Malani ra dhani - मालाणी रा धणी

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🚩 गंगा दशहरा महापर्व की मंगलमय शुभकामनाएं 🚩भारतीय संस्कृति, श्रद्धा एवं सनातन आस्था की पावन प्रतीक माँ गंगा के पृथ्वी पर...
25/05/2026

🚩 गंगा दशहरा महापर्व की मंगलमय शुभकामनाएं 🚩

भारतीय संस्कृति, श्रद्धा एवं सनातन आस्था की पावन प्रतीक माँ गंगा के पृथ्वी पर अवतरण दिवस गंगा दशहरा के शुभ अवसर पर श्री रावल मल्लीनाथ श्री राणी रूपादे संस्थान, तिलवाड़ा की ओर से समस्त श्रद्धालु भक्तों को हार्दिक शुभकामनाएं।

माँ गंगा की असीम कृपा से आप सभी के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि, आरोग्य एवं आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार हो।

यह पावन पर्व सभी के जीवन को पुण्य, सेवा एवं सद्भावना से आलोकित करे।

🙏 जय माँ गंगे । जय श्री रावल मल्लीनाथ जी री। 🙏 जय श्री राणी रूपादे जी री । 🙏

18/05/2026
✨जय श्री रावल मल्लीनाथ जी री ✨✨ जय श्री राणी रूपादे जी री ✨श्री रावल मल्लीनाथ श्री राणी रूपादे संस्थान, तिलवाड़ा के अधीन...
27/04/2026

✨जय श्री रावल मल्लीनाथ जी री ✨
✨ जय श्री राणी रूपादे जी री ✨

श्री रावल मल्लीनाथ श्री राणी रूपादे संस्थान, तिलवाड़ा के अधीनस्थ तीनों मंदिरों में दिनांक 29 अप्रैल 2026 (वैशाख शुक्ल पक्ष त्रयोदशी) से आरती समय में परिवर्तन किया गया है।

🌅 मंगला आरती — प्रातः 05:30 बजे
🌇 संध्या आरती — सायं 07:30 बजे

सभी श्रद्धालुजन समयानुसार पधारकर आरती के दर्शन-लाभ प्राप्त करें।

🙏 संस्थान की ओर से समस्त श्रद्धालु भक्तगणों का हार्दिक स्वागत एवं अभिनंदन 🙏

27/03/2026

चैत्र नवरात्रा पर्व – नवम दिवस: मां सिद्धिदात्री पूजा

चैत्र नवरात्रा पर्व नवम दिवस पर मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। वे भगवान शिव को भी सिद्धि प्रदान करने वाली देवी मानी जाती हैं। मां को विद्या और कला की देवी सरस्वती का रूप भी कहा गया है। इनकी पूजा से सिद्धियां, सुख-समृद्धि और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

स्वरूप:
मां सिद्धिदात्री कमल के फूल पर विराजमान रहती हैं। इन्हें नौ प्रकार के फल और फूल अर्पित करने का विशेष महत्व है। साधक को जामुनी/बैंगनी वस्त्र पहनकर पूजा करनी चाहिए, जिससे विशेष फल प्राप्त होता है।

पूजा विधि और भोग:
साधक उपवास और विशेष पूजन कर मां को प्रसन्न करते हैं। मां को हलवा, पूरी, चना, फल, खीर, नारियल और तिल का भोग लगाया जाता है। भोग लगाने के बाद मां की आरती विशेष फलदायी मानी जाती है।

लाभ:
1. सभी प्रकार की सिद्धियों की प्राप्ति।
2. जीवन में सुख-समृद्धि और सफलता।
3. आत्म-विश्वास और आध्यात्मिक उन्नति।
4. मोक्ष की प्राप्ति।

26/03/2026

चैत्र नवरात्रा पर्व अष्टम दिवस – मां महागौरी पूजा

शक्ति स्वरूपा मां दुर्गा की आराधना के पावन पर्व चैत्र नवरात्रा के अष्टम दिवस मां महागौरी की पूजा-अर्चना की जाती है। शास्त्रों में वर्णन है कि मां महागौरी की उपासना से साधक को सुख-समृद्धि, सौभाग्य और मानसिक शुद्धता की प्राप्त होती है।

मां महागौरी का स्वरूप
मां महागौरी का वर्ण पूर्णत: श्वेत एवं उज्ज्वल है। उनकी उपमा शंख, चंद्रमा और कुंद के फूल से दी गई है। उनके सभी वस्त्र और आभूषण भी श्वेत हैं, इसलिए इन्हें महागौरी कहा जाता है। इनकी चार भुजाएं हैं। वाहन वृषभ (बैल) है। दाहिने ऊपर का हाथ अभय मुद्रा में है और नीचे वाले हाथ में त्रिशूल है। बाएं ऊपर वाले हाथ में डमरू और नीचे का हाथ वर मुद्रा में है।

