13/09/2022
कुछ राज्य सरकारों द्वारा धार्मिक मदरसों का सर्वेक्षण
मदरसों को बदनाम करने और हमवतनी भाईयों में सन्देह पैदा करने की नापाक और घृणित साज़िश (महासचिव बोर्ड)
नई दिल्ली: 11 सितंबर, 2022 ई0
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव हज़रत मौलाना ख़ालिद सैफ़ुल्लाह रहमानी ने अपने प्रेस नोट में कहा है कि कुछ राज्य सरकारों द्वारा धार्मिक मदरसों का सर्वेक्षण वास्तव में मदरसों और हमवतनी भाईयों के बीच इन्हें सन्देहास्पद बनाने की एक घिनावनी और नापाक साज़िश है। उन्होंने आगे कहा कि धार्मिक मदरसों का एक उज्ज्वल इतिहास रहा है, इन मदरसों में पढ़ने और पढ़ाने वालों के लिए चरित्र-निर्माण और नैतिक प्रशिक्षण का आयोजन चौबीसों घंटे किया जाता है, कभी इन मदरसे में पढ़ने और पढ़ाने वालों ने आतंकवाद और साम्प्रदायिक घृणा पर आधारित कोई कार्य नहीं किया; यद्यपि कई बार सरकार ने इस प्रकार के आरोप लगाए; मगर चूंकि ये झूठे आरोप थे इसलिए इसका कोई सुबूत नहीं मिला, सत्ताधारी दल के पुराने और प्रभावशाली नेता लालकृष्ण आडवाणी जब देश के गृहमंत्री थे तो उन्होंने भी यह स्वीकार किया था, डॉ. राजेंद्र प्रसाद, जवाहरलाल नेहरू, एपीजे अब्दुल कलाम और मौलाना आज़ाद जैसे देश के कद्दावर नेतृत्व ने मदरसों की सेवाओं को स्वीकार किया है, स्वतंत्रता संग्राम के दौरान मदरसों से निकले विद्वानों (उलेमाओं) ने असाधारण बलिदान दिया है और स्वतंत्रता के बाद भी ये संस्थान देश के सबसे गरीब वर्गों को शिक्षा प्रदान करने में प्रमुख भूमिका निभा रहे है, इसलिए बोर्ड सरकार से अपने इस इरादे से दूर रहने का अनुरोध करता है और यदि किसी भी वैध आवश्यकता के तहत सर्वेक्षण किया जाता है तो इसे केवल मदरसों या मुस्लिम संस्थानों तक सीमित न रखा जाए बल्कि देश के सभी धार्मिक और गैर-धार्मिक संस्थानों का एक निश्चित सिद्धांत के तहत सर्वेक्षण किया जाए; बल्कि इसमें सरकारी संस्थानों को भी शामिल किया जाए, कि सरकार ने शैक्षणिक संस्थानों के बुनियादी ढांचे के संबंध में जो नियम निर्धारित किए हैं सरकारी संस्थान स्वयं इसे किस हद तक पूरा कर रहे हैं, मौलाना रहमानी ने कहा कि केवल धार्मिक मदरसों का सर्वेक्षण मुसलमानों की रुस्वा करने का कुप्रयास है और बिल्कुल अस्वीकार्य है और मिल्लत-ए-इस्लामिया इसे ख़ारिज करती है।
✍️ जारीकर्ता
डॉ. मुहम्मद वक़ारुद्दीन लतीफ़ी
कार्यालय सचिव