Akhand Hindu Samrajya Sangathan अखण्ड हिन्दू साम्राज्य संगठन

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रामायण क्या है..??अगर कभी पढ़ो और समझो तो आंसुओ पे काबू रखना....एक रात की बात हैं, माता कौशल्या जी को सोते में अपने महल ...
20/11/2023

रामायण क्या है..??

अगर कभी पढ़ो और समझो तो आंसुओ पे काबू रखना....एक रात की बात हैं, माता कौशल्या जी को सोते में अपने महल की छत पर किसी के चलने की आहट सुनाई दी..नींद खुल गई, पूछा कौन हैं ? मालूम पड़ा श्रुतकीर्ति जी (सबसे छोटी बहु, शत्रुघ्न जी की पत्नी)हैं ।माता कौशल्या जी ने उन्हें नीचे बुलाया |
श्रुतकीर्ति जी आईं, चरणों में प्रणाम कर खड़ी रह गईं
माता कौशिल्या जी ने पूछा, श्रुति ! इतनी रात को अकेली छत पर क्या कर रही हो बेटी ? क्या नींद नहीं आ रही ? शत्रुघ्न कहाँ है ? श्रुतिकीर्ति की आँखें भर आईं, माँ की छाती से चिपटी, गोद में सिमट गईं, बोलीं, माँ उन्हें तो देखे हुए तेरह वर्ष हो गए । उफ !
कौशल्या जी का ह्रदय काँप कर झटपटा गया तुरंत आवाज लगाई, सेवक दौड़े आए । आधी रात ही पालकी तैयार हुई, आज शत्रुघ्न जी की खोज होगी,
माँ चली..आपको मालूम है शत्रुघ्न जी कहाँ मिले ?
अयोध्या जी के जिस दरवाजे के बाहर भरत जी नंदिग्राम में तपस्वी होकर रहते हैं, उसी दरवाजे के भीतर एक पत्थर की शिला हैं, उसी शिला पर, अपनी बाँह का तकिया बनाकर लेटे मिले !! माँ सिराहने बैठ गईं, बालों में हाथ फिराया तो शत्रुघ्न जी नेआँखें खोलीं, माँ उठे, चरणों में गिरे, माँ ! आपने क्यों कष्ट किया ? मुझे बुलवा लिया होता..माँ ने कहा, शत्रुघ्न ! यहाँ क्यों ?" शत्रुघ्न जी की रुलाई फूट पड़ी, बोले- माँ ! भैया राम जी पिताजी की आज्ञा से वन चले गए,
भैया लक्ष्मण जी उनके पीछे चले गए, भैया भरत जी भी नंदिग्राम में हैं, क्या ये महल, ये रथ, ये राजसी वस्त्र, विधाता ने मेरे ही लिए बनाए हैं ? माता कौशल्या जी निरुत्तर रह गईं । देखो क्या है ये रामकथा..यह भोग की नहीं....त्याग की कथा हैं..!! यहाँ त्याग की ही प्रतियोगिता चल रही हैं और सभी प्रथम हैं, कोई पीछे नहीं रहा... चारो भाइयों का प्रेम और त्याग एक दूसरे के प्रति अद्भुत-अभिनव और अलौकिक हैं ।
"रामायण" जीवन जीने की सबसे उत्तम शिक्षा देती हैं भगवान राम को 14 वर्ष का वनवास हुआ तो उनकी पत्नी सीता माईया ने भी सहर्ष वनवास स्वीकार कर लिया..!! परन्तु बचपन से ही बड़े भाई की सेवा मे रहने वाले लक्ष्मण जी कैसे राम जी से दूर हो जाते!
माता सुमित्रा से तो उन्होंने आज्ञा ले ली थी, वन जाने की.. परन्तु जब पत्नी “उर्मिला” के कक्ष की ओर बढ़ रहे थे तो सोच रहे थे कि माँ ने तो आज्ञा दे दी,
परन्तु उर्मिला को कैसे समझाऊंगा.?? क्या बोलूँगा उनसे.? यहीं सोच विचार करके लक्ष्मण जी जैसे ही अपने कक्ष में पहुंचे तो देखा कि उर्मिला जी आरती का थाल लेके खड़ी थीं और बोलीं- "आप मेरी चिंता छोड़ प्रभु श्रीराम की सेवा में वन को जाओ...मैं आपको नहीं रोकूँगीं। मेरे कारण आपकी सेवा में कोई बाधा न आये, इसलिये साथ जाने की जिद्द भी नहीं करूंगी।"