पूजा का फल
मां महागौरी की कृपा से गृहस्थ जीवन में सुख-शांति व खुशहाली आती है। जीवन की विपदाओं और रोगों से मुक्ति मिलती है। मानसिक शुद्धता और कार्यों में सफलता प्राप्त होती है।

विशेष विधान
महाष्टमी के दिवस कन्या पूजन का विशेष महत्व है। छोटी कन्याओं को प्रेमपूर्वक भोजन कराना एवं उनका आशीर्वाद लेना मां की विशेष कृपा का साधन है। मां महागौरी को नारियल, हलवा और काले चने का भोग अर्पित किया जाता है। उन्हें सफेद पुष्प जैसे चमेली व रातरानी अति प्रिय हैं। साधक को इस दिन गुलाबी वस्त्र धारण करने चाहिए। गुलाबी रंग पवित्रता, प्रेम और सौंदर्य का प्रतीक है, जो आत्मा को शुद्ध करता है और जीवन में सौभाग्य का आशीर्वाद लाता है।

25/03/2026

चैत्र नवरात्रा पर्व सप्तम दिवस : मां कालरात्रि पूजा

चैत्र नवरात्रा पर्व के सप्तम दिवस पर मां दुर्गा के सप्तम स्वरूप मां कालरात्रि की विधिवत पूजा-अर्चना की जाती है। मां का यह रूप भय, अंधकार और समस्त नकारात्मक शक्तियों का नाश करने वाला है।

शुभंकरी स्वरूप
मां कालरात्रि की आराधना से भक्तों के आसपास की बुरी शक्तियां स्वतः ही नष्ट हो जाती हैं। मां की कृपा से जीवन में आने वाली समस्त बाधाएं दूर होती हैं और साधक को मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। यही कारण है कि इन्हें शुभंकरी भी कहा जाता है।

मां कालरात्रि का स्वरूप
मां कालरात्रि का स्वरूप मां दुर्गा का सप्तम स्वरूप माना जाता हैं। इनके शरीर का रंग घने अंधकार की भांति एकदम काला है। भले ही इनका रूप भयंकर प्रतीत होता है, किंतु ये भक्तों को सदैव शुभ फल प्रदान करने वाली माता हैं।

प्रिय भोग
गुड़ और चने का भोग लगाने से दुःख और कष्ट दूर होते हैं। शहद का भोग अर्पित करना भी मंगलकारी माना गया है।

पूजा से लाभ
साधक को साहस, शक्ति और आत्मविश्वास की प्राप्ति होती है। मां कालरात्रि भक्तों की काल से रक्षा करती हैं। जीवन में सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करती हैं। भूत-प्रेत और समस्त नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है।

24/03/2026

चैत्र नवरात्रा पर्व षष्ठम दिवस : मां कात्यायनी की पूजा

मां कात्यायनी की महिमा
चैत्र नवरात्रा पर्व षष्ठम दिवस मां दुर्गा के षष्ठम स्वरूप मां कात्यायनी की आराधना की जाती है। ऋषि कात्यायन के यहां जन्म लेने के कारण इन्हें कात्यायनी कहा जाता है। मान्यता है कि मां की पूजा से विवाह और प्रेम संबंधी बाधाएं दूर होती हैं, गृहस्थ जीवन में सुख-शांति आती है और व्यक्ति निर्भय एवं निरोगी रहता है।

विशेष लाभ
विवाह और प्रेम संबंध : मां कात्यायनी की उपासना से विवाह में आ रही रुकावटें दूर होती हैं तथा मनचाहे जीवनसाथी की प्राप्ति होती है। सुख-समृद्धि : आराधना से गृहस्थ जीवन में सुख-शांति और समृद्धि आती है। आध्यात्मिक उन्नति : मां की कृपा से आत्मविश्वास, ज्ञान और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है।

मां कात्यायनी का स्वरूप
मां कात्यायनी का रूप अत्यंत दिव्य और तेजस्वी है। रंग : सोने के समान चमकीला। भुजाएं : चार — ऊपरी बाएं हाथ में तलवार, नीचे बाएं हाथ में कमल का पुष्प, ऊपर दायां हाथ अभय मुद्रा में, नीचे दायां हाथ वरद मुद्रा में

प्रिय भोग और रंग
प्रिय भोग : शहद (मधु) — इसे अर्पित करने से आकर्षण शक्ति और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। प्रिय रंग : हरा — इस दिन हरे वस्त्र पहनना अत्यंत शुभ माना जाता है।

