बनूंगा दूसरा बच्चा बोला मे
पुलिस अफसर बनुंगा तीसरा बच्चा बोला
इन्जीनियर कोइ वकील कोइ टीचर कोइ
डॉक्टर सभी बच्चो के जवाब दुनयावी ओहदों
के इर्ध गीर्ध घूम रहे थे तभी एक बच्चा बोला

#मैं_सहाबी_बनना_चाहता_हूँ

सभी बच्चे उसपर हँसने लगे ये क्या होते हॆ
बच्चा बोला मे सच मे सहाबी बनना चाहता हूँ
उस्ताद ने पूछा,तुम सहाबी क्यु बनना चाहते
हो ?
बच्चा बोलता हॆ मे सहाबी इसलिये बनना
चाहता हूँ की मेरी माँ हर रात मुझे असहाबा के
किस्से सुनाती हॆ मे ये जान गया हूँ की असहाबा
कितने बहादुर होते थे अल्लाह ओर उसके रसूल
से प्यार करने वाले ओर अल्लाह के सिवा
किसी से नही डरते थे
मे भी उनके जेसा ही बनना चाहता हूँ
बच्चे की पूरी बात सुनने के बाद उस्ताद चुप हो
जाता हॆ ओर मन ही मन सोचने लगता हॆ इस
बच्चे की माँ ज़रूर कोइ अजीम ओर नेक
खयालात औरत हॆ तभी तो इसने अपनी माँ से
ही ये नेक बाते सुन सुन कर असहाबा की जिंदगी
को अपनी मुस्तक्बील की जिंदगी चुनने का
सोचा हॆ
जहाँ बच्चे को सबसे पहले अल्लाह का नाम
ओर कल्मा सिखाना चाहिये वहाँ आजकल की
माँ बच्चो को गाना सिखाती हॆ
बच्चो की सलाम करने की जगह हाई हेलो टाटा
बाई बाई सिखाया जाता हॆ
हमारे घरो मे गर बच्चो से पुछ लिया जाये बेटा
सहाबी कोन होते हॆ तो वो हमारी शक्लें देखने
लगेंगे क्युँकि उनसे घरो मे इस तरह की बाते की
ही नहुष जाती ओर ना ही घर मे तालीम की जाती
आज़ हमारे घर के बच्चे शाहरूख खान सलमान
खान की तरह किसी क्रिकेटर फुटबॉलर की
तरह बनना चहते हॆ दुनियाँ मे कामयाब होना
चाहते हॆ लेकिन दोनो जहाँ की कामयाबी जिसके
(हज़रत मुहम्मद रसूलूल्लाह सल्लललाहु अलेही
वसल्लम) रास्ते पर चलने मे हॆ उनके रास्ते पर
नही चलना चाहते ओर चलेंगे भी केसे हम उन्हे
कुछ सिखायेंगे तभी ना
हम तो कच्ची उम्र मे ही उन्हे यहूदी नसारा
कल्चर वाले स्कूलों मे एडमिशन करा देते हॆ
जिससे बच्चे वहाँ के कल्चर मे रच बस जाते हॆ
ओर हम उम्मीद करते हॆ हमारे बच्चे बड़े होकर
नेक बने

07/08/2017

अपने खिलाफ बातें खामोशी से सुन लो...
और जवाब देने का हक वक्त को दे दो.....

Apne Khilaaf Baatain Khamoshi Se Sun Lo....

Aur Jawab Dene Ka Haq Waqt Ko De Do....

19/07/2017

हो सकता है आपको किसी की खूबसूरती से मोहब्बत हो जाए...

लेकिन यह याद रहे कि जिंदगी किरदार और आमाल के साथ गुजारी जाती है खूबसूरती के साथ नही......

17/07/2017

O:) अश्हाब-ए-मुहम्मद हक़ के वली O:)

14/06/2017

आप अल्हम्दुलिल्लाह हर साल उमरा करते
हैं ...
चाशत ,इशराक ,अव्वाबीन नफ्ली इबादतें
करते हैं .....
ख़ूब सदक़ा देते हैं ....
वाज़ाइफ़ ,तसबिहात की पाबंदी करते हैं.....
लेकिन आप ....
कोशिश नहीं करते सूद से बचने की ....
आप कोशिश नहीं करते पर्दा करने की ....
आप कोशिश नहीं करते बद नज़री से बचने
की ....
आप परवाह नही करते हराम खा रहे या
हलाल ....
आप ने अगर नाज़ायज़ रिश्ते बना कर रखे हैं....
आप कभी कोशिश नहीं करते बचने की, झूठ
,चुगली ग़ीबत ,और किसी मुसलमान का दिल
दुखाने की ।।।
तो याद रखिये यह सब इबदातें आपको
अल्लाह के गुस्से सी नहीं बचा सकतीं।।।।

11/06/2017

INTEQALE PUR MALAL
Bade Ranj O Gham Ke Sath Ahbab E
Ahlesunnat Wa Jamat Ko Ye Khabar
Dee Ja Rahi Hai Ki Ramzan E Kareem Ke
Ashra E Maghfirat Me Yaani Aaj
11-6-2017 Ko Huzoor Tajushshariah
Ke Damad Hazrat M***i Shoyeb Raza
Naeemi ﺭﺣﻤﺖ ﺍﻟﻠﮧ ﻋﻠﯿﮧ
Apne MAALIKE HAQIQI Se Ja Mile..
ِﻪْﻴَﻟِﺇ ﺇِﻧَّﺎ ﻟِﻠَّﻪِ ﻭَﺇِﻧَّﺎٓ
ﺭَٰﺟِﻌُﻮﻥَ
Allah Pak Marhoom Ki Maghfirat
Farmaye, unke Darajaat Buland
Farmaye Aur unhe Sarkar ﺻﻠﯽ
ﺍﻟﻠﮧ ﻋﻠﯿﮧ ﻭﺳﻠﻢ Ka Pados
Naseeb Farmaye आमीन..
Pliz Koi Like Na Kre Bas Hazrat Ke Liye
Khub Duaa Kijiye...

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