लक्ष्मण जी को कहने में संकोच हो रहा था.!! परन्तु उनके कुछ कहने से पहले ही उर्मिला जी ने उन्हें संकोच से बाहर निकाल दिया..!! वास्तव में यहीं पत्नी का धर्म है..पति संकोच में पड़े, उससे पहले ही पत्नी उसके मन की बात जानकर उसे संकोच से बाहर कर दे.!! लक्ष्मण जी चले गये परन्तु 14 वर्ष तक उर्मिला ने एक तपस्विनी की भांति कठोर तप किया.!! वन में “प्रभु श्री राम माता सीता” की सेवा में लक्ष्मण जी कभी सोये नहीं , परन्तु उर्मिला ने भी अपने महलों के द्वार कभी बंद नहीं किये और सारी रात जाग जागकर उस दीपक की लौ को बुझने नहीं दिया.!! मेघनाथ से युद्ध करते हुए जब लक्ष्मण जी को “शक्ति” लग जाती है और हनुमान जी उनके लिये संजीवनी का पर्वत लेके लौट रहे होते हैं, तो बीच में जब हनुमान जी अयोध्या के ऊपर से गुजर रहे थे तो भरत जी उन्हें राक्षस समझकर बाण मारते हैं और हनुमान जी गिर जाते हैं.!! तब हनुमान जी सारा वृत्तांत सुनाते हैं कि, सीता जी को रावण हर ले गया, लक्ष्मण जी युद्ध में मूर्छित हो गए हैं। यह सुनते ही कौशल्या जी कहती हैं कि राम को कहना कि “लक्ष्मण” के बिना अयोध्या में पैर भी मत रखना। राम वन में ही रहे.!! माता “सुमित्रा” कहती हैं कि राम से कहना कि कोई बात नहीं..अभी शत्रुघ्न है.!! मैं उसे भेज दूंगी..मेरे दोनों पुत्र “राम सेवा” के लिये ही तो जन्मे हैं.!! माताओं का प्रेम देखकर हनुमान जी की आँखों से अश्रुधारा बह रही थी। परन्तु जब उन्होंने उर्मिला जी को देखा तो सोचने लगे कि, यह क्यों एकदम शांत और प्रसन्न खड़ी हैं?
क्या इन्हें अपनी पति के प्राणों की कोई चिंता नहीं?
हनुमान जी पूछते हैं- देवी! आपकी प्रसन्नता का कारण क्या है? आपके पति के प्राण संकट में हैं...सूर्य उदित होते ही सूर्य कुल का दीपक बुझ जायेगा।
उर्मिला जी का उत्तर सुनकर तीनों लोकों का कोई भी प्राणी उनकी वंदना किये बिना नहीं रह पाएगा.!!
उर्मिला बोलीं- " मेरा दीपक संकट में नहीं है, वो बुझ ही नहीं सकता.!! रही सूर्योदय की बात तो आप चाहें तो कुछ दिन अयोध्या में विश्राम कर लीजिये, क्योंकि आपके वहां पहुंचे बिना सूर्य उदित हो ही नहीं सकता.!! आपने कहा कि, प्रभु श्रीराम मेरे पति को अपनी गोद में लेकर बैठे हैं..! जो “योगेश्वर प्रभु श्री राम” की गोदी में लेटा हो, काल उसे छू भी नहीं सकता..!! यह तो वो दोनों लीला कर रहे हैं..मेरे पति जब से वन गये हैं, तबसे सोये नहीं हैं..उन्होंने न सोने का प्रण लिया था..इसलिए वे थोड़ी देर विश्राम कर रहे हैं..और जब भगवान् की गोद मिल गयी तो थोड़ा विश्राम ज्यादा हो गया...वे उठ जायेंगे..!!और “शक्ति” मेरे पति को लगी ही नहीं, शक्ति तो प्रभु श्री राम जी को लगी है.!! मेरे पति की हर श्वास में राम हैं, हर धड़कन में राम, उनके रोम रोम में राम हैं, उनके खून की बूंद बूंद में राम हैं, और जब उनके शरीर और आत्मा में ही सिर्फ राम हैं, तो शक्ति राम जी को ही लगी, दर्द राम जी को ही हो रहा.!! इसलिये हनुमान जी आप निश्चिन्त होके जाएँ..सूर्य उदित नहीं होगा।"
राम राज्य की नींव जनक जी की बेटियां ही थीं...
कभी “सीता” तो कभी “उर्मिला”..!! भगवान् राम ने तो केवल राम राज्य का कलश स्थापित किया ..परन्तु वास्तव में राम राज्य इन सबके प्रेम, त्याग, समर्पण और बलिदान से ही आया .!! जिस मनुष्य में प्रेम, त्याग, समर्पण की भावना हो उस मनुष्य में राम हि बसता है... कभी समय मिले तो अपने वेद, पुराण, गीता, रामायण को पढ़ने और समझने का प्रयास कीजिएगा .,जीवन को एक अलग नज़रिए से देखने और जीने का सऊर मिलेगा .!! "लक्ष्मण सा भाई हो, कौशल्या माई हो, स्वामी तुम जैसा, मेरा रघुराइ हो..
नगरी हो अयोध्या सी, रघुकुल सा घराना हो, चरण हो राघव के, जहाँ मेरा ठिकाना हो..हो त्याग भरत जैसा, सीता सी नारी हो, लव कुश के जैसी, संतान हमारी हो.. श्रद्धा हो श्रवण जैसी, सबरी सी भक्ति हो,
हनुमत के जैसी निष्ठा और शक्ति हो... ये रामायण है, पुण्य कथा श्री राम की...