23/03/2026

चैत्र नवरात्रा पर्व पंचम दिवस: मां स्कंदमाता की पूजा

चैत्र नवरात्रा पर्व के नौ दिवसों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना की जाती है। पंचमी तिथि को मां दुर्गा के पंचम स्वरूप मां स्कंदमाता की पूजा का विशेष महत्व है। देवी को यह नाम उनके पुत्र भगवान स्कंद (कार्तिकेय) की माता होने के कारण प्राप्त हुआ। शास्त्रों में वर्णन है कि मां स्कंदमाता की उपासना से साधक को सांसारिक सुख-समृद्धि प्राप्त होती है, साथ ही दिव्य ज्ञान और उत्तम आरोग्य भी प्राप्त होता है।

मां स्कंदमाता का स्वरूप
मां स्कंदमाता सिंह पर विराजमान रहती हैं। उनके चार भुजाएँ हैं—दो हाथों में कमल धारण करती हैं, एक हाथ वरद मुद्रा में आशीर्वाद प्रदान करता है और चौथे हाथ में बाल स्वरूप भगवान कार्तिकेय गोद में विराजमान रहते हैं। उनका रंग शुभ्र है और वे कमल के आसन पर विराजमान रहती हैं, इसलिए इन्हें पद्मासना देवी भी कहा जाता है।

आध्यात्मिक महत्व
नवरात्रा पर्व की पंचमी को साधक का मन ‘विशुद्ध चक्र’ में स्थित होता है। इस दिन की साधना से लौकिक और सांसारिक चित्तवृत्तियाँ शांत होकर साधक परम चैतन्य की ओर अग्रसर होता है। मां स्कंदमाता की आराधना से साधक का मन पूर्णत: देवी स्वरूप में तल्लीन होकर आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त करता है।

पूजा का फल
मां स्कंदमाता की साधना से आरोग्य, बुद्धिमत्ता और ज्ञान की प्राप्ति होती है। उनकी उपासना से सभी इच्छाएँ पूर्ण होती हैं और साधक को सुख-शांति मिलती है। इनकी पूजा करने से भगवान कार्तिकेय की भी स्वत: उपासना हो जाती है। सूर्यमंडल की अधिष्ठात्री देवी होने के कारण उपासक में दिव्य कांति और तेज का संचार होता है। संतान सुख एवं रोगमुक्ति के लिए स्कंदमाता की पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है।

भोग का महत्व
इस दिन मां दुर्गा को केले का भोग अर्पित करने का विधान है। इस भोग का प्रसाद ब्राह्मण को दान करने से बुद्धि का विकास होता है और साधक जीवन में प्रगति प्राप्त करता है।

22/03/2026

चैत्र नवरात्रा पर्व चतुर्थ दिवस: मां कुष्मांडा की पूजा

चैत्र नवरात्रा पर्व के चतुर्थ दिवस को मां दुर्गा के चतुर्थ स्वरूप मां कुष्मांडा की पूजा की जाती है।

सनातन मान्यता है कि मां कुष्मांडा ने अपनी मंद मुस्कान (कुष्मांड) से पूरे ब्रह्मांड की रचना की थी, इसी कारण इन्हें ब्रह्मांड की सृष्टिकर्त्री भी कहा जाता है।

स्वरूप
मां कुष्मांडा को अष्टभुजा देवी कहा जाता है। उनके दाएं हाथों में – कमल, धनुष, बाण और कमंडल बाएं हाथों में – गदा, चक्र, अमृतकलश और जपमाला उनका वाहन सिंह है। जपमाला को सभी सिद्धियों और निधियों का स्रोत माना गया है।

विशेषताएं
संस्कृत में कुष्मांड का अर्थ कुम्हड़ा है, इसलिए कुम्हड़े की बलि इन्हें प्रिय मानी जाती है। मां कुष्मांडा थोड़ी-सी भक्ति और सेवा से ही प्रसन्न होकर भक्तों को सुख, यश, बल, आरोग्य और लंबी आयु का आशीर्वाद देती हैं। ये एकमात्र देवी हैं जिनका निवास सूर्य लोक में माना जाता है।

पूजा और भोग
इस दिन मां कुष्मांडा को लाल पुष्प अर्पित करना शुभ है। भोग में मालपुआ अति प्रिय है। इसके साथ दही और हलवे का भोग भी लगाया जाना भी शुभ है। भक्तों को हरे वस्त्र धारण करने चाहिए। हरे रंग के वस्त्र और अन्न का दान करने से माता विशेष प्रसन्न होती हैं। परिवार में सुख-शांति, उत्तम स्वास्थ्य और समृद्धि हेतु इस दिन भजन, कीर्तन, कथा व मंत्र जप का आयोजन करना अत्यंत फलदायी है।

संक्षेप

सृष्टि के आरंभ में जब चारों ओर अंधकार था, तब त्रिदेवों ने मां दुर्गा से प्रार्थना की। मां दुर्गा ने कुष्मांडा रूप में प्रकट होकर अपनी मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना की और प्रकाश फैलाया। यही कारण है कि इन्हें सृष्टि की आदिशक्ति कहा जाता है।

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