जय श्रीराम, जय गोविंदा ✨🕉️🔱💖🙏😌

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जमीन पर बैठकर भोजन करने से फायदे क्या कभी आपने सोचा है कि प्राचीन काल में हमारे बड़े-बड़े ऋषि-महर्षि जमीन पर बैठकर ही भोजन...
09/09/2023

जमीन पर बैठकर भोजन करने से फायदे

क्या कभी आपने सोचा है कि प्राचीन काल में हमारे बड़े-बड़े ऋषि-महर्षि जमीन पर बैठकर ही भोजन क्यों किया करते थे? वे ना तो असभ्य थे और ना ही निचले तबके के, फिर क्यों भोजन करने के लिए वे भूमि को ही चुनते थे?
जब हम जमीन पर बैठ कर खाना खाते है तो या तो हम जमीन पर आलथी-पालथी मार कर बैठते हैं तो वह सुखासन अथवा अद्र्धपदमासन होता है। इस आसन में बैठने से मस्तिष्क शांत होता है तथा हमारा पाचन संस्थान सक्रिय होता है। माना जाता है कि इस मुद्रा में बैठने पर पेट दिमाग को भोजन पचाने के लिए आवश्यक पाचन रसों का स्त्राव करने का संकेत देता है जिससे भोजन शीघ्र ही पच जाएं।
कुछ तथ्य ह्म नीचे दे रहें है
प्राचीन परंपरा
लेकिन क्या कभी आपने सोचा है कि प्राचीन काल में बड़े-बड़े ऋषि-महर्षि जमीन पर बैठकर ही भोजन क्यों किया करते थे? वे ना तो असभ्य थे और ना ही निचले तबके के, फिर क्यों भोजन करने के लिए वे भूमि को ही चुनते थे?
फायदे
चलिए आज हम आपको जमीन पर बैठकर खाने का तात्पर्य और उसके फायदे बताते हैं, जिनसे अभी तक आप पूरी तरह अपरिचित हैं।
1. स्वास्थ्य के लिए लाभप्रद
जमीन पर बैठकर खाना खाने का अर्थ सिर्फ भोजन करने से नहीं है, यह एक प्रकार का योगासन कहा जाता है। जब भारतीय परंपरानुसार हम जमीन पर बैठकर भोजन करते हैं तो उस तरीके को सुखासन या पद्मासन की तरह देखा जाता है। यह आसन हमारे स्वास्थ्य की दृष्टि से बहुत लाभप्रद है।

2. रक्तचाप में कमी

इस तरीके से बैठने से आपकी रीढ़ की हड्डी के निचले भाग पर जोर पड़ता है, जिससे आपके शरीर को आरामदायक अनुभव होता है। इससे आपकी सांस थोड़ी धीमी पड़ती है, मांसपेशियों का खिंचाव कम होता है और रक्तचाप में भी कमी आती है।

3. पाचन क्रिया
इस आसन में बैठने से पाचन क्रिया भी दुरुस्त रहती है, जिससे खाना जल्दी पचता है। अब आप देख लीजिए जमीन पर बैठकर खाना खाने से ना सिर्फ आप भोजन का लुत्फ उठा रहे होते हैं बल्कि साथ ही साथ योग भी कर रहे होते हैं।

4. पाचन क्रिया में सुधार

जमीन पर बैठकर खाने से आपको भोजन करने के लिए प्लेट की तरफ झुकना होता है, यह एक नैचुरल पोज है। लगातार आगे होकर झुकने और फिर पीछे होने की प्रक्रिया से आपके पेट की मांसपेशियां निरंतर कार्यरत रहती हैं, जिसकी वजह से आपकी पाचन क्रिया में सुधार होता है।

5. शरीर के मुख्य भागों की मजबूती

भोजन करने के लिए जब आप पद्मासन में बैठते हैं तब आपके पेट, पीठ के निचले हिस्से और कूल्हे की मांसपेशियों में लगातार खिंचाव रहता है जिसकी वजह से दर्द और असहजता से छुटकारा मिलता है। इस मांसपेशियों में अगर ये खिंचाव लगातार बना रहेगा तो इससे स्वास्थ्य में सुधार देखा जा सकता है।

6. वजन को नियंत्रित रखना

जमीन पर बैठना और उठना, एक अच्छा व्यायाम माना जाता है। भोजन करने के लिए तो आपको जमीन पर बैठना ही होता है और फिर उठना भी, अर्ध पद्मासन का ये आसन आपको धीरे-धीरे खाने और भोजन को अच्छी तरह पचाने में सहायता देता है।

7. परिवार की निकटता

एक साथ बैठकर खाने से फैमिली बॉंडिंग स्ट्रॉंग होती है, ये बात तो आप जानते ही हैं। साथ ही पद्मासन में बैठकर खाने से आप मानसिक तनाव से दूर होते हैं, जिससे आप अपने परिवार के साथ एक अच्छा टाइम बिता सकते हैं।

8. घुटनों का व्यायाम

जमीन पर बैठकर भोजन करने से आपका पूरा शरीर स्वस्थ रहता है, पाचन क्रिया दुरुस्त रहती है। इसके साथ ही साथ जमीन पर बैठने के लिए आपको अपने घुटने मोड़ने पड़ते हैं। इससे आपके घुटनों का भी बेहतर व्यायाम हो जाता है, उनकी लचक बरकरार रहती है जिसकी वजह से आप जोड़ों की समस्या से बचते हैं।

9. पोस्चर में सुधार

क्रॉस लेग्स की सहायता से जमीन पर बैठने से आपके शारीरिक आसन यानि कि पोस्चर में सुधार होता है। स्वस्थ शरीर के लिए सही आसन बहुत जरूरी है, इससे आपकी मांसपेशियों को मजबूती मिलती है लेकिन साथ ही साथ रक्त संचार में भी सुधार होता है।

10. दिल की मजबूती

सही पोस्चर में बैठने से आपके शरीर में रक्त का संचार बेहतर होता है और साथ ही साथ आपको नाड़ियों में दबाव भी कम महसूस होता है। पाचन क्रिया में रक्त संचार का एक अहम रोल है। पाचन क्रिया को सुचारू रूप से चलाने में हृदय की भूमिका अहम होती है। जब भोजन जल्दी पच जाएगा तो हृदय को भी कम मेहनत करनी पड़ेगी।

11. दीर्घायु

जब आपका हृदय, शरीर और मांसपेशियां स्वस्थ रहेंगी, आपके शरीर में रक्त का संचार बखूबी होगा तो जाहिर है यह आपकी दीर्घायु की गारंटी बन सकता है।

12. शर्म कैसी

तो फिर अगली बार से जमीन पर बैठकर खाना खाने में शर्म महसूस मत कीजिए। अरे भई! ये शर्म का नहीं हेल्थ का विषय है। वैसे भी हमारे पूर्वजों ने जिस परंपरा को बनाया है, वह गलत तो नहीं हो सकती इसलिए आवश्यकता है कि उनकी वैज्ञानिकता को समझकर व्यवहार करें।

आधुनिक समय में हमारी दिनचर्या, खान-पान और कार्य करने के तरीकों में कई बड़े-बड़े परिवर्तन हो गए हैं। आज अधिकांश लोग डायनिंग टेबल पर बैठकर खाना खाते हैं। जबकि पुराने समय में जमीन पर आसन लगाकर बैठते थे और इसके बाद भोजन करते थे। प्राचीन काल से ही जमीन पर बैठकर खाना खाने की परंपरा चली आ रही है।
जमीन पर बैठकर खाना खाने से कौन-कौन लाभ प्राप्त होते हैं...
जमीन पर बैठकर क्यों खाना खाएं...
डायनिंग टेबल पर बैठकर खाने से कई स्वास्थ्य संबंधी कई प्रकार की परेशानियां स्वत: ही हमें घेर लेती हैं। जो लोग जमीन पर बैठकर पारंपरिक तरीके से खाने खाते हैं, वे छोटी-छोटी कई बीमारियों से बचे रहते हैं।
जमीन पर बैठकर खाना खाते समय हम एक विशेष योगासन की अवस्था में बैठते हैं, जिसे सुखासन कहा जाता है। योग शास्त्र के अनुसार सुखासन और पद्मासन से हमें एक समान स्वास्थ्य संबंधी लाभ प्राप्त होते हैं।
पाचन तंत्र रहता है व्यवस्थित
आमतौर पर डायनिंग टेबल पर या खड़े होकर खाना खाने में कई प्रकार की परेशानियां होती हैं जबकि बैठकर खाना खाने से हम ज्यादा अच्छी तरह से भोजन कर सकते हैं। शरीर पर किसी प्रकार का अतिरिक्त भार नहीं पड़ता है। पाचन तंत्र व्यवस्थित रहता है और भोजन पचाने में उसे किसी प्रकार की परेशानी नहीं होती है।

सुखासन के लाभ

• सुखासन से मन की एकाग्रता बढ़ती है। इस तरह खाना खाने से मोटापा, अपच, कब्ज, एसीडीटी आदि पेट संबंधी बीमारियों में भी राहत मिलती है।
• सुखासन से पूरे शरीर में रक्त-संचार समान रूप से होता है। जिससे शरीर को अधिक ऊर्जा प्राप्त होती है। इस ऊर्जा के प्रभाव से हम किसी भी कार्य को अधिक अच्छे ढंग से कर सकते हैं।
• सुखासन से छाती और पैरों को मिलती है मजबूती
• सुखासन से मानसिक तनाव समाप्त होता है और मन में सकारात्मक विचारों का प्रभाव बढ़ता है।
• इस आसन से हमारी छाती और पैरों को मजबूती प्राप्त होती है।
• यदि हम नियमित रूप से योगा नहीं कर सकते हैं तो कम से कम बैठकर खाना खाने से योग के कई लाभ प्राप्त कर सकते हैं।
🌼🌼हरे कृष्ण 🌼🌼
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18/09/2022

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📌 *दिनांक 18/09/2022 (रविवार)*

📍 *श्रीमान् आदरणीय कमल चौधरी जी*
📍 *पता : मलाड (मुम्बई), महाराष्ट्र*
📍 *फोन नं./मोबाइल नं. 98211 36414*
📍 *आईडी क्रमांक: 3283*

📌 *अखण्ड हिन्दू साम्राज्य संगठन के प्रति आपकी निष्ठा व सक्रिय भूमिका को देखते हुए संगठन द्वारा आपको राष्ट्रीय कार्यकारिणी में राष्ट्रीय प्रचारक के पद पर नियुक्त किया जाता हैं।*

📌 *आपसे अपेक्षा है कि आप अखण्ड हिन्दू साम्राज्य संगठन के नियमों व संगठन के दिशा निर्देशों का पालन करते हुए हिन्दुत्व व राष्ट्रहित में अपना सक्रिय योगदान देंगे, संगठन को सशक्त बनाएंगे तथा अपने पद की जिम्मेदारी का पूर्ण निष्ठा एवं कर्तव्य परायणता के साथ निर्वहन करेंगे।*
📍 *उज्जवल भविष्य एवं उत्तम कार्यकाल की शुभकामनाओं के साथ*
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*अखण्ड हिन्दू साम्राज्य संगठन परिवार*

*जय सनातन, जय हिन्द वन्दे मातरम्*

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ॐ रवि कान्त बंसल

श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी हे नाथ नारायण वासुदेवा ।हे गोविंदा जय गोपाला
14/09/2022

श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी हे नाथ नारायण वासुदेवा ।
हे गोविंदा जय गोपाला

05/09/2022

मनुष्य का अहंकार और मोह ही उसे बर्बाद कर देता है, उसे किसी शत्रु की जरूरत नही पड़ती...!

जय श्री कृष्ण 🙏🚩

प्रथम पूज्य भगवान गणेश, जय गौरी नंदन लंबोदरहे गोविंदा जय गोपाला
03/09/2022

प्रथम पूज्य भगवान गणेश, जय गौरी नंदन लंबोदर
हे गोविंदा जय गोपाला

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ:निर्विघ्नं कुरु मे देव: सर्वकार्येषु सर्वदाआप सभी को श्री गणेश चतुर्थी की हार्दिक शुभक...
30/08/2022

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ:
निर्विघ्नं कुरु मे देव: सर्वकार्येषु सर्वदा

आप सभी को श्री गणेश चतुर्थी की हार्दिक शुभकामनाएं। भगवान श्री गणेश जी से मेरी प्रार्थना है कि सभी को सुख, शांती, समृद्धि व खुशहाली प्रदान करे। गणपति बप्पा मोरया।

यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत।अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्॥परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम् ।धर...
22/08/2022

यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत।
अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्॥
परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम् ।
धर्मसंस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे युगे ॥

अर्थ: मै प्रकट होता हूं, मैं आता हूं, जब जब धर्म की हानि होती है, तब तब मैं आता हूं, जब जब अधर्म बढता है तब तब मैं आता हूं, सज्जन लोगों की रक्षा के लिए मै आता हूं, दुष्टों के विनाश करने के लिए मैं आता हूं, धर्म की स्थापना के लिए में आता हूं और युग युग में जन्म लेता हूं। #कृष्ण

बुधवार सायं का श्री रामजन्मभूमि मंदिर निर्माण कार्य का विहंगम दृश्य। जय श्री राम!
28/07/2022

बुधवार सायं का श्री रामजन्मभूमि मंदिर निर्माण कार्य का विहंगम दृश्य। जय श्री राम!

देवाधिदेव महादेव के पवित्र श्रावण मास के प्रथम सोमवार की समस्त देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं।भगवान भोलेनाथ जी से प्रा...
18/07/2022

देवाधिदेव महादेव के पवित्र श्रावण मास के प्रथम सोमवार की समस्त देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं।

भगवान भोलेनाथ जी से प्रार्थना है कि सभी पर उनकी कृपा सदा बनी रहे।
#सावन_सोमवार #सावन_का_प्रथम_सोमवार

“देवाधिदेव महादेव के पवित्र श्रावण मास के प्रथम सोमवार की समस्त देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं। भगवान भोलेना.....

🌿🌿श्रावण मास प्रारम्भ 🌿🌿🙏🌹🔱जय श्री महाकालेश्वर जी 🔱🌹🙏 दिनांक _14🌿07🌿2022,गुरुवार🌹भस्म आरती श्रृंगार दर्शन उज्जैन मध्य प्...
14/07/2022

🌿🌿श्रावण मास प्रारम्भ 🌿🌿